पश्चिम बंगाल: दुर्गापुर:चण्डीदास: बाजार: होली के बाज़ार में रंग, अबीर-गुलाल से सजी दुकानें।
होली का त्योहार आते ही बाज़ारों की रौनक देखते ही बनती है। गलियों और चौक-चौराहों पर सजी दुकानें मानो रंगों की इंद्रधनुषी दुनिया रच देती हैं। चारों ओर लाल, गुलाबी, पीले, हरे और नीले रंगों के ढेर ऐसे सजे रहते हैं जैसे धरती पर इंद्रधनुष उतर आया हो। अबीर और गुलाल की सुगंध हवा में घुलकर वातावरण को और भी आनंदमय बना देती है। दुकानदार अपनी दुकानों को आकर्षक ढंग से सजाते हैं। रंगों से भरे बड़े-बड़े टब, सुंदर पैकेटों में बंद गुलाल, और बच्चों को लुभाती रंग-बिरंगी पिचकारियाँ हर किसी का ध्यान खींच लेती हैं। कहीं ढोल-नगाड़ों की आवाज़ सुनाई देती है तो कहीं होली के गीत बजते रहते हैं। बच्चे उत्साह से रंग चुनते हैं और बड़े लोग एक-दूसरे के लिए अच्छे और सुरक्षित रंगों की तलाश करते दिखाई देते हैं।
बाज़ार में केवल रंग ही नहीं, बल्कि मिठाइयों और नमकीन की दुकानों पर भी खूब भीड़ रहती है। गुजिया, मालपुआ और अन्य पकवानों की खुशबू लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। हर चेहरे पर उत्साह और उमंग झलकती है। ऐसा लगता है जैसे पूरा बाज़ार खुशियों से सराबोर हो गया हो।
होली का यह रंगीन बाज़ार केवल खरीद-बिक्री का स्थान नहीं होता, बल्कि यह आपसी मेल-मिलाप और भाईचारे का प्रतीक बन जाता है। रंग, अबीर और गुलाल से सजी ये दुकानें हमें प्रेम, सद्भाव और आनंद का संदेश देती हैं। सचमुच, होली के बाज़ार की रौनक मन को आनंद से भर देती है।