पटना,एजेंसी। बिहार में शराबबंदी पर सवाल, अवैध कारोबार जारी।

पटना,एजेंसी। बिहार में शराबबंदी पर सवाल, अवैध कारोबार जारी।

कार्यालय:कर्मचारी/केन्द्र/राज्य कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा शराब सेवन, अवैध कारोबार पर सवाल,सरकार को राजस्व हानि, शराब माफिया हो रहे मालामाल।

पटना,संवाददाता। भारतीय रेलवे कुली समाचार पत्र देश विदेश समाचार 

नीति और कानून की घोषणा एक बात है, और उसका प्रभाव वास्तविक जीवन में पूरी तरह लागू करना दूसरी बात। यह सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती है कानून बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसका प्रभावी क्रियान्वयन।
नीति और कानून की पहल:
नितीश कुमार की सरकार ने शराब बंदी लागू की है। इसका मतलब यह है कि सरकारी स्तर पर शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया है। आम तौर पर इसका उद्देश्य समाज में शराब से होने वाले स्वास्थ्य और सामाजिक नुकसान को कम करना होता है।
वास्तविकता और चुनौतियाँ:
आपने जो कहा कि “शराब प्रशासन की मिली भगत से घर-घर धड़ल्ले से बाजार में उपलब्ध हो रहा है,” यह दर्शाता है कि कानून के बावजूद अवैध बिक्री जारी है। इसका कारण अक्सर यह होता है कि:
शराब की काला बाज़ार आपूर्ति बहुत सक्रिय हो जाती है।
प्रशासनिक भ्रष्टाचार या स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत इसे बढ़ावा देती है। मांग और आपूर्ति का सिद्धांत जब लोग शराब लेना चाहते हैं, तो अवैध तरीके से इसे उपलब्ध कराया जाता है।

बिहार में लागू शराबबंदी कानून के बावजूद राज्य के कई जिलों में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद घर-घर शराब उपलब्ध हो रही है।

राज्य सरकार ने शराबबंदी को सामाजिक सुधार की बड़ी पहल बताया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार यह कहते रहे हैं कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा और अपराध में कमी आई है। हालांकि विपक्ष और स्थानीय लोग कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहे हैं।

कई इलाकों में लोगों का आरोप है कि अवैध कारोबार प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई अक्सर छोटे विक्रेताओं तक सीमित रह जाती है, जबकि बड़े तस्कर बच निकलते हैं।

सामाजिक संगठनों का मानना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए प्रशासनिक पारदर्शिता, रोजगार के अवसर, नशामुक्ति अभियान और जन जागरूकता जरूरी है।

वहीं, सरकार का दावा है कि अवैध शराब के खिलाफ लगातार छापेमारी की जा रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो रही है। बावजूद इसके, शराबबंदी की प्रभाव शीलता को लेकर बहस जारी है।

बिहार। सरकार,प्रशासन और समाज तीनों को एकजुट होकर साथ में काम करना पड़ेगा।इस प्रकार कुछ व्यावहारिक उपाय कर सकते हैं।

प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना:

जिन इलाकों में लगातार अवैध शराब पकड़ी जाती है, वहाँ स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग की जिम्मेदारी तय हो। भ्रष्ट अधिकारियों पर तेज कार्रवाई हो।

गुप्त शिकायत व्यवस्था:-

लोगों को सुरक्षित तरीके से सूचना देने की सुविधा मिले, ताकि वे बिना डर के अवैध बिक्री की जानकारी दे सकें।

तकनीकी निगरानी:-

बॉर्डर चेकपोस्ट, सीसीटीवी, ड्रोन और डिजिटल ट्रैकिंग से तस्करी पर रोक लगाई जा सकती है।

रोजगार और नशामुक्ति कार्यक्रम:-

कई लोग शराब के अवैध कारोबार में आर्थिक मजबूरी से जुड़ते हैं। वैकल्पिक रोजगार और नशामुक्ति केंद्रों की जरूरत होती है।

