गुजरात। गांधीनगर। अमित शाह ने लॉन्च की 'भारत टैक्सी', दो वर्षों में 500 से अधिक शहरों तक विस्तार का लक्ष्य।

अमित शाह ने लॉन्च की 'भारत टैक्सी', दो वर्षों में 500 से अधिक शहरों तक विस्तार का लक्ष्य।

गांधीनगर। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात में सहकारी मॉडल पर आधारित 'भारत टैक्सी' सेवा का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह सेवा यात्रियों को किफायती और भरोसेमंद परिवहन उपलब्ध कराने के साथ-साथ टैक्सी चालकों को मालिकाना हक और बेहतर आय का अवसर देगी। अमित शाह ने घोषणा की कि भारत टैक्सी का विस्तार अगले दो वर्षों में 500 से अधिक शहरों तक किया जाएगा। फिलहाल इसकी शुरुआत गुजरात के चुनिंदा शहरों से की गई है और बाद में इसे देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।







रूस-यूक्रेन युद्ध कब होगा समाप्त? दुनिया की नजर दोनों देशों के फैसले पर।

रूस-यूक्रेन युद्ध कब होगा समाप्त? दुनिया की नजर दोनों देशों के फैसले पर।
अंतरराष्ट्रीय डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब भी इसके समाप्त होने की कोई निश्चित समय-सीमा सामने नहीं आई है। दुनिया भर के आम लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह संघर्ष कब खत्म होगा और दोनों देशों में शांति कब लौटेगी।
हाल के दिनों में रूस ने एक बार फिर कहा है कि शांति समझौते के लिए उसकी पहले से तय शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, यूक्रेन का कहना है कि उसने कई बार शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा है, लेकिन उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के खत्म होने को लेकर पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी है। लगातार चार वर्षों से जारी संघर्ष के बीच शांति वार्ता की चर्चाएं फिर तेज हुई हैं, लेकिन अभी तक किसी स्थायी समझौते के संकेत नहीं मिले हैं। हाल के दिनों में रूस ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा है कि उसकी शांति की शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि यूक्रेन ने युद्धविराम और बातचीत की इच्छा जताई है।

कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि दोनों देश युद्धविराम, कैदियों की अदला-बदली और सीमित समझौतों जैसे भरोसा बढ़ाने वाले कदमों पर सहमत होते हैं, तभी व्यापक शांति समझौते की संभावना मजबूत हो सकती है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इसी बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में मॉस्को और कीव कौन-सा फैसला लेते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध कब समाप्त होगा, इसका सीधा जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। इसकी दिशा दोनों देशों की राजनीतिक इच्छाशक्ति, सैन्य स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पर निर्भर करेगी। तुर्किये सहित कई देश एक बार फिर दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। 

इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्पष्ट किया है कि रूस अपने घोषित सैन्य लक्ष्यों से पीछे नहीं हटेगा। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने और रूस पर दबाव बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच हमले भी जारी हैं, जिससे शांति की राह अभी कठिन दिखाई दे रही है। 



भीषण हीटवेव से जूझ रहा यूरोप, हर घर में एसी क्यों नहीं?

भीषण हीटवेव से जूझ रहा यूरोप, हर घर में एसी क्यों नहीं?

यूरोप: इस समय यूरोप के कई देश भीषण गर्मी और हीटवेव की चपेट में हैं। तापमान कई स्थानों पर सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोप में अधिकांश घर ऐसे समय में बनाए गए थे जब गर्मियां अपेक्षाकृत हल्की होती थीं। इसलिए बड़ी संख्या में घरों में एयर कंडीशनर (एसी) नहीं लगाए गए। इसके अलावा, कई शहरों की ऐतिहासिक इमारतों में एसी लगाना तकनीकी रूप से कठिन या स्थानीय नियमों के कारण सीमित हो सकता है।

ऊर्जा की ऊंची लागत और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण भी लंबे समय तक एसी का उपयोग अपेक्षाकृत कम रहा। हालांकि, लगातार बढ़ती हीटवेव के चलते अब कई देशों में एसी की मांग तेजी से बढ़ रही है।

विशेषज्ञ लोगों को पर्याप्त पानी पीने, दोपहर की तेज धूप से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी स्वास्थ्य संबंधी सलाह का पालन करने की सलाह दे रहे हैं। वहीं, कई यूरोपीय सरकारें भीषण गर्मी से निपटने के लिए राहत और जागरूकता अभियान चला रही हैं।


ज़ीरो बैलेंस के विज्ञापनों पर उठे सवाल, उपभोक्ताओं ने ब्याज दरों में पारदर्शिता की मांग की।

ज़ीरो बैलेंस के विज्ञापनों पर उठे सवाल, उपभोक्ताओं ने ब्याज दरों में पारदर्शिता की मांग की।

बजाज फाइनेंस कंपनी से उपभोक्ता परेशान। ठगी का शिकार। भारत सरकार से जांच कराने की मांग।

जीरो प्रतिशत ब्याज' के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रमित किए जाने का आरोप, जांच की मांग।

जीरो प्रतिशत ब्याज' के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रमित किए जाने का आरोप, जांच की मांग

संवाददाता: अमन कुमार मिश्र।

बरौनी। सोकहारा।

बाजार में "0% ब्याज" या "जीरो प्रतिशत ब्याज" पर ईएमआई का आकर्षक प्रचार उपभोक्ताओं को लुभा रहा है, लेकिन उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में ऐसे ऑफर भ्रामक साबित हो रहे हैं।

उनका कहना है कि ब्याज नहीं लेने का दावा करने के बावजूद ग्राहकों से प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, बीमा शुल्क या अन्य छिपे हुए शुल्क वसूले जाते हैं, जिससे खरीदारी की वास्तविक लागत बढ़ जाती है। 

शिकायतकर्ताओं ने संबंधित नियामक एजेंसियों से ऐसे विज्ञापनों और वित्तीय योजनाओं की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी योजना में अतिरिक्त शुल्क या विशेष शर्तें लागू हैं, तो उनकी जानकारी विज्ञापन में स्पष्ट और प्रमुखता से दी जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ता सही निर्णय ले सकें। 

विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी "0% ब्याज" ऑफर का लाभ लेने से पहले उसकी सभी शर्तों, प्रोसेसिंग फीस, कुल भुगतान राशि और अन्य शुल्कों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए।

कई योजनाओं में ब्याज की लागत उत्पाद की कीमत में पहले से शामिल हो सकती है या अन्य माध्यमों से वसूली जा सकती है।

मुजफ्फरपुर, 29 जून:

कुछ उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि निजी वित्तीय संस्थाओं द्वारा "जीरो प्रतिशत ब्याज" पर ऋण देने का प्रचार किया जाता है, लेकिन बाद में ऋण से जुड़े शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शर्तों के कारण ग्राहकों पर अपेक्षा से अधिक वित्तीय बोझ पड़ता है।

शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि ऋण की सभी शर्तों और कुल लागत की स्पष्ट जानकारी पहले से नहीं दी जाती, जिससे कई लोगों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में प्रभावी ऋण लागत सरकारी बैंकों की तुलना में अधिक महसूस होती है।

उपभोक्ताओं ने संबंधित नियामक संस्थाओं और प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि कहीं भ्रामक प्रचार या नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो आवश्यक कार्रवाई की जाए।

साथ ही, उन्होंने ऋण लेने से पहले सभी दस्तावेज़ों, ब्याज दर, शुल्क और शर्तों को ध्यान से पढ़ने की सलाह भी दी है।

उपभोक्ताओं की प्रमुख मांगें हैं:-

ब्याज दरों की स्पष्ट जानकारी:- विज्ञापन में यह साफ बताया जाए कि कितनी ब्याज दर मिलेगी और किन शर्तों पर मिलेगी।

शर्तों का खुलासा:- यदि अलग-अलग बैलेंस स्तरों पर अलग ब्याज दरें लागू होती हैं, तो इसकी जानकारी प्रमुखता से दी जाए।

छिपे हुए शुल्कों की जानकारी:- ज़ीरो बैलेंस होने के बावजूद यदि कुछ सेवाओं पर शुल्क लगता है, तो उसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए।

भ्रामक प्रचार से बचाव: विज्ञापन ऐसे न हों जिनसे उपभोक्ता को वास्तविक लाभों के बारे में गलत धारणा बने।

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बेगुसराय/पटना। कानून का सम्मान सर्वोपरि, सजा का फैसला केवल न्यायालय करेगा।

कानून का सम्मान सर्वोपरि, सजा का फैसला केवल न्यायालय करेगा।

बेगूसराय/पटना। किसी भी चर्चित मामले में जनता की भावनाएं और प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक होती हैं, लेकिन भारतीय कानून व्यवस्था के अनुसार किसी व्यक्ति को फांसी, आजीवन कारावास या अन्य किसी दंड का निर्णय केवल सक्षम न्यायालय ही दे सकता है। 

कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई, आरोप या प्राथमिकी दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जाता।

संविधान और न्यायिक व्यवस्था के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। किसी भी मामले में जांच, साक्ष्य, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर अदालत अंतिम फैसला सुनाती है। दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार सजा दी जाती है, जबकि आरोप सिद्ध नहीं होने पर संबंधित व्यक्ति को राहत मिलती है।

विधि विशेषज्ञों के अनुसार न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि अदालत के अंतिम निर्णय से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया जा सकता। इसलिए किसी आरोपी को फांसी या अन्य कठोर दंड देने की मांग पर अंतिम निर्णय न्यायालय और कानून के दायरे में ही लिया जाता है।

प्रशासनिक और कानूनी मामलों में पारदर्शिता तथा त्वरित न्याय की मांग करते हुए नागरिकों ने कहा कि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषी को सजा और निर्दोष को न्याय मिल सके। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और कानून के शासन को लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला माना जाता है।

भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे IAS संजीव हंस पर कड़ी कार्रवाई की मांग, जनता में आक्रोश।

भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे IAS संजीव हंस पर कड़ी कार्रवाई की मांग, जनता में आक्रोश।

Sanjeev Hansh crupt Officers District Magistrate 

बेगूसराय/पटना। बिहार कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Sanjeev Hans पर लगे भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के आरोपों को लेकर जनता के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोष सिद्ध होने पर कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियों द्वारा की गई जांच में संजीव हंस और उनके सहयोगियों पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग तथा कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों ने कई स्थानों पर छापेमारी भी की थी।

सूत्रों के अनुसार, संजीव हंस से जुड़े मामलों में कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति, टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और अन्य गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। हाल के वर्षों में उनके खिलाफ कई मामलों में एजेंसियों की कार्रवाई चर्चा का विषय रही है। 

बेगूसराय सहित बिहार के विभिन्न जिलों में लोगों का कहना है कि यदि किसी भी अधिकारी पर लगे आरोप अदालत में सिद्ध होते हैं तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने तक निर्दोष माना जाता है। 

जनता का एक वर्ग प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की मांग कर रहा है तथा चाहता है कि भ्रष्टाचार के मामलों का शीघ्र निपटारा हो ताकि दोषियों को सजा और निर्दोषों को न्याय मिल सके।

संजय गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि, योगदान को किया गया याद।

संजय गांधी की पुण्यतिथि पर देशभर में श्रद्धांजलि, योगदान को किया गया याद।
भारत देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में इनकी छवि को देखते थे। आज भी  भारत की जनता इस छवि को याद करते हैं।
नई दिल्ली, 23 जून। आज पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व Sanjay Gandhi की पुण्यतिथि के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। कई सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके योगदान को स्मरण किया।

मॉं और बेटे ने देश के लिए बलिदान दिया।

श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि संजय गांधी ने युवाओं को राजनीति से जोड़ने तथा देश के विकास के लिए कई पहल करने का प्रयास किया। उपस्थित लोगों ने उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को याद करते हुए कहा कि उनका नाम भारतीय राजनीति के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
इस अवसर पर लोगों ने उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि देश उनके योगदान को आज भी याद करता है। कई श्रद्धांजलि सभाओं में उनके जीवन और राजनीतिक यात्रा पर चर्चा की गई तथा उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि महान नेताओं के कार्यों और विचारों से प्रेरणा लेकर देश के विकास और जनसेवा के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। श्रद्धांजलि सभाओं का समापन दो मिनट का मौन रखकर किया गया।

क्रेमलिन ने लंदन को दी चेतावनी, यूक्रेन के मिसाइल कारखाने पर हमले के बाद बढ़ा तनाव।

According to the official, no information has been provided.


क्रेमलिन ने लंदन को दी चेतावनी, यूक्रेन के मिसाइल कारखाने पर हमले के बाद बढ़ा तनाव।

मॉस्को/लंदन, 24 जून। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 

यूक्रेन द्वारा रूस के एक महत्वपूर्ण मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स कारखाने पर किए गए हमले के बाद क्रेमलिन समर्थक हलकों से ब्रिटेन के खिलाफ कड़ी चेतावनियां सामने आई हैं। 

रूसी पक्ष का आरोप है कि पश्चिमी देशों, विशेष रूप से ब्रिटेन, की मदद के बिना ऐसे गहरे हमले संभव नहीं हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन ने हाल ही में रूस के वोरोनेझ क्षेत्र में स्थित एक मिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया। 

यूक्रेनी सेना का दावा है कि यह संयंत्र रूस की मिसाइल निर्माण क्षमता के लिए महत्वपूर्ण था। हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की भी खबर है।

इसी बीच रूसी मीडिया और कुछ प्रमुख प्रचारकों ने ब्रिटेन को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा है कि यदि लंदन यूक्रेन को लंबी दूरी की मिसाइलें और सैन्य सहायता देता रहा तो रूस जवाबी कदम उठा सकता है। 

कुछ रूसी टिप्पणीकारों ने यहां तक कहा कि रूस को ब्रिटेन के खिलाफ "अल्टीमेटम" जारी करना चाहिए। हालांकि, ऐसी टिप्पणियां आधिकारिक रूसी सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं मानी जातीं।

ब्रिटेन हाल के महीनों में यूक्रेन को सैन्य सहायता बढ़ाने और उसकी वायु रक्षा तथा लंबी दूरी की हमले की क्षमता मजबूत करने का समर्थन करता रहा है। लंदन में हुई उच्चस्तरीय बैठकों में भी यूक्रेन को अतिरिक्त सहायता देने पर चर्चा हुई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन द्वारा रूसी सैन्य और ऊर्जा ढांचे पर लगातार बढ़ते हमलों से मॉस्को पर दबाव बढ़ा है। 

इसके जवाब में रूस की ओर से तीखी बयानबाजी और संभावित प्रतिशोध की चेतावनियां भी तेज हो गई हैं।

निष्कर्ष: यूक्रेन के ताजा हमले के बाद रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। 

हालांकि अभी तक क्रेमलिन की ओर से लंदन पर किसी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन रूसी राजनीतिक और मीडिया हलकों की आक्रामक भाषा ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है।

तारीख पर तारीख" की तर्ज पर कुलियों को "आश्वासन पर आश्वासन"रेलवे कुलियों में बढ़ता असंतोष।

भारत के वर्तमान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव शन्नी देओल की तरह भुमिका निभा रहे हैं।

तारीख पर तारीख" की तर्ज पर कुलियों को "आश्वासन पर आश्वासन"रेलवे कुलियों में बढ़ता असंतोष।

बिकानेर: रेलवे स्टेशन पर  आश्वासन की बौछार कर दी गई।

बीकानेर से विशेष रिपोर्ट:

बीकानेर। हिंदी फिल्म के एक चर्चित संवाद में अभिनेता Sunny Deol कहते हैं, "तारीख पर तारीख मिलती रही, इंसाफ नहीं मिला।

" इसी तर्ज पर रेलवे कुलियों का कहना है कि उन्हें भी वर्षों से "आश्वासन पर आश्वासन" मिल रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम अभी तक दिखाई नहीं दे रहे हैं।

हाल ही में बीकानेर में रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw के दौरे के दौरान कुली प्रतिनिधियों ने अपनी विभिन्न मांगों और समस्याओं को उनके समक्ष रखा। 

कुलियों का कहना है कि हर बार मुलाकात के दौरान उनकी बात ध्यान से सुनी जाती है और सकारात्मक आश्वासन भी दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती।

रेलवे कुलियों का आरोप है कि बदलते समय में उनकी आजीविका पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।

स्टेशन परिसरों में आधुनिक सुविधाओं और नई व्यवस्थाओं के विस्तार के बीच कुली वर्ग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। 

उनका कहना है कि रोजगार सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर लंबे समय से मांगें उठाई जा रही हैं, लेकिन समाधान की प्रक्रिया काफी धीमी है।

कुली संगठनों के अनुसार, जब भी वे रेल मंत्री या रेलवे अधिकारियों से मिलते हैं, उन्हें आश्वासन दिया जाता है कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि, उनका मानना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है

कुलियों की आवाज:

एक कुली प्रतिनिधि ने कहा, "हमें हर बार भरोसा दिलाया जाता है कि हमारी समस्याएं दूर होंगी, लेकिन आज भी हम उसी इंतजार में हैं। 

अब हमें आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए।"

निष्कर्ष:

रेलवे के विकास और आधुनिकीकरण के साथ-साथ स्टेशनों पर वर्षों से सेवा दे रहे कुलियों की समस्याओं के समाधान की मांग भी तेज हो रही है। कुलियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ, तो वे अपने अधिकारों के लिए व्यापक स्तर पर आवाज उठाने को मजबूर होंगे।

बिकानेर रेलवे स्टेशन:रेलवे कुली नौसाद खान ने रेलमंत्री से की मुलाकात, ग्रुप-डी में समायोजन की मांग उठाई।

रेलवे कुली नौसाद खान ने रेलमंत्री से की मुलाकात, ग्रुप-डी में समायोजन की मांग उठाई।

बिकानेर: रेल कुली ने रेलमंत्री को राजस्थानी पाग पहना कर सम्मानित किया।

बीकानेर, 22 जून। रेलवे कुली नौसाद खान ने रेलमंत्री से मुलाकात कर देशभर के रेलवे कुलियों की समस्याओं और मांगों को उनके समक्ष रखा। इस दौरान उन्होंने कुलियों के भविष्य, रोजगार सुरक्षा तथा उन्हें रेलवे के ग्रुप-डी पदों में समायोजित करने की मांग प्रमुखता से उठाई।

नौसाद खान को सभी स्टेशनों पर कार्यरत रेलवे कुली ने धन्यवाद दिया।

नौसाद खान ने रेलमंत्री को बताया कि वर्षों से रेलवे स्टेशनों पर सेवा देने वाले कुली आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि अनुभवी कुलियों को उनकी सेवा और अनुभव है के आधार पर रेलवे के ग्रुप-डी पदों में समायोजित करने की योजना बनाई जाए, जिससे उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
उलाव हवाई अड्डे पर बातचीत दरम्यान प्रधानमंत्री ने भी रेलवे कुलियों को आश्वासन दिया था। क्या हुआ बीजेपी के सभी नेता ढग हैं।

मुलाकात के दौरान रेलमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और सकारात्मक आश्वासन देते हुए कहा कि कुलियों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदमों पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वर्ष 2027 तक कुलियों के कल्याण और उनकी सुविधाओं में सुधार के लिए कुछ न कुछ ठोस प्रयास किए जाएंगे।

रेलमंत्री से मिले आश्वासन के बाद रेलवे कुलियों में उम्मीद की नई किरण जगी है। नौसाद खान ने कहा कि यदि कुलियों के लिए रोजगार सुरक्षा और ग्रुप-डी में समायोजन जैसी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो इससे हजारों कुली परिवारों को लाभ मिलेगा।

रेलवे कुलियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी और लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।