सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026 गूगल और xAI के बीच हुआ अरबों डॉलर का AI समझौता।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दुनिया में एक बड़ा कारोबारी समझौता सामने आया है।
सैन फ्रांसिस्को/टेक डेस्क, 8 जून 2026।

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की दुनिया में एक बड़ा कारोबारी समझौता सामने आया है। |
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मानव नियंत्रण और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियॉं। |
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दोनों पक्षों में तनाव जारी है वार्ता की कोशिशों के बावजूद खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष तेज,अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित। |
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इथेनॉल फ्यूल टैंक एवं बनाने का प्लांट। |
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| यात्रियों को समय का आभाव रहने के कारण स्टेशन मास्टर को लिखित शिकायत दर्ज नहीं होता है। |
झाझा (जमुई), संवाददाता।
झाझा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर ट्रेनों के आगमन से पहले पेयजल की सप्लाई बंद किए जाने का आरोप यात्रियों ने लगाया है। यात्रियों का कहना है कि ट्रेन आने के समय जब प्लेटफार्म पर सबसे अधिक भीड़ होती है, उसी दौरान पानी उपलब्ध नहीं रहने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यात्रियों के अनुसार, प्लेटफार्म पर लगे नलों में पानी नहीं आने के कारण उन्हें मजबूरन स्टॉलों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ यात्रियों को असुविधा भी झेलनी पड़ रही है। खासकर गर्मी के मौसम में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय यात्रियों ने आरोप लगाया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन इसके समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका कहना है कि रेलवे प्रशासन को यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए और प्लेटफार्म पर नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराना चाहिए।
यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों से मांग की है कि झाझा रेलवे स्टेशन पर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की जांच कराई जाए तथा ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय भी पानी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में रेलवे प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है।
वॉशिंगटन, अमेरिका। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया: लोकतंत्र का अनोखा मॉडल।
वॉशिंगटन, अमेरिका।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्रों में से एक अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता के वोटों से नहीं होता।
यहां एक विशेष प्रणाली, जिसे Electoral College कहा जाता है, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव का अंतिम फैसला करती है।
चुनाव प्रक्रिया कैसे शुरू होती है:
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार वर्ष में आयोजित होते हैं।
प्रमुख राजनीतिक दल पहले अपने उम्मीदवार चुनते हैं।
इसके लिए विभिन्न राज्यों में प्राइमरी और कॉकस चुनाव आयोजित किए जाते हैं।
इसके बाद राष्ट्रीय अधिवेशनों में उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा की जाती है।
जनता वोट देती है, लेकिन राष्ट्रपति सीधे नहीं चुनती:
नवंबर महीने में अमेरिकी नागरिक मतदान करते हैं।
हालांकि वे सीधे राष्ट्रपति के लिए वोट नहीं देते, बल्कि अपने राज्य के "इलेक्टर्स" (निर्वाचकों) के समूह को चुनते हैं।
यही निर्वाचक बाद में राष्ट्रपति के लिए आधिकारिक मतदान करते हैं।
क्या है इलेक्टोरल कॉलेज:
अमेरिका में कुल 538 इलेक्टोरल वोट हैं। किसी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए कम-से-कम 270 वोट हासिल करने होते हैं।
प्रत्येक राज्य को उसके कांग्रेस प्रतिनिधियों और सीनेटरों की संख्या के आधार पर इलेक्टोरल वोट मिलते हैं।
विजेता कैसे तय होता है:
अधिकांश राज्यों में "विनर-टेक्स-ऑल" प्रणाली लागू है।
इसका अर्थ है कि जिस उम्मीदवार को राज्य में सबसे अधिक लोकप्रिय वोट मिलते हैं,
उसे उस राज्य के सभी इलेक्टोरल वोट प्राप्त हो जाते हैं।
केवल Maine और Nebraska में अलग व्यवस्था लागू है, जहां इलेक्टोरल वोटों का आंशिक विभाजन संभव है।
अंतिम चरण:
दिसंबर में निर्वाचक अपने-अपने राज्यों में मिलकर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदान करते हैं।
इसके बाद जनवरी में अमेरिकी कांग्रेस इन वोटों की आधिकारिक गणना और पुष्टि करती है।
विजेता उम्मीदवार को राष्ट्रपति-निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
विवाद और बहस:
अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर समय-समय पर बहस होती रही है। इतिहास में कई बार ऐसा हुआ है कि किसी उम्मीदवार ने राष्ट्रीय स्तर पर अधिक लोकप्रिय वोट प्राप्त किए, लेकिन इलेक्टोरल वोट कम मिलने के कारण चुनाव हार गया। वर्ष 2000 और 2016 इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
अंतिम निष्कर्ष : अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया दुनिया की सबसे जटिल और विशिष्ट लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में गिनी जाती है।
यहां जनता की राय महत्वपूर्ण होती है, लेकिन अंतिम फैसला इलेक्टोरल कॉलेज प्रणाली के माध्यम से होता है।
यही कारण है कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव केवल वोटों की गिनती नहीं, बल्कि राज्यों के राजनीतिक संतुलन का भी खेल माना जाता है।
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| भारतीय मूल के ए आई तकनीकि सलाहकार श्रीराम कृष्णन। |
व्हाइट हाउस में श्रीराम कृष्णन की प्रमुख जिम्मेदारी अमेरिका की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) नीति तैयार करने और उसे लागू करने में सहायता करना थी। उनका कार्य था।
एआई विकास के लिए राष्ट्रीय रणनीति बनाना।
एआई नियमन (Regulation) के लिए नीति ढांचा तैयार करना।
अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना।
चीन समेत अन्य देशों के साथ एआई प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी बढ़त सुनिश्चित करना।
उद्योग, सरकार और अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करना।
उनकी नियुक्ति के बाद अमेरिकी राजनीति में कुछ विवाद भी हुआ।
कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने उनके पुराने आव्रजन (Immigration) संबंधी विचारों का विरोध किया, जबकि कई प्रमुख तकनीकी नेताओं, जिनमें Elon Musk भी शामिल थे, ने उनका समर्थन किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, श्रीराम कृष्णन ने ट्रंप प्रशासन की एआई रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर एआई नियमन के एकीकृत ढांचे की वकालत की और अमेरिका को एआई क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में काम किया।
जून 2026 में श्रीराम कृष्णन ने घोषणा की कि वे महीने के अंत तक व्हाइट हाउस का पद छोड़ देंगे।
उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा और भविष्य में भी वे अमेरिका के सामने मौजूद एआई संबंधी बड़ी चुनौतियों पर काम करते रहेंगे।
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विंसेंट कीमर को मायूसी छा गई। |
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नई दिल्ली।वाशिंगटन।आर्थिक डेस्क।रविवार |
https://amangitanjaliexpress1984.blogspot.com/2026/06/blog-post_340.htmlबाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिसके चलते मुद्रा और कमोडिटी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।
स्थानीय सर्राफा बाजारों में भी सोना और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे कारोबारियों में सतर्कता का माहौल बना रहा।
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की चाल पर निर्भर रहने की संभावना जताई जा रही है।
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| वाशिंगटन एजेंसी।नई दिल्ली। विशेष संवाददाता: अमन कुमार मिश्र रिपोर्ट। |
दबबाला राजगोपाल राज रेड्डी एक प्रसिद्ध कम्प्यूटर वैज्ञानिक है जिनको कृत्रिम बुद्धिमत्ता ए आई और रोबोटिक क्षेत्र में कम्प्यूटर विज्ञान के सर्वोच्च सम्मान ए एम ट्यूरिंग पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में भारतवंशी वैज्ञानिक Raj Reddy के योगदान को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
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| तकनीकी जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक AI के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। |
उन्होंने मशीन लर्निंग, स्पीच रिकग्निशन और बुद्धिमान कंप्यूटर प्रणालियों के क्षेत्र में कई दशकों तक शोध किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI का विकास किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं है,
बल्कि दुनिया भर के अनेक वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के सामूहिक योगदान का नतीजा है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि “AI का जन्मदाता भारत का एक लड़का है।”
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस दावे को शाब्दिक रूप से सही नहीं माना जा सकता। AI की अवधारणा और विकास में John McCarthy, Alan Turing, Marvin Minsky सहित कई वैज्ञानिकों का योगदान रहा है।
फिर भी, राज रेड्डी को AI के शुरुआती और प्रभावशाली शोधकर्ताओं में गिना जाता है, और भारतीय मूल के वैज्ञानिकों के लिए उनकी उपलब्धियाँ प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।