मिजोरम:म्यांमार सीमा भारत के लिए इतनी संवेदनशील क्यों है?
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भारत और म्यांमार की सीमा |
भारत के कदम (Safety Measures) ड्रोन पर निगरानी और नियंत्रण:- नागरिक और सैन्य ड्रोन के लिए नियम:-भारत सरकार ने ड्रोन की उड़ान और संचालन को नियंत्रित करने के लिए DGCA (Directorate General of Civil Aviation) द्वारा नए नियम बनाए हैं। ये नियम ड्रोन की अधिकतम ऊंचाई, उड़ान की सीमा और ऑपरेटर लाइसेंस की आवश्यकता को निर्धारित करते हैं।
भारत सरकार का ड्रोन नियम (2021): ड्रोन के उपयोग के लिए पंजीकरण और अनुमति की प्रक्रिया को लागू किया गया है। यह नियम विशेष रूप से गैर-सैन्य उपयोग को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं।
आधिकारिक सुरक्षा बलों की तैनाती:CRPF (Central Reserve Police Force), BSF (Border Security Force) और ITBP (Indo-Tibetan Border Police) जैसे बलों की तैनाती, जो सीमा क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी और हमलों से निपटने के लिए निगरानी रखते हैं। बल विशेष ड्रोन सुरक्षा प्रणाली के तहत आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।
नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की तैयारियां:- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) भी अपने प्रशिक्षण में ड्रोन को इंटरसेप्ट करने और नष्ट करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। वे ड्रोन से होने वाले हमलों का मुकाबला करने के लिए रणनीतिक तौर पर प्रशिक्षित हैं।
ड्रोन को रोकने के लिए इस्तेमाल हो रही टेक्नोलॉजी (Technology to Counter Drones) भारत में ड्रोन सुरक्षा के लिए कई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो ड्रोन के खतरे से निपटने में मदद कर रही हैं। यहां कुछ प्रमुख एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी की चर्चा की गई है:-
एंटी-ड्रोन रडार सिस्टम (Anti-Drone Radar Systems) DRDO और BEL का Integrated Drone Detection System:
यह रडार ड्रोन की उड़ान को 3D स्पेस में ट्रैक कर सकता है और उसकी दिशा और दूरी को पहचानता है। रडार, रेडियो-फ्रीक्वेंसी (RF) सिग्नल और कैमरा के साथ मिलकर ड्रोन की पहचान करता है। इसके बाद, ड्रोन को जाम करने के लिए सिग्नल भेजे जाते हैं।
RF जामिंग और स्पूफिंग (Radio Frequency Jamming and Spoofing) यह प्रणाली ड्रोन के रिमोट कंट्रोल और GPS सिग्नल को जाम करती है, जिससे ड्रोन या तो गिर जाता है या नियंत्रण से बाहर हो जाता है।
ड्रोन जामिंग गन्स: ये गन्स रिमोट सिग्नल को जाम कर देती हैं। ये हथियार सुरक्षा बलों द्वारा विमान हवाईअड्डों, सीमाओं और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के खतरे को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। एंटीड्रोन लेज़र और माइक्रोवेव (Anti-Drone Lasers and Microwaves)
लंबी दूरी तक प्रभावी लेज़र: यह हाई-पावर लेज़र सिस्टम दूर से ड्रोन को नष्ट कर सकता है। DRDO का 'दीनदयाल एंटी-ड्रोन सिस्टम' इस तकनीक को लागू करता है।
माइक्रोवेव हथियार (High-Power Microwave Weapons): यह माइक्रोवेव आधारित हथियार ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को नष्ट कर देता है, जिससे ड्रोन फेल हो जाता है।
यह सिस्टम रक्षा क्षेत्र में भी बहुत तेजी से अपनाया जा रहा है। ड्रोन इंटरसेप्टर ड्रोन (Drone Interceptor Drones)।
सिस्टम 1: ड्रोन से ड्रोन लड़ाई: ड्रोन इंटरसेप्टर का काम है किसी ड्रोन को पकड़ना और उसे कुशलता से गिराना। ये ड्रोन अपने आप किसी संदिग्ध ड्रोन को ट्रैक करते हैं और उसे गिरा देते हैं।