समाज की भागीदारी:-

पंचायत, महिला समूह, और स्थानीय संगठन जागरूकता अभियान चलाएँ। बिहार में कई जगह महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ प्रभावी आंदोलन भी किए हैं।

कानून का समान पालन:-

छोटे लोगों पर ही कार्रवाई न हो, बल्कि बड़े सप्लायर और नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई हो।

शराबबंदी जैसी नीति की सफलता काफी हद तक उसके ईमानदार क्रियान्वयन और जनता के सहयोग पर निर्भर करती है।

चेन्नई,एजेंसी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय कुमार ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

चेन्नई,एजेंसी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय कुमार  ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

उन्होंने राज्य में धार्मिक स्थलों और स्कूलों के आसपास स्थित शराब की 717 दुकानों को बंद करने का आदेश दिया। इसका उद्देश्य न केवल सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है, बल्कि बच्चों और युवाओं को शराब के दुष्प्रभावों से दूर रखना भी है।

यह कदम सार्वजनिक कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा, यह नीति अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है जो शराब के व्यापार और समाज पर उसके प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।

नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा 30 अगस्त 2013 मनमोहन सिंह।सोने की मांग घटेगी तो आयात कम होगा। विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा।

नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा। 30 अगस्त 2013 मनमोहन सिंह। सोने की मांग घटेगी तो आयात कम होगा विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा।

भुत पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में 30 अगस्त 2013 को कहा था कि सोना खरीदना बंद कर दो स्वत: कीमत घट जाएगी। उसी ब्यान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहा रहे हैं।

सोना खरीदना बंद करें, कीमतें घटेंगी। पूर्व P M मनमोहन सिंह की 2013 की चेतावनी फिर चर्चा में।

नई दिल्ली, 14 मई।

लोकसभा में आज सोने की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर जोरदार चर्चा हुई। इसी दौरान पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की वर्ष 2013 में दी गई चेतावनी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई। उस समय उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि लोग सोना खरीदना कम करें, ताकि आयात घटे और कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके।

संसद में कई सांसदों ने कहा कि आज भी सोने की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। बाजार में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके दामों ने मध्यम वर्ग और शादी-ब्याह वाले परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। चर्चा के दौरान 2013 का वह बयान याद किया गया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कहा था कि “यदि लोग सोना खरीदना बंद करें, तो कीमतें नीचे आ सकती हैं।”

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता, डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनाव के कारण सोने की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि भारत समेत कई देशों में सोना नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है।

आर्थिक जानकारों के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। ऐसे में मांग कम होने पर कीमतों पर असर पड़ सकता है, लेकिन भारतीय परिवारों में सोना केवल निवेश नहीं बल्कि परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है।

लोकसभा में हुई चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर भी मनमोहन सिंह का पुराना बयान तेजी से वायरल हो रहा है। कई लोग इसे दूरदर्शी सलाह बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में केवल मांग कम होने से कीमतों में बड़ी गिरावट संभव नहीं है।

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना आयात करने वाले देशों में था।

2013 में भारत का करेंट एकाउंट डेफिसिट (C A D) बहुत बढ़ गया था यानी देश जितना विदेशी मुद्रा कमा रहा था उससे ज्यादा बाहर खर्च हो रही थी।

सोना डॉलर देकर आयात होता है। ज्यादा सोना आयात होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।

उसी समय रुपया काफी कमजोर हो रहा था और महंगाई तथा आर्थिक अस्थिरता की चिंता थी।

एक अर्थशास्त्री होने के नाते मनमोहन सिंह का तर्क यह था कि लोग सोने की जगह बैंक में जमा , बॉन्ड या उत्पादक निवेश करें।

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना आयात करने वाले देशों में था।

सोने की मांग घटेगी तो आयात कम होगा।

विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा।

लंबे समय में सोने की कीमतों में नरमी आ सकती है।

लेकिन यह कहना कि उन्होंने “पक्का जान लिया था कि सोना सस्ता हो जाएगा”, पूरी तरह सही नहीं होगा। सोने की कीमतें केवल भारत की मांग से तय नहीं होती। इन पर कई वैश्विक कारण असर डालते हैं।

