नई दिल्ली: केन्द्रीय श्रमिक संगठन के हड़ताल से आम जनजीवन आंशिक रूप से असर पड़ा।
भारत सरकार एक तरफ किसानों को प्रत्येक वर्ष छः हजार रुपए देती है दुसरी तरफ किसानों को महंगे दामों में खाद बीज खरीदने पर मजबूर कर रही है। किसान मजबूर होकर खेती करने के लिए ऊंचे ऊंचे दामों पर खाद बीज खरीदने पर मजबूर हो जाते हैं। भारत सरकार के रवैए से आजिज किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं होता है भारतीय जनता पार्टी की सरकार में कितने किसानों ने आत्महत्या की, गणित करना मुश्किल होगा।
उड़िसा, केरल, तमिलनाडु,गोवा, झारखंड, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और पंजाब सहित कई राज्यों में आंशिक रूप से हड़ताल का असर पड़ा। जहां भारतीय जनता पार्टी से मिली-जुली सरकार है उस जगहों पर हड़ताल का असर नहीं किया बारह घंटे की हड़ताल से केन्द्र की सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। हड़ताल मजदूर वर्ग का हथियार है सरकार के सामने अपनी समस्या को सुलझाने में सहायक होता है। उड़िसा राज्य में राष्ट्रव्यापी आंदोलन से राजमार्ग सहित प्रमुख सड़कों के जाम होने सार्वजनिक परिवहन बाजार शैक्षणिक संस्थान एवं कारोबारी प्रतिष्ठान प्रभावित हुए।
झारखंड में बैंकिंग बीमा क्षेत्र प्रभावित हुए। छत्तीसगढ़ में की राष्ट्रीयकृत बैंक बंद रहे। क्योंकि बैंकों के कमचारी हड़ताल में शामिल थे। बीमा कंपनी, डाकघर, मजदूर और किसान भी सरकार के खिलाफ आंदोलन में शामिल थे।



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