हैदराबाद:सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स पीच रिपोर्ट।

हैदराबाद: सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स पीच रिपोर्ट।

 स्थान: राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम,हैदराबाद।

सनराइजर्स हैदराबाद और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच बार-बार हाई-स्कोरिंग हो सकता है, खासकर अगर पिच फ्लैट हो और स्लैब छोटा हो।

SRH की बैटिंग लाइन-अप में पावर हिटर्स हैं जो पावरप्ले से ही अटैक शुरू कर देते हैं, जबकि K K R के पास भी मिडल-ऑर्डर में ऐसे खिलाड़ी हैं जो बड़े छक्के आसानी से लगा सकते हैं। अगर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने वाली टीम 180-200+ का स्कोर खड़ा कर दे, तो मैच पूरी तरह “बल्लेबाज़ों का शो” बन सकता है।

लेकिन एक छोटा सा ट्विस्ट भी हो सकता है, अगर पिच में थोड़ी भी स्लो नेस या टर्न हुआ, तो स्पिनर्स (खासकर K K R के) गेम पलट सकते हैं। I P L में कई बार ऐसा हुआ है कि हाई-स्कोर की उम्मीद वाले मैच अचानक लो-स्कोर थ्रिलर बन जाते हैं। बड़े छक्के और रन-फेस्ट की पूरी उम्मीद है लेकिन मौसम, पिच और टॉस तीनों मिलकर ही असली कहानी लिखेंगे।

नई दिल्ली: आम लोगों के घर के सिलेंडर की कीमत नहीं बढ़ी है।

नई दिल्ली: आम लोगों के घर के सिलेंडर की कीमत नहीं बढ़ी है।

गैस सिलेंडर के दामों में 40 से 50 रूपए प्रति सिलेंडर वृद्धि की संभावना व्यक्त की जा रही है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद 40 से 50 रूपए प्रति सिलेंडर कीमत बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई है।

लेकिन होटल/व्यापार में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडर बहुत महंगे हो गए हैं,जिसका असर धीरे-धीरे आम जनता पर भी पड़ेगा।

L P G कीमत =विदेश की कीमत + लाने का खर्च + टैक्स – सब्सिडी + कंपनियों का मार्जिन।

सरकार L P G की कीमत सीधे “मनमाने तरीके” से नहीं तय करती, बल्कि एक सिस्टम के जरिए तय होती है जिसमें अंतरराष्ट्रीय कीमतें, टैक्स और सब्सिडी सब शामिल होते हैं।

🏠 घरेलू कीमत vs कमर्शियल कीमत: घरेलू सिलेंडर सरकार नियंत्रित (स्थिर रखने की कोशिश) कमर्शियल सिलेंडर  ज्यादा “मार्केट-ड्रिवन”, इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है।

🏛️ सरकारी टैक्स और सब्सिडी सरकार दो तरह से असर डालती है,टैक्स (G S T आदि) जोड़कर कीमत बढ़ सकती है
सब्सिडी देकर कीमत कम कर सकती है (खासकर उज्ज्वला योजना वालों के लिए) पहले सबको सब्सिडी मिलती थी, अब ज्यादातर सब्सिडी सीमित हो गई है और सीधे D B T (बैंक में पैसे) के रूप में दी जाती है।

🚢 इम्पोर्ट + ट्रांसपोर्ट लागत:विदेश से भारत लाने का खर्च
बंदरगाह, रिफाइनिंग,और डिलीवरी लागत डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों का खर्च (जैसे इंडेन,भारत गैस)L P G की कीमत कैसे तय होती है?
1) 🌍 अंतरराष्ट्रीय कीमत (सबसे बड़ा फैक्टर): भारत L P G का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए कीमत तय करने में ये देखना होता है। सऊदी अरामको जैसी कंपनियों की L P G कीमत अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल और गैस मार्केट डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट अगर दुनिया में L P G महंगी होती है, तो भारत में भी दबाव बढ़ता है।

