वाशिंगटन/चेन्नई।अमेरिकी सरकार में एआई नीति सलाहकार बने श्रीराम कृष्णन।

वॉशिंगटन/चेन्नई। भारतीय मूल के प्रख्यात तकनीकी उद्यमी और निवेशक Sriram Krishnan को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन में सीनियर पॉलिसी एडवाइज़र फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति दिसंबर 2024 में घोषित हुई और उन्होंने जनवरी 2025 से व्हाइट हाउस में कार्यभार संभाला।

कौन हैं श्रीराम कृष्णन:

श्रीराम कृष्णन का जन्म भारत के Chennai में हुआ। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अमेरिका जाकर तकनीकी क्षेत्र में तेजी से पहचान बनाई। वे पहले Microsoft, Yahoo!, Meta (फेसबुक), Snap Inc. और X Corp. (Twitter/X) जैसी प्रमुख कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में कार्य कर चुके हैं। बाद में वे वेंचर कैपिटल फर्म Andreessen Horowitz के जनरल पार्टनर भी बने थे 

क्या थी उनकी जिम्मेदारी:

व्हाइट हाउस में श्रीराम कृष्णन की प्रमुख जिम्मेदारी अमेरिका की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीति तैयार करने और उसे लागू करने में सहायता करना थी। उनका कार्य था।

एआई विकास के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाना।

एआई नियमन (Regulation) के लिए नीति ढांचा तैयार करना।

अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना।

चीन समेत अन्य देशों के साथ एआई प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी बढ़त सुनिश्चित करना।

उद्योग, सरकार और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करना।

नियुक्ति के समय क्यों चर्चा में रहे:

उनकी नियुक्ति के बाद अमेरिकी राजनीति में कुछ विवाद भी हुआ। 

कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने उनके पुराने आव्रजन (Immigration) संबंधी विचारों का विरोध किया, जबकि कई प्रमुख तकनीकी नेताओं, जिनमें Elon Musk भी शामिल थे, ने उनका समर्थन किया।

एआई नीति में योगदान:

विशेषज्ञों के अनुसार, श्रीराम कृष्णन ने ट्रंप प्रशासन की एआई रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर एआई नियमन के एकीकृत ढांचे की वकालत की और अमेरिका को एआई क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में काम किया।

2026 में पद छोड़ने की घोषणा:

जून 2026 में श्रीराम कृष्णन ने घोषणा की कि वे महीने के अंत तक व्हाइट हाउस का पद छोड़ देंगे। 

उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा और भविष्य में भी वे अमेरिका के सामने मौजूद एआई संबंधी बड़ी चुनौतियों पर काम करते रहेंगे।

भारतीय मूल के श्रीराम कृष्णन का अमेरिकी सरकार में एआई नीति सलाहकार बनना भारतीय तकनीकी प्रतिभा की वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। 

सिलिकॉन वैली के अनुभव और नीति-निर्माण में उनकी भूमिका ने उन्हें अमेरिका की एआई रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल कर दिया।

ओस्लो (नॉर्वे)। प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे शतरंज में रचा इतिहास, खिताब पर जमाया कब्ज़ा।

🇮🇳ओस्लो (नॉर्वे)। प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे शतरंज में रचा इतिहास, खिताब पर जमाया कब्ज़ा।

विंसेंट कीमर को मायूसी छा गई।

प्रज्ञानानंदा बने Norway Chess जीतने वाले पहले भारतीय,फाइनल में विंसेंट कीमर को हराया,विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को भी हराया,भारत के शतरंज इतिहास में बड़ा मील का पत्थर।

ओस्लो (नॉर्वे), 7 जून 2026:

भारतीय ग्रैंडमास्टर R Praggnanandhaa ने नॉर्वे में आयोजित प्रतिष्ठित Norway Chess 2026 टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब जीत लिया है।

यह उपलब्धि इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि वे इस प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।

फाइनल राउंड में उन्होंने जर्मनी के मजबूत खिलाड़ी विंसेंट कीमर को हराकर खिताब अपने नाम किया। 

पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन बेहद आक्रामक और स्थिर रहा, और अंतिम चरण में लगातार जीतों ने उन्हें चैंपियन बना दिया।

इस जीत के दौरान प्रज्ञानानंदा ने विश्व नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को भी हराकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा।

जीत के बाद देशभर से बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया है और इसे भारतीय शतरंज के लिए एक “ऐतिहासिक क्षण” बताया जा रहा है।

नई दिल्ली।वाशिंगटन।रविवार का बाजार अपडेट: यूरो, सोना और चांदी में गिरावट; डॉलर मजबूत।

नई दिल्ली।वाशिंगटन।रविवार का बाजार अपडेट: यूरो, सोना और चांदी में गिरावट; डॉलर मजबूत।

