पटना। बिहार में कैबिनेट विस्तार: गुरुवार को मंत्रियों ने ली शपथ।

पटना।बिहार में कैबिनेट विस्तार: गुरुवार को मंत्रियों ने ली शपथ। 7 मई 2026.
भुत पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र निशांत कुमार को मंत्री पद मिलाइसके साक्षी नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह,और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह।

बिहार के राज्यपाल लेफ्टीनेंट जनरल सैयद आता हसनैन ने 32 मंत्रियों को शपथ दिलाई।

बिहार के मंत्री मंडल में पिछड़ी जाति का दबदबा कायम रहा।

20 ने पांच-पांच के समुह में शपथ-ग्रहण किए 12 ने छः-छः के दो समुहों में शपथ-ग्रहण किए और पांच महिलाओं को भी मंत्री मंडल में शामिल की गई।

पटना, 8 मई 2026: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को गांधी मैदान, पटना में नए मंत्रियों को शपथ दिलाकर अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ वरिष्ठ नेता और कई प्रमुख राज्य मंत्रियों ने भी मौजूदगी दर्ज कराई।

इस शपथ ग्रहण समारोह में कुल [कुल संख्या आठ 08] नए मंत्रियों ने शपथ ली। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को उनके-अपने विभागों के सफल संचालन और जनता की सेवा करने का संकल्प दिलाया।

हिस्सेदारी कुल:- 35
भाजपा:-16
जदयू: -15
लोजपा:-02
हम:-01 
रालोमो:- 01

शपथ ग्रहण करने वाले प्रमुख मंत्री और उनके विभाग (उदाहरण सूची):-मंत्री के नाम एवं पोर्टफोलियो:-

सम्राट चौधरी:- मुख्यमंत्री: सामान्य प्रशासन,गृह विभाग, मंत्री मंडल सचिवालय निगरानी निर्वाचन सिविल विमानन ऐसे विभाग जो किसी को आवंटित नहीं है।
विजय कुमार चौधरी:- उपमुख्यमंत्री,जलसंसाधन विभाग, संसदीय कार्यमंत्री का पद मिला।
विजेंद्र प्रसाद यादव:उपमुख्यमंत्री,वित्त मंत्री,वाणिज्य कर। 