14.2 किलो घरेलू L P G सिलेंडर (जो आम घरों में इस्तेमाल होता है) उसकी कीमत नई दिल्ली में ₹913 ही बनी हुई है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।

यानी घर के रसोई गैस सिलेंडर की कीमत नहीं बढ़ी है। लेकिन 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर (होटल/रेस्टोरेंट वाला) उसकी कीमत में हाल में बढ़ोतरी हुई है।

आसान शब्दों में: घर वालों के लिए राहत = कीमत स्थिर
बिज़नेस वालों के लिए = महंगाई बढ़ी। सरकार सीधे रोज़ कीमत नहीं तय करती, बल्कि एक मिश्रित सिस्टम है जिसमें ग्लोबल मार्केट,डॉलर-रुपया,सरकारी नीति और तेल कंपनियों की समीक्षा। सब मिलकर कीमत तय करते हैं।



नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के सामने मतगणना अधिकारी से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका को रद्द कर दिया गया।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के सामने मतगणना अधिकारी से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका को रद्द कर दिया गया।

मतगणना अधिकारी से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस द्वारा दायर याचिका को रद्द कर दिया गया।

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने भारत के चुनाव आयुक्त  के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती से जुड़ा निर्देश था। पार्टी को आशंका थी कि केवल केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा:- कोर्ट ने कहा कि कोई अतिरिक्त आदेश देने की जरूरत नहीं है और चुनाव आयोग अपने नियमों के अनुसार काम कर सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतगणना कर्मियों के चयन का अधिकार चुनाव आयोग के पास है। चुनाव आयोग ने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय और राज्य दोनों प्रकार के कर्मचारियों का मिश्रण रहेगा उसका सर्कुलर पूरी तरह लागू किया जाएगा।

नतीजा: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इससे चुनाव आयोग की व्यवस्था ज्यों की त्यों लागू रहेगी और मतगणना प्रक्रिया उसी के अनुसार होगी।

संक्षेप में: कोर्ट को लगा कि चुनाव आयोग की व्यवस्था पर्याप्त है, इसलिए उसने T M C की मांगों पर कोई अलग आदेश नहीं दिया।


वाशिंगटन एजेंसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बयान: ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।

वाशिंगटन एजेंसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बयान: ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे।

अमेरिका को डर है कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गए, तो ईरान तबाही मचा सकता है।

अमेरिका चाहता है कि ईरान सिर्फ सामान्य (शांतिपूर्ण) कामों के लिए परमाणु तकनीक इस्तेमाल करे, हथियार बनाने के लिए नहीं।

वॉशिंगटन से आई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने इस मुद्दे को वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा बताते हुए कहा कि इस दिशा में सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रम्प पहले भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा हो सकता है।

अमेरिका का मानना है कि अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है, तो इससे मध्य पूर्व में हथियारों की होड़ तेज हो सकती है। इसी कारण अमेरिका इस मुद्दे पर कड़े रुख के साथ कूटनीतिक और आर्थिक दबाव बनाता रहा है।
अमेरिका को डर है कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार आ गए, तो इससे दुनिया, खासकर मध्य पूर्व में खतरा बढ़ सकता है।
इससे दूसरे देश भी ऐसे हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे तनाव और बढ़ेगा।
इसी वजह से अमेरिका ईरान पर दबाव डालता है,जैसे आर्थिक प्रतिबंध लगाना या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध करना।

पंजाब एजेंसी: पंजाब विधानसभा के एक सत्र (मई 2026) में विपक्ष (कांग्रेस, अकाली दल, BJP) ने आरोप लगाया कि भगवंत मान शराब के नशे में थे।

पंजाब विधानसभा के एक सत्र (मई 2026) में विपक्ष (कांग्रेस, अकाली दल, B J P) ने आरोप लगाया कि भगवंत मान शराब के नशे में थे।
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) हो या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम या आम आदमी पार्टी लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के दौरान अपने विरोधियों पर आरोप लगाते हैं। यह सिर्फ एक पार्टी तक सीमित नहीं है।
भगवंत मान को लेकर जो “शराब पीकर भाषण देने” वाली बात फैल रही है, वह अभी तक सिर्फ राजनीतिक आरोप है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर मिथ्या आरोप लगाने से राजनीतिक करने वाले विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। 