अमेरिकी ब्याज दरें

डॉलर की मजबूती

वैश्विक संकट

युद्ध और अनिश्चितता

केंद्रीय बैंकों की खरीद

2013 के बाद कुछ समय के लिए सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट भी आई थी, इसलिए लोगों को लगा कि उनकी बात सही साबित हुई। लेकिन लंबे समय में सोना फिर काफी महंगा हुआ।

सोना खरीदना बंद करें, कीमतें घटेंगी। पूर्व P M मनमोहन सिंह की 2013 की चेतावनी फिर चर्चा में।

कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल। सुवेंदु अधिकारी“ममता बनर्जी की Z+ सुरक्षा जारी रहेगी”

कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल। सुवेंदु अधिकारी“ममता बनर्जी की Z+ सुरक्षा जारी रहेगी”
Suvendu Adhikari ने कहा कि Mamta Banerjee की जेड+सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

सुवेंदु अधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूर्व मुख्यमंत्री को पहले की तरह पूरी सुरक्षा और सम्मान दिया जाए।

राजनीतिक हलकों में इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रोटोकॉल को लेकर चर्चाएं तेज थीं। सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था राजनीति से ऊपर है और संवैधानिक पदों पर रहे नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

इधर, राज्य सरकार ने Abhishek Banerjee की Z+ सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया है। अब उन्हें सांसद प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षा मिलेगी। इस फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य की राजनीति में और बहस देखने को मिल सकती है।

नई दिल्ली: सोने की मजबूती के पीछे यही तीन बड़े कारण।

नई दिल्ली: सोने की मजबूती के पीछे यही तीन बड़े कारण।

भु-राजनीतिक तनाव:-जैसे युद्ध, अमेरिका-चीन तनाव, मध्य-पूर्व की स्थिति आदि। ऐसे समय में निवेशक सुरक्षित निवेश (safe haven) के रूप में सोना खरीदते हैं।

केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद:- खासकर People's Bank of China, Reserve Bank of India और कई उभरते देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोना बढ़ा रहे हैं। इससे वैश्विक मांग मजबूत बनी हुई है।

आर्थिक अनिश्चितता:-मंदी का डर, महंगाई, ब्याज दरों को लेकर असमंजस और शेयर बाजार की अस्थिरता इन सब परिस्थितियों में निवेशक सोने को सुरक्षित संपत्ति मानते हैं।
इसके अलावा:-अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व भविष्य में ब्याज दरें घटाता है, तो सोने को और समर्थन मिल सकता है।
डॉलर:- लेकिन यदि डॉलर बहुत मजबूत होता है और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची रहती हैं, तो सोने पर दबाव आ सकता है।
लंबी अवधि: यानी फिलहाल लंबी अवधि का ट्रेंड मजबूत दिख रहा है, लेकिन बीच-बीच में तेज़ करेक्शन (गिरावट) भी संभव है।
सोने में भारी गिरावट की आशंका, फिर भी मजबूत बना हुआ बाजार

नई दिल्ली, बुधवार।
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। World Gold Council (WGC) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में संकेत दिया है कि आने वाले समय में कुछ परिस्थितियों में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि वर्तमान में सोना भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीद और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण मजबूत बना हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था उम्मीद से अधिक मजबूत रहती है, ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बनी रहती हैं और अमेरिकी डॉलर में मजबूती आती है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। WGC ने ऐसे परिदृश्य में सोने में 5 से 20 प्रतिशत तक गिरावट की संभावना जताई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों का रुझान अभी भी सोने की ओर बना हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की तरफ आकर्षित किया है।
इसके अलावा कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। Reserve Bank of India तथा People's Bank of China सहित कई केंद्रीय बैंकों ने हाल के वर्षों में अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ता है या अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो सोने की कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी हुई है।

