श्रीशैलम। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग। धार्मिक महत्व। पौराणिक कथा। मंदिर की विशेषता। कैसे पहुंचे। दर्शन करने का सर्वोत्तम समय।

श्रीशैलम।आंध्रप्रदेश। मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग। धार्मिक महत्व। पौराणिक कथा। मंदिर की विशेषता। कैसे पहुंचे। दर्शन करने का सर्वोत्तम समय।

धार्मिक महत्व:

यहाँ भगवान शिव “मल्लिकार्जुन” और माता पार्वती “भ्रामराम्बा” के रूप में विराजमान हैं।

यह स्थान एक साथ ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ दोनों है।

मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा:

कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती अपने पुत्र कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैल पर्वत पर आए थे। वहीं शिवजी ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए और “मल्लिकार्जुन” कहलाए।

मल्लिका = माता पार्वती
अर्जुन = भगवान शिव

मंदिर की विशेषताएँ:

द्रविड़ शैली की भव्य वास्तुकला
विशाल गोपुरम और पत्थरों की नक्काशी
कृष्णा नदी के पास प्राकृतिक सुंदरता
महाशिवरात्रि पर विशेष उत्सव

कैसे पहुँचें:

निकटतम शहर: कुरनूल और हैदराबाद
सड़क मार्ग से श्रीशैलम अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

दर्शन का सर्वोत्तम समय:

अक्टूबर से मार्च तथा महाशिवरात्रि का समय सबसे उत्तम माना जाता है।

श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश),मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, शिवभक्ति में डूबा श्रीशैलम।

श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश),मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, शिवभक्ति में डूबा श्रीशैलम।

श्रीशैलम (आंध्र प्रदेश), संवाददाता।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में दूसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह श्रीशैलम मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में स्थित है, जो आंध्र प्रदेश के नल्लमाला पर्वत और कृष्णा नदी के तट पर है।

भारत के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 

आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम स्थित मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर में देश के विभिन्न राज्यों से भक्त पहुंचकर भगवान शिव और माता भ्रामराम्बा के दर्शन कर रहे हैं।

नल्लमाला पर्वतमाला और कृष्णा नदी के रमणीय तट पर स्थित यह प्राचीन तीर्थस्थल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। 

मान्यता है कि यहां भगवान शिव मल्लिकार्जुन तथा माता पार्वती भ्रामराम्बा के रूप में विराजमान हैं। 

यही कारण है कि यह स्थान ज्योतिर्लिंग और शक्ति पीठ, दोनों रूपों में विशेष महत्व रखता है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, विशेष पर्वों और अवकाश के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। 

भक्तों की सुविधा के लिए दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है।

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती अपने पुत्र कार्तिकेय को मनाने के लिए श्रीशैल पर्वत पर आए थे। 

इसी स्थान पर भगवान शिव ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए, जिसके बाद यह तीर्थ ‘मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मंदिर की भव्य द्रविड़ शैली की वास्तुकला, विशाल गोपुरम और उत्कृष्ट पत्थर नक्काशी श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। 

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना से भक्तों को आध्यात्मिक शांति तथा पुण्य की प्राप्ति होती है। 

यही कारण है कि श्रीशैलम देश के प्रमुख शिव तीर्थों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

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भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले।

सोमनाथ मंदिर:आस्था, इतिहास और रहस्यों का अद्भुत संगम।

प्रभास पाटन (गुजरात), संवाददाता।

अरब सागर के तट पर स्थित Somnath Temple आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रेम माने जाने वाले इस मंदिर को भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का गौरव कहा जाता है।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन करने श्राप से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रदेव ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर यहीं श्राप से मुक्ति प्राप्त की थी, जिसके कारण इस तीर्थ का नाम "सोमनाथ" पड़ा। मंदिर का इतिहास संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथा से भरा हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार इस मंदिर पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया। स्वतंत्र भारत में मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य Sardar Vallabhbhai Patel की प्रेरणा से शुरू हुआ और 1951 में इसका उद्घाटन Rajendra Prasad ने किया।

मंदिर का एक प्रमुख आकर्षण "बाणस्तंभ" है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक बीच में कोई भूभाग नहीं है। यह तथ्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच विशेष जिज्ञासा का विषय बना रहता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान Krishna के पृथ्वी से प्रस्थान से जुड़े कई पवित्र स्थल भी मंदिर के आसपास स्थित हैं। इनमें Bhalka Tirth और Triveni Sangam प्रमुख हैं।