विपक्ष ने यहां तक मांग की कि उनका अल्कोहल/डोप टेस्ट कराया जाए। इसी मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा हुआ और कुछ विधायकों ने वॉक आउट भी किया।

दूसरी तरफ क्या कहा गया:-खुद भगवंत मान और उनकी पार्टी (A A P) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और इसे “घटिया राजनीति” बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष बिना सबूत के आरोप लगा रहा है।

अभी तक यह सिर्फ आरोप हैं,कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट या पुष्टि नहीं हुई है कि वे नशे में थे।

विपक्ष ने आरोप लगाया है:-

लेकिन कोई आधिकारिक पुष्टि, मेडिकल रिपोर्ट या जांच का नतीजा सामने नहीं आया है।

इसलिए अभी इसे पक्का तथ्य (fact) मानना सही नहीं होगा।
ऐसे मामलों में बेहतर होता है कि: भरोसेमंद स्रोतों का इंतज़ार किया जाए,और बिना सबूत के वायरल दावों पर तुरंत विश्वास न किया जाए,अगर आगे इस मामले में कोई जांच या ठोस प्रमाण आता है, तब स्थिति साफ मानी जाएगी।


New Delhi & Old Delhi नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली बाजार में खुदरा पैसे की किल्लत।

New Delhi & Old Delhi नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली बाजार में खुदरा पैसे की किल्लत।
बाजार में खुदरा पैसे की किल्लत से आम जनता परेशान।
बाजार में किल्लत का मुख्य कारण एक,दो,पांच,दस के सिक्के बाजार से कहां गायब हो जाता है, पहले कभी ऐसा नहीं होता था। भारत सरकार को इस पर मंथन करना चाहिए इसकी जांच अवश्य सरकार को करनी चाहिए।

नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाज़ारों में खुदरा पैसों (छोटे नोट/सिक्कों) की किल्लत कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन हाल के समय में यह फिर से उभरती दिख रही है। New Delhi और Old Delhi के व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को इससे दिक्कत हो रही है।

समस्या क्यों हो रही है:-छोटे नोटों की कमी: ₹10, ₹20, ₹50 के नोट और सिक्के पर्याप्त मात्रा में सर्कुलेशन में नहीं हैं।

डिजिटल पेमेंट का बढ़ना:- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रोत्साहन से U P I और ऑनलाइन पेमेंट बढ़े हैं, जिससे लोग नकद (खासकर छोटे नोट) कम रखते हैं।

जमा करके रखना:- कुछ दुकानदार और लोग छोटे नोट/सिक्के जमा करके रखते हैं, जिससे बाज़ारों में उनकी उपलब्धता और घट जाती है।

बैंक से सीमित सप्लाई:- बैंकों में भी कभी-कभी छोटे नोटों की उपलब्धता सीमित रहती है।

इसका असर:- दुकानदारों को ग्राहकों को सही छुट्टा देने में दिक्कत कई बार “छुट्टा नहीं है” कहकर टॉफी/चॉकलेट देने की प्रथा। ग्राहकों और दुकानदारों के बीच बहस या असुविधा छोटे लेन-देन में देरी क्या समाधान हो सकते हैं?

डिजिटल पेमेंट अपनाना:- U P I, Q R कोड आदि से छुट्टे की समस्या कम हो सकती है

बैंकों से छोटे नोट लेना:- R B I समय-समय पर छोटे नोट जारी करता है

सिक्कों का सही उपयोग: सिक्के लेने से मना करना गैरकानूनी है

व्यवस्थित वितरण: बाज़ार में छोटे नोटों की बेहतर सप्लाई। इस मुद्दे पर हाल ही में सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया  (R B I) दोनों ने कुछ अहम बातें और कदम सामने रखे हैं, कि “कमी” और “जमीनी हकीकत” में थोड़ा फर्क दिख रहा है। सरकार और R B I का आधिकारिक रुख मार्च 2026 में सरकार ने संसद में साफ कहा कि ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की देश में कोई कमी नहीं है। R B I के अनुसार हर साल बड़ी मात्रा में छोटे नोट छापे और सप्लाई किए जा रहे हैं, और मांग के अनुसार सप्लाई एडजस्ट होती रहती है।

मतलब: कागज़ पर (आफीसियल डाटा में) समाप्त नहीं माना जा रहा। लेकिन ज़मीनी स्तर पर समस्या क्यों दिख रही है?

हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि: कुछ क्षेत्रों में वास्तविक नकदी ( फिजी कली  कैस) की कमी महसूस हो रही है खासकर छोटे नोट/सिक्कों की उपलब्धता uneven (असमान) है,बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक तक ने cash shortage की शिकायत की है,यानी “सप्लाई है”, लेकिन सही जगह और सही समय पर नहीं पहुँच रही।
सरकार और RBI के नए कदम (2026) सबसे अहम हालिया पहल:-छोटे नोट/सिक्कों के लिए विशेष मशीनें SBI और RBI मिलकर cash&coin dispensers (छोटे नोट/सिक्के देने वाली मशीनें) लगाने की योजना बना रहे हैं,ये मशीनें बाज़ारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगेंगी। जून 2026 तक दर्जनों मशीन लगाने की योजना।
इसका मकसद:- छुट्टे पैसे सीधे मशीन से मिल जाएँ, दुकानदार पर निर्भरता कम हो। डिजिटल पेमेंट को और बढ़ावा छोटे लेन-देन में भी U P I और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा जारी सरकार मानती है कि बहुत ज्यादा मांग का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल हो चुका है।
वितरण प्रणाली सुधारने पर फोकस:- R B I और बैंक मुद्रा वितरण (कैश कहाँ कितना पहुँचे) को बेहतर करने पर काम कर रहे हैं, खासकर बहुत ज्यादा मांग क्षेत्रों (जैसे बाजार) में,देश में छोटे नोटों की कमी” आधिकारिक तौर पर नहीं मानी गई “बाज़ार में छुट्टे की समस्या”हकीकत में मौजूद है,असली समस्या:वितरण+जमाखोरी+व्यवहारिक उपयोग।



गुजरात: सुरत नगरपालिका चुनाव में बीजेपी 115 सीटों से आगे।

गुजरात: सुरत नगरपालिका चुनाव में बीजेपी 115 सीटों से आगे।

सुरत नगरपालिका चुनाव में बीजेपी 115,आप पार्टी 04, नेशनल कांग्रेस पार्टी को 01 सीटें मिली।

सुरत नगरपालिका चुनाव   में   बीजेपी का अच्छा प्रदर्शन होता     दिखाई दे रहा   है। 115 सीटों  पर पार्टी ने बढ़त बनाई है, जो  उनकी मजबूत  स्थिति को दर्शाता है। ये चुनाव परिणाम  बीजेपी  के लिए एक बड़ी जीत मानी जा सकती है,खासकर  अगर हम सूरत जैसे व्यापारी और शहरी इलाके की बात करें।

सूरत नगरपालिका चुनाव में बीजेपी की 115 सीटों पर बढ़त को हल्के में नहीं लिया जा सकता ये एक मजबूत शहरी जनाधार का संकेत है। लेकिन इसे सीधे पूरे राज्य की राजनीति का ट्रेंड मान लेना थोड़ा जल्दीबाज़ी होगा।

पहली बात, सूरत जैसे शहर में बीजेपी पहले से ही काफी मजबूत रही है। यहाँ का व्यापारी वर्ग, शहरी मतदाता और संगठनात्मक पकड़ पार्टी के पक्ष में रहती है। इसलिए नगरपालिका स्तर पर अच्छा प्रदर्शन “कंसिस्टेंसी” दिखाता है, जरूरी नहीं कि “नई लहर”।
दूसरी बात, स्थानीय चुनावों और राज्य विधानसभा चुनावों के मुद्दे अलग होते हैं। नगरपालिका चुनावों में पानी, सड़क, सफाई जैसे स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं, जबकि राज्य स्तर पर नेतृत्व, नीतियाँ, बेरोज़गारी, कृषि, और बड़े सामाजिक समीकरण ज्यादा असर डालते हैं। हाँ, ये जरूर कहा जा सकता है, कि बीजेपी का शहरी वोट बेस अभी भी मजबूत है।

