देवघर।झारखंड।देवघर बाबा धाम (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) की पौराणिक कथा।

देवघर। झारखंड। देवघर बाबा धाम (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) की पौराणिक कथा।
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक से मनोकामना पूर्ण होती है।

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। इसे बाबा धाम, बैद्यनाथ धाम और कामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है।

06//06/2026

रावण और शिवलिंग की कथा:-

पुराणों के अनुसार, रावण भगवान शिव का परम भक्त था। उसने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उसे एक दिव्य शिवलिंग दिया और कहा कि इसे लंका ले जाओ, लेकिन रास्ते में इसे धरती पर मत रखना, अन्यथा यह वहीं स्थापित हो जाएगा।

देवताओं को भय हुआ कि यदि शिवलिंग लंका पहुँच गया तो रावण और भी शक्तिशाली हो जाएगा। इसलिए उन्होंने लीला रची। यात्रा के दौरान रावण को लघुशंका की आवश्यकता हुई। उसने एक ग्वाले (कुछ कथाओं में बैजू अहीर) को शिवलिंग पकड़ने के लिए दिया और कहा कि इसे नीचे न रखना।

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना और जलाभिषेक से मनो-कामनाएँ पूर्ण होती हैं।

शिवलिंग का भार लगातार बढ़ता गया। ग्वाला उसे अधिक देर तक नहीं संभाल सका और उसने उसे भूमि पर रख दिया। जब रावण लौटा तो उसने बहुत प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग को हिला नहीं सका। तब वही शिवलिंग उस स्थान पर स्थायी रूप से स्थापित हो गया, जो आज बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है।

बैद्यनाथ नाम क्यों पड़ा:-

एक मान्यता के अनुसार, तपस्या के दौरान रावण ने अपने सिर भगवान शिव को अर्पित करने शुरू किए थे। जब शिव ने उसे पुनर्जीवित किया और उसके घावों का उपचार किया, तब वे वैद्य (चिकित्सक) के रूप में प्रकट हुए। इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम बैद्यनाथ पड़ा।

धार्मिक महत्व

यह स्थान ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों माना जाता है।

सावन महीने में लाखों कांवड़िये सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा पर जलाभिषेक करते हैं।

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना और जलाभिषेक से मनो-कामनाएँ पूर्ण होती हैं।

रिपोर्टर: संवाददाता अमन कुमार मिश्र।

स्थान: देवघर, झारखंड।

प्रकाशन: भारतीय रेलवे कुली समाचार पत्र देश विदेश समाचार समाचार।

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