नई दिल्ली।वाशिंगटन।आर्थिक डेस्क।रविवार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में रविवार को यूरो में कमजोरी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी डॉलर में मजबूती देखी गई। डॉलर के मजबूत होने का सीधा असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर पड़ा, जिससे सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट आई।

नरेन्द्र मोदी की सलाह कामयाब नहीं हो रहा है।

https://amangitanjaliexpress1984.blogspot.com/2026/06/blog-post_340.htmlबाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके चलते मुद्रा और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।

स्थानीय सर्राफा बाजारों में भी सोना और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कारोबारियों में सतर्कता का माहौल बना रहा।

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की चाल पर निर्भर रहने की संभावना जताई जा रही है।

वाशिंगटन।भारतवंशी वैज्ञानिक राज रेड्डी को AI के अग्रदूतों में माना जा रहा है।

 मुख्य समाचार:

वाशिंगटन।भारतवंशी वैज्ञानिक राज रेड्डी को AI के अग्रदूतों में माना जा रहा है।
वाशिंगटन एजेंसी।नई दिल्ली। विशेष संवाददाता: अमन कुमार मिश्र रिपोर्ट।

दबबाला राजगोपाल राज रेड्डी एक प्रसिद्ध कम्प्यूटर वैज्ञानिक है जिनको कृत्रिम बुद्धिमत्ता ए आई और रोबोटिक क्षेत्र में कम्प्यूटर विज्ञान के सर्वोच्च सम्मान ए एम ट्यूरिंग पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारतवंशी वैज्ञानिक Raj Reddy के योगदान को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। 

तकनीकी जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक AI के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 

उन्होंने मशीन लर्निंग, स्पीच रिकग्निशन और बुद्धिमान कंप्यूटर प्रणालियों के क्षेत्र में कई दशकों तक शोध किया।

राज रेड्डी को कंप्यूटर विज्ञान के सर्वोच्च सम्मान माने जाने वाले Turing Award से भी सम्मानित किया जा चुका है। 

विशेषज्ञों के अनुसार, AI का विकास किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं है, 

बल्कि दुनिया भर के अनेक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के सामूहिक योगदान का नतीजा है।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि “AI का जन्मदाता भारत का एक लड़का है।” 

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दावे को शाब्दिक रूप से सही नहीं माना जा सकता। AI की अवधारणा और विकास में John McCarthy, Alan Turing, Marvin Minsky सहित कई वैज्ञानिकों का योगदान रहा है।

फिर भी, राज रेड्डी को AI के शुरुआती और प्रभावशाली शोधकर्ताओं में गिना जाता है, और भारतीय मूल के वैज्ञानिकों के लिए उनकी उपलब्धियाँ प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

दमन दीव में सौर ऊर्जा की बड़ी उपलब्धि, प्रधानमंत्री ने बताया देश के लिए प्रेरणादायक मॉडल।

दमन दीव में सौर ऊर्जा की बड़ी उपलब्धि, प्रधानमंत्री ने बताया देश के लिए प्रेरणादायक मॉडल।

प्रधानमंत्री कार्यक्रम में दमन दीव में भव्य स्वागत।

दमन दीव, 7 जून।

जनता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि दीव में बिजली आपूर्ति का सबसे बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से प्राप्त हो रहा है। 

उन्होंने इसे स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दीव ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और आज यह देश के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है। 

सौर ऊर्जा के व्यापक उपयोग से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है, बल्कि बिजली उत्पादन की लागत में भी कमी आई है।

दमन दीव ने हाल के वर्षों में सौर ऊर्जा क्षमता का तेजी से विस्तार किया है। 

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, दीव देश का पहला जिला बन गया है जो अपनी पूरी बिजली आवश्यकता सौर ऊर्जा से पूरी करने की क्षमता हासिल कर चुका है। 


प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में ऐसे प्रयास भारत को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी मदद करेंगे। 

उन्होंने नागरिकों से सौर ऊर्जा अपनाने और ऊर्जा संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि दीव का मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जहां स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है।

वाशिंगटन। 7 जून।ट्रम्प की टिप्पणी पर विवाद: भारतीय पत्रकार से बातचीत का वीडियो वायरल।

वाशिंगटन। 7 जून। ट्रम्प की टिप्पणी पर विवाद: भारतीय पत्रकार से बातचीत का वीडियो वायरल।

वॉशिंगटन, 7 जून: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की एक टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। 

वॉशिंगटन, व्हाइट हाउस में एक प्रेस बातचीत के दौरान ट्रम्प ने एक भारतीय पत्रकार से मज़ाकिया अंदाज़ में बात की, जिसके बाद उनका वीडियो तेजी से वायरल हो गया।