संगठनात्मक मशीनरी अच्छी तरह काम कर रही है। विपक्ष (खासकर कांग्रेस या अन्य दल) यहाँ कमजोर नजर आ रहा है, अगर यही ट्रेंड अन्य शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी दिखे, तब इसे राज्य स्तर के लिए बड़ा संकेत माना जा सकता है।

तो संक्षेप में:-

ये परिणाम बीजेपी के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन पूरे गुजरात के भविष्य की तस्वीर तय करने के लिए अभी और व्यापक डेटा देखना जरूरी होगा।

मुंबई/पुने/महाराष्ट्र के I T कंपनी कॉग्निजेंट लगभग 4,000 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है।

मुंबई/पुने/महाराष्ट्र/चेन्नई/कोलकाता,के I T कंपनी कॉग्निजेंट लगभग 4,000 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है।

भारत में ए आई आने से चार हजार कर्मचारी भविष्य अंधकारमय हो गया।

यह एक अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी है जिसका मुख्यालय न्यू जर्सी में है। डिजिटल,क्लाउड, आउटसोर्सिंग सेवा प्रदान करती है। 02/05/2026 तक तीन लाख संतावन हजार 600 कर्मचारी काम करते हैं।

क्या हुआ है:- कंपनी एक प्रोग्राम प्रोजेक्ट लीप चला रही है, इसमें एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ऑटोमेशन पर बड़ा निवेश किया जा रहा है। इसी वजह से कुछ रूल्स कम किए जा रहे हैं,ये करीब कुल कर्मचारियों का 1% है।

अमेजन,मेटा ऑरसेल आदि टेक्निकल कंपनी ने 90,000 हजार से ऊपर कमचारियों को छंटनीग्रसत कर दिया।

क्या सिर्फ यही कंपनी ऐसा कर रही है:- नहीं यह एक बड़ा global trend बन चुका है। 2026 में tech sector में 90,000+ नौकरी जा चुकी हैं बड़ी कंपनी (Amazon, Meta, Oracle आदि) भी staff कम कर रही हैं। वजह:-AI ऑटोमेशन,कॉस्ट कटिंग,पुनर्गठन।

कंपनी छंटनी के साथ-साथ 20,000 नए इंजिनियर भी बहाली करने की योजना बना रही है।

क्या AI ही वजह है:- आंशिक रूप से हाँ, लेकिन पूरी वजह नहीं कंपनी AI में भारी निवेश कर रही है।कुछ दोहराव वाली नौकरी AI से प्रतिस्थापित हो रही हैं,लेकिन साथ ही अति-नियुक्ति सुधार,खर्च कम करना, व्यावसायिक पुनर्गठन बड़ी वजह हैं, AI के कारण कुछ जॉब खत्म हो रही हैं, लेकिन  नई   स्कल वाली जॉब बन भी रही हैं,यानी “जॉब खत्म” नहीं, बल्कि जॉब का स्वभाव बदल रहा है।


न्यूयॉर्क: जोहरान ममदानी स्टेट असेम्बली सदस्य ने कोहिनूर हीरा वापस करने की मांग की।

न्यूयॉर्क: जोहरान ममदानी स्टेट असेम्बली सदस्य ने कोहिनूर हीरा वापस करने की मांग की।

वर्तमान समय में काटकर छोटा किया गया और आज यह ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है।

वह इस समय न्यूयॉर्क के मेयर हैं (2026 से), पहले स्टेट असेंबली सदस्य (2021–2025) रह चुके हैं।

क्या कहा था ममदानी ने:-

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स तृतीय से अलग से बात करने का मौका मिले, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात करेंगे। उनका बयान ब्रिटिश राजा की अमेरिका यात्रा (9/11 स्मरण कार्यक्रम) के दौरान आया।

क्यों है यह मुद्दा बड़ा:- कोहिनूर हीरा 1849 में पंजाब के ब्रिटिश अधिग्रहण के बाद ब्रिटेन के पास गया था। भारत लंबे समय से इसे औपनिवेशिक लूट का प्रतीक मानकर वापस मांगता रहा है।

विवाद और प्रतिक्रिया:- ममदानी के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बहस फिर तेज हो गई। कुछ राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आईं,जैसे U K के एक नेता ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात कही। ममदानी अब “स्टेट असेंबली सदस्य” नहीं बल्कि न्यूयॉर्क सिटी के मेयर हैं, और उन्होंने हाल ही में कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की मांग का समर्थन किया है।

🪨 कोहिनूर हीरा क्या है:- कोहिनूर हीरा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध हीरों में से एक है “कोहिनूर” का मतलब होता है “रोशनी का पर्वत” (फ़ारसी में)। शुरुआत भारत में खोज माना जाता है कि यह हीरा भारत के गोलकुंडा (आज का तेलंगाना) की खदानों से निकला था। शुरुआती समय में यह कई हिंदू राजाओं के पास रहा।

🕌मुग़ल काल:-हीरा मुग़ल सम्राटों के पास पहुँचा, खासकर शाहजहाँ के समय। इसे प्रसिद्ध मयूर सिंहासन में जड़ा गया था।

⚔️ फारस और अफ़ग़ान शासक:- 1739 में नादिर शाह ने भारत पर हमला किया (दिल्ली पर आक्रमण 1739) और कोहिनूर अपने साथ ले गया। यहीं से इसका नाम “कोहिनूर” पड़ा। बाद में यह अफ़ग़ान शासकों के पास चला गया।

👑 सिख साम्राज्य:- हीरा अंततः महाराजा रणजीत सिंह के पास आया, जो पंजाब के शासक थे।

🇬🇧 ब्रिटिश हाथों में कैसे पहुँचा:- 1849 में द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर कब्ज़ा कर लिया। नाबालिग महाराजा दिलीप सिंह से हीरा ले लिया गया और ब्रिटेन भेज दिया गया।

👑 ब्रिटेन में:- हीरा क्वीन विक्टोरिया को सौंपा गया। बाद में इसे काटकर छोटा किया गया और आज यह ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है, जो टॉवर ऑफ लंदन में रखा है।

🇮🇳विवाद क्यों है:-न्यूयॉर्क: जोहरान ममदानी स्टेट असेम्बली सदस्य ने कोहिनूर हीरा की मांग की।

क्या कहा था ममदानी ने:- एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स तृतीय से अलग से बात करने का मौका मिले, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात करेंगे। उनका बयान ब्रिटिश राजा की अमेरिका यात्रा (9/11 स्मरण कार्यक्रम) के दौरान आया। 

क्यों है यह मुद्दा बड़ा:- कोहिनूर हीरा 1849 में पंजाब के ब्रिटिश अधिग्रहण के बाद ब्रिटेन के पास गया था।  भारत लंबे समय से इसे औपनिवेशिक लूट का प्रतीक मानकर वापस मांगता रहा है। 

विवाद और प्रतिक्रिया:- ममदानी के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बहस फिर तेज हो गई। कुछ राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आईं,जैसे U K के एक नेता ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की बात कही। 

🪨 कोहिनूर हीरा क्या है:- कोहिनूर हीरा दुनिया के सबसे प्रसिद्ध हीरों में से एक है। “कोहिनूर” का मतलब होता है “रोशनी का पर्वत” (फ़ारसी में)। शुरुआत: भारत में खोज माना जाता है कि यह हीरा भारत के गोलकुंडा (आज का तेलंगाना) की खदानों से निकला था। शुरुआती समय में यह कई हिंदू राजाओं के पास रहा।

