नई दिल्ली : लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 किया जाएगा।

नई दिल्ली : लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 किया जाएगा।
।पार्लियामेंट में बहस करते हुए।

भारत में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का मुद्दा अक्सर जनसंख्या के आधार पर पुनर्सीमांकन से जुड़ा हुआ है।

पुनर्सीमांकन क्या है: पुनर्सीमांकन का मतलब है निर्वाचन क्षेत्रों (निर्वाचन क्षेत्रों) की सीमाओं और संख्या को इस तरह बदलना कि हर सांसद लगभग समान जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करें। यह काम भारत परिसीमन आयोग करता है। 

यह सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं है: बल्कि राजनीतिक संतुलन, संघीय ढांचे और प्रतिनिधित्व की न्यायसंगतता से जुड़ा बड़ा प्रश्न है। 2026 के बाद होने वाले फैसले भारत की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं।

कुल सीटें बढ़ाकर सभी राज्यों को कुछ फायदा देना जनसंख्या के साथ-साथ विकास या क्षेत्रफल जैसे अन्य मानकों को भी शामिल करना। 
भारत की संसद में संतुलन बनाए रखने के लिए नई व्यवस्थाएं। इससे राजनीतिक शक्ति का संतुलन बदल सकता है।

2. संघीय ढांचे पर असर कुछ राज्यों को डर है कि: संसद में उनकी आवाज़ कमजोर हो जाएगी केंद्र की राजनीति पर कुछ राज्यों का दबदबा बढ़ सकता है



कुल सीटें बढ़ाकर सभी राज्यों को कुछ फायदा देना जनसंख्या के साथ-साथ विकास या क्षेत्रफल जैसे अन्य मानकों को भी शामिल करना।

अभी स्थिति क्या हैलोकसभा में वर्तमान में 543 निर्वाचित सीटें हैं। आखिरी बड़ा पुनर्सीमांकन 1971 की जनगणना के आधार पर हुआ था। उसके बाद, जनसंख्या में भारी बदलाव के बावजूद सीटों की संख्या फ्रीज़ (स्थिर) कर दी गई।


यह फैसला 42 वां दूसरा संवैधानिक संशोधन (1976) के दौरान लिया गया था, ताकि: जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण (परिवार नियोजन) में सफल रहे, उन्हें नुकसान न हो। अगर सिर्फ जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़तीं, तो अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को फायदा मिलता। बाद में 84 वां संवैधानिक संशोधन के जरिए इस फ्रीज़ को 2026 तक बढ़ा दिया गया।
अब विवाद क्यों है: 2026 के बाद फिर से पुनर्सीमांकन संभव है,और यही विवाद की जड़ है।
उत्तर भारत (जैसे यूपी, बिहार) में जनसंख्या ज्यादा बढ़ी है सीटें बढ़ सकती हैं। दक्षिण भारत (जैसे तमिलनाडु, केरल) ने जनसंख्या नियंत्रण किया सीटें कम अनुपात में वृद्धि  मिलेंगी।





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