प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शाम के समय आयोजित होने वाला साउंड एंड लाइट शो मंदिर के गौरवशाली इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है, जो दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोमनाथ मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और अदम्य संकल्प का प्रतीक है। समुद्र की लहरों के बीच खड़ा यह भव्य मंदिर आज भी सनातन परंपरा की अमर गाथा सुनाता है।

Somnath Temple (सोमनाथ मंदिर) भारत के सबसे प्राचीन और पूजनीय शिव मंदिरों में से एक है। इसे 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है और यह Prabhas Patan में Gujarat के अरब सागर तट पर स्थित है।

सोमनाथ मंदिर का महत्व:

"सोमनाथ" का अर्थ है "चंद्रमा के स्वामी"।

पौराणिक कथाओं के अनुसार चंद्रदेव (सोम) ने यहाँ भगवान शिव की तपस्या की थी और उनके आशीर्वाद से श्रापमुक्त हुए थे।

यह मंदिर हिंदू धर्म में आस्था, पुनर्निर्माण और सांस्कृतिक धैर्य का प्रतीक माना जाता है।

इतिहास:

सोमनाथ मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है। विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों और परंपराओं के अनुसार मंदिर को कई बार नष्ट किया गया और फिर पुनर्निर्मित किया गया।

विशेष रूप से:

Mahmud of Ghazni ने 1025 ईस्वी में मंदिर पर आक्रमण किया था।

बाद की शताब्दियों में भी मंदिर को कई बार क्षति पहुँची।

वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्रता के बाद हुआ, जिसका समर्थन Sardar Vallabhbhai Patel ने किया था।

वर्तमान संरचना का उद्घाटन 1951 में Rajendra Prasad द्वारा किया गया।

सोमनाथ मंदिर के रहस्य और रोचक तथ्य:

1. बाणस्तंभ (Arrow Pillar) का रहस्य:-

मंदिर के दक्षिणी समुद्र तट पर एक स्तंभ है जिसे बाणस्तंभ कहा जाता है। उस पर अंकित है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक बीच में कोई भूभाग नहीं है। यह तथ्य लोगों में विशेष आकर्षण का विषय है क्योंकि मंदिर समुद्र के किनारे स्थित है।

2. स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की मान्यता:-

भक्तों की मान्यता है कि यहाँ स्थित शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। यह धार्मिक आस्था का विषय है और ऐतिहासिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

3. बार-बार पुनर्निर्माण:-

मंदिर का अनेक बार विनाश और पुनर्निर्माण होना इसे भारतीय इतिहास और संस्कृति में विशेष स्थान देता है। कई लोग इसे सनातन परंपरा की दृढ़ता का प्रतीक मानते हैं।

4. श्रीकृष्ण से संबंध:-

हिंदू परंपरा के अनुसार Krishna ने अपने अवतार का अंतिम समय इसी क्षेत्र में बिताया था। निकट स्थित Bhalka Tirth और Triveni Sangam इसी कथा से जुड़े तीर्थ स्थल माने जाते हैं।

दर्शन की जानकारी:-

मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। प्रातःकाल, दोपहर और सायंकाल आरती होती है। शाम का साउंड एंड लाइट शो भी लोकप्रिय है, जिसमें मंदिर का इतिहास प्रस्तुत किया जाता है।

दर्शन के दौरान देखने योग्य स्थान:-

Somnath Temple

Bhalka Tirth

Triveni Sangam

Somnath Beach

Gita Mandir

सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है। इसकी भव्यता, समुद्र तट का वातावरण और इससे जुड़ी कथाएँ इसे भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में स्थान दिलाती हैं।


सियोल / प्योंगयांग, 5 जून 2026 उत्तर कोरिया बना रहा “तबाही का कारखाना”, परमाणु कार्यक्रम तेज।

सियोल / प्योंगयांग, 5 जून 2026 उत्तर कोरिया बना रहा “तबाही का कारखाना”, परमाणु कार्यक्रम तेज।

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश के परमाणु कार्यक्रम को और तेज करने के निर्देश दिए हैं। 

सरकारी मीडिया KCNA के अनुसार, किम ने हाल ही में एक नए परमाणु सामग्री उत्पादन केंद्र का निरीक्षण किया और देश की परमाणु क्षमता को “बहु-गुणा” बढ़ाने का आदेश दिया।
कुछ वर्षों में उत्पादन क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया लगातार अपने यूरेनियम संवर्धन और हथियार-ग्रेड सामग्री उत्पादन को बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में उत्पादन क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है और भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और गहरी हो गई है।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका पहले ही उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ी निगरानी और प्रतिबंध जारी रखे हुए हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव को और बढ़ा सकता है और वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। 