क्रमशः शपथ-ग्रहण:-

श्रवन कुमार: ग्रामीण विकास,सूचना एवं जनसंपर्क।

विजय कुमार सिन्हा: कृषि विभाग।

डॉ दिलीप कुमार जायसवाल:राजस्व भूमि सुधार।

निशांत: स्वास्थ्य विभाग 

लेशी सिंह: भवन निर्माण विभाग ।

रामकृपाल यादव: सहकारिता विभाग।

नीतीश मिश्रा: नगर विकाश एवं आवास, सूचना प्रावैधिकी विभाग।

दामोदर रावत: परिवहन विभाग।

संजय सिंह टाईगर: उच्च शिक्षा,विधि विभाग।

अशोक चौधरी: खाद्य उपभोक्ता संरक्षण विभाग।

श्रीभगवान कुशवाहा:योजना एवं विकास विभाग।

अरूण शंकर प्रसाद:श्रम संसाधन,युवा रोजगार,

मदन सहनी: मद्यनिषेध उत्पाद विभाग,निबंधन।

डॉ संतोष कुमार सुमन:लघु जल संसाधन मंत्रालय

रमा निषाद: पिछड़ा,अतिपिछड़ा कल्याण विभाग।

रत्नेश सादा: आपदा प्रबंधन।

कुमार शैलेन्द्र: पथ निमार्ण विभाग।

शीला कुमारी: विज्ञान एवं प्रावैधिकी।

केदार प्रसाद गुप्ता: पर्यटन विभाग।

लखेन्द्र  रौशन: एस सी,एस टी, कल्याण विभाग।

सुनील कुमार: ग्रामीण कार्य विभाग।

श्रेयसी सिंह: उधोग एवं खेल विभाग।

मो० जमा खान:अल्पसंख्यक कल्याण विभाग।

नंद किशोर राम: डेयरी,मत्स्य एवं पशुपालन विभाग।

शैलेश कुमार उर्फ भुलो मंडल: उर्जा विभाग।

डॉ प्रमोद कुमार: भूतत्व,कला संस्कृति विभाग।

श्वेता गुप्ता: समाज कल्याण विभाग।

मिथिलेश तिवारी: शिक्षा विभाग।

डॉ रामचंद्र प्रसाद: पर्यावरण एवं वन, जलवायु परिवर्तन।

संजय कुमार सिंह:लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण।

संजय कुमार: गन्ना उधोग विभाग 

दीपक प्रकाश:- पंचायती राज मंत्रालय।

। गुरूवार को मंत्री पद का शपथ-ग्रहण किए।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा:-

"हमारा लक्ष्य है बिहार को विकास और सुशासन की नई ऊँचाइयों तक ले जाना। हर मंत्री अपने विभाग में जनता की उम्मीदों पर खरा उतरे।"

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मंत्रियों ने जनता की सेवा, विकास कार्यों की पारदर्शिता और राज्य की समृद्धि के लिए समर्पण का संकल्प लिया।

एंथ्रोपिक इंजिनियर। सॉफ्टवेयर इंजीनियर।अब A I कोड लिख सकता है, बग ढूँढ सकता है, टेस्ट बना सकता है और छोटे ऐप जल्दी बना देता है।

एंथ्रोपिक इंजिनियर। सॉफ्टवेयर इंजीनियर।अब A I कोड लिख सकता है, बग ढूँढ सकता है, टेस्ट बना सकता है और छोटे ऐप जल्दी बना देता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा प्रबंधित की जाती है। यह कर्नाटक बेंगलुरु में है। भारत का प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान उपग्रह प्रक्षेपण और मिशन योजना यहीं से से संचालित किया जाता है। एंथ्रोपिक इंजिनियर का कहना है कि अब ए आई कोड लिखेगा।

  1. डारियो अमोडई और दूसरी A I कंपनियों के कई नेताओं ने कहा है कि A I आने वाले वर्षों में बहुत-सा सॉफ्टवेयर काम ऑटोमेट कर सकता है। 
  2. इससे जूनियर-लेवल और दोहराए जाने वाले कोडिंग टास्क पर असर पड़ रहा है।
  3. लेकिन बड़े सिस्टम डिज़ाइन, प्रोडक्ट समझ, सिक्योरिटी, स्केलिंग, टीम कोर्डिनेशन, क्लाइंट रिक्रूटमेंट और जिम्मेदारी अभी भी इंसानों पर ही निर्भर हैं।
  4. आज की इंडस्ट्री में बदलाव “इंजीनियर खत्म” से ज्यादा “इंजीनियर का काम बदलना” जैसा है।
  5. कई कंपनी अब ऐसे डेवलपर्स चाहती हैं जो: A I टूल्स के साथ काम कर सकें।वास्तुकला व्यावसायिक समस्याएं हल करें।
  6. केवल सिंटेक्स नहीं, बल्कि सिस्टम जानकारी हो।
  7. उदाहरण: पहले डेवलपर मैन्युअल रूप से बॉयलर प्लेट कोड लिखता था। अब A I वह कोड बनाता है, लेकिन सही डिज़ाइन अंकित करना, एआई के कोड को सत्यापित करना, उत्पादन में सुरक्षित रूप से तैनात करना अभी भी इंसान है।
  8. इसलिए अगले कुछ वर्षों में संभवतः- कम कोचिंग वाले दोहराए जाने वाले कोडिंग जॉब घटें,मजबूत इंजीनियरों की उत्पादकता बहुत अधिक है,एआई-सहायता प्राप्त डेवलपर्स की मांग बढ़ी
  9. अगर आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन रहे हैं, तो सिर्फ कोडिंग सिंटेक्स सिंटैक्स पर नहीं,बल्कि:-
  10. DSA+System design,AI Tools Usage,Cloud/devlops besics problem solving, communication ज्यादा प्रभावित होगा।
  11. आजकल एक एंथ्रोपिक इंजीनियर या सामान्य सॉफ्टवेयर इंजीनियर केवल कोड लिखने तक ही सीमित नहीं है। AI टूल्स के साथ वे अब और भी ज्यादा शक्तिशाली बन गए हैं। चलिए इसे विस्तार से देखते हैं:

  12. AI कोड लिखना:
  13. AI मॉडल्स (जैसे मैं) कोडिंग भाषाएँ समझते हैं और तेज़ी से कोड जनरेट कर सकते हैं।
  14. इससे डेवलपर्स छोटे-छोटे मॉड्यूल या पूरे प्रोजेक्ट जल्दी बना सकते हैं।
  15. बग ढूँढना (Debugging):
  16. AI कोड में संभावित एरर्स और लॉजिक इश्यूज पहचान सकता है।
  17. यह डेवलपर्स का समय बचाता है और प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है।
  18. टेस्टिंग ऑटोमेशन:
  19. यूनिट टेस्ट, इंटीग्रेशन टेस्ट या UI टेस्ट AI से जल्दी जनरेट कर सकते हैं।
  20. यह सुनिश्चित करता है कि कोड ज्यादा भरोसेमंद और एरर-फ्री हो।
  21. त्वरित ऐप डेवलपमेंट:
  22. छोटे वेब या मोबाइल ऐप्स AI की मदद से मिनटों या घंटों में बन सकते हैं।
  23. प्रोटोटाइप बनाने और MVP (Minimum Viable Product) टेस्ट करने में समय बचता है।
  24. AI अब सिर्फ टूल नहीं, बल्कि एक पार्टनर बन गया है। जो काम पहले घंटों या दिनों में होता था, अब मिनटों में संभव है। लेकिन इंसानी क्रिएटिविटी और लॉजिक अभी भी जरूरी है, AI सिर्फ उसे सुपर चार्ज करता है।
  25. उदाहरण: एक सिंपल टू-डू ऐप बनाना है। हम AI की मदद से कोड लिखेंगे और उसके लिए टेस्ट भी बनाएंगे।
  26. ऐप का बेसिक कोड(Python + Flask)
  27. from flask import Flask, request, jsonify

  28. app = Flask(__name__)
  29. todos = []

  30. @app.route('/todos', methods=['GET'])
  31. def get_todos():
  32. return jsonify(todos)

  33. @app.route('/todos', methods=['POST'])
  34. def add_todo():
  35. data = request.get_json()
  36. todo = data.get('task')
  37. if todo:
  38. todos.append(todo)
  39. return jsonify({"message": "Task added!", "todos": todos}), 201
  40. return jsonify({"error": "No task provided"}), 400

  41. if __name__ == '__main__':
  42. app.run(debug=True)
  43. यह कोड एक सिंपल A P I बनाता है:-

पटना: सम्राट चौधरी बने मुख्यमंत्री:-गांधी मैदान बना ऐतिहासिक गवाह, सम्राट चौधरी ने गांधी मैदान में ली मुख्यमंत्री पद की शपथ।

पटना: सम्राट चौधरी बने मुख्यमंत्री:- गांधी मैदान बना ऐतिहासिक गवाह, सम्राट चौधरी ने गांधी मैदान में ली मुख्यमंत्री पद की शपथ।

“सम्राट चौधरी ने ली शपथ, समर्थकों में उत्साह”

पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार को नया अध्याय जुड़ गया, जब सम्राट चौधरी ने पटना स्थित गांधी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। समारोह में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, एनडीए के वरिष्ठ नेता और हजारों समर्थक मौजूद रहे।
भारत के प्रधानमंत्री की मौजूदगी में मंत्री मंडल शपथग्रहण
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान गांधी मैदान पूरी तरह खचाखच भरा नजर आया। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और राजधानी पटना में कई जगहों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास, रोजगार और कानून व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बदलाव बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है। “गांधी मैदान से बिहार को मिला नया मुख्यमंत्री” “सम्राट चौधरी ने ली शपथ, समर्थकों में उत्साह”“पटना के गांधी मैदान में ऐतिहासिक राजनीतिक आयोजन”

सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री पद ग्रहण और मंत्रिमंडल विस्तार समारोह गांधी मैदान में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई बड़े नेता शामिल हुए।

समारोह को लेकर गांधी मैदान में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और पूरे पटना में ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहा। शपथ ग्रहण का समय लगभग 12:10 बजे रखा गया, जिसे अभिजीत मुहूर्त के अनुसार शुभ माना गया।

बिहार में सत्ता परिवर्तन: सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण में उमड़ा जनसैलाब।

पटना के गांधी मैदान में भव्य समारोह, सम्राट चौधरी ने संभाली कमान।

एनडीए नेताओं की मौजूदगी में सम्राट चौधरी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ।

बिहार की राजनीति में नया अध्याय, सम्राट चौधरी बने मुख्यमंत्री।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में समर्थक और एनडीए कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसे बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ।


कोलकाता:पश्चिम बंगाल:बड़े प्रशासनिक बदलाव,जांच या राजनीतिक स्थिति में हलचल हो रही हो।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल: बड़े प्रशासनिक बदलाव,जांच या राजनीतिक स्थिति में हलचल हो रही हो।
ममता दीदी: इस्तीफा देने से इंकार बोली हम हारे नहीं, चुनाव आयोग ने बेईमानी से हराया है।

चुनाव + बड़े ट्रांसफर + कानून-व्यवस्था की चिंता + कोर्ट केस,कोई भी सरकारी दस्तावेज़ छेड़छाड़ या गायब न हो सके। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी नहीं प्रशासनिक बदलाव शुरू।

कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव:- (Chief Secretary) द्वारा जारी एक प्रशासनिक निर्देश से जुड़ी लगती है। पश्चिम बंगाल में हाल ही में ऐसे निर्देश दिए गए थे कि सरकारी विभागों में कोई भी फाइल, दस्तावेज़ या रिकॉर्ड बिना उचित अनुमति के इधर-उधर न किया जाए।

रिकॉर्ड की सुरक्षा:- ताकि महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज़ गायब या छेड़छाड़ से सुरक्षित रहें। जांच या ऑडिट की तैयारी अगर कोई जांच, ऑडिट या समीक्षा चल रही हो।

प्रशासनिक पारदर्शिता:- सभी फाइलें अपने निर्धारित स्थान पर रहें ताकि कामकाज स्पष्ट रहे।

संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा:- खासकर जब मामला संवेदनशील या कानूनी हो अक्सर ऐसे निर्देश तब सामने आते हैं जब किसी बड़े प्रशासनिक बदलाव, जांच या राजनीतिक स्थिति में हलचल हो रही हो।

1.चुनाव से पहले बड़े स्तर पर अफसरों का ट्रांसफर:-

भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा चुनाव से पहले मुख्य सचिव DGP और कई बड़े अधिकारियों का ट्रांसफर किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को सही ठहराया। इसका मतलब: प्रशासनिक कंट्रोल में अचानक बड़ा बदलाव।

2. भारी प्रशासनिक फेरबदल:-

सैकड़ों पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को बदला गया (173 पुलिस, 83 BDO)। ऐसी स्थिति में फाइलों के गायब होने, बदलने या गलत जगह जाने का खतरा बढ़ जाता है।

3. कानून-व्यवस्था पर सवाल:-

मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति” माना। इससे प्रशासन पर भरोसे को लेकर चिंता बढ़ी।

4. चुनाव प्रक्रिया पर विवाद:- 

वोट काउंटिंग और कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया। 

तो “फाइल न हिलाने” का आदेश क्यों:-मुख्य सचिव का आदेश एक सुरक्षा और नियंत्रण का कदम है।

1. कोई भी सरकारी फाइल गायब या बदली न जाए।

2. अगर जांच या कोर्ट केस हो तो रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।

3. चुनाव के दौरान पारदर्शिता बनी रहे।

4. अचानक ट्रांसफर के बीच दस्तावेज़ों में गड़बड़ी न हो।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रचंड बहुमत के बाद योगी आदित्यनाथ के तरह सरकार चलेगी।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रचंड बहुमत के बाद योगी आदित्यनाथ के तरह सरकार चलेगी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में बहुत जल्द सरकार बनेगी।
यह पहली बार है जब बीजेपी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है। बीजेपी ने ममता बनर्जी का नामो निशान मिटा दिया।

1. कानून-व्यवस्था:(Law & Orderपुलिस सिस्टम को ज्यादा सख्त और केंद्रीकृत बनाने की कोशिश राजनीतिक हिंसा पर कड़ी कार्रवाई “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति (जैसा यूपी में देखने को मिलता है)
2. भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुधार: सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना,लोकल स्तर पर “कट मनी” जैसी शिकायतों पर कार्रवाई डिजिटल गवर्नेंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर जोर।
3. इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश:-सड़कों, रेलवे, पोर्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विस्तार बंगाल को मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की कोशिश केंद्र की योजनाओं के साथ “डबल इंजन” समन्वय।
4. उद्योग और रोजगार:-नए उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नीतियां MSME सेक्टर को बढ़ावा युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम।
5. सांस्कृतिक और धार्मिक मुद्दे “सांस्कृतिक पहचान” पर जोर मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहेगा, खासकर All India Trinamool Congress के साथ टकराव में।
6. किसानों और ग्रामीण योजनाएं: केंद्र की योजनाएं जैसे PM-KISAN को विस्तार ग्रामीण सड़कों, सिंचाई और कृषि मार्केट सुधार।
7. शिक्षा और स्वास्थ्य: सरकारी स्कूलों और अस्पतालों का अपग्रेड केंद्र की योजनाओं का राज्य में तेज़ी से लागू होना।
⚖️ 8. राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव: लोकल प्रशासन में बड़े स्तर पर बदलाव पुराने सिस्टम (जो ममता बनर्जी के कार्यकाल में बना)   को      री- स्टरक्चर करना।
ध्यान रखने वाली बात “योगी आदित्यनाथ जैसा मॉडल” पूरी तरह लागू होगा, यह तय नहीं है,क्योंकि बंगाल की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति अलग है यहां क्षेत्रीय पहचान और भाषा की राजनीति ज्यादा मजबूत है।

निष्कर्ष: बीजेपी की सरकार का फोकस आमतौर पर कानून-व्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और प्रशासनिक सख्ती पर रहेगा। लेकिन बंगाल में इसे लागू करने का तरीका स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बदलेगा।








वाशिंगटन एजेंसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर कर दी गई है।

वाशिंगटन एजेंसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर कर दी गई है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा ईरान की सैन्य ताकत कमजोर कर दिया है।

वाशिंगटन/एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रमों और रणनीतिक कदमों के चलते ईरान की ताकत पर असर पड़ा है।

राष्ट्रपति ट्रम्प के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम माना जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सैन्य शक्ति कई स्तरों पर फैली हुई है, जिसमें उसकी मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय सहयोगी और रक्षा प्रणाली शामिल हैं। ऐसे में उसकी सैन्य ताकत को पूरी तरह कमजोर बताना एक जटिल विषय है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयानों को राजनीतिक और कूटनीतिक संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। फिलहाल, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


वाशिंगटन एजेंसी: नासा के वैज्ञानिकों ने 27 ऐसे ग्रह की खोज की है जो दो यारों के बीचोंबीच चक्कर लगाती है।

वाशिंगटन एजेंसी: नासा के वैज्ञानिकों ने 27 ऐसे ग्रह की खोज की है जो दो यारों के बीचोंबीच चक्कर लगाती है।

वैज्ञानिकों ने 27 ऐसे ग्रह की खोज की है जो दो यारों के बीचों-बीच चक्कर लगाती है।

नासा (NASA) के वैज्ञानिकों ने ऐसे कई ग्रह खोजे हैं जिन्हें सर्कम्बाइनरी प्लैनेट कहा जाता है। इसका मतलब है कि ये ग्रह दो तारों (बिनरी स्टार सिस्टम) के चारों ओर घूमते हैं,यानी जैसे हमारा पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है, वैसे ये ग्रह दो सूर्यों के चारों ओर एक साथ चक्कर लगाते हैं।

क्या सच है:-वैज्ञानिकों ने अब तक दर्जनों ऐसे ग्रह खोजे हैं (लगभग 20–30 के आसपास, समय के साथ संख्या बढ़ती रहती है) ये ग्रह “दो यारों” नहीं बल्कि दो तारों (स्टार) के बीच के गुरुत्वाकर्षण में रहते हैं,इन्हें ढूंढने में केप्लर स्पेस टेलिस्कोप जैसी मिशनों की बड़ी भूमिका रही है।

यह खास क्यों है:-ऐसे सिस्टम में गुरुत्वाकर्षण बहुत जटिल होता है,फिर भी ग्रह स्थिर कक्षा में बने रह सकते हैं,यह दिखाता है कि ब्रह्मांड में ग्रह बनने के तरीके हमारी कल्पना से कहीं ज़्यादा विविध हैं।

 


कोलकाता:अभिषेक बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना केन्द्रों पर गड़बड़ी (धांधली) हुई है।

कोलकाता:अभिषेक बनर्जी ने हाल ही में आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना केन्द्रों पर गड़बड़ी (धांधली) हुई है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के इशारे पर काम किया है।

अभिषेक बनर्जी के बयानों और आरोपों के बाद इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (E C I) ने सीधे उनके आरोपों को स्वीकार नहीं किया, बल्कि अपने नियमों के अनुसार कार्रवाई की।

T M C नेताओं (जैसे अभिषेक और ममता बनर्जी) ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए और कहा बीजेपी के साथ चुनाव आयोग का पहले सांठ गांठ बना हुआ है। लेकिन चुनाव आयोग ने आरोपों का समर्थन नहीं किया और प्रक्रिया को नियमों के अनुसार सही बताया, साथ ही अपने फैसलों (जैसे रोक, पुनर्मतदान) को प्रशासनिक आधार पर लागू किया।

अभिषेक बनर्जी का कहना है कि मतगणना के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगाए गए C C T V कैमरों की फुटेज की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं किसी तरह की अनियमितता तो नहीं हुई। 

अभिषेक बनर्जी ने क्या कहा था उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी और धांधली के आरोप लगाए और B J P व चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।

कुछ मामलों में उन्होंने दोबारा मतदान  को लेकर भी आयोग के फैसलों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी।

क्या कहा/किया चुनाव आयोग ने:-

चुनाव के दौरान जब अभिषेक बनर्जी काउंटिंग सेंटर पहुँचे, तो ECI ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया क्योंकि वे उस चुनाव के उम्मीदवार नहीं थे।आयोग ने साफ किया कि काउंटिंग सेंटर में केवल अधिकृत लोग ही जा सकते हैं, और नियम सभी पर समान लागू होते हैं। इसके अलावा, आयोग ने मोबाइल फोन जैसी चीज़ों पर भी सख्ती दिखाई ताकि काउंटिंग प्रक्रिया निष्पक्ष रहे।

भारत के सर्वोपरि चुनाव आयोग ने इस पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं किया है। ह मुद्दा चुनाव आयोग की भूमिका और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल खड़े करता है। आम तौर पर ऐसे मामलों में विपक्षी दल या उम्मीदवार C C T V फुटेज, पुनर्मतगणना  या स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं ताकि परिणामों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।



नई दिल्ली: भारतीय रेलवे कुली संघ (रेलवे पोर्टर्स/कुलियों का संगठन) समय-समय पर सरकार से मांग करता रहा है कि कुलियों को स्थायी रूप से भारतीय रेलवे में समायोजित किया जाए।

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे कुली संघ (रेलवे पोर्टर्स/कुलियों का संगठन) समय-समय पर सरकार से मांग करता रहा है कि कुलियों को स्थायी रूप से भारतीय रेलवे में समायोजित किया जाए।

2008 की तरह रेलवे में समायोजित करने के लिए रेलमंत्री, प्रधानमंत्री से मांग की गई एवं क्षेत्रीय सांसद, विधायक द्वारा संसद भवन में आवाज लगाई गई लेकिन किसी इस आवाज को नहीं सुना।

भारतीय रेलवे कुली आज भी अपने अधिकार और स्थायी रोजगार की मांग कर रहे हैं।

भारतीय रेलवे कुली संघ की मांग है कि 2008 की तरह कुलियों को भारतीय रेलवे में समायोजित किया जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

2008 के आसपास भी ऐसी मांगें उठी थीं, जब कुछ कुलियों को सीमित स्तर पर नौकरी में लेने या उन्हें वैकल्पिक रोजगार देने की चर्चा हुई थी। लेकिन यह पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया। 

इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैंरेलवे में पहले से ही पदों की सीमित संख्या:

भर्ती की प्रक्रियाएं (जैसे रेलवे भर्ती बोर्ड) के जरिए ही नियुक्ति का नियम

कुलियों का पारंपरिक रूप से लाइसेंसधारी लेकिन गैर-स्थायी कर्मचारी होना।

इसलिए हर बार मांग उठती है, लेकिन उसे लागू करना प्रशासन के लिए आसान नहीं होता।फिर भी,कुलियों की समस्याएं वास्तविक हैं:

आय का अस्थिर होना,सामाजिक सुरक्षा (पेंशन, बीमा) की कमी,डिजिटल टिकटिंग और ट्रॉली/लिफ्ट जैसी सुविधाओं से काम कम होना।

मीडिया और जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्रीय (जैसे सांसद/विधायक) तक मुद्दा संसद भवन, रेलमंत्री, भारत के प्रधानमंत्री तक पहुंचाया गया। कोर्ट और जनहित याचिका (PIL) का भी सहारा लिया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रेलवे कुलियों ने कहा सिर्फ निराशा ही निराशा दिखाई दे रहा है।

बरौनी: बरौनी नगर परिषद में सफाई कर्मियों का शोषण: दो वार्ड का काम एक व्यक्ति से लिया जाता है, वेतन में कटौती और भुगतान में देरी”

बरौनी:सोकहारा: बरौनी नगर परिषद में सफाई कर्मियों का शोषण: दो वार्ड का काम एक व्यक्ति से लिया जाता है, वेतन में कटौती और भुगतान में देरी”

सही समय पर वेतन का ठेकेदार द्वारा भुगतान नहीं करने के कारण काम छोड़ रहे हैं।

“झाड़ू लगाने वाले कर्मचारियों ने उठाई आवाज, समय पर वेतन नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी”

बरौनी। बरौनी नगर परिषद में कार्यरत सफाई कर्मियों के साथ गंभीर अनियमितता और शोषण का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, झाड़ू लगाने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।

कर्मचारियों का आरोप है कि कई मामलों में एक ही व्यक्ति से दो वार्डों का काम लिया जा रहा है, जबकि उन्हें एक वार्ड के अनुसार ही वेतन दिया जाता है। इतना ही नहीं, वेतन में कटौती की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।

इस संबंध में कर्मचारियों ने बताया कि वे लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

इस मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि वेतन का भुगतान समय पर किया जाए और कार्य के अनुसार उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित किया जाए।

बरौनी नगर परिषद में सफाई कर्मियों के साथ अन्याय के आरोप!

बरौनी से बड़ी खबर:- एक कर्मचारी से दो वार्ड का काम,समय पर वेतन नहीं,वेतन में कटौती की शिकायत,कर्मचारियों में बढ़ रहा है आक्रोश। क्या होगी जांच? कब मिलेगा न्याय।