नई दिल्ली: सोने की मजबूती के पीछे यही तीन बड़े कारण।

नई दिल्ली: सोने की मजबूती के पीछे यही तीन बड़े कारण।

भू-राजनीतिक तनाव:-जैसे युद्ध, अमेरिका-चीन तनाव, मध्य-पूर्व  की स्थिति आदि। ऐसे समय में निवेशक सुरक्षित निवेश (safe haven) के रूप में सोना खरीदते हैं।

केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद:- खासकर People's Bank of China, Reserve Bank of India और कई उभरते देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं। इससे वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है।
आर्थिक अनिश्चितता:-मंदी का डर, महंगाई, ब्याज दरों को लेकर असमंजस और शेयर बाजार की अस्थिरता इन सब परिस्थितियों में निवेशक सोने को सुरक्षित संपत्ति मानते हैं।
इसके अलावा:-अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरें घटाता है, तो सोने को और समर्थन मिल सकता है।
डॉलर:- लेकिन यदि डॉलर बहुत मजबूत होता है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची रहती हैं, तो सोने पर दबाव आ सकता है।
लंबी अवधि: यानी फिलहाल लंबी अवधि का ट्रेंड मजबूत दिख रहा है, लेकिन बीच-बीच में तेज़ करेक्शन (गिरावट) भी संभव है।
सोने में भारी गिरावट की आशंका, फिर भी मजबूत बना हुआ बाजार

नई दिल्ली, बुधवार।
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। World Gold Council (WGC) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में संकेत दिया है कि आने वाले समय में कुछ परिस्थितियों में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि वर्तमान में सोना भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण मजबूत बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था उम्मीद से अधिक मजबूत रहती है, ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनी रहती हैं और अमेरिकी डॉलर में मजबूती आती है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। WGC ने ऐसे परिदृश्य में सोने में 5 से 20 प्रतिशत तक गिरावट की संभावना जताई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों का रुझान अभी भी सोने की ओर बना हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की तरफ आकर्षित किया है।
इसके अलावा कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। Reserve Bank of India तथा People's Bank of China सहित कई केंद्रीय बैंकों ने हाल के वर्षों में अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ता है या अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो सोने की कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

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