नई दिल्ली।रेल मंत्रालय। रेल भवन।मंडल रेल प्रबंधक।रेल महाप्रबंधक।।कुलियों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश, ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध में उठी आवाज।

नई दिल्ली। रेल मंत्रालय।रेल भवन। रेल महाप्रबंधक। मंडल रेल प्रबंधक।कुलियों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश, ठेकेदारी व्यवस्था के विरोध में उठी आवाज।

रेलवे कुलियों ने आवाज उठाई ठेकेदारी प्रथा बंद करो।बंद करो। रेल मंत्री हाय हाय। वित्त मंत्री हाय हाय। प्रधानमंत्री हाय हाय के नारे लगाए।
बरौनी, प्रतिनिधि।
रेल मंत्रालय। रेल भवन।रेलवे कुलियों के कार्य को ठेकेदारी व्यवस्था से जोड़ने के फैसले के बाद कुलियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। 

सभी रेलवे जंक्शन सहित कई स्टेशनों पर कार्यरत कुलियों का आरोप है कि उनकी वर्षों पुरानी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है, जबकि उनकी समस्याओं और मांगों को सुनने के लिए न तो रेलवे प्रशासन तैयार है और न ही सरकार गंभीर पहल कर रही है।

कुलियों का कहना है कि रेलवे यात्रियों की सुविधा के नाम पर निजी एजेंसियों को काम सौंप रही है, लेकिन लंबे समय से सेवा दे रहे कुलियों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है। 

उनका आरोप है कि सरकार एक ओर रोजगार और श्रमिक हितों की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक रोजगार व्यवस्था को कमजोर करने वाले निर्णय लिए जा रहे हैं।

बरौनी स्टेशन के कुलियों ने कहा कि कई बार अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इससे कुलियों और उनके परिवारों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

कुली संगठनों ने मांग की है कि ठेकेदारी व्यवस्था लागू करने से पहले वर्तमान कुलियों के हितों की रक्षा की जाए तथा उनके साथ संवाद स्थापित किया जाए। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे।

हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कुलियों को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाएंगे।

नई दिल्ली।5 जून। सुप्रीम कोर्ट।सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अटेंडेंट की बहाली पर लगाई अंतरिम रोक।

नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट।सुप्रीम कोर्ट ने बैंक अटेंडेंट की बहाली पर लगाई अंतरिम रोक।
जस्टिस R. Mahadevanकी पीठ ने बैंक अटेंडेंट की बहाली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।
नई दिल्ली, 5 जून।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस Ahsanuddin Amanullah और जस्टिस R. Mahadevanकी पीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले में बैंक अटेंडेंट की बहाली के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई होने तक बहाली के आदेश को प्रभावी नहीं रहने दिया जाएगा। 

अदालत ने मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि बहाली का आदेश कानून और सेवा नियमों के अनुरूप नहीं है, जबकि कर्मचारी पक्ष ने आदेश को उचित बताते हुए उसे बरकरार रखने की मांग की। 

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम राहत देते हुए बहाली पर रोक लगाने का आदेश पारित किया।

मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत सभी कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। 

इस आदेश के बाद संबंधित बैंक और कर्मचारी के बीच चल रहा विवाद फिलहाल यथास्थिति में बना रहेगा।

ब्रासीलिया। सु-आपे। ब्राजील। गन्ने के रस से बनेगी बिजली, विश्व। दुनिया का पहला इथेनॉल इंजन तैयार।

ब्रासीलिया। सु-आपे। ब्राजील। गन्ने के रस से बनेगी बिजली, विश्व। दुनिया का पहला इथेनॉल इंजन तैयार।
गन्ने के रस से इथेनॉल तैयार ब्रासीलिया/सुआपे, ब्राज़ील।  
ब्रासीलिया/सुआपे, ब्राज़ील। ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ब्राज़ील में दुनिया का पहला ऐसा इंजन तैयार किया गया है जो गन्ने से बने इथेनॉल के सहारे बिजली उत्पादन करेगा। यह परियोजना पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