घटना के दौरान पत्रकार द्वारा सवाल पूछे जाने से पहले ट्रम्प ने उसकी राष्ट्रीयता को लेकर टिप्पणी की। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह मज़ाक कर रहे थे। 

बातचीत के कुछ हिस्सों को लेकर कई लोगों ने इसे भारतीय पत्रकार का मज़ाक उड़ाने वाला व्यवहार बताया, जबकि ट्रम्प समर्थकों का कहना है कि यह केवल हल्का-फुल्का हास्य था।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। आलोचकों ने इसे असंवेदनशील और अनुचित बताया, 

जबकि समर्थकों ने कहा कि ट्रम्प अक्सर पत्रकारों और राजनीतिक विरोधियों के साथ इसी प्रकार का व्यंग्यात्मक लहजा अपनाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं की टिप्पणियाँ अक्सर व्यापक चर्चा का विषय बन जाती हैं, खासकर तब जब वे किसी व्यक्ति की पहचान, राष्ट्रीयता या पृष्ठभूमि से जुड़ी हों।

फिलहाल इस मामले पर व्हाइट हाउस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। हालांकि वायरल वीडियो को लेकर चर्चा जारी है और यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियाँ बटोर रहा है।

नई दिल्ली। चुनावी खर्च का बोझ आखिर जनता पर ही क्यों?

नई दिल्ली।चुनावी खर्च का बोझ आखिर जनता पर ही क्यों?

सभी बीजेपी नेताओं की एक जैसी भाषाएं निकलती है।

विशेष संवाददाता: अमन कुमार मिश्र रिपोर्ट।

भारतीय रेलवे कुली समाचार पत्र देश विदेश समाचार 

देश में हर चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार, रैलियां, सभाएं और जनसंपर्क अभियान चलाए जाते हैं। 

चुनावी गतिविधियों पर होने वाले भारी खर्च को लेकर आम जनता के बीच लगातार सवाल उठते रहे हैं। 


बाजार में बढ़ती महंगाई, विभिन्न करों और शुल्कों में वृद्धि तथा आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच नागरिकों का मानना है कि सरकारी और राजनीतिक खर्चों का अंतिम प्रभाव जनता की जेब पर पड़ता है। 

कई लोगों का कहना है कि चुनावी मौसम में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद आम आदमी की समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं।

नागरिकों का यह भी आरोप है कि सत्ता में पहुंचने के बाद जनप्रतिनिधि सुविधाओं और विशेषाधिकारों का लाभ उठाते हैं, 

जबकि आम जनता रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई जैसी चुनौतियों से जूझती रहती है। 

यही कारण है कि चुनावी खर्च और उसकी पारदर्शिता का मुद्दा समय-समय पर चर्चा का विषय बनता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में चुनाव आवश्यक हैं।

लेकिन चुनावी खर्च के स्रोत, उपयोग और जवाबदेही को लेकर अधिक पारदर्शिता होना भी उतना ही जरूरी है। 

उनका कहना है कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए चुनावी वित्त व्यवस्था में सुधार और खर्च की प्रभावी निगरानी आवश्यक है।

आम नागरिकों की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया को अधिक किफायती, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए।

ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और जनता को यह महसूस हो कि उसके करों और संसाधनों का उपयोग जनहित में किया जा रहा है।


महंगाई, टैक्स, विभिन्न शुल्कों और रोजमर्रा की बढ़ती लागत से पहले ही परेशान आम नागरिकों का मानना है कि चुनावी गतिविधियों पर खर्च होने वाली विशाल धनराशि का असर अंततः जनता की जेब पर पड़ता है। 

लोग सवाल उठाते हैं कि चुनावों में करोड़ों-अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि आम आदमी बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता रहता है।

जनता के बीच यह भावना भी देखने को मिलती है कि चुनाव जीतने के बाद नेता और जनप्रतिनिधि सुविधाजनक कार्यालयों तथा वातानुकूलित कमरों में बैठकर सत्ता का आनंद लेते हैं।

जबकि आम नागरिक महंगाई और आर्थिक दबाव का सामना करता रहता है। इसी कारण चुनावी खर्च और उसके प्रभाव को लेकर समय-समय पर बहस छिड़ती रहती है।
हालांकि राजनीतिक दलों का कहना है कि चुनाव लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इन पर होने वाला खर्च लोकतांत्रिक प्रक्रिया को चलाने के लिए आवश्यक है। 

फिर भी पारदर्शिता, जवाबदेही और चुनावी खर्च पर नियंत्रण की मांग लगातार उठती रही है, ताकि जनता का विश्वास मजबूत बना रहे।

चुनावी वित्तपोषण में अधिक पारदर्शिता लाई जाए और सार्वजनिक धन के उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाए, तो लोकतंत्र और जनता दोनों के हित बेहतर ढंग से सुरक्षित किए जा सकते हैं।