चेन्नई,एजेंसी। 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना लागू, तमिलनाडु सरकार पर ₹1,730 करोड़ का अतिरिक्त बोझ।

चेन्नई,एजेंसी। 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना लागू, तमिलनाडु सरकार पर ₹1,730 करोड़ का अतिरिक्त बोझ।

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने राज्य के घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री थलपति विजय कुमार द्वारा घोषित यह योजना उन परिवारों पर लागू होगी जिनकी दो महीने की बिजली खपत 500 यूनिट से कम है।

सरकार के अनुसार इस फैसले का उद्देश्य मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बढ़ती महंगाई से राहत देना है। योजना लागू होने से लाखों उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

ऊर्जा विभाग के प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस योजना से राज्य सरकार पर लगभग ₹1,730 करोड़ सालाना अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ पड़ेगा। हालांकि सरकार का कहना है कि आम जनता को राहत देना उसकी प्राथमिकता है और इसके लिए आवश्यक वित्तीय प्रबंधन किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी वर्षों में राज्य की राजनीति और आर्थिक नीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है। विपक्षी दलों ने योजना के वित्तीय भार को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि आम लोगों के बीच इस घोषणा का स्वागत किया जा रहा है।

सरकार जल्द ही योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश और लागू होने की तारीख जारी कर सकती है।

नई दिल्ली,एजेंसी।।महंगाई और रोजगार संकट से महानगरों से लौट रहे मजदूर।

नई दिल्ली,एजेंसी। महंगाई और रोजगार संकट से महानगरों से लौट रहे मजदूर।

भारत के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ मजदूर अपने घर आने को बिवस।

रसोई गैस, दाल, तेल और रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दाम गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।#महंगाई#मजदूर#रोजगार#LPG#भारत।

यह केवल आर्थिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी है। मजदूर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि वही असुरक्षित महसूस करेंगे, तो विकास की गति भी प्रभावित होगी।

महंगाई और रोजगार   संकट ने     मजदूर वर्ग की कमर तोड़ दी  है।  दिल्ली, मुंबई, हरियाणा-पंजाब जैसे शहरों से हजारों मजदूर अपने गांव लौटने को मजबूर हैं।

आज देश का मजदूर वर्ग कठिन दौर से गुजर रहा है। बड़े शहरों में मेहनत करके परिवार चलाने वाले मजदूर अब मजबूरी में अपने गांव लौट रहे हैं। कारण साफ है रोजगार की कमी और लगातार बढ़ती महंगाई।

रसोई गैस के दाम बढ़ रहे हैं, खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं और मजदूरी उतनी नहीं बढ़ रही। शहरों में रहना गरीब परिवारों के लिए दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।

सरकार और समाज दोनों को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे जिससे रोजगार बढ़े, महंगाई नियंत्रित हो और गरीब परिवारों को राहत मिल सके।
बड़े शहरों में काम करने वाले हजारों मजदूर अब अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। बढ़ती महंगाई, रोजगार की कमी और Liquefied Petroleum Gas (एलपीजी) गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने गरीब और दिहाड़ी मजदूर वर्ग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मजदूरों का कहना है कि शहरों में कमाई पहले जैसी नहीं रही, जबकि किराया, भोजन और परिवहन का खर्च लगातार बढ़ रहा है। दाल, तेल, सब्जी और रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने घरेलू बजट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
निर्माण कार्य, फैक्ट्रियों और छोटे उद्योगों में काम की कमी के कारण कई मजदूरों को नियमित रोजगार नहीं मिल पा रहा। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग अपने गृह राज्यों और गांवों की ओर लौट रहे हैं, जहां वे खेती या मनरेगा जैसे कार्यों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर देश की आर्थिक गतिविधियों और श्रम बाजार पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।


चीन: शी जिनपिंग की बड़ी कार्रवाई, दर्जनों जनरल बर्खास्त।

       चीन की सत्ता बेनाम सेना।

शी जिनपिंग की बड़ी कार्रवाई, दर्जनों जनरल बर्खास्त।
चीन के दर्जनों जनरलों को शी जिनपिंग ने बर्खास्त किया
बीजिंग, विशेष संवाददाता।

