डोनाल्ड ट्रम्प: शांति दूत या तबाही का सौदागर? दुनिया के सामने बड़ा सवाल।
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वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विदेश नीति को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। |
डोनाल्ड ट्रम्प खुद को युद्ध खत्म कराने और “शांति के लिए ताकत” का इस्तेमाल करने वाला नेता बताते हैं, जबकि उनके आलोचक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और कड़े बयानों को दुनिया में तनाव बढ़ाने वाला कदम मानते हैं।
22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने जहां दूसरे केवल बात करते रहे, वहां कार्रवाई की और उनकी सरकार ने कई संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई। व्हाइट हाउस का दावा है कि ट्रम्प प्रशासन ने आठ बड़े संघर्षों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई है।
लेकिन दूसरी तरफ ईरान का मुद्दा ट्रम्प की नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है। संयुक्त राष्ट्र में ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान के साथ शांति समझौता नहीं होता तो अमेरिका के सामने कठोर विकल्प मौजूद हैं और उन्होंने ईरान को “annihilate” करने तक की चेतावनी दी।
रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए भी ट्रम्प प्रशासन लगातार बातचीत की कोशिशों का दावा कर रहा है। सितंबर में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को रूस और यूक्रेन के बीच शांति प्रस्ताव पर बातचीत के लिए भेजे जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि बातचीत में अब तक कई बाधाएं बनी हुई हैं।
यही विरोधाभास ट्रम्प की विदेश नीति को लेकर बहस का केंद्र है—क्या सैन्य दबाव और धमकी के जरिए शांति स्थापित की जा सकती है, या ऐसी रणनीति नए संघर्षों का जोखिम बढ़ाती है?
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