🕌 मुग़ल काल:- हीरा मुग़ल सम्राटों के पास पहुँचा, खासकर शाहजहाँ के समय। इसे प्रसिद्ध मयूर सिंहासन में जड़ा गया था।

⚔️ फारस और अफ़ग़ान शासक:- 1739 में नादिर शाह ने भारत पर हमला किया (दिल्ली पर आक्रमण 1739) और कोहिनूर अपने साथ ले गया। यहीं से इसका नाम “कोहिनूर” पड़ा। बाद में यह अफ़ग़ान शासकों के पास चला गया।

👑 सिख साम्राज्य:- हीरा अंततः महाराजा रणजीत सिंह के पास आया, जो पंजाब के शासक थे।

🇬🇧 ब्रिटिश हाथों में कैसे पहुँचा:- 1849 में द्वितीय आंग्ल-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब पर कब्ज़ा कर लिया। नाबालिग महाराजा दलीप सिंह से हीरा ले लिया गया और ब्रिटेन भेज दिया गया।

👑 ब्रिटेन में हीरा:- क्वीन विक्टोरिया को सौंपा गया। बाद में इसे काटकर छोटा किया गया और आज यह ब्रिटिश क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है, जो टॉवर ऑफ लंदन में रखा है।

🇮🇳 विवाद क्यों है:- भारत (और कभी-कभी पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान भी) कहते हैं यह हीरा जबरन लिया गया था (औपनिवेशिक लूट)। इसलिए इसे वापस किया जाना चाहिए।

ब्रिटेन का तर्क: यह कानूनी संधि (ट्रीटी ऑफ लाहौर) के तहत मिला था।

🧭 आज की स्थिति:- कोहिनूर अभी भी ब्रिटेन में है। समय-समय पर भारत इसकी वापसी की मांग उठाता रहता है, जैसे हाल में जोहरान ममदानी का बयान भी इसी बहस को फिर चर्चा में लाया।

संक्षेप में:-कोहिनूर सिर्फ एक हीरा नहीं है यह इतिहास, सत्ता और औपनिवेशिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। भारत (और कभी-कभी पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान भी) कहते हैं। यह हीरा जबरन लिया गया था (औपनिवेशिक लूट)। इसलिए इसे वापस किया जाना चाहिए।

⚖️ कानूनी स्थिति क्या कहती है:- 1849 की लाहौर की संधि के तहत कोहिनूर ब्रिटिशों को सौंपा गया था। ब्रिटेन कहता है कि यह कानूनी समझौते से मिला, इसलिए वापस करने की बाध्यता नहीं है।

भारत का तर्क: यह संधि जबरदस्ती और औपनिवेशिक दबाव में हुई, इसलिए वैध नहीं मानी जानी चाहिए।समस्या: उस समय के समझौतों को आज के अंतरराष्ट्रीय कानून से चुनौती देना बहुत कठिन होता है।

🌍 अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है:- यूनेस्को के 1970 कन्वेंशन के तहत लूटे गए सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी की बात होती है। लेकिन यह नियम 1970 के बाद के मामलों पर लागू होता है, जबकि कोहिनूर 19 वीं सदी का मामला है। यानी, भारत के पास सीधा कानूनी रास्ता कमजोर है।

क्या राजनीतिक रास्ता है:- यही असली संभावना है,अगर ब्रिटेन स्वेच्छा से लौटाए या “सांस्कृतिक सहयोग” के तहत लोन/शेयरिंग मॉडल बने दुनिया में ऐसे उदाहरण हैं।नाइजीरिया को कुछ “बेनीन ब्रॉन्ज़” वापस किए गए, कई यूरोपीय म्यूज़ियम अब उपनिवेशकालीन वस्तुएँ लौटाने पर विचार कर रहे हैं।

🇬🇧 ब्रिटेन क्यों नहीं लौटाता:- कुछ बड़े कारण यह क्राउन ज्वेल्स का हिस्सा है (राष्ट्रीय प्रतीक) डर है कि अगर कोहिनूर लौटाया, तो दूसरी वस्तुओं की मांग भी बढ़ेगी राजनीतिक रूप से यह मुद्दा संवेदनशील है