ईओ/आईआर (EO/IR) कैमरे: इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO) और इन्फ्रारेड (IR) कैमरे का इस्तेमाल, विशेष रूप से रात के समय और खराब मौसम में ड्रोन की पहचान करने के लिए किया जाता है। ये कैमरे थर्मल इमेजिंग का इस्तेमाल करके सही स्थिति का पता लगाने में मदद करते हैं, खासकर ऊंचे स्थानों और रिमोट एरिया में।
भारत में ड्रोन के खिलाफ सुरक्षा परियोजनाएँ:D4 सिस्टम (Drone Detect, Deter, Destroy):
यह प्रणाली डीआरडीओ (DRDO) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित की गई है। इसमें रडार, कैमरा, और जामिंग तकनीक का मिश्रण होता है, जो सुरक्षा बलों को ड्रोन से जुड़े खतरों से निपटने में मदद करता है।
कोलकाता हवाई अड्डा सुरक्षा: कोलकाता हवाई अड्डे पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किया गया है। यहां ईओ/आईआर कैमरे, रडार, और जामिंग सिस्टम का उपयोग करके हवाई अड्डे के आसपास ड्रोन की गतिविधियों को मॉनिटर किया जाता है।
भविष्य की दिशा:भारत सरकार द्वारा विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से ड्रोन से निपटने के लिए और अधिक उन्नत सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की भूमिका भी शामिल है।
ये सिस्टम स्वत: ड्रोन की पहचान, जामिंग और नष्ट करने की क्षमता रखने वाले होंगे।
निष्कर्ष:भारत ने ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए कई सुरक्षा उपाय और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह सुनिश्चित करता है कि ड्रोन से होने वाली किसी भी घातक घटना को पहले ही रोका जा सके। भविष्य में AI, लेज़र और हाई-फ्रीक्वेंसी सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपाय और भी प्रभावी हो सकते हैं।
ऐसी घटना हुई है जिसमें एक अमेरिकी (Matthew VanDyke) और 6 यूक्रेनी नागरिक को NIA ने गिरफ्तार किया है,आरोप है कि वे:टूरिस्ट वीज़ा की आड़ में म्यांमार के विद्रोही गुटों को ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे थे,लेकिन यह अभी जांच के अधीन मामला है, अंतिम सच्चाई कोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अभी क्या स्थिति है: सभी आरोपी जांच के दायरे में हैं।उन पर UAPA (आतंकवाद विरोधी कानून) के तहत केस दर्ज है।अभी आरोप साबित नहीं हुए हैं, जांच जारी है
रूसी एजेंसी की भूमिका:खबरों के मुताबिक रूस से मिली खुफिया जानकारी (tip-off) के बाद ही यह कार्रवाई हुई
यानी भारतीय एजेंसियों को पहले से इन लोगों की गतिविधियों पर इनपुट मिला था।
आरोप क्या हैं?रिपोर्ट्स के अनुसार:ये लोग टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आए थे.फिर पूर्वोत्तर (मिजोरम/असम) के रास्ते म्यांमार में प्रवेश किया। वहाँ विद्रोही (ethnic armed groups) से संपर्क किया है,और कथित तौर पर:-
ड्रोन ऑपरेशन,आधुनिक युद्ध तकनीक,हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देने में शामिल थे। ड्रोन और हथियारों का एंगल जांच एजेंसियों का कहना है कि यूरोप से ड्रोन और उपकरण लाए गए। और इन्हें म्यांमार के उग्रवादी समूहों तक पहुँचाया गया है।कुछ रिपोर्ट्स में “ड्रोन ट्रेनिंग और covert operations” का भी जिक्र है।म्यांमार में विद्रोही गुट आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन टूरिस्ट वीज़ा की आड़ में बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग देने का दावा अभी पुख्ता रूप से साबित नहीं है — इसे सावधानी से देखना चाहिए।


















