पश्चिम बंगाल कोलकाता:ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर कहा कि राष्ट्रपति “बीजेपी के इशारे पर बोल रही हैं”, जिससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

पश्चिम बंगाल कोलकाता:ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर कहा कि राष्ट्रपति “बीजेपी के इशारे पर बोल रही हैं”, जिससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी।

राष्ट्रपति का पद संविधान के अनुसार राजनीति से ऊपर माना जाता है, इसलिए जब कोई नेता कहता है कि राष्ट्रपति किसी पार्टी के इशारे पर काम कर रहे हैं, तो उसे संवैधानिक मर्यादा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना जाता है।

Mamata Banerjee ने Droupadi Murmu (भारत की राष्ट्रपति) के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति चुनाव से पहले “बीजेपी के इशारे पर राजनीति” कर रही हैं। उन्होंने कहा: “हम राष्ट्रपति का सम्मान करते हैं, लेकिन चुनाव से पहले बीजेपी के कहने पर राजनीति मत कीजिए।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उत्तर बंगाल में International Santal Conference में गई थीं।

उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि जब राष्ट्रपति किसी राज्य में आते हैं तो आमतौर पर मुख्यमंत्री और मंत्री स्वागत के लिए मौजूद रहते हैं, लेकिन इस दौरे में ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कार्यक्रम का स्थान बदला गया और कई लोग अंदर नहीं आ पाए। ममता बनर्जी ने कहा कि कोई प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ।

राष्ट्रपति के कार्यक्रम की व्यवस्था राष्ट्रपति सचिवालय की मंजूरी के अनुसार थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी राष्ट्रपति के पद का इस्तेमाल करके राज्य सरकार को निशाना बना रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया Narendra Modi और बीजेपी नेताओं ने इस बयान को राष्ट्रपति का अपमान बताया और इसकी कड़ी आलोचना की।

राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल और कार्यक्रम व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ। उसी के जवाब में ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति बीजेपी के सलाह/इशारे पर राजनीति कर रही हैं, जिससे बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

भारतीय संविधान के अनुसार राष्ट्रपति का पद राजनीतिक रूप से निष्पक्ष माना जाता है। इसलिए किसी राष्ट्रपति पर किसी पार्टी के इशारे पर काम करने का आरोप लगना संवेदनशील माना जाता है।

राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका भारत में राष्ट्रपति देश के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। संविधान का अनुच्छेद 52: भारत में एक राष्ट्रपति होगा। अनुच्छेद 53: केंद्र की कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति के नाम से चलती है। लेकिन व्यवहार में राष्ट्रपति ज्यादातर फैसले मंत्रिपरिषद की सलाह पर लेते हैं (अनुच्छेद 74)। इसका मतलब: वास्तविक राजनीतिक शक्ति सरकार (प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद) के पास होती है। राष्ट्रपति का पद संवैधानिक संतुलन और औपचारिक अधिकारों का प्रतीक होता है। राष्ट्रपति के प्रमुख कार्य राष्ट्रपति के काम कई क्षेत्रों में होते हैं: कार्यपालिका प्रधानमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपालों की नियुक्ति वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति का काम राष्ट्रपति करते हैं।



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