वॉशिंगटन/यरुशलम, ट्रम्प-नेतन्याहू रिश्तों में दरार? ईरान, गाज़ा और युद्धविराम पर बढ़े मतभेद।

वॉशिंगटन/यरुशलम, ट्रम्प-नेतन्याहू रिश्तों में दरार? ईरान, गाज़ा और युद्धविराम पर बढ़े मतभेद।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू।
वॉशिंगटन/यरुशलम, विशेष संवाददाता

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच हाल के दिनों में कई रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। 

हालांकि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से मजबूत राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग रहा है, 

लेकिन ईरान, गाज़ा युद्ध और क्षेत्रीय सैन्य अभियानों को लेकर दृष्टिकोण में अंतर दिखाई दे रहा है।

सूत्रों के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ईरान के साथ चल रही वार्ताओं को आगे बढ़ाने का इच्छुक है, 

जबकि नेतन्याहू सरकार ईरान और उसके सहयोगी समूहों के खिलाफ कड़ा सैन्य रुख बनाए रखना चाहती है। 

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने निजी बातचीत में इज़राइली कार्रवाइयों को शांति प्रयासों के लिए बाधक बताया।

गाज़ा में जारी संघर्ष भी दोनों नेताओं के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। 

अमेरिका युद्धविराम और बंधकों की रिहाई को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि इज़राइल का कहना है कि सुरक्षा लक्ष्यों की प्राप्ति तक सैन्य अभियान जारी रह सकता है। 

युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में हिंसा की घटनाएँ जारी हैं, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को चुनौती मिल रही है।

लेबनान और हिज़्बुल्लाह से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद की खबरें सामने आई हैं। 

अमेरिकी पक्ष क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर दे रहा है, जबकि इज़राइल सुरक्षा खतरों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मतभेद गठबंधन के टूटने का संकेत नहीं हैं,

 बल्कि मध्य पूर्व की बदलती परिस्थितियों में रणनीति को लेकर असहमति को दर्शाते हैं। 

दोनों देशों के बीच सुरक्षा और सामरिक सहयोग अब भी मजबूत माना जाता है, 

लेकिन आने वाले महीनों में ईरान और गाज़ा को लेकर उठाए जाने वाले कदम इस रिश्ते की दिशा तय कर सकते हैं।



पटना।बिहार की नई मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय ने ली शपथ।

पटना। बिहार की नई मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय ने ली शपथ।
पटना, 6 जून। बिहार की नई मुख्य न्यायाधीश श्रीमति शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में न्यायपालिका, प्रशासन एवं विभिन्न क्षेत्रों की कई गणमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं। 

मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने के बाद श्रीमती राय ने संविधान के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए न्यायिक दायित्वों का निष्पक्ष एवं ईमानदारी पूर्वक निर्वहन करने का संकल्प लिया।


उनकी नियुक्ति को बिहार की न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

लंदन। लंदन में CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में हंगामा, ‘असहमति’ पर सवाल को लेकर विवाद।

लंदन। लंदन में CJI सूर्यकांत के कार्यक्रम में हंगामा, ‘असहमति’ पर सवाल को लेकर विवाद।

यह कार्यक्रम Birkbeck, University of London में आयोजित किया गया था, जहां CJI सूर्यकांत ने “Artificial Intelligence and International Law” विषय पर व्याख्यान दिया। रिपोर्टों के अनुसार, सवाल पूछने वाले व्यक्ति ने भारत में असहमति के प्रति कथित बढ़ती असहिष्णुता का मुद्दा उठाया, लेकिन मॉडरेटर ने इसे कार्यक्रम के विषय से असंबंधित बताते हुए रोक दिया। तनावपुर्ण माहौल बन गया।

घटना का वीडियो तनावपूर्ण माहौल बन गया।मीडिया पर वायरल होने के बाद High Commission of India in London ने बयान जारी कर इसे “अशोभनीय दर्शक व्यवहार” बताया। उच्चायोग ने कहा कि एक व्यक्ति ने कार्यक्रम को बाधित करने का प्रयास किया और इस तरह का आचरण स्वीकार्य नहीं है।

वहीं, आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर पूछे जा रहे सवाल को पूरा सुने बिना रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवाद की भावना के विपरीत है। दूसरी ओर, आयोजकों और भारतीय पक्ष का तर्क है कि प्रश्न कार्यक्रम के निर्धारित विषय से बाहर था और इससे चर्चा का उद्देश्य प्रभावित हो रहा था।


फिलहाल यह विवाद इस सवाल पर केंद्रित है कि क्या प्रश्नको अनुचित रूप से रोका गया या फिर कार्यक्रम को विषय से भटकाने की कोशिश की जा रही थी। घटना ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

विशेष संवाददाता:अमन कुमार मिश्र।