चीन की सेना के भीतर “पावर स्ट्रगल” या “शुद्धिकरण अभियान” (purge) कह रहे हैं। हालांकि चीन सरकार आधिकारिक तौर पर इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताती है।

चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में सेना के भीतर बड़े स्तर पर कार्रवाई जारी है। पिछले दो वर्षों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (P L A) के दर्जनों वरिष्ठ जनरलों और रक्षा अधिकारियों को पद से हटाया गया है। इस घटनाक्रम ने चीन की राजनीति और सेना के बीच तनाव की अटकलों को तेज कर दिया है।

कई मिडिया रिपोर्ट से जानकारी अनुसार: बल्कि सेना पर राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश भी है।

P L A की रॉकेट फ़ोर्स और शीर्ष सैन्य नेतृत्व में बड़े स्तर पर सफाई हुई।

2023 से अब तक 75 से 100 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटाया या जांच के दायरे में लाया गया।

कुछ अधिकारियों पर केवल रिश्वत नहीं, बल्कि “राजनीतिक अविश्वास” और X i के आदेश तंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगे।

सूत्रों के अनुसार चीन सरकार ने भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठने के बाद कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की। सबसे ज्यादा असर P L A की रॉकेट फ़ोर्स और रक्षा मंत्रालय पर पड़ा है।

पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफु और Wei Fenghe पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कई अधिकारियों को हिरासत में लिया गया जबकि कुछ को सार्वजनिक पदों से अचानक हटा दिया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग सेना पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह केवल भ्रष्टाचार विरोधी अभियान नहीं बल्कि सेना में पूर्ण निष्ठा सुनिश्चित करने की रणनीति भी हो सकती है।

हालांकि चीन सरकार का कहना है कि यह अभियान “राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अनुशासन” बनाए रखने के लिए चलाया जा रहा है। सरकार ने सेना में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की बात कही है।

दुनियाभर के रणनीतिक विशेषज्ञ इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि चीन की सेना एशिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकतों में गिनी जाती है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।




चेन्नई, एजेंसी। T V K ने D M K सरकार पर साधा निशाना।

चेन्नई,एजेंसी। टी वी के और डी एम के में तकरार।

चेन्नई से राजनीतिक तकरार तेज।

T V K ने D M K सरकार पर साधा निशाना।

चेन्नई, एजेंसी। थलपति विजय की पार्टी टी वी के और सत्तारूढ़ डीएमके के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। विजय ने राज्य सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि तमिलनाडु का खजाना खाली हो चुका है और राज्य करीब 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वित्तीय प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है, जिसका असर आम जनता पर पड़ रहा है। विजय ने कहा कि बढ़ते कर्ज और खर्चों के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

विजय के बयान के बाद डीएमके नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष जनता को भ्रमित करने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। 

पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए तमिलनाडु में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।

तेहरान एजेंसी: शनिवार को फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैनिक सम्पत्ति पर हमला करने की चेतावनी दी गई। ईरान के पड़ोसी देश पर ड्रोन हमले।

तेहरान एजेंसी: शनिवार को फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैनिक सम्पत्ति पर हमला करने की चेतावनी दी गई। ईरान के पड़ोसी देश पर ड्रोन हमले।
इसी बीच, ईरान के पड़ोसी देश में ड्रोन हमला किया गया है।
ईरान की तेहरान एजेंसी ने शनिवार को चेतावनी दी कि फारस की खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य संपत्तियों पर हमला किया जा सकता है। इसी दौरान ईरान के पड़ोसी देशों में ड्रोन हमलों की खबरों से मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। रिपोर्टों के अनुसार दुबई एयरपोर्ट के पास आग लगने और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं।

हाल के दिनों में युनाइटेड स्टेट्स और ईरान नके बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई रिपोर्टों में फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों, तेल टैंकरों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की धमकी दी गई