नई दिल्ली: कुलियों की आवाज:
"कितनी होली-दीवाली बीत गईं, लेकिन हमारी उम्मीदें आज भी अधूरी हैं।
रेलवे कुलियों का सवाल:
वादे हुए, लेकिन इंतजार खत्म नहीं कितनी होली-दीवाली बीत गईं, लेकिन हमारे लिए किए गए वादे आज भी अधूरे हैं।"
हम चाहते हैं कि हमारे हितों से जुड़े वादों को याद कर उन्हें पूरा किया जाए।"प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी"
नई दिल्ली, संवाददाता। देश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत कुलियों (पोर्टरों) के बीच एक बार फिर नाराजगी और निराशा का माहौल देखने को मिल रहा है। कुलियों का कहना है कि उनके हितों से जुड़े जिन मुद्दों और मांगों पर वर्षों पहले उम्मीदें जगी थीं, वे आज भी अधूरी हैं।
कई कुलियों का आरोप है कि उनकी सामाजिक सुरक्षा, आय में सुधार, कल्याणकारी योजनाओं और कार्य सुविधाओं को लेकर बार-बार आश्वासन दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव नहीं दिखाई दिए। उनका कहना है कि समय तेजी से बीतता जा रहा है और कई होली-दीवाली गुजर जाने के बावजूद उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले कुलियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और बदलती व्यवस्था के बीच उनका जीवन और कठिन होता जा रहा है। उनका मानना है कि सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।
कुली संगठनों के कुछ प्रतिनिधियों ने कहा कि वे सरकार से किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित भविष्य की अपेक्षा रखते हैं। उनका कहना है कि यदि पूर्व में कोई आश्वासन दिया गया था तो उसे समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।
हालांकि, सरकार की ओर से इस विषय पर अलग-अलग समय पर कई योजनाओं और सुधारों की जानकारी दी जाती रही है। लेकिन कुलियों का कहना है कि जब तक इनका लाभ व्यापक रूप से उन्हें नहीं मिलता, तब तक उनकी चिंताएं बनी रहेंगी।
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