दुबई: ईरान का दावा है कि उसके हमले अरब देशों के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल “दुश्मन ताकतों” के खिलाफ हैं।

दुबई: ईरान का दावा है कि उसके हमले अरब देशों के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल “दुश्मन ताकतों” के खिलाफ हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक ब्यान में उन्होंने कहा हम उन दुशमन हमलावरों को निशाना बनाना है जो अरबियों और ईरानियों का सम्मान और न ही वे किसी तरह की सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।

ईरान का यह बयान आम तौर पर क्षेत्रीय तनाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जाता है। जब ईरान कहता है कि उसके हमले अरब देशों के खिलाफ नहीं बल्कि “दुश्मन ताकतों” के खिलाफ हैं, तो उसका इशारा अक्सर उन देशों या समूहों की ओर होता है जिन्हें वह अपने लिए सीधा खतरा मानता है,जैसे इज़राइल या  संयुक्त राज्य अमेरिका


अब्बास अराघची के बयान का मतलब है अरब देशों को आश्वस्त करना । सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, और अन्य खाड़ी देशों के साथ संबंध वर्तमान समय में सुधरें हैं। ईरान नहीं चाहते हैं कि ये देश हमारे खिलाफ खड़े हो।
ईरान यह संदेश देना चाहता है कि हमें अरब देशों से कोई बैर नहीं है। बल्कि खास विरोधियों से है।

कूटनीतिक रणनीति:-इससे ईरान क्षेत्रीय अलगाव से बचने और संभावित गठबंधनों को टूटने से रोकने की कोशिश करता है।

दुश्मन ताकतें” किसे कहा जाता है: -आम तौर पर इजराइल, संयुक्त राज्य अमेरिका, उनके सहयोगी या क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकाने।

क्षेत्रीय असर:-

खाड़ी देशों का ब्यान राहत देने वाला हो सकता है। लेकिन फिर भी सतर्क रहते हैं।

मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होता, बल्कि “सीमित संघर्ष” के रूप में जारी रहता है। छोटी-सी घटना भी बड़े टकराव में बदल सकती है।






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें