सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026 गूगल और xAI के बीच हुआ अरबों डॉलर का AI समझौता।

सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026 गूगल और xAI के बीच हुआ अरबों डॉलर का AI समझौता।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दुनिया में एक बड़ा कारोबारी समझौता सामने आया है। 

सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026।


रिपोर्टों के अनुसार, इस सौदे के तहत Google अक्टूबर 2026 से जून 2029 तक प्रति माह लगभग 92 करोड़ डॉलर (920 मिलियन डॉलर) का भुगतान करेगा।


इन संसाधनों का उपयोग Google अपने AI प्लेटफ़ॉर्म और उन्नत भाषा मॉडलों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा AI उद्योग में कंप्यूटिंग शक्ति की बढ़ती आवश्यकता को दर्शाता है। 

AI मॉडल पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, जिसके कारण बड़ी तकनीकी कंपनियों को विशाल डेटा सेंटरों और अत्याधुनिक चिप्स की जरूरत पड़ रही है।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब SpaceX और xAI के एकीकरण के बाद एलन मस्क की कंपनी AI अवसंरचना (Infrastructure) के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही है। 

हाल ही में कंपनी ने अन्य AI कंपनियों के साथ भी बड़े कंप्यूटिंग समझौते किए हैं, जिससे वह AI क्षेत्र में एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदाता के रूप में उभर रही है।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यह सौदा न केवल Googleकी AI महत्वाकांक्षाओं को मजबूती देगा, बल्कि SpaceX-xAI के राजस्व और भविष्य की विकास योजनाओं को भी बड़ा समर्थन प्रदान करेगा।

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसी। AI कंपनी एंथ्रोपिक ने उन्नत AI विकास पर रोक लगाने की अपील की।

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसी। AI कंपनी एंथ्रोपिक ने उन्नत AI विकास पर रोक लगाने की अपील की।

मानव नियंत्रण और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियॉं।

सैन फ्रांसिस्को, एजेंसी। AI सुरक्षा पर केंद्रित कंपनी Anthropic ने दुनिया भर में उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास की गति धीमी करने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि भविष्य में AI सिस्टम इतने सक्षम हो सकते हैं कि वे स्वयं को बेहतर बनाने लगें, जिससे मानव नियंत्रण और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

कंपनी के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि "रिकर्सिव सेल्फ-इम्प्रूवमेंट" (Recursive Self-Improvement) जैसी स्थिति आने पर AI तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ सकती है। इसे देखते हुए एंथ्रोपिक ने देशों और AI कंपनियों के बीच वैश्विक सहमति तथा निगरानी व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्नत AI विकास को अस्थायी रूप से धीमा या रोका जा सके।

एंथ्रोपिक का मानना है कि AI मानव समाज के लिए बड़े अवसर लेकर आ सकता है, लेकिन इसके संभावित जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कंपनी ने कहा कि सुरक्षा उपायों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना अत्यधिक शक्तिशाली AI सिस्टम भविष्य में अप्रत्याशित परिणाम पैदा कर सकते हैं।

हालांकि, कंपनी की इस अपील पर कुछ विशेषज्ञों और उद्योग जगत के लोगों ने सवाल भी उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि AI विकास की गति कम करने से नवाचार और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। वहीं समर्थकों का तर्क है कि तकनीक के सुरक्षित उपयोग के लिए पहले से तैयारी करना आवश्यक है।

नई दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान,8 जून अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, दोनों पक्षों ने किए नए हमले।

नई। दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान,8 जून अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ा तनाव, दोनों पक्षों ने किए नए हमले।

दोनों पक्षों में तनाव जारी है वार्ता की कोशिशों के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष तेज,अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित।

नई। दिल्ली/वॉशिंगटन/तेहरान, 8 जून सीज फायर और वार्ता की कोशिशों के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष तेज,अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 

हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे से जुड़े सैन्य ठिकानों और रणनीतिक लक्ष्यों पर हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। 

रिपोर्टों के अनुसारअमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ तटीय सैन्य रडार ठिकानों पर कार्रवाई की, 

जबकि जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की कोशिश की।

सूत्रों के अनुसार ईरानी मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों के बाद अमेरिकी बलों ने जवाबी कार्रवाई की। 

वहीं ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने पहले हुए युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन किया है। 

दोनों देशों के बीच चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बावजूद हालात में सुधार नहीं दिख रहा है।

क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला है। 

तेल की कीमतों में उछाल आया है और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरे मध्य-पूर्व में व्यापक अस्थिरता पैदा हो सकती है। 

संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने तथा कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है।

नई दिल्ली। ई 85 इथेनॉल फ्यूल लॉन्च, हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम।

नई दिल्ली। ई 85 इथेनॉल फ्यूल लॉन्च, हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम।

इथेनॉल फ्यूल टैंक एवं बनाने का प्लांट।

केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी

नई दिल्ली, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने देश में E85 इथेनॉल फ्यूल का शुभारंभ किया। 
सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा की ओर ले जाने के साथ-साथ पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
E85 ईंधन में लगभग 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। यह विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए तैयार किया गया है। 
सरकार के अनुसार, E85 पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल है और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगा।
गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार लंबे समय से इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। ई-85 फ्यूल के विस्तार से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और पेट्रोलियम आयात पर होने वाले खर्च में भी कमी आ सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि चरणबद्ध तरीके से विभिन्न क्षेत्रों में ई-85 फ्यूल की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इसके लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और आवश्यक ईंधन अवसंरचना के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ई-85 फ्यूल का लॉन्च हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है।


झाझा (जमुई)। झाझा रेलवे स्टेशन पर पानी की सप्लाई बंद होने से यात्रियों में नाराजगी।

झाझा (जमुई)। झाझा रेलवे स्टेशन पर पानी की सप्लाई बंद होने से यात्रियों में नाराजगी।
यात्रियों को समय का आभाव रहने के कारण स्टेशन मास्टर को लिखित शिकायत दर्ज नहीं होता है।

यात्रियों को समय का आभाव रहने के कारण स्टेशन मास्टर को लिखित शिकायत दर्ज नहीं होता है।

झाझा (जमुई), संवाददाता।

झाझा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर ट्रेनों के आगमन से पहले पेयजल की सप्लाई बंद किए जाने का आरोप यात्रियों ने लगाया है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन आने के समय जब प्लेटफार्म पर सबसे अधिक भीड़ होती है, उसी दौरान पानी उपलब्ध नहीं रहने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

यात्रियों के अनुसार, प्लेटफार्म पर लगे नलों में पानी नहीं आने के कारण उन्हें मजबूरन स्टॉलों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों को असुविधा भी झेलनी पड़ रही है। खासकर गर्मी के मौसम में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय यात्रियों ने आरोप लगाया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसके समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि रेलवे प्रशासन को यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए और प्लेटफार्म पर नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराना चाहिए।

यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों से मांग की है कि झाझा रेलवे स्टेशन पर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की जांच कराई जाए तथा ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय भी पानी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में रेलवे प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।

वॉशिंगटन, अमेरिका। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया: लोकतंत्र का अनोखा मॉडल।

वॉशिंगटन, अमेरिका। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया: लोकतंत्र का अनोखा मॉडल।



वॉशिंगटन, अमेरिका।

दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्रों में से एक अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता के वोटों से नहीं होता। 

यहां एक विशेष प्रणाली, जिसे Electoral College कहा जाता है, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव का अंतिम फैसला करती है।

चुनाव प्रक्रिया कैसे शुरू होती है:

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार वर्ष में आयोजित होते हैं। 

प्रमुख राजनीतिक दल पहले अपने उम्मीदवार चुनते हैं। 

इसके लिए विभिन्न राज्यों में प्राइमरी और कॉकस चुनाव आयोजित किए जाते हैं। 

इसके बाद राष्ट्रीय अधिवेशनों में उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा की जाती है।

जनता वोट देती है, लेकिन राष्ट्रपति सीधे नहीं चुनती:

नवंबर महीने में अमेरिकी नागरिक मतदान करते हैं। 

हालांकि वे सीधे राष्ट्रपति के लिए वोट नहीं देते, बल्कि अपने राज्य के "इलेक्टर्स" (निर्वाचकों) के समूह को चुनते हैं। 

यही निर्वाचक बाद में राष्ट्रपति के लिए आधिकारिक मतदान करते हैं।

क्या है इलेक्टोरल कॉलेज:

अमेरिका में कुल 538 इलेक्टोरल वोट हैं। किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए कम-से-कम 270 वोट हासिल करने होते हैं। 

प्रत्येक राज्य को उसके कांग्रेस प्रतिनिधियों और सीनेटरों की संख्या के आधार पर इलेक्टोरल वोट मिलते हैं।

विजेता कैसे तय होता है:

