बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नवरात्रि मां कुष्मांडा मां की अराधना की जाती है।

बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नवरात्रि मां कुष्मांडा मां की अराधना की जाती है।

मां कुष्मांडा की अराधना अर्चना चतुर्थी तिथि को कुम्भर
 से की जाती है। ऐसी मान्यता शास्त्रों में दी गई है।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नवरात्रि का चौथा दिन (मां कुष्मांडा पूजा) मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की आराधना करते हैं।

मां कुष्मांडा को सृष्टि की आदि सृजनकर्ता माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान (कु + उष्मा + अंड = ब्रह्मांड) से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें "आदि शक्ति" भी कहा जाता है।

इस दिन विशेष रूप से:-मां को कुम्हड़ा (कद्दू) का भोग लगाया जाता है-दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।साधक अनाहत चक्र पर ध्यान करते हैं।

बिहार के बेगूसराय (बरौनी,सोकहारा) जैसे क्षेत्रों में भी इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।

मां कुष्मांडा की पूजा विधि और प्रमुख मंत्र सरल और विस्तार से दिए जा रहे हैं।

मां कुष्मांडा की पूजा विधि:प्रातःकाल की तैयारी:सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।पूजा स्थान को साफ कर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

संकल्प लें: हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर मन में पूजा का संकल्प करें।

कलश स्थापना: पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें (यदि पहले दिन नहीं किया है तो)

मां का ध्यान और आवाहनदीप जलाकर मां का ध्यान करें और उन्हें आमंत्रित करें।

पूजन सामग्री अर्पित करें:रोली, अक्षत, फूल, माला, धूप, दीप अर्पित करें। विशेष रूप से कुम्हड़ा (कद्दू) का भोग लगाएं।(मां कुष्मांडा को प्रिय माना जाता है)

मंत्र जप और पाठ: दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें।मां के बीज मंत्र का जप करें।

आरती करें: अंत में मां की आरती करके प्रसाद वितरित करें, 

मां कुष्मांडा का ध्यान मंत्र:-

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥

बीज मंत्र:- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः। इस मंत्र का जप कम से कम 108 बार करना शुभ माना जाता है।

मां कुष्मांडा की आरती (संक्षेप):

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी... (आप पूरी दुर्गा आरती भी कर सकते हैं)

विशेष मान्यताएं:-इस दिन पूजा करने से रोग, शोक और भय दूर होते हैं,आयु, यश और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है,साधक के अनाहत चक्र को बल मिलता है


बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा:-चैत्र नवरात्रि के पाँचवें दिन, यानी शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि के पाँचवें दिन, यानी शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

स्कंदमाता का स्वरूप निराला 

यह दिन विशेष रूप से शुद्ध मन, भक्ति और मानसिक साधना (मन में ध्यान करके पूजा) के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

स्कंदमाता का स्वरूप और महत्व: मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

चार भुजाओं में कमल और बाल स्कंद को गोद में धारण करती हैं। इनकी पूजा से भक्त को सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मानसिक पूजा (मानसिक आराधना) का विधान अगर आप बाहरी सामग्री के बिना मन में पूजा करना चाहते हैं, तो यह विधि अपनाई जाती है।

ध्यान (Meditation) शांत स्थान पर बैठकर मां स्कंदमाता का ध्यान करें। उनके दिव्य स्वरूप को मन में स्पष्ट रूप से देखें।

आवाहन (मन में बुलाना):-

मन ही मन प्रार्थना करें:-“हे मां स्कंदमाता, कृपा करके मेरे मन में विराजमान हों।”अर्चना (मानसिक पूजन) मन में ही फूल, अक्षत, चंदन, धूप, दीप अर्पित करें।

कल्पना करें कि आप पूरी श्रद्धा से मां की सेवा कर रहे हैं।

मंत्र जप:-“ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” का जाप करें। जितना संभव हो, श्रद्धा से जप करें। भोग अर्पण (मानसिक रूप से)

