अर्जेंटीना: यानी रेलवे का निजीकरण हुआ, लेकिन सुधार नहीं हुआ। भारत को सबक सिखाना जरूरी है।

अर्जेंटीना: यानी रेलवे का निजीकरण हुआ, लेकिन सुधार नहीं हुआ।भारत को सबक सिखाना जरूरी है।

अर्जेंटीना में बहुत ही खतरनाक रेलमार्ग द्वारा ट्रेनों का गुजरना बादलों से चारों तरफ घिरा हुआ।

अर्जेंटीना में रेलवे का निजीकरण 1990 के दशक में हुआ, लेकिन उससे वैसा सुधार नहीं आया जैसा उम्मीद की गई थी।

निजीकरण क्यों हुआ: 1990 के दशक में कार्लो मेंनम की सरकार ने बड़े पैमाने पर सरकारी कंपनियों का निजीकरण किया। रेलवे भी उसी का हिस्सा था। उस समय रेलवे भारी घाटे में था,इंफ्रास्ट्रक्चर जर्जर था।सरकार खर्च कम करना चाहती थी। 

अर्जेंटीना का रेलवे नेटवर्क 

अर्जेंटीना का रेलवे नेटवर्क दक्षिण अमेरिका में सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है। जो उन्नीसवीं सदी के अंत में विकसित हुआ। यह देश के कृषि औद्योगिक क्षेत्रों को बयुर्नस आयर के बंदरगाह को जोड़ता है। प्रमुख लाइनों में पेटागोनिया एक्सप्रेस शामिल है। जो ऊंचे एंडीज पर्वत से जोड़ती है।निजीकरण के बाद क्या हुआ।
अर्जेंटीना दक्षिण अमेरिका की पहाड़ी एरिया से गुजरती हुई।
निजी कंपनियों को अलग-अलग रूट्स दिए गए, लेकिन कंपनियों ने लंबी अवधि के निवेश नहीं किए उनका फोकस मुनाफा था, न कि नेटवर्क सुधार कई कम-लाभ वाले रूट बंद कर दिए गए सुरक्षा और रखरखाव पर ध्यान कम रहा। 
नतीजा:-सेवा की गुणवत्ता कई जगह और खराब हो गई' ट्रेन नेटवर्क छोटा हो गया। कुछ गंभीर हादसे भी हुए (जैसे 2012 का एक बार ट्रेन दुर्घटना हुई)

बाद में क्या हुआ इन समस्याओं के कारण: सरकार ने धीरे-धीरे फिर से राज्य नियंत्रण बढ़ाना शुरू किया।

2015 में फेरोकैरिलेस अर्जेंटीनो कंपनी को दोबारा सक्रिय किया गया। निजीकरण अपने आप में सुधार की गारंटी नहीं है।

अगर:मजबूत नियमन (नियमन) न हो,निवेश की शर्तें सख्त न हों। सार्वजनिक हित को प्राथमिकता न दी जाए तो नतीजा उल्टा भी हो सकता है,जैसा अर्जेंटीना में देखा गया।


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