अधिकांश राज्यों में "विनर-टेक्स-ऑल" प्रणाली लागू है। 

इसका अर्थ है कि जिस उम्मीदवार को राज्य में सबसे अधिक लोकप्रिय वोट मिलते हैं, 

उसे उस राज्य के सभी इलेक्टोरल वोट प्राप्त हो जाते हैं। 

केवल Maine और Nebraska में अलग व्यवस्था लागू है, जहां इलेक्टोरल वोटों का आंशिक विभाजन संभव है।

अंतिम चरण:

दिसंबर में निर्वाचक अपने-अपने राज्यों में मिलकर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदान करते हैं। 

इसके बाद जनवरी में अमेरिकी कांग्रेस इन वोटों की आधिकारिक गणना और पुष्टि करती है। 

विजेता उम्मीदवार को राष्ट्रपति-निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।

विवाद और बहस:

अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर समय-समय पर बहस होती रही है। इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है कि किसी उम्मीदवार ने राष्ट्रीय स्तर पर अधिक लोकप्रिय वोट प्राप्त किए, लेकिन इलेक्टोरल वोट कम मिलने के कारण चुनाव हार गया। वर्ष 2000 और 2016 इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

अंतिम निष्कर्ष : अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया दुनिया की सबसे जटिल और विशिष्ट लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में गिनी जाती है। 

यहां जनता की राय महत्वपूर्ण होती है, लेकिन अंतिम फैसला इलेक्टोरल कॉलेज प्रणाली के माध्यम से होता है। 

यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव केवल वोटों की गिनती नहीं, बल्कि राज्यों के राजनीतिक संतुलन का भी खेल माना जाता है।

वाशिंगटन/चेन्नई।अमेरिकी सरकार में एआई नीति सलाहकार बने श्रीराम कृष्णन।

वॉशिंगटन/चेन्नई। भारतीय मूल के प्रख्यात तकनीकी उद्यमी और निवेशक Sriram Krishnan को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन में सीनियर पॉलिसी एडवाइज़र फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति दिसंबर 2024 में घोषित हुई और उन्होंने जनवरी 2025 से व्हाइट हाउस में कार्यभार संभाला।

कौन हैं श्रीराम कृष्णन:

श्रीराम कृष्णन का जन्म भारत के Chennai में हुआ। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अमेरिका जाकर तकनीकी क्षेत्र में तेजी से पहचान बनाई। वे पहले Microsoft, Yahoo!, Meta (फेसबुक), Snap Inc. और X Corp. (Twitter/X) जैसी प्रमुख कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में कार्य कर चुके हैं। बाद में वे वेंचर कैपिटल फर्म Andreessen Horowitz के जनरल पार्टनर भी बने थे 

क्या थी उनकी जिम्मेदारी:

व्हाइट हाउस में श्रीराम कृष्णन की प्रमुख जिम्मेदारी अमेरिका की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीति तैयार करने और उसे लागू करने में सहायता करना थी। उनका कार्य था।

एआई विकास के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाना।

एआई नियमन (Regulation) के लिए नीति ढांचा तैयार करना।

अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना।

चीन समेत अन्य देशों के साथ एआई प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी बढ़त सुनिश्चित करना।

उद्योग, सरकार और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करना।

नियुक्ति के समय क्यों चर्चा में रहे:

उनकी नियुक्ति के बाद अमेरिकी राजनीति में कुछ विवाद भी हुआ। 

कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने उनके पुराने आव्रजन (Immigration) संबंधी विचारों का विरोध किया, जबकि कई प्रमुख तकनीकी नेताओं, जिनमें Elon Musk भी शामिल थे, ने उनका समर्थन किया।

एआई नीति में योगदान:

विशेषज्ञों के अनुसार, श्रीराम कृष्णन ने ट्रंप प्रशासन की एआई रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर एआई नियमन के एकीकृत ढांचे की वकालत की और अमेरिका को एआई क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में काम किया।

2026 में पद छोड़ने की घोषणा:

जून 2026 में श्रीराम कृष्णन ने घोषणा की कि वे महीने के अंत तक व्हाइट हाउस का पद छोड़ देंगे। 

उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा और भविष्य में भी वे अमेरिका के सामने मौजूद एआई संबंधी बड़ी चुनौतियों पर काम करते रहेंगे।

भारतीय मूल के श्रीराम कृष्णन का अमेरिकी सरकार में एआई नीति सलाहकार बनना भारतीय तकनीकी प्रतिभा की वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। 

