कोलकाता, पश्चिम बंगाल। मंगलवार।“शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही इमाम बोर्ड के सदस्यों में बदलाव”

“शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही इमाम बोर्ड के सदस्यों में बदलाव”
हम भारत में रहते हैं,भारत का खाते हैं। भारत में बंदे मातरम क्यों नहीं बोलेंगे। यह धरती मेरी मां है इस मिट्टी में पले बढ़े हैं। जमियत उलेमा ए हिन्द।
कोलकाता, मंगलवार:

राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के बाद अब प्रशासनिक और धार्मिक संस्थाओं में भी फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद संभालने के तुरंत बाद इमाम बोर्ड के कई सदस्यों को बदला गया है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि नई सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को “पारदर्शी और जवाबदेह” बनाने के उद्देश्य से विभिन्न बोर्डों और समितियों की समीक्षा कर रही है। इसी क्रम में इमाम बोर्ड में भी नए चेहरों को जगह दी गई है।

विपक्ष ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप कर रही है। वहीं सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में राज्य की कई अन्य समितियों और बोर्डों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

“सरकार ने नहीं जारी किया आधिकारिक बयान”

कोलकाता, मंगलवार:

इमाम बोर्ड के सदस्यों में बदलाव की खबरों के बीच राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। 

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, संबंधित विभाग स्तर पर समीक्षा प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय के बाद औपचारिक अधिसूचना जारी की जा सकती है।

इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। विपक्षी दलों ने सरकार से पारदर्शिता बनाए रखने और बदलाव के कारण सार्वजनिक करने की मांग की है। 

वहीं सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि सभी नियुक्तियां नियमों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार की जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार जल्द आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करती है, तो विवाद और अटकलों पर विराम लग सकता है।


लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में भारतीय मूल के तुषार कुमार ने 23 वर्ष की उम्र में बने एल्स्ट्री और बोरे हम वुड के मेयर।

लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में भारतीय मूल के तुषार कुमार ने 23 वर्ष की उम्र में बने एल्स्ट्री और बोरे हम वुड के मेयर।

भारतीय मिडिया की सुर्खियों में छाई हुई, तुषार कुमार,मेयर ब्रिटेन।

लंदन, संवाददाता: 

भारतीय मूल के युवा नेता तुषार कुमार ने ब्रिटेन में नया इतिहास रच दिया है। मात्र 23 वर्ष की उम्र में उन्हें एल्स्ट्री और बोरे हम वुड का मेयर नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वे ब्रिटेन में भारतीय मूल के सबसे कम उम्र के मेयरों में शामिल हो गए हैं।


तुषार कुमार लेबर पार्टी से जुड़े हुए हैं और इससे पहले डिप्टी मेयर तथा टाउन काउंसलर की जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की है।

मेयर बनने के बाद तुषार कुमार ने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को राजनीति, सामाजिक सेवा और सामुदायिक कार्यों में आगे आने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारतीय समुदाय और स्थानीय लोगों ने उनकी इस उपलब्धि पर खुशी जताई है। सोशल मीडिया पर भी तुषार कुमार को लगातार बधाइयाँ मिल रही हैं। उनकी सफलता को भारतीय मूल के युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
तुषार कुमार लेबर पार्टी से जुड़े हैं और उन्होंने King's College London से पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई की है। वे 2023 में टाउन काउंसिल के सदस्य बने थे और इससे पहले डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।

लेबर पार्टी से जुड़े हैं और पहले डिप्टी मेयर तथा टाउन काउंसलर के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। तुषार कुमार ने कहा कि उनका लक्ष्य युवाओं को राजनीति और सामाजिक सेवा में भाग लेने के लिए प्रेरित करना है।

मास्को।कीव। सोमवार। रूस-यूक्रेन युद्ध: रविवार रात ड्रोन और मिसाइल हमलों से दहला मोर्चा।

मास्को।कीव। सोमवार। रूस-यूक्रेन युद्ध: रविवार रात ड्रोन और मिसाइल हमलों से दहला मोर्चा।

मॉस्को/कीव, सोमवार।

मॉस्को/कीव, सोमवार।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में रविवार रात्रि एक बार फिर भारी ड्रोन और मिसाइल हमलों ने तनाव बढ़ा दिया। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया, जिससे कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और नागरिकों में दहशत फैल गई।

यूक्रेनी वायुसेना के अनुसार, रूस ने देर रात बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें दागीं। हमलों का मुख्य निशाना यूक्रेन के ओडेसा, ड्नीप्रो और खारकीव क्षेत्र रहे। कई रिहायशी इमारतों तथा ऊर्जा सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन ने कुछ लोगों के घायल होने की पुष्टि की है।

वहीं रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि यूक्रेन ने मॉस्को क्षेत्र सहित बेलगोरोद और सीमावर्ती इलाकों पर ड्रोन हमले किए। 

रूसी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन मार गिराने का दावा किया, हालांकि कुछ स्थानों पर आग लगने और ढांचागत नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

युद्ध के बढ़ते हवाई हमलों के कारण दोनों देशों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब “ड्रोन युद्ध” का रूप ले चुका है, 

जहां कम लागत वाले लेकिन अत्याधुनिक ड्रोन युद्ध रणनीति का अहम हिस्सा बन गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने लगातार बढ़ रहे हमलों पर चिंता जताई है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। हालांकि फिलहाल युद्ध थमता नजर नहीं आ रहा।

बढ़ते हमलों पर दुनिया चिंतित, रूस-यूक्रेन युद्ध थमने के आसार नहीं।

संयुक्त राष्ट्र/कीव/मॉस्को, सोमवार।

रूस और यूक्रेन के बीच लगातार तेज होते ड्रोन और मिसाइल हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गहरी चिंता व्यक्त की है। 

कई देशों और वैश्विक संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने तथा युद्धविराम की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि लगातार बढ़ते हमले आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। 

यूरोपीय देशों ने भी युद्ध के विस्तार पर चिंता जताते हुए कूटनीतिक समाधान निकालने की जरूरत बताई है।

रविवार रात्रि रूस और यूक्रेन के बीच हुए ताजा हमलों में कई शहरों में विस्फोट हुए और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। 
दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमले करने के आरोप लगाए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध अब लंबे और तकनीकी संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसमें ड्रोन युद्ध अहम भूमिका निभा रहा है। 

लगातार हो रहे हमलों के कारण आम लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की अपीलें तेज हो रही हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल युद्ध थमता नजर नहीं आ रहा।

नई दिल्ली, एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर की चाल से तय हो रहा सोना।

नई दिल्ली, एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर की चाल से तय हो रहा सोना।

।घरेलू नीतियों का असर सीमित, वैश्विक तनाव