🇮🇳 भारत क्या कर सकता है:- लगातार डिप्लो मैटिक दबाव,अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा उठाना,जनमत और वैश्विक समर्थन बनाना।

🧭असली निष्कर्ष कानूनी तौर पर:- भारत के लिए केस मजबूत नहीं है। राजनीतिक तौर पर: अगर माहौल बदला, तो संभव है, यानी, कोहिनूर की वापसी कोर्ट से कम और राजनीतिक इच्छा शक्ति पर ज़्यादा निर्भर है।










न्युयॉर्क: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति पद का दुरूपयोग कर रहे हैं।

न्युयॉर्क: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा डोनाल्ड ट्रम्प राष्ट्रपति पद का दुरूपयोग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट:अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने पद का दुरूपयोग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल दस्तावेज के मुताबिक 11 से पहली किस्त जारी किया जायेगा। अमेरिकी सरकार द्वारा लागू किए गए टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार देने के बाद अब करीब 166 अरब डॉलर की वापसी प्रकिया शुरू हो चुकी है।हाल के फैसलों में कोर्ट ने ट्रम्प की कुछ नीतियों (जैसे टैरिफ) को रोका है।

राष्ट्रपति ने अपनी सीमा पार की है। सुप्रीम कोर्ट नीतियों और कानूनों की वैधता तय करता है।
प्राइवेसी और टेक केस (चल रहा मामला) कोर्ट अभी “जियोफेंस वारंट” (लोकेशन डेटा) पर भी विचार कर रहा है,कि क्या यह नागरिकों की प्राइवेसी का उल्लंघन है। टैरिफ  पर बड़ा फैसला 01/05/2026 सबसे अहम केस था। ,लर्निंग रिसोर्सेज़, इंक. बनाम ट्रंप। फैसले में युनाइटेड स्टेट्स ऑफ सुप्रीम कोर्ट ने कहा राष्ट्रपति (यानी डोनाल्ड ट्रम्प) अपने आप टैरिफ नहीं लगा सकते। 1977 का कानून (I E E P A) उन्हें यह शक्ति नहीं देता है। मतलब कोर्ट ने यह नहीं कहा कि “ट्रम्प ने पद का दुरुपयोग किया” बल्कि यह कहा कि उन्होंने अपने अधिकार से बाहर जाकर काम किया।
चुनावी नक्शा (पुनर्वितरण) केस01-05-2026.
हाल में कोर्ट ने टेक्सास का एक नया चुनावी नक्शा बहाल किया, जो रिपब्लिकन पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।

इसका असर: कांग्रेस की सीटों का संतुलन बदल सकता है चुनावी राजनीति पर बड़ा प्रभाव।

चुनावी नक्शा (पुनर्वितरण)केस 01-05–2026।

हाल में कोर्ट ने टेक्सास का एक नया चुनावी नक्शा बहाल किया, जो रिपब्लिकन पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
इसका असर: कांग्रेस की सीटों का संतुलन बदल सकता है,चुनावी राजनीति पर बड़ा प्रभाव।मतदान के अधिकार / लुइसियाना / केस एक और अहम केस (जैसे लुइसियाना बनाम कैलाइंस न्यायालय)  में कोर्ट ने कहा कि हर राज्य को “अधिक अल्पसंख्यक जिले बनाना ही होगा”ऐसा जरूरी नहीं
इससे वोटिंग राइट्स एक्ट  की व्याख्या सीमित हुई
इसका मतलब कोर्ट ने संविधान की व्याख्या की,
लेकिन सीधे किसी राष्ट्रपति को दोषी नहीं ठहराया। प्राइवेसी और टेक केस (चल रहा मामला) कोर्ट अभी “ जियोफेंस वारंट” (लोकेशन डेटा) पर भी विचार कर रहा है, कि क्या यह नागरिकों की प्राइवेसी का उल्लंघन है।