वाशिंगटन/तेहरान/29/मई/2026/अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले,मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव।

अमेरिका ने हवाई हमले से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर असर।
वाशिंगटन/तेहरान/29/मई/2026/अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले,मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर हवाई हमले करवाया जिससे ईरान को बहुत क्षति हुई

वॉशिंगटन/तेहरान, 29 मई 2026।

अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए हैं, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के अनुसार हमले ईरान के ड्रोन कंट्रोल स्टेशन और मिसाइल लॉन्च साइटों को निशाना बनाकर किए गए।

रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और अमेरिकी युद्धपोतों पर संभावित खतरे के जवाब में की गई। 

अमेरिका ने इन हमलों को “रक्षात्मक कार्रवाई” बताया है, जबकि ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया।

ईरानी सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो उसका जवाब “कड़ा और निर्णायक” होगा। 


इस तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया। 



हमले मुख्यतः दक्षिणी ईरान और Strait of Hormuz के आसपास हुए बताए गए हैं।

Bandar Abbas-ड्रोन कंट्रोल और सैन्य ठिकाने निशाने पर रहे।

Qeshm Island-स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के पास स्थित द्वीप, जहाँ सैन्य और तटीय इलाकों में विस्फोट की खबरें आईं।

Kharg Island-ईरान के तेल निर्यात का बड़ा केंद्र; पहले अमेरिकी हमलों में इसका भी जिक्र आया।

Tehran-कुछ रिपोर्टों में राजधानी के पश्चिमी हिस्से में विस्फोट बताए गए। 

यह पूरा इलाका इसलिए संवेदनशील है क्योंकि यहीं से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल समुद्री रास्ते से गुजरता है।

नई दिल्ली/फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग तेज, कर्मचारियों की सैलरी में हो सकता है बड़ा इजाफा।

8वें वेतन आयोग पर बड़ी खबर:

नई दिल्ली/फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग तेज, कर्मचारियों की सैलरी में हो सकता है बड़ा इजाफा।

8वें वेतन आयोग पर बड़ी खबर:

आयोग देशभर में कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें कर सुझाव जुटा रहा है। 


केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। 

कर्मचारी संगठनों ने सरकार से फिटमेंट फैक्टर 3.83 तक बढ़ाने की मांग की है। 

अगर यह मांग मान ली जाती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर करीब ₹69,000 तक पहुंच सकती है।

बताया जा रहा है कि आयोग देशभर में कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें कर सुझाव जुटा रहा है। 

दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और देहरादून के बाद अब भुवनेश्वर में भी बैठक प्रस्तावित है। 


कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाए और न्यूनतम वेतन बढ़ाया जाए। 


पेंशन व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार कर्मचारियों को OPS, NPS और UPS जैसे विकल्प चुनने की सुविधा दे सकती है। 


हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार सभी मांगों को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर सकती। 


सरकार की ओर से अभी तक नई सैलरी संरचना को लेकर अंतिम घोषणा नहीं की गई है।

लेकिन कर्मचारियों में 8वें वेतन आयोग को लेकर उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है।





यूनियनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को देखते हुए कर्मचारियों को बड़ी राहत दी जानी चाहिए। 

फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है, जिससे कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा संभव माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक आयोग कर्मचारियों, पेंशनर्स और विभिन्न विभागों से सुझाव लेने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। 


हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी अंतिम फैसले की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है।


बिहार/बेगुसराय/बरौनी/Flip/kart/ऑनलाइन खरीदारी में घटिया सामान मिलने से उपभोक्ता परेशान।

बिहार/ बेगुसराय/ बरौनी/ Flip/kart/ऑनलाइन खरीदारी में घटिया सामान मिलने से उपभोक्ता परेशान।

ऑनलाइन खरीदारी में घटिया सामान मिलने से उपभोक्ता परेशान।

Flipkart समेत कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को घटिया गुणवत्ता वाले सामान मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन दिखाए गए उत्पाद और डिलीवर किए गए सामान की गुणवत्ता में बड़ा अंतर होता है।