मां को केले या मीठे का भोग मानसिक रूप से अर्पित करें।

आरती (मन में):-

अंत में मां की आरती मन ही मन गाएं और कृतज्ञता व्यक्त करें।

आध्यात्मिक लाभ:मन की शुद्धि और एकाग्रता बढ़ती है भय और तनाव कम होता है

जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन आता है।इस दिन की साधना का मुख्य उद्देश्य है। मन को निर्मल बनाकर मां के प्रति पूर्ण समर्पण करना। मन को निर्मल बनाकर मां के प्रति पूर्ण समर्पण करना।“मन को निर्मल बनाकर मां के प्रति पूर्ण समर्पण करना”यह नवरात्रि साधना का सबसे गहरा और सच्चा भाव है, विशेषकर मां स्कंदमाता की उपासना में। इसका वास्तविक अर्थ क्या है?

मन को निर्मल बनाना:-

अपने भीतर से द्वेष, क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार को हटाना सरलता, करुणा और सच्चाई को अपनान हर विचार को शुद्ध और सकारात्मक बनाना।

पूर्ण समर्पण (Complete Surrender) यह भाव रखना कि “मैं नहीं, सब कुछ मां ही हैं” अपने कर्म, विचार और परिणाम सब मां को अर्पित कर देना। सुख-दुख, लाभ-हानि हर परिस्थिति को मां की इच्छा मानकर स्वीकार करना।

कैसे करें यह साधना:-

श्रद्धा से ध्यान करें: मां स्कंदमाता के स्वरूप को मन में धारण करें

अहंकार छोड़ें: “मैं” की भावना कम करें, “मां” की भावना बढ़ाएं

निस्वार्थ भाव रखें: पूजा किसी इच्छा के लिए नहीं, बल्कि प्रेम से करें

कृतज्ञता अपनाएं: जो भी मिला है, उसे मां का प्रसाद मानें।

एक सरल भाव: “हे मां, मेरा मन, बुद्धि और आत्मा—सब कुछ आपको समर्पित है। मुझे सही मार्ग दिखाएं और अपनी शरण में रखें”जब मन पूरी तरह शांत, सरल और समर्पित हो जाता है, तब सच्ची भक्ति अपने आप प्रकट होती है। यही स्थिति भक्ति का सर्वोच्च रूप मानी जाती है।


बिहार/बेगुसराय/जयमंगला गढ़ में माता की चौथे दिन पुजा अर्चना की गई।

Mother was worshipped on the fourth day in Bihar/Begusarai/Jayamangala Garh.

Bihar Begusarai Jayamangala Garh.

जयमंगला गढ़ मंदिर बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है। इसे माँ दुर्गा के रूप जयमंगला माता के रूप में पूजा जाता है। यह स्थान खासकर नवरात्रि में श्रद्धालुओं से भरा रहता है।

जयमंगला गढ़ माता की कथा


मान्यता के अनुसार, प्राचीन समय में यह क्षेत्र घने जंगलों और जलाशयों से घिरा हुआ था। कहते हैं कि एक बार कुछ चरवाहों ने देखा कि उनकी गायें एक विशेष स्थान पर अपने-आप दूध गिरा देती थीं। यह देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ।


जब लोगों ने उस जगह की खुदाई की, तो वहाँ से माँ दुर्गा की दिव्य मूर्ति प्रकट हुई। माना जाता है कि यह स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) मूर्ति थी। इसी चमत्कार के बाद वहाँ मंदिर का निर्माण कराया गया और माँ को जयमंगला माता के रूप में स्थापित किया गया।

 पौराणिक मान्यता


कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान शक्तिपीठों से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि जब सती का शरीर भगवान शिव द्वारा ले जाया जा रहा था, तब उनके शरीर के कुछ अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे। उन्हीं में से एक स्थान जयमंगला गढ़ भी माना जाता है (हालांकि यह मान्यता स्थानीय है और सभी ग्रंथों में नहीं मिलती)।


स्थान की विशेषता


यह मंदिर एक झील (कावर झील क्षेत्र) के पास स्थित है, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम यहाँ देखने को मिलता है।