सिलिकॉन वैली के अनुभव और नीति-निर्माण में उनकी भूमिका ने उन्हें अमेरिका की एआई रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया।

ओस्लो (नॉर्वे)। प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे शतरंज में रचा इतिहास, खिताब पर जमाया कब्ज़ा।

🇮🇳ओस्लो (नॉर्वे)। प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे शतरंज में रचा इतिहास, खिताब पर जमाया कब्ज़ा।

विंसेंट कीमर को मायूसी छा गई।

प्रज्ञानानंदा बने Norway Chess जीतने वाले पहले भारतीय,फाइनल में विंसेंट कीमर को हराया,विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को भी हराया,भारत के शतरंज इतिहास में बड़ा मील का पत्थर।

ओस्लो (नॉर्वे), 7 जून 2026:

भारतीय ग्रैंडमास्टर R Praggnanandhaa ने नॉर्वे में आयोजित प्रतिष्ठित Norway Chess 2026 टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब जीत लिया है।

यह उपलब्धि इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि वे इस प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।

फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के मजबूत खिलाड़ी विंसेंट कीमर को हराकर खिताब अपने नाम किया। 

पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बेहद आक्रामक और स्थिर रहा, और अंतिम चरण में लगातार जीतों ने उन्हें चैंपियन बना दिया।

इस जीत के दौरान प्रज्ञानानंदा ने विश्व नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को भी हराकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा।

जीत के बाद देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया है और इसे भारतीय शतरंज के लिए एक “ऐतिहासिक क्षण” बताया जा रहा है।

नई दिल्ली।वाशिंगटन।रविवार का बाजार अपडेट: यूरो, सोना और चांदी में गिरावट; डॉलर मजबूत।

नई दिल्ली।वाशिंगटन।रविवार का बाजार अपडेट: यूरो, सोना और चांदी में गिरावट; डॉलर मजबूत।

नई दिल्ली।वाशिंगटन।आर्थिक डेस्क।रविवार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में रविवार को यूरो में कमजोरी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखी गई। डॉलर के मजबूत होने का सीधा असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर पड़ा, जिससे सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट आई।

नरेन्द्र मोदी की सलाह कामयाब नहीं हो रहा है।

https://amangitanjaliexpress1984.blogspot.com/2026/06/blog-post_340.htmlबाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके चलते मुद्रा और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।

स्थानीय सर्राफा बाजारों में भी सोना और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कारोबारियों में सतर्कता का माहौल बना रहा।

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की चाल पर निर्भर रहने की संभावना जताई जा रही है।

वाशिंगटन।भारतवंशी वैज्ञानिक राज रेड्डी को AI के अग्रदूतों में माना जा रहा है।

 मुख्य समाचार:

वाशिंगटन।भारतवंशी वैज्ञानिक राज रेड्डी को AI के अग्रदूतों में माना जा रहा है।
वाशिंगटन एजेंसी।नई दिल्ली। विशेष संवाददाता: अमन कुमार मिश्र रिपोर्ट।

दबबाला राजगोपाल राज रेड्डी एक प्रसिद्ध कम्प्यूटर वैज्ञानिक है जिनको कृत्रिम बुद्धिमत्ता ए आई और रोबोटिक क्षेत्र में कम्प्यूटर विज्ञान के सर्वोच्च सम्मान ए एम ट्यूरिंग पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारतवंशी वैज्ञानिक Raj Reddy के योगदान को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 

तकनीकी जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक AI के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 

उन्होंने मशीन लर्निंग, स्पीच रिकग्निशन और बुद्धिमान कंप्यूटर प्रणालियों के क्षेत्र में कई दशकों तक शोध किया।

राज रेड्डी को कंप्यूटर विज्ञान के सर्वोच्च सम्मान माने जाने वाले Turing Award से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

विशेषज्ञों के अनुसार, AI का विकास किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं है, 

बल्कि दुनिया भर के अनेक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के सामूहिक योगदान का नतीजा है।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि “AI का जन्मदाता भारत का एक लड़का है।” 

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दावे को शाब्दिक रूप से सही नहीं माना जा सकता। AI की अवधारणा और विकास में John McCarthy, Alan Turing, Marvin Minsky सहित कई वैज्ञानिकों का योगदान रहा है।

फिर भी, राज रेड्डी को AI के शुरुआती और प्रभावशाली शोधकर्ताओं में गिना जाता है, और भारतीय मूल के वैज्ञानिकों के लिए उनकी उपलब्धियाँ प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।