कई ग्राहकों ने आरोप लगाया कि मोबाइल एक्सेसरी, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक आइटम और घरेलू उत्पाद अपेक्षित गुणवत्ता के नहीं होते। कुछ मामलों में नकली या खराब स्थिति वाले उत्पाद मिलने की भी शिकायत दर्ज की गई है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि रिटर्न और रिफंड प्रक्रिया कई बार लंबी और जटिल हो जाती है, जिससे ग्राहकों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन खरीदारी करते समय ग्राहकों को विक्रेता की रेटिंग, ग्राहक समीक्षा और रिटर्न पॉलिसी की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए।

कंपनी की ओर से समय-समय पर यह कहा जाता रहा है कि ग्राहकों की शिकायतों के समाधान और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। 

वहीं उपभोक्ता संगठनों ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर निगरानी और सख्त गुणवत्ता मानकों की मांग की है।

शिकायत के बावजूद समाधान नहीं, ग्राहक परेशान।

Flipkart से खरीदारी करने वाले कुछ ग्राहकों ने आरोप लगाया है कि खराब सामान मिलने के बाद भी उन्हें उचित सहायता नहीं मिल रही। उपभोक्ताओं का कहना है। 

कि कंपनी के हेल्पलाइन नंबर और सपोर्ट सिस्टम पर शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होती।

ग्राहकों का आरोप है कि कस्टमर केयर पर बार-बार कॉल करने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता और कई शिकायतें लंबित रह जाती हैं। 

कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी कहा कि रिफंड और रिप्लेसमेंट प्रक्रिया जरूरत से ज्यादा लंबी हो जाती है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी करते समय सभी बिल, स्क्रीनशॉट और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए, ताकि शिकायत की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध हो सके।

वहीं उपभोक्ता संगठनों ने ई-कॉमर्स कंपनियों से बेहतर ग्राहक सेवा और तेज शिकायत निवारण व्यवस्था लागू करने की मांग की है।


नई दिल्ली:NEET पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फिर भी नहीं हुई दोबारा परीक्षा 2024।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा दुबारा R-Examलेने की जरूरत नहीं है।
नई दिल्ली:NEET पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, फिर भी नहीं हुई दोबारा परीक्षा 2024।

अदालत बोली परीक्षा संचालन में “गंभीर चिंताएं”, लेकिन देशव्यापी री-एग्जाम जरूरी नहीं।

अदालत बोली परीक्षा संचालन में “गंभीर चिंताएं”, लेकिन देशव्यापी री-एग्जाम जरूरी नहीं।

नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2024 को लेकर देशभर में उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने माना कि परीक्षा संचालन में कई गंभीर खामियां सामने आईं। अदालत ने कहा कि National Testing Agency (NTA) द्वारा परीक्षा आयोजित करने का तरीका “गंभीर चिंताओं” को जन्म देता है।

हालांकि, कोर्ट ने पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह साबित नहीं होता कि पूरे देश में परीक्षा की पवित्रता पूरी तरह खत्म हो गई थी या कोई “सिस्टमेटिक लीक” हुआ था।

मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि बिहार के पटना और झारखंड के हज़ारीबाग जैसे कुछ केंद्रों पर पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन इसका असर पूरे देश के 23 लाख से अधिक छात्रों पर पड़ा हो, ऐसा पर्याप्त सबूत नहीं मिला।

अदालत ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों और डेटा विश्लेषण के जरिए गलत तरीके से फायदा उठाने वाले छात्रों की पहचान की जा सकती है। इसलिए ईमानदार छात्रों को फिर से परीक्षा देने के लिए मजबूर करना उचित नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि देशव्यापी री-NEET कराने से मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया, शैक्षणिक सत्र और भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ सकता था।

इस बीच, हाल के वर्षों में NEET को लेकर लगातार विवाद बढ़ते जा रहे हैं। 2026 में भी पेपर लीक के आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी “अब तक सबक नहीं सीख पाई है।”

नई दिल्ली:New Delhi/NEET मेडिकल परीक्षा पर भरोसा टूटा, फिर भी NTA क्यों? सेना को जिम्मेदारी देने की मांग तेज।

नई दिल्ली:New Delhi/NEET मेडिकल परीक्षा पर भरोसा टूटा, फिर भी NTA क्यों? सेना को जिम्मेदारी देने की मांग तेज।

परीक्षार्थी ने कहा परीक्षा परिणाम घोषित तक सेना को जिम्मेदारी सौंपी जाए। NTA की पुर्ण जिम्मेदारी देना पुनरावृत्ति करने के बराबर होगा।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर लगातार विवाद सामने आने के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा National Testing Agency (NTA) पर कमजोर पड़ता जा रहा है। 


2024 से शुरू हुआ पेपर लीक, रिजल्ट गड़बड़ी और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल अब 2026 तक जारी हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की है।


मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NTA “अपनी गलतियों से सबक नहीं सीख रहा।” कोर्ट ने NEET पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार और NTA को नोटिस जारी किया।




सोशल मीडिया और छात्र समुदायों में लगातार यह मांग उठ रही है कि परीक्षा व्यवस्था को किसी अधिक अनुशासित और पारदर्शी संस्था के हवाले किया जाए। 

कई छात्रों ने कहा कि अब उन्हें NTA की निष्पक्षता पर भरोसा नहीं रहा।


सख्तअनुशासन,सुरक्षित,लॉजिस्टिक्स,गोपनीयता बनाए रखने की क्षमता,बड़े स्तर पर संचालन का अनुभव।

मौजूद है। इसलिए मेडिकल और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं का संचालन सेना या सेना की निगरानी वाली स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग बढ़ रही है।

हालांकि विशेषज्ञों का एक वर्ग यह भी मानता है कि सेना का मुख्य कार्य राष्ट्रीय सुरक्षा है, इसलिए परीक्षा संचालन के लिए अलग स्वायत्त और जवाबदेह परीक्षा प्राधिकरण बनाना अधिक व्यावहारिक समाधान हो सकता है।

सरकार सुधार की तैयारी में:

केंद्र सरकार अब NTA में बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार NEET और JEE जैसी परीक्षाओं के लिए नई व्यवस्था और संयुक्त परीक्षा मॉडल पर चर्चा चल रही है।




नई दिल्ली/सेना और NEET परीक्षा: देशभर में छिड़ी बहस।

नई दिल्ली/सेना और NEET परीक्षा: देशभर में छिड़ी बहस।
2024 में झारखंड राज्य में नीट पेपर लिक मामले को सुप्रीम कोर्ट अपने स्तर दुबारा R-Exam लेने की अनुमति नहीं दी।
प्रश्न यहां यह उठता है कि भारत में ही परीक्षा का पेपर लीक क्यों होता है। दुसरे देशों में क्यों नहीं क्योंकि भारत में उपर से नीचे तक करप्ट चपरासी से लेकर अधिकारी एवं मंत्री तक है। सुरक्षा व्यवस्था प्रणाली दुरूस्त नहीं है।

भारत देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी चर्चा का बिषय है कि मेडिकल परीक्षा अब भारतीय सेना के हवाले से लिया जाएगा।

नई दिल्ली, 29 मई देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया और आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि “भारतीय सेना का काम सीमा की रक्षा करना है, फिर परीक्षा व्यवस्था में उनकी भूमिका क्यों दिखाई देती है?”

विशेषज्ञों के अनुसार, National Testing Agency (NTA) ही NEET परीक्षा आयोजित करती है। भारतीय सेना सीधे परीक्षा नहीं करवाती, लेकिन सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए कई बार प्रशासन सेना या सुरक्षा बलों की सहायता ले सकता है।

शिक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक और नकल के मामलों के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर दिया गया है। इसी कारण प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई, संवेदनशील केंद्रों की निगरानी और आपातकालीन सहायता जैसे कार्यों में सुरक्षा एजेंसियों का सहयोग लिया जाता है।

इस मुद्दे पर जनता की राय बंटी हुई है। कुछ लोग इसे देशहित में जरूरी कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि सेना को केवल राष्ट्रीय सुरक्षा तक सीमित रखना चाहिए।

सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक नया बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा लगातार जारी है।

NEET मेडिकल परीक्षा पर सेना की एंट्री? देश ही नहीं विदेशों में भी चर्चा तेज।

नई दिल्ली, 29 मई-भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर एक नई बहस ने देश भर में हलचल मचा दी है। अब यह चर्चा केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विदेशों में भी इस विषय पर बातें होने लगी हैं कि क्या मेडिकल परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था भारतीय सेना और वायुसेना के हवाले की जाएगी।

हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार NEET प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई के लिए Indian Air Force की मदद लेने पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि पेपर लीक और परीक्षा विवादों के बाद सरकार “फुलप्रूफ सुरक्षा व्यवस्था” बनाने की तैयारी में है।

मेडिकल परीक्षा आयोजित करने वाली National Testing Agency (NTA) पहले ही NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर चुकी है। एजेंसी ने कहा कि कई राज्यों से मिली शिकायतों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने बड़ा रूप ले लिया है। कई लोग इसे शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि सेना का मुख्य काम देश की सीमाओं की रक्षा करना है, न कि परीक्षाओं की निगरानी। Reddit और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा मॉडल पर चर्चा तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सेना या वायुसेना की मदद ली जाती है, तो उनकी भूमिका केवल प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और संवेदनशील केंद्रों की सुरक्षा तक सीमित रहेगी। परीक्षा संचालन और परिणाम जारी करने का काम अब भी NTA के पास ही रहेगा।

बरौनी जंक्शन/बेगुसराय जंक्शन/रेलवे स्टेशनों पर कुलियों की कठिन जिंदगी: तपती धूप में भी जारी है मेहनत।

बरौनी/बेगुसराय जंक्शन/रेलवे स्टेशनों पर कुलियों की कठिन जिंदगी: तपती धूप में भी जारी है मेहनत।

चिलचिलाती गर्मी में स्टेशनों पर से बाहर निकल कर जाना, कठिनाईयों का सामना करना में मंत्री के वश की बात नहीं है।

भारत के मंत्री को एसी गाड़ी,एसी बांग्ला,पेंशन, खाने-पीने की व्यवस्था जरूरत की सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है 

लेकिन रेलवे कुलियों के लिए कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

रेलवे में समायोजित करने के लिए सरकार से 2008 से गुहार लगाई जा रही है लेकिन बहरी सरकार कोई ध्यान नहीं दे रहा है 

चिलचिलाती गर्मी और तपती धूप के बीच रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले कुलियों की जिंदगी आज भी बेहद कठिन बनी हुई है। 

प्लेटफॉर्म पर भारी सामान उठाकर यात्रियों को सेवा देने वाले ये मजदूर दिनभर लगातार मेहनत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई बार उन्हें पर्याप्त आय और आराम नहीं मिल पाता।

स्टेशनों पर सुबह से लेकर देर रात तक कुलियों को यात्रियों के सूटकेस, बैग और अन्य सामान ढोते देखा जा सकता है। 

तेज धूप, भीड़ और लंबे समय तक खड़े रहने की मजबूरी के बीच उनकी यह मेहनत रेलवे व्यवस्था का अहम हिस्सा है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियाँ अक्सर अनदेखी रह जाती है।

स्थानीय कुलियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में काम और भी कठिन हो जाता है। 

कई बार पानी और छाया की कमी के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण बन जाती है। 

वहीं यात्रियों की बढ़ती भीड़ और डिजिटल बुकिंग सिस्टम के कारण काम का स्वरूप भी बदल रहा है, जिससे उनकी कमाई पर असर पड़ता है।

हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से समय-समय पर सुविधाएँ और पहचान पत्र जैसी व्यवस्थाएँ की गई हैं, 

लेकिन जमीनी स्तर पर कई कुलियों का कहना है कि उन्हें अभी भी बेहतर कार्य स्थितियों और नियमित सहायता की जरूरत है।

यह मुद्दा सिर्फ एक वर्ग की परेशानी नहीं, बल्कि शहरी परिवहन व्यवस्था में मेहनतकश श्रमिकों की भूमिका और उनके अधिकारों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन मजदूरों के लिए गर्मी से राहत, स्वास्थ्य सुविधाएँ और आय सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी जिंदगी भी सम्मानजनक और सुरक्षित बन सके।

नई दिल्ली/गुरुवार भीषण गर्मी पर मोदी सख्त,कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को दी खास सलाह।

नई दिल्ली/गुरुवार भीषण गर्मी पर मोदी सख्त,कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को दी खास सलाह।
नई दिल्ली, गुरुवार।
एसी में बैठ कर लोगों की समीक्षा करने से बेहतर होगा कि रेलवे स्टेशन पर जाकर देखें कि रेलवे कुली कैसे अपने घर परिवार के लिए जीवन यापन कर रहे हैं।

पहले सामने जो नजारा देखने को मिल रहा है उस पर ध्यान देना चाहिए। पत्र मिलने के बाबजूद कुलियों की समस्या का निदान नहीं हो सका है। 

रेलवे अधिकारी भी एसी में बैठे बैठे समीक्षा कर रहे हैं मंत्री गण भी इसलिए भारत विकसित नहीं हो सका सिर्फ विकासशील देशों में गिने जाते हैं।

देशभर में  बढ़ती   गर्मी और   हीटवेव के   बीच  प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कैबिनेट बैठक में अपने मंत्रियों को सतर्क रहने और आम जनता की  समस्याओं पर ध्यान देने की सलाह दी। बैठक में प्रधानमंत्री  ने  ईंधन  बचत, सादगी और जनता से जुड़ाव पर विशेष जोर दिया।

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे कार पूलिंग अपनाएं और सरकारी काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम रखें। उन्होंने अनावश्यक ईंधन खर्च से बचने की अपील करते हुए कहा कि देश इस समय भीषण गर्मी और ऊर्जा दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है।

देश में बढ़ती गर्मी और भीषण हीटवेव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को सतर्क रहने और जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के सभी विभागों को अधिक सक्रिय और संवेदनशील भूमिका निभानी होगी। उन्होंने विशेष रूप से ईंधन बचत, सरकारी कार्यों में सादगी और जनता से सीधा जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दिया।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से यह भी कहा कि हीटवेव के दौरान आम लोगों की परेशानियों जैसे पानी की कमी, बिजली की मांग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

सरकार का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों में समन्वय और त्वरित निर्णय बेहद जरूरी हैं, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।

बैठक के अंत में सभी मंत्रियों को अपने-अपने विभागों में तैयारियों की समीक्षा करने और जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों जाकर आम नागरिक की समस्या का तुरन्त निदान करें।

बेंगलुरु एजेंसी/कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दिया इस्तीफा।

 आज की बड़ी खबर:

कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दिया इस्तीफा।
बेंगलुरु:कर्नाटक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस आलाकमान के कहने पर इस्तीफा दे दिया।

बेंगलुरु, 28 मई 2026:

कर्नाटक की राजनीति में आज बड़ा उलटफेर देखने को मिला। मुख्यमंत्री Siddaramaiah ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बेंगलुरु स्थित लोक भवन में राज्यपाल कार्यालय को अपना इस्तीफा सौंपा। कांग्रेस हाईकमान के निर्देश के बाद यह फैसला लिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व के निर्देश के बाद यह फैसला लिया गया और अब उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना सबसे ज्यादा बताई जा रही है।

इस्तीफे के बाद सिद्धारमैया ने कहा कि वे सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में जाने या राज्यसभा सीट लेने में उनकी कोई रुचि नहीं है।

यह बदलाव कांग्रेस के अंदर लंबे समय से चल रही नेतृत्व खींचतान के बाद आया है। पार्टी विधायक दल और हाईकमान अब औपचारिक रूप से नए नेता के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

Dublin/Ireland Women vs West Indies Women 1st T 20I at Castle Avenue, Dublin.

Dublin/28/05/2026.

West Indies Women defeated Ireland Women by 8 wickets at Castle Avenue, Dublin in the opening match of the Women’s Tri-Series.

Castle Avenue Dublin 28/05/2026.

Ireland Women vs West Indies Women 1st T 20I at Castle Avenue, Dublin.

West Indies Women won the toss and chose to bowl first.

Ireland Women were bowled out for 103 in 17 overs.

West Indies Women won the toss and chose to bowl first.

During the chase, West Indies Women are in control with Hayley Matthews playing aggressively at the top.

Current live situation:

WI-W around 63/2 after 9 overs.

Hayley Matthews crossed 45 runs and is leading the chase comfortably.

Pitch report:

Castle Avenue is helping seam bowlers early because of cloudy conditions.

Chasing looks easier under lights.

West Indies Women defeated Ireland Women by 8 wickets at Castle Avenue, Dublin in the opening match of the Women’s Tri-Series.

Ireland Women: 103 all out (17 overs)

West Indies Women: chased the target.

comfortably with 11 balls remaining.

Hayley Matthews played a key role in the run chase.