 धार्मिक महत्व

नवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहाँ विशेष पूजा होती है

लोग अपनी मनोकामनाएँ लेकर आते हैं और माता से आशीर्वाद मांगते हैं

कहा जाता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना यहाँ पूर्ण होती है


अगर आप चाहें तो मैं आपको जयमंगला गढ़ मंदिर जाने का रास्ता, मेला, या वहाँ के अनुभव के बारे में भी बता सकता हूँ।


मिजोरम: भारत की जांच एजेंसी (NIA) ने 6 यूक्रेनी नागरिकों और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है।

मिजोरम: भारत की जांच एजेंसी (NIA) ने 6 यूक्रेनी नागरिकों और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है।
NIA/एन आई ए की टीम ने कहा ड्रोनऔर उपकरण यूरोप से लाकर म्यांमार में सप्लाई करने वाले ये व्यक्ति है।
भारत के पूर्वोत्तर (मिजोरम) के रास्ते म्यांमार में घुसे वहां हथियारबंद समूहों को ड्रोन चलाने और युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे थे। ड्रोन और उपकरण यूरोप से लाकर म्यांमार में सप्लाई किए गए।
मिजोरम: भारत की जांच एजेंसी (NIA) ने 6 यूक्रेनी नागरिकों और 1 अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है।
अमेरिका और यूक्रेन के नागरिक को रूसी अधिकारियों की सुचना पर गिरफ्तारी की गई।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह नेटवर्क:-म्यांमार के विद्रोही गुटों की मदद कर रहा था।और भारत को निशाना बनाने की संभावित साजिश से भी जुड़ा हो सकता है।

भारत के अंदर सक्रिय प्रतिबंधित समूहों को भी ट्रेनिंग दी गई। लेकिन पूरी सच्चाई अभी स्पष्ट नहीं।यूक्रेन ने इन आरोपों को साबित नहीं माना और अपने नागरिकों की रिहाई की मांग की है।जांच अभी जारी है—अदालत और एजेंसियां सबूतों की जांच कर रही हैं। कुछ विदेशी (अमेरिकी + यूक्रेनी) लोगों की गिरफ्तारी हुई है। उन पर म्यांमार में हथियारबंद गुटों को ड्रोन ट्रेनिंग देने का आरोप है। भारत के खिलाफ संभावित खतरे/साजिश की भी जांच हो रही है। लेकिन यह अभी आरोप हैं, पूरी तरह साबित नहीं हुए हैं।



मिजोरम:म्यांमार सीमा भारत के लिए इतनी संवेदनशील क्यों है?

मिजोरम:म्यांमार सीमा भारत के लिए इतनी संवेदनशील क्यों है?

भारत और म्यांमार की सीमा 

भारत की जांच एजेंसी National Investigation Agency (NIA) ने एक अमेरिकी नागरिक Matthew VanDyke और 6 यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। भारत में ड्रोन से जुड़े खतरों से निपटने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं और टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल हो रहा है। यह न सिर्फ सुरक्षा बलों की मदद करता है, बल्कि समग्र देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी सशक्त बनाता है।

भारत के कदम (Safety Measures) ड्रोन पर निगरानी और नियंत्रण:- नागरिक और सैन्य ड्रोन के लिए नियम:-भारत सरकार ने ड्रोन की उड़ान और संचालन को नियंत्रित करने के लिए DGCA (Directorate General of Civil Aviation) द्वारा नए नियम बनाए हैं। ये नियम ड्रोन की अधिकतम ऊंचाई, उड़ान की सीमा और ऑपरेटर लाइसेंस की आवश्यकता को निर्धारित करते हैं।

भारत के जवान सीमा पर सुरक्षा करते हुए।

भारत सरकार का ड्रोन नियम (2021): ड्रोन के उपयोग के लिए पंजीकरण और अनुमति की प्रक्रिया को लागू किया गया है। यह नियम विशेष रूप से गैर-सैन्य उपयोग को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं।

आधिकारिक सुरक्षा बलों की तैनाती:CRPF (Central Reserve Police Force), BSF (Border Security Force) और ITBP (Indo-Tibetan Border Police) जैसे बलों की तैनाती, जो सीमा क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए होने वाली तस्करी और हमलों से निपटने के लिए निगरानी रखते हैं। बल विशेष ड्रोन सुरक्षा प्रणाली के तहत आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं।

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) की तैयारियां:- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) भी अपने प्रशिक्षण में ड्रोन को इंटरसेप्ट करने और नष्ट करने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। वे ड्रोन से होने वाले हमलों का मुकाबला करने के लिए रणनीतिक तौर पर प्रशिक्षित हैं।ड्रोन को रोकने के लिए इस्तेमाल हो रही टेक्नोलॉजी (Technology to Counter Drones) भारत में ड्रोन सुरक्षा के लिए कई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो ड्रोन के खतरे से निपटने में मदद कर रही हैं। यहां कुछ प्रमुख एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी की चर्चा की गई है:-

एंटी-ड्रोन रडार सिस्टम (Anti-Drone Radar Systems) DRDO और BEL का Integrated Drone Detection System:

यह रडार ड्रोन की उड़ान को 3D स्पेस में ट्रैक कर सकता है और उसकी दिशा और दूरी को पहचानता है। रडार, रेडियो-फ्रीक्वेंसी (RF) सिग्नल और कैमरा के साथ मिलकर ड्रोन की पहचान करता है। इसके बाद, ड्रोन को जाम करने के लिए सिग्नल भेजे जाते हैं। RF जामिंग और स्पूफिंग (Radio Frequency Jamming and Spoofing) यह प्रणाली ड्रोन के रिमोट कंट्रोल और GPS सिग्नल को जाम करती है, जिससे ड्रोन या तो गिर जाता है या नियंत्रण से बाहर हो जाता है। ड्रोन जामिंग गन्स: ये गन्स रिमोट सिग्नल को जाम कर देती हैं। ये हथियार सुरक्षा बलों द्वारा विमान हवाईअड्डों, सीमाओं और संवेदनशील इलाकों में ड्रोन के खतरे को रोकने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। एंटीड्रोन लेज़र और माइक्रोवेव (Anti-Drone Lasers and Microwaves)।

लंबी दूरी तक प्रभावी लेज़र: यह हाई-पावर लेज़र सिस्टम दूर से ड्रोन को नष्ट कर सकता है। DRDO का 'दीनदयाल एंटी-ड्रोन सिस्टम' इस तकनीक को लागू करता है।माइक्रोवेव हथियार (High-Power Microwave Weapons): 

यह माइक्रोवेव आधारित हथियार ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को नष्ट कर देता है, जिससे ड्रोन फेल हो जाता है।

यह सिस्टम रक्षा क्षेत्र में भी बहुत तेजी से अपनाया जा रहा है। ड्रोन इंटरसेप्टर ड्रोन (Drone Interceptor Drones)।

सिस्टम 1: ड्रोन से ड्रोन लड़ाई: ड्रोन इंटरसेप्टर का काम है किसी ड्रोन को पकड़ना और उसे कुशलता से गिराना। ये ड्रोन अपने आप किसी संदिग्ध ड्रोन को ट्रैक करते हैं और उसे गिरा देते हैं।

ईओ/आईआर (EO/IR) कैमरे: इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO) और इन्फ्रारेड (IR) कैमरे का इस्तेमाल, विशेष रूप से रात के समय और खराब मौसम में ड्रोन की पहचान करने के लिए किया जाता है। ये कैमरे थर्मल इमेजिंग का इस्तेमाल करके सही स्थिति का पता लगाने में मदद करते हैं, खासकर ऊंचे स्थानों और रिमोट एरिया में।

भारत में ड्रोन के खिलाफ सुरक्षा परियोजनाएँ:D4 सिस्टम (Drone Detect, Deter, Destroy): यह प्रणाली डीआरडीओ (DRDO) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित की गई है। इसमें रडार, कैमरा, और जामिंग तकनीक का मिश्रण होता है, जो सुरक्षा बलों को ड्रोन से जुड़े खतरों से निपटने में मदद करता है।

कोलकाता हवाई अड्डा सुरक्षा: कोलकाता हवाई अड्डे पर एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किया गया है। यहां ईओ/आईआर कैमरे, रडार, और जामिंग सिस्टम का उपयोग करके हवाई अड्डे के आसपास ड्रोन की गतिविधियों को मॉनिटर किया जाता है।

भविष्य की दिशा:भारत सरकार द्वारा विभिन्न एजेंसियों के सहयोग से ड्रोन से निपटने के लिए और अधिक उन्नत सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग की भूमिका भी शामिल है।

ये सिस्टम स्वत: ड्रोन की पहचान, जामिंग और नष्ट करने की क्षमता रखने वाले होंगे।

निष्कर्ष:भारत ने ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए कई सुरक्षा उपाय और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह सुनिश्चित करता है कि ड्रोन से होने वाली किसी भी घातक घटना को पहले ही रोका जा सके। भविष्य में AI, लेज़र और हाई-फ्रीक्वेंसी सिस्टम जैसे अत्याधुनिक उपाय और भी प्रभावी हो सकते हैं। ऐसी घटना हुई है जिसमें एक अमेरिकी (Matthew VanDyke) और 6 यूक्रेनी नागरिक को NIA ने गिरफ्तार किया है,आरोप है कि वे: टूरिस्ट वीज़ा की आड़ में म्यांमार के विद्रोही गुटों को ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दे रहे थे,लेकिन यह अभी जांच के अधीन मामला है, अंतिम सच्चाई कोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

अभी क्या स्थिति है:  सभी आरोपी जांच के दायरे में हैं।उन पर UAPA (आतंकवाद विरोधी कानून) के तहत केस दर्ज है।अभी आरोप साबित नहीं हुए हैं, जांच जारी है

रूसी एजेंसी की भूमिका:

खबरों के मुताबिक रूस से मिली खुफिया जानकारी (tip-off) के बाद ही यह कार्रवाई हुई।यानी भारतीय एजेंसियों को पहले से इन लोगों की गतिविधियों पर इनपुट मिला था।आरोप क्या हैं?

रिपोर्ट्स के अनुसार:ये लोग टूरिस्ट वीज़ा पर भारत आए थे.फिर पूर्वोत्तर (मिजोरम/असम) के रास्ते म्यांमार में प्रवेश किया। वहाँ विद्रोही (ethnic armed groups) से संपर्क किया है,और कथित तौर पर:-

ड्रोन ऑपरेशन,आधुनिक युद्ध तकनीक,हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग देने में शामिल थे। ड्रोन और हथियारों का एंगल जांच एजेंसियों का कहना है कि यूरोप से ड्रोन और उपकरण लाए गए। और इन्हें म्यांमार के उग्रवादी समूहों तक पहुँचाया गया है।कुछ रिपोर्ट्स में “ड्रोन ट्रेनिंग और covert operations” का भी जिक्र है।म्यांमार में विद्रोही गुट आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन टूरिस्ट वीज़ा की आड़ में बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग देने का दावा अभी पुख्ता रूप से साबित नहीं है — इसे सावधानी से देखना चाहिए।










बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पुजा अर्चना मानसिक तनाव को दूर करने के लिए की जाती है।

बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पुजा अर्चना मानसिक तनाव को दूर करने के लिए की जाती है।।
पुजारी चंदन कुमार मिश्र सोकहारा बरौनी बेगुसराय बिहार।
चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा के पूजन का दिन होता है। मां चंद्रघंटा, देवी दुर्गा का रूप मानी जाती हैं, जिनकी मूरत में एक घंटे (घंटा) का आकार होता है, जिसे वे अपने हाथ में धारण करती हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में शांति और सुख-समृद्धि का वास होता है।

तीसरे दिन की पूजा विधि:-

प्रशंसा और स्तुति: सबसे पहले, स्वच्छ स्थान पर एक पीला या लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर देवी का चित्र या मूर्ति स्थापित करें।मां चंद्रघंटा की विशेषताएँ और उनका वर्णन करें। उनके मंत्र का जाप करें, जैसे:-"ॐ चंद्रघंटायै नमः"यह मंत्र हर समस्या को समाप्त करने और मानसिक शांति देने के लिए प्रभावशाली है।

दीप और अगरबत्ती लगाना: देवी के चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती लगाएं। इससे वातावरण शुद्ध होता है और देवी की कृपा प्राप्त होती है।

नैवेद्य अर्पित करना: माता को उनकी प्रिय चीजें जैसे फल, मिठाई, या खीर अर्पित करें। साथ ही, ताजे फूलों से देवी का पूजन करें।

नौ दिनों के व्रत का पालन: अगर आप नवरात्रि के व्रत में हैं, तो इस दिन व्रत का पालन करते हुए दिनभर संयमित आहार लें और एकाग्रता से पूजा करें।

सुरक्षा और आशीर्वाद की प्रार्थना: पूजा के दौरान मां से अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सुरक्षा की प्रार्थना करें। मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास में वृद्धि के लिए मां चंद्रघंटा की पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

आरती:-पूजा के बाद, देवी की आरती गाकर उनका आभार व्यक्त करें।

विशेष लाभ: मां चंद्रघंटा की पूजा से व्यक्ति के जीवन में संकटों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह दिन मानसिक शांति और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए उपयुक्त होता है। आप इस दिन विशेष रूप से मां से अपने जीवन के तनाव और मानसिक परेशानी को दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं। आप इस दिन विशेष रूप से मां से अपने जीवन के तनाव और मानसिक परेशानी को दूर करने की प्रार्थना कर सकते हैं। जी हां, मां चंद्रघंटा की पूजा करते समय आप विशेष रूप से निम्नलिखित प्रार्थना कर सकते हैं ताकि आपके जीवन के तनाव और मानसिक परेशानियों का निवारण हो सके।

प्रार्थना:-"हे मां चंद्रघंटा, आप सर्व शक्तिमान और सभी दुखों का नाश करने वाली हैं। आपका रूप शांत, सौम्य और अत्यंत प्रभावशाली है। मां चंद्रघंटा की पूजा विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान बहुत श्रद्धा और धूमधाम से की जाती है, लेकिन कई भक्त उन्हें प्रतिदिन भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं। उनके घंटे की ध्वनि और घंटी की आवाज़ से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि यह हमें अपने भीतर की शक्ति और साहस को भी महसूस करने में मदद करती है।


Patna/बिहार के मुख्यमंत्री की रेस में कौन-कौन नेता चल रहे हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री की रेस में कौन-कौन नेता चल रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री की रेस में कौन-कौन नेता चल रहे हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री बनने के"रेस" में सम्राट चौधरी

अभी (2026 के आसपास) अगर आप बिहार की बात कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर काफी चर्चा और कयास चल रहे हैं। हाल की खबरों के मुताबिक स्थिति थोड़ी अनिश्चित है और कई नेता “रेस” में माने जा रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री एवं सम्राट चौधरी जनता के सामने हाथ जोड़कर खड़े।

बिहार में मुख्यमंत्री की रेस में प्रमुख नाम:-
नितीश कुमार एवं सम्राट चौधरी।

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार:-नीतीश कुमार – अभी तक मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन उनके भविष्य (जैसे राज्यसभा जाने की चर्चा) को लेकर अटकलें हैं। अगर बदलाव होता है, तो इन नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री की रेस में कौन-कौन नेता चल रहे हैं।

बीजेपी (NDA) की तरफ से सम्राट चौधरी सबसे आगे माने जा रहे हैं। नित्यानंद राय,दिलीप जायसवाल,संजीव चौरसिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि अगर सत्ता बीजेपी के पास जाती है, तो इन्हीं में से किसी एक पर दांव लग सकता है।

अन्य नामों की चर्चा:-@@@@@@@@@@@

विजय कुमार सिन्हा (बीजेपी नेता) निशांत कुमार (नीतीश कुमार के बेटे, राजनीति में एंट्री के बाद चर्चा में) कुल स्थिति क्या है:अभी कोई फाइनल नाम तय नहीं है।राजनीतिक समीकरण (NDA vs महागठबंधन) पर सब निर्भर है।अंदरूनी खींचतान और रणनीति के कारण स्थिति “ओपन” है

सरल शब्दों में:-बिहार में अभी मुख्यमंत्री की रेस खुली हुई है, लेकिन सम्राट चौधरी को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है.(अगर बीजेपी CM) बनाती है।


वाशिंगटन न्यूज एजेंसी:एलपीजी गैस भंडार पर हमले के परिणाम भयंकर हो सकते है।

एलपीजी गैस भंडार पर हमले के परिणाम भयंकर हो सकते है। 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा।

डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति 

एलपीजी(लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस)भंडार पर मिसाइल हमले करने से कई प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

बड़े पैमाने पर विस्फोट और आग: एलपीजी गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है, और ऐसे भंडारों पर मिसाइल हमले से बड़े विस्फोट हो सकते हैं, जिनमें भारी संख्या में नागरिक हताहत हो सकते हैं। यह विस्फोट आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तबाही मचा सकते हैं।

आर्थिक और ऊर्जा संकट: अगर गैस भंडारों को निशाना बनाया जाता है, तो यह न केवल स्थानीय ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकता है, बल्कि पूरे क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता ला सकता है। गैस की आपूर्ति में कमी से कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे आम नागरिकों के लिए रोजमर्रा की ज़िंदगी और भी कठिन हो जाएगी।

पर्यावरणीय प्रभाव: एलपीजी गैस में मौजूद हानिकारक रसायन वायुमंडल में फैल सकते हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है। जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, और जैव विविधता में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

नौ देशों में ताबड़तोड़ प्रहार का मतलब यह हो सकता है कि ईरान ने एक साथ कई देशों को निशाना बनाया है, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी और युद्ध का दायरा बहुत व्यापक हो जाएगा। ऐसे संघर्षों में आम नागरिकों की सबसे बड़ी समस्याएं होती हैं, जिनमें शरणार्थी संकट, मौत, चोटें, और मानसिक आघात शामिल हैं।

राजनीतिक दृष्टिकोण से: यदि ईरान ने कई देशों को इस तरह से निशाना बनाया है, तो यह अंतरराष्ट्रीय संघर्ष को और भी बढ़ा सकता है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों का उत्तरदायित्व बढ़ सकता है, साथ ही क्षेत्रीय ताकतों का भी विवादों में और घिरने का खतरा रहेगा। एक ऐसी स्थिति में, संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दखल दे सकते हैं।



बिहार: बेगुसराय/बरौनी:माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना के लिए समर्पित है।

बिहार: बेगुसराय/बरौनी: द्वितीया तिथि:आज माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना के लिए समर्पित है।
बिहार: बेगुसराय/बरौनी:माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना के लिए समर्पित है।

बिहार बेगुसराय बरौनी सोकहारा छोटी भगवती दुर्गा स्थान।

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन माता दुर्गा के दूसरे रूप, माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना के लिए समर्पित है। इस दिन को विशेष रूप से साधना और तपस्या का दिन माना जाता है। माँ ब्रह्मचारिणी का रूप तप, संयम और साधना की प्रतीक मानी जाती हैं। उनके दर्शन से भक्तों को आत्मिक शक्ति और धैर्य की प्राप्ति होती है। माँ ब्रह्मचारिणी के पूजा विधि में आमतौर पर निम्नलिखित शामिल होते हैं:

स्नान और शुद्धता: पूजा के पहले स्नान करके शुद्ध रहना चाहिए। व्रत: इस दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। यदि व्रत न रखा जा सके तो उपवास भी कर सकते हैं।

माँ के मंत्र का जाप: "ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः" का जाप करें। 

पुष्प अर्पण: माँ को सफेद फूल चढ़ाएं, क्योंकि माँ ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग सफेद है।प्रसाद: खीर, फल, शुद्ध घी, शहद आदि का प्रसाद अर्पित किया जाता है।

चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन का दिन विशेष रूप से आत्मनिर्भरता, तप और ध्यान की ओर निर्देशित होता है। इस दिन की पूजा से मानसिक शांति और समर्पण की भावना प्राप्त होती है।



बिहार/बेगुसराय/बरौनी: आचार्य अविनाश शास्त्री ने कहा 72 वर्षों के बाद चैत्र नवरात्रि में दुर्लभ संयोग संयोग।

बिहार/बेगुसराय/बरौनी: आचार्य अविनाश शास्त्री ने कहा 72 वर्षों के बाद चैत्र नवरात्रि में दुर्लभ संयोग संयोग।
Markoni DGR Township 
चैत्र नवरात्रि में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, और प्रत्येक दिन एक विशेष रूप से पूजा जाता है। हर दिन एक अलग देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंत्रों का जाप किया जाता है।

यहां पूरी जानकारी दी जा रही है कि कौन से दिन किस देवी की पूजा की जाती है और कौन सा मंत्र जाप किया जाता है:-
Barauni Begusarai Shokhara Choti Bhagvati Durgasthan.
बिहार बेगुसराय बरौनी सोकहारा छोटी भगवती दुर्गा स्थान

मंत्र:
पूजा: शैलपुत्री देवी को हिमालय की पुत्री और दुर्गा का प्रथम रूप माना जाता है। इनकी पूजा से स्थिरता और मानसिक शक्ति मिलती है।
मंत्र:
पूजा: यह रूप देवी दुर्गा का तपस्या और साधना के प्रतीक रूप में होता है। इनकी पूजा से तप और आत्मविश्वास की शक्ति मिलती है।
पूजा: चंद्रघंटा देवी को शांति और समृद्धि की देवी माना जाता है। इनकी पूजा से भय और तनाव से मुक्ति मिलती है।
पूजा: यह देवी सृष्टि की उत्पत्ति और शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी पूजा से जीवन में आनंद और समृद्धि आती है।
पूजा: स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (Kartikeya) की माँ हैं, और इनकी पूजा से संतान सुख और बुराईयों से मुक्ति मिलती है।
6. षष्ठ दिवस (षष्ठी) - कात्यायनी माता
मंत्र:
पूजा: कात्यायनी देवी का रूप शक्तिशाली और विनाशक है। इनकी पूजा से सभी शत्रुओं का नाश होता है।
7. सप्तमी दिवस (सप्तमी) - कालरात्रि माता
मंत्र:
पूजा: कालरात्रि देवी को रात्रि के समय में बुराई का नाश करने वाली देवी माना जाता है। इनकी पूजा से अंधकार और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।
मंत्र:
पूजा: महागौरी देवी की पूजा से सुख-शांति और शुद्धता की प्राप्ति होती है। ये देवी सद्गुणों की प्रतीक हैं।
मंत्र:
पूजा: सिद्धिदात्री देवी को सिद्धियों और इच्छाओं की पूर्णता की देवी माना जाता है। इनकी पूजा से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
यह नवरात्रि में दुर्गा माँ का प्रमुख मंत्र है, जो सम्पूर्ण नवरात्रि में जाप किया जा सकता है।
उपवास और साधना:- इस समय उपवास और व्रत का बहुत महत्व है। आप एक दिन फलाहार (फलों का आहार) लेकर उपवास कर सकते हैं।
साधारणत:- दिन में देवी की पूजा और मंत्र जाप से मानसिक शांति और शक्ति की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के इन दिनों में देवी की पूजा से शुभ फलों की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।ै