वाशिंगटन: अमेरिकी निवेशको ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आखरी समय में पीछे क्यों हट जाते हैं।

वाशिंगटन: अमेरिकी निवेशको ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आखरी समय में पीछे क्यों हट जाते हैं।

अमेरिका के दस दिग्गज निवेशक में से एक हैं।

अमेरिका में कई निवेशक और विश्लेषक कहते हैं कि डोनाल्ड ट्रम्प जब बहुत सख्त आर्थिक या व्यापारिक फैसले (जैसे टैरिफ, प्रतिबंध) घोषित करते हैं, तो बाद में अक्सर आख़िरी समय में नरम पड़ जाते हैं। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण बताए जाते हैं।

शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट का दबाव:जब ट्रम्प ने कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए, तो वैश्विक बाजार में तेज गिरावट और अस्थिरता आ गई। निवेशकों के अनुसार जब बाजार बहुत ज्यादा गिरने लगता है या बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ती है,तब प्रशासन अक्सर निर्णय नरम कर देता है। एक उदाहरण में ट्रम्प ने बड़े टैरिफ लागू करने के 24 घंटे के अंदर ही उन्हें अस्थायी रूप से कम कर दिया, जिसके बाद शेयर बाजार में तेज उछाल आया।

(Negotiation Strategy) (दबाव बनाकर सौदा करना) ट्रम्प की शैली यह मानी जाती है कि पहले बहुत कठोर घोषणा करते हैं ताकि दूसरे देश बातचीत की मेज पर आए । बाद में समझौते या बातचीत के लिए कुछ कदम पीछे ले लेते हैं। कई अधिकारी कहते हैं कि यह उनकी “डील-मेकिंग रणनीति” का हिस्सा है।

निवेशकों में एक धारणा बन गई है। वॉल स्ट्रीट में कुछ लोग इसे मज़ाक में "टैको"(Trump Always Chickens Out) भी कहते हैं। यानी डोनाल्ड ट्रम्प अक्सर अंतिम समय में फैसले से पीछे हट जाते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान का डर बहुत सख्त टैरिफ या राजनीतिक तनाव से स्टॉक मार्केट गिर सकता है। महंगाई बढ़ सकती है। वैश्विक व्यापार युद्ध शुरू हो सकता है। इसलिए कई बार प्रशासन तनाव कम करने के लिए फैसला बदल देता है।

निवेशकों का मानना है कि ट्रम्प पहले कड़ा रुख अपनाते हैं ताकि दबाव बने, लेकिन जब बाजार या अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर दिखता है तो वे अक्सर पीछे हट जाते हैं या फैसले में बदलाव कर देते हैं।




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