विशेषज्ञों के अनुसार गन्ने के रस को पहले किण्वन (फर्मेंटेशन) और आसवन (डिस्टिलेशन) प्रक्रिया से इथेनॉल में बदला जाता है। इसके बाद इस इथेनॉल का उपयोग विशेष रूप से विकसित इंजन में ईंधन के रूप में किया जाता है। इंजन से प्राप्त यांत्रिक ऊर्जा जनरेटर को चलाती है, जिससे बिजली का उत्पादन होता है।
ब्रासीलिया/सुआपे (ब्राज़ील):

ब्राज़ील में गन्ने से बने इथेनॉल का उपयोग करके बिजली उत्पादन के लिए दुनिया का पहला बड़े पैमाने का इथेनॉल-चालित इंजन तैयार किया गया है। यह परियोजना ब्राज़ील की कंपनी Suape Energia और फ़िनलैंड की Wärtsilä के सहयोग से विकसित की गई है।

इस इंजन में लगभग 90% इथेनॉल और 10% बायोडीज़ल का उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य गन्ने से प्राप्त नवीकरणीय ईंधन के जरिए बिजली पैदा करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना है।

परियोजना फिलहाल परीक्षण चरण में है और इसकी प्रारंभिक उत्पादन क्षमता लगभग 4 मेगावाट बताई गई है। यदि परीक्षण सफल रहते हैं, तो इथेनॉल का उपयोग केवल वाहनों में ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन में भी किया जा सकेगा।

संक्षेप में:
गन्ने से बने इथेनॉल को ईंधन बनाकर बिजली पैदा करने वाला दुनिया का पहला बड़े पैमाने का इंजन ब्राज़ील में तैयार हुआ है, जो स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अवन्तिका (उज्जैन), अवन्तिका (उज्जैन)महाकाल के प्रकोप से कांपा अवन्तिका, अत्याचारी दूषण का अंत।

 दैनिक धर्म समाचार:

अवन्तिका (उज्जैन)महाकाल के प्रकोप से कांपा अवन्तिका, अत्याचारी दूषण का अंत।

महाकालेश्वर मंदिर। उज्जैन, अवन्तिकापुरी 

अवन्तिका (उज्जैन), विशेष संवाददाता।

अवन्तिका नगरी में कल एक चमत्कारिक घटना देखने को मिली, जब भगवान शिव ने महाकाल रूप में प्रकट होकर अत्याचारी असुर दूषण का वध कर दिया। 

लंबे समय से असुर के आतंक से त्रस्त नगरवासियों ने भगवान शिव से रक्षा की प्रार्थना की थी।

जानकारी के अनुसार, दूषण नामक राक्षस धर्म-कर्म और यज्ञों में बाधा डाल रहा था। 

उसके अत्याचारों से परेशान ऋषि-मुनि और ब्राह्मणों ने सामूहिक रूप से भगवान शिव की आराधना शुरू की। 

भक्तों की पुकार सुनते ही धरती से एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और उसी ज्योति से भगवान शिव महाकाल स्वरूप में अवतरित हुए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भगवान महाकाल और दूषण के बीच भीषण युद्ध हुआ। 
अंततः महाकाल ने अपने दिव्य अस्त्रों से असुर का संहार कर धर्म की रक्षा की। 

असुर के वधके बाद पूरे नगर में हर्ष और उत्साह का वातावरण छा गया।

भक्तों के अनुरोध पर भगवान शिव ने उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में निवास करने का वरदान दिया। 

तभी से यह पवित्र धाम महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से प्रसिद्ध है।

अवन्तिका नगरी में प्रकट हुए महाकाल, दुष्ट असुर दूषण का किया संहार

प्राचीन अवन्तिका नगरी (वर्तमान उज्जैन) में आज एक अद्भुत दिव्य घटना घटित हुई। 

नगरवासियों और ब्राह्मणों की प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए और अत्याचारी असुर दूषण का वध कर धर्म की रक्षा की। 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर बाद में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दूषण नामक राक्षस लंबे समय से ऋषि-मुनियों और शिवभक्तों पर अत्याचार कर रहा था। 

भयभीत नागरिकों ने भगवान शिव का आह्वान किया। 

तभी धरती फट गई और एक तेजस्वी ज्योति प्रकट हुई, जिससे भगवान शिव ने महाकाल स्वरूप धारण कर असुर का संहार कर दिया।

नगर के विद्वानों का कहना है कि भगवान शिव के इस रौद्र रूप को "महाकाल" इसलिए कहा गया क्योंकि वे स्वयं काल और मृत्यु के भी स्वामी हैं। 

भक्तों के अनुरोध पर भगवान इसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हो गए, जो आज महाकालेश्वर के नाम से विश्वभर में पूजित है।

विशेष जानकारी:

महाकालेश्वर 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है।
यह ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी होने के कारण विशेष माना जाता है। यहाँ की भस्म आरती विश्वप्रसिद्ध है।

धर्म संदेश:

"जब-जब धर्म पर संकट आता है, महाकाल अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।"
धर्म विशेषज्ञ की राय

धर्माचार्यों का मानना है कि महाकालेश्वर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि धर्म, आस्था और न्याय का प्रतीक है। 

यह कथा संदेश देती है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर सदैव अपने भक्तों के साथ खड़े रहते हैं।


देवघर।झारखंड।देवघर बाबा धाम (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) की पौराणिक कथा।

देवघर। झारखंड। देवघर बाबा धाम (बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग) की पौराणिक कथा।
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक से मनोकामना पूर्ण होती है।

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। इसे बाबा धाम, बैद्यनाथ धाम और कामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है।

06//06/2026

रावण और शिवलिंग की कथा:-

पुराणों के अनुसार, रावण भगवान शिव का परम भक्त था। उसने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उसे एक दिव्य शिवलिंग दिया और कहा कि इसे लंका ले जाओ, लेकिन रास्ते में इसे धरती पर मत रखना, अन्यथा यह वहीं स्थापित हो जाएगा।

देवताओं को भय हुआ कि यदि शिवलिंग लंका पहुँच गया तो रावण और भी शक्तिशाली हो जाएगा। इसलिए उन्होंने लीला रची। यात्रा के दौरान रावण को लघुशंका की आवश्यकता हुई। उसने एक ग्वाले (कुछ कथाओं में बैजू अहीर) को शिवलिंग पकड़ने के लिए दिया और कहा कि इसे नीचे न रखना।

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना और जलाभिषेक से मनो-कामनाएँ पूर्ण होती हैं।

शिवलिंग का भार लगातार बढ़ता गया। ग्वाला उसे अधिक देर तक नहीं संभाल सका और उसने उसे भूमि पर रख दिया। जब रावण लौटा तो उसने बहुत प्रयास किया, लेकिन शिवलिंग को हिला नहीं सका। तब वही शिवलिंग उस स्थान पर स्थायी रूप से स्थापित हो गया, जो आज बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है।

बैद्यनाथ नाम क्यों पड़ा:-

एक मान्यता के अनुसार, तपस्या के दौरान रावण ने अपने सिर भगवान शिव को अर्पित करने शुरू किए थे। जब शिव ने उसे पुनर्जीवित किया और उसके घावों का उपचार किया, तब वे वैद्य (चिकित्सक) के रूप में प्रकट हुए। इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम बैद्यनाथ पड़ा।

धार्मिक महत्व

यह स्थान ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ दोनों माना जाता है।

सावन महीने में लाखों कांवड़िये सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा पर जलाभिषेक करते हैं।

मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना और जलाभिषेक से मनो-कामनाएँ पूर्ण होती हैं।

रिपोर्टर: संवाददाता अमन कुमार मिश्र।

स्थान: देवघर, झारखंड।

प्रकाशन: भारतीय रेलवे कुली समाचार पत्र देश विदेश समाचार समाचार।

देवघर। झारखंड। श्रावणी मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़।

 देवघर से विशेष रिपोर्ट अमन कुमार मिश्र 

देवघर। झारखंड। श्रावणी मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़।

देवघर, झारखंड। विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। 

सावन माह के अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से लाखों कॉवड़िये देवघर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। 

मंदिर परिसर में "बोल बम" और "हर हर महादेव" के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। 

कहा जाता है कि लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। 

प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे शिवलिंग प्रदान किया, लेकिन शर्त रखी कि रास्ते में उसे कहीं धरती पर नहीं रखना होगा। 

देवताओं की लीला के कारण रावण ने देवघर में शिवलिंग भूमि पर रख दिया, जिसके बाद वह वहीं स्थापित हो गया। 

यही स्थान आज बाबा बैद्यनाथ धाम के रूप में प्रसिद्ध है।

श्रावणी मेले को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात की विशेष व्यवस्था की है। 

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, चिकित्सा शिविर तथा विश्राम केंद्र भी बनाए गए हैं।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, बाबा धाम में सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 

यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।