सांसदों और मंत्रियों की संपत्ति की जांच की मांग तेज।

सांसदों और मंत्रियों की संपत्ति की जांच की मांग तेज।

Demands for an investigation into the assets of MPs and ministers intensify.

भारत में संसद बनने से पहले एक एक रूपये के लिए तरसने वाले सांसद या विधायक, विधानपरिषद के पास आय अधिक सम्पत्ति कैसे अजिर्त कर लिया है।

How have MPs or MLAs who struggled for even a single rupee before entering Parliament or the Legislative Assembly/Council amassed such vast wealth?

नई दिल्ली। देश में सांसदों और मंत्रियों की बढ़ती संपत्तियों को लेकर जन चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मांग की है कि पिछले 15 वर्षों में जनप्रतिनिधियों की संपत्तियों में हुई वृद्धि की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

New Delhi. Public discourse regarding the rising assets of Members of Parliament and ministers across the country has intensified. Various social organizations and citizens have demanded an independent and impartial inquiry into the increase in the assets of public representatives over the past 15 years.

लोगों का कहना है कि यदि किसी सांसद या मंत्री की संपत्ति करोड़ों या अरबों रुपये तक बढ़ी है, तो उसके स्रोत को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। मांग की जा रही है कि सभी जनप्रतिनिधियों की घोषित संपत्तियों, आयकर विवरणों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर पारदर्शी जांच की जाए।

People argue that if the assets of an MP or minister have grown to the tune of crores or billions of rupees, the source of this wealth should be made public. There is a demand for a transparent investigation involving the cross-verification of the declared assets, income tax details, and other financial documents of all elected representatives.

नागरिकों का मानना है कि लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता आवश्यक है। इसलिए जनता को यह जानने का अधिकार है कि जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में हुई वृद्धि वैध आय, व्यवसाय, निवेश या अन्य कानूनी स्रोतों से हुई है या नहीं।

Citizens believe that accountability and transparency are essential in a democracy. Therefore, the public has the right to know whether the increase in the assets of elected representatives stems from legitimate income, business, investments, or other legal sources.

हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बिना जांच और प्रमाण के किसी भी सांसद या मंत्री पर भ्रष्टाचार या कमीशनखोरी के आरोप लगाना उचित नहीं है। जांच एजेंसियों और संबंधित संस्थाओं द्वारा तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

However, it is important to note that it is inappropriate to level allegations of corruption or the taking of commissions against any MP or minister without investigation and evidence. Conclusions can only be reached based on facts established by investigative agencies and relevant bodies.

विशेषज्ञों का कहना है कि सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों की संपत्ति का समय-समय पर ऑडिट और सार्वजनिक खुलासा होने से शासन व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।

Experts say that the periodic auditing and public disclosure of the assets of elected representatives from all political parties will further strengthen public trust in the governance system.

समझौते के बाद वैश्विक बाजारों में दिखा उत्साह, निवेशकों का बढ़ा भरोसा।

समझौते के बाद वैश्विक बाजारों में दिखा उत्साह, निवेशकों का बढ़ा भरोसा।
वैश्विक बाजारों में वृद्धि के वाबजूद भारतीय नाड़ी में उत्साह देखा गया है।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन, 19 जून। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला है। लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद के कारण निवेशकों का विश्वास बढ़ा और कई प्रमुख बाजारों में तेजी दर्ज की गई।

विशेषज्ञों के अनुसार समझौते के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं घटी हैं, जिससे ऊर्जा बाजार में स्थिरता के संकेत मिले हैं। तेल की कीमतों में नरमी आने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसका असर परिवहन, विनिर्माण और अन्य उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है।

दुनिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखा गया। निवेशकों ने इसे मध्य पूर्व में शांति और आर्थिक स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग में कुछ कमी आई, जबकि शेयरों और अन्य जोखिम वाले निवेश विकल्पों में रुचि बढ़ी।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी सफल रहती है, तो वैश्विक व्यापार और निवेश गतिविधियों को नया बल मिल सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा मजबूत होगी और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितता कम होगी।

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक फिलहाल निवेशक आगे की वार्ताओं और समझौते के क्रियान्वयन पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के कदम तय करेंगे कि यह सकारात्मक माहौल कितना लंबे समय तक कायम रहता है।


अमेरिका–ईरान में ऐतिहासिक समझौता, तनाव कम होने की उम्मीद।

अमेरिका–ईरान में ऐतिहासिक समझौता, तनाव कम होने की उम्मीद।

ईरान ने अमेरिकी सरकार को झुकने पर मजबूर किया 


60 दिनों के अंतरिम समझौते पर सहमति, युद्धविराम और आगे की वार्ता का रास्ता खुला।

वॉशिंगटन/तेहरान, 19 जून। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य सैन्य टकराव को रोकना और स्थायी समाधान के लिए बातचीत को आगे बढ़ाना है।

समझौते के अनुसार दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाइयों को रोकेंगे और अगले 60 दिनों तक व्यापक शांति वार्ता जारी रखेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक समुद्री व्यापार और रणनीतिक जलमार्गों को सामान्य बनाने पर भी सहमति बनी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अमेरिकी प्रशासन ने इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम बताया है, जबकि ईरान ने इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश किया है। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल प्रारंभिक समझौता है और स्थायी समाधान के लिए दोनों देशों को कई जटिल मुद्दों पर आगे भी बातचीत करनी होगी।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार यदि यह समझौता सफल रहता है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़े दबाव में भी कमी आ सकती है। समझौते के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है।

चेन्नई: तमिलनाडु की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय कुमार की पत्नी के साथ डाइवोर्स हो गया है।

चेन्नई: तमिलनाडु की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी जोसेफ  विजय कुमार की पत्नी के साथ डाइवोर्स हो गया है।
मुख्यमंत्री के तलाक़ की चर्चा बनी जनचर्चा, चौक-चौराहों पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं।

विशेष संवाददाता

शहर और ग्रामीण इलाकों के चौक-चौराहों, चाय की दुकानों तथा सार्वजनिक स्थलों पर इन दिनों मुख्यमंत्री के निजी जीवन को लेकर चर्चा का माहौल देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी के तलाक़ संबंधी खबरों के बाद लोग अपने-अपने ढंग से इस विषय पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों का निजी जीवन भी अक्सर जनचर्चा का विषय बन जाता है। वहीं, कई नागरिकों का मानना है कि किसी व्यक्ति के पारिवारिक या वैवाहिक संबंधों को उसके प्रशासनिक कार्यों से सीधे जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

चर्चाओं के दौरान कुछ लोग यह भी कहते सुने गए कि जब बड़े पदों पर बैठे लोगों के जीवन में ऐसे बदलाव आ सकते हैं, तो आम लोगों के लिए भी यह असामान्य नहीं है। दूसरी ओर, कुछ लोगों ने यह राय व्यक्त की कि नेताओं के निजी जीवन की बजाय उनके शासन, नीतियों और जनहित के कार्यों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।

दिनभर विभिन्न स्थानों पर इस विषय को लेकर बहस और चर्चाएं होती रहीं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन मुख्य रूप से उसके प्रशासनिक प्रदर्शन, निर्णयों और जनता के प्रति जवाबदेही के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल उसके निजी जीवन की घटनाओं के आधार पर।

फिलहाल, यह मुद्दा आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय बैठकों तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मुख्यमंत्री की पत्नी तलाक़ दे सकती है तो हमलोग देंगें तो क्या होगा। 

बड़े मियां बड़ी बात छोटे मियां सुभान अल्लाह वाली कहावत हो गई है, जब अपनी पत्नी को संभाल कर नहीं रख सकते हैं तो इतना बड़ा राज्य कैसे संभालेंगे।


दिनभर तलाक की चर्चा चौक चौराहों पर चलती रहती है।

पेट्रोल-डीजल के दाम घटने पर आमजन को तत्काल लाभ क्यों नहीं मिला?

पेट्रोल-डीजल के दाम घटने पर आमजन को तत्काल लाभ क्यों नहीं मिला?

आम लोगों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर तेल सस्ता हुआ है, तो इसका लाभ उपभोक्ताओं तक तुरंत पहुंचना चाहिए।

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में तत्काल कमी नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर तेल सस्ता हुआ है, तो इसका लाभ उपभोक्ताओं तक तुरंत पहुंचना चाहिए।

सरकार और तेल कंपनियों का तर्क है कि हाल के महीनों में बढ़ी लागत और तेल विपणन कंपनियों के घाटे की भरपाई अभी पूरी तरह नहीं हो पाई है। रिपोर्टों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहले हुई बढ़ोतरी से कंपनियों की "अंडर-रिकवरी" में कमी आई है, लेकिन उन्हें अब भी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतें केवल कच्चे तेल की दरों पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें कर, परिवहन लागत, विपणन खर्च और सरकारी राजस्व संबंधी नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर कई बार घरेलू बाजार में तुरंत दिखाई नहीं देता।

विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी का सीधा लाभ जनता को दिया जाए। उनका कहना है कि महंगाई से जूझ रहे आम नागरिकों को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल के दामों में कटौती आवश्यक है।

फिलहाल सरकार की ओर से कीमतों में तत्काल कटौती का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है, हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता बना रहता है तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

फ्रांस में जी 7 शिखर सम्मेलन में भारत की मजबूत उपस्थिति, प्रधानमंत्री मोदी निभाएंगे अहम भूमिका।

फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की मजबूत उपस्थिति, प्रधानमंत्री मोदी निभाएंगे अहम भूमिका।

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron सहित कई विश्व नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। 

पेरिस/एवियन, फ्रांस। प्रधानमंत्री Narendra Modi फ्रांस में आयोजित जी 7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हैं, जहां भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को प्रमुखता से उठाएगा। भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है और प्रधानमंत्री मोदी कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेंगे।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की चर्चा वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, तकनीकी सहयोग और विकासशील देशों की चुनौतियों पर केंद्रित रहेगी। उन्होंने कहा है कि भारत केवल अपने हितों की नहीं, बल्कि विकासशील देशों की आकांक्षाओं और चिंताओं की भी आवाज़ बनेगा।

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron सहित कई विश्व नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। भारत और फ्रांस के बीच व्यापार, रक्षा, नवाचार, परमाणु ऊर्जा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जी7 मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी देश की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाती है। प्रधानमंत्री मोदी की यह लगातार सातवीं जी7 भागीदारी है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव का संकेत मानी जा रही है। 

फ्रांस में हो रहे जी7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका भारत के वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत करने वाली मानी जा रही है। दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत विकास, सहयोग और वैश्विक दक्षिण के हितों को प्रमुखता से रखने की कोशिश करेगा।

मॉस्को। यूक्रेनी ड्रोन हमले में रूस के ओरियोल क्षेत्र में एक व्यक्ति की मौत।

मॉस्को। यूक्रेनी ड्रोन हमले में रूस के ओरियोल क्षेत्र में एक व्यक्ति की मौत।
मॉस्को, 15 जून। रूस के दक्षिण-पश्चिमी ओरियोल (Oryol) क्षेत्र में यूक्रेन द्वारा किए गए ड्रोन हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि
नौ अन्य लोग घायल हो गए। क्षेत्रीय गवर्नर आंद्रेई क्लिचकोव के अनुसार, ड्रोन एक बहुमंजिला आवासीय इमारत से टकराया, जिससे भवन को भारी नुकसान पहुंचा।

गवर्नर ने बताया कि घायलों को चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की जा रही है। हमले के बाद इमारत की कई खिड़कियां और बाहरी हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। सोशल मीडिया पर जारी तस्वीरों में भवन के कई हिस्सों में नुकसान साफ दिखाई दे रहा है।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने कई यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराया, लेकिन कुछ ड्रोन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे। यूक्रेन की ओर से इस घटना पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान दोनों पक्षों द्वारा ड्रोन हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे सीमा से दूर स्थित रूसी क्षेत्रों में भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

वाशिंगटन, एजेंसी। लोकप्रियता की दौड़ में रिश्ते पीछे, कुर्सी की नीलामी में उमड़ी भीड़।

वाशिंगटन, एजेंसी। लोकप्रियता की दौड़ में रिश्ते पीछे, कुर्सी की नीलामी में उमड़ी भीड़।
जो अपने कर्तव्यों के निर्वहन से प्राप्त हो, न कि केवल सार्वजनिक प्रदर्शन से।"लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन माता-पिता की सेवा से मिलने वाला सम्मान जीवनभर साथ रहता है।"

विशेष संवाददाता।

दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है जो सामाजिक प्रतिष्ठा और लोकप्रियता हासिल करने के लिए हर मंच पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन अपने माता-पिता की सेवा और जिम्मेदारियों के प्रति उतनी गंभीरता नहीं दिखाते। समाज के विभिन्न वर्गों में इस प्रवृत्ति को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

हाल ही में कई स्थानों पर देखा गया कि कुछ लोग चर्चित व्यक्तियों द्वारा उपयोग की गई कुर्सियों, वस्तुओं या स्मृति-चिह्नों की नीलामी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने पहुंचे। वहीं दूसरी ओर, परिवार और बुजुर्गों की देखभाल जैसे मूल सामाजिक दायित्वों को नजरअंदाज करने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।

सामाजिक चिंतकों का मानना है कि आधुनिक दौर में दिखावे और प्रसिद्धि की चाह ने कई लोगों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। उनका कहना है कि माता-पिता की सेवा केवल नैतिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि समाज की मजबूत नींव भी है। यदि लोग सम्मान और लोकप्रियता के लिए प्रतीकात्मक चीजों के पीछे भागेंगे, लेकिन अपने परिवार की जिम्मेदारियों से दूर रहेंगे, तो सामाजिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समाज को बाहरी प्रतिष्ठा से अधिक पारिवारिक संस्कारों और मानवीय मूल्यों को महत्व देने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि किसी कुर्सी या वस्तु की नीलामी में शामिल होना गलत नहीं है, लेकिन माता-पिता के प्रति कर्तव्य निभाना उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

संपादकीय टिप्पणी:

"जिस समाज में माता-पिता की सेवा से अधिक महत्व प्रसिद्धि के प्रतीकों को मिलने लगे, वहां आत्ममंथन की आवश्यकता अवश्य होती है।"जिस समाज में माता-पिता की सेवा और सम्मान से अधिक महत्व प्रसिद्धि के प्रतीकों, पदों और दिखावे को मिलने लगे, वहाँ केवल व्यक्तियों को नहीं, पूरे समाज को आत्ममंथन की आवश्यकता होती है। वास्तविक सम्मान वही है जो अपने कर्तव्यों के निर्वहन से प्राप्त हो, न कि केवल सार्वजनिक प्रदर्शन से।"लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन माता-पिता की सेवा से मिलने वाला सम्मान जीवनभर साथ रहता है।"


सुपरबग्स पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर घटा, दुनिया के लिए बढ़ा खतरा।

सुपरबग्स पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर घटा, दुनिया के लिए बढ़ा खतरा।

डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबा आपयोटिक न लें।

विशेष संवाददाता।

नई दिल्ली, 15 जून। दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते और गलत इस्तेमाल के कारण "सुपरबग्स" तेजी से फैल रहे हैं। 

ये ऐसे बैक्टीरिया हैं जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं करतीं, जिससे साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है।

हालिया वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, वर्ष 2023 में दुनिया भर में पाए गए लगभग हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण पर एंटीबायोटिक दवाओं का प्रभाव नहीं हुआ। 

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ई. कोलाई (E. coli) और क्लेब्सिएला न्यूमोनिए (Klebsiella pneumoniae) जैसे बैक्टीरिया कई प्रमुख एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो चुके हैं। 

इससे डॉक्टरों को "लास्ट-रिजॉर्ट" यानी अंतिम विकल्प वाली शक्तिशाली दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।

भारत में भी एंटीबायोटिक प्रतिरोध (AMR) चिंता का विषय बना हुआ है। अस्पतालों में किए गए अध्ययनों में पाया गया कि बड़ी संख्या में मरीजों को बिना पर्याप्त जांच के एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं, जिससे सुपरबग्स के विकसित होने का खतरा बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक उपयोग, अधूरा उपचार और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना इस समस्या के प्रमुख कारण हैं। 

यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में सामान्य सर्जरी, प्रसव और छोटे संक्रमणों का इलाज भी जोखिमपूर्ण हो सकता है।

क्या करें?

डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक न लें।

निर्धारित दवा का पूरा कोर्स पूरा करें।

वायरल बीमारियों (जुकाम, फ्लू आदि) में एंटीबायोटिक का अनावश्यक उपयोग न करें।

स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के नियमों का पालन करें।सुपरबग्स का बढ़ता खतरा स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए चेतावनी है। एंटीबायोटिक दवाओं का जिम्मेदार उपयोग ही इस संकट को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।


टेलर ने जिस कुर्सी पर बैठकर मैच देखा, अब होगी उसकी नीलामी।

टेलर ने जिस कुर्सी पर बैठकर मैच देखा, अब होगी उसकी नीलामी।

इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि महिलाओं को मेन्स क्रिकेट टीम का कोच बनाया गया है।

प्रशंसकों में उत्साह, यादगार वस्तु को खरीदने के लिए लग सकती है बड़ी बोली।

समाचार रिपोर्ट: अमन कुमार मिश्र।

नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायिका Taylor Swift जिस कुर्सी पर बैठकर एक चर्चित मैच का आनंद लिया था, अब उसकी नीलामी की तैयारी की जा रही है। आयोजकों के अनुसार, यह कुर्सी प्रशंसकों और संग्रहकर्ताओं के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गई है।

बताया जा रहा है कि मैच के दौरान टेलर जिस सीट पर बैठी थीं, उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए थे। इसके बाद उस कुर्सी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। अब नीलामी के जरिए इसे बेचने का निर्णय लिया गया है।

नीलामी आयोजकों का कहना है कि टेलर स्विफ्ट की वैश्विक लोकप्रियता को देखते हुए इस कुर्सी के लिए ऊंची बोली लगने की संभावना है। कई प्रशंसक और संग्रहकर्ता इसे एक यादगार वस्तु के रूप में अपने पास रखना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी मशहूर हस्ती से जुड़ी वस्तुओं की नीलामी में अक्सर अपेक्षा से अधिक कीमत मिल जाती है। ऐसे में इस कुर्सी की नीलामी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

नीलामी की तारीख और शुरुआती बोली से जुड़ी विस्तृत जानकारी जल्द जारी किए जाने की संभावना है। फिलहाल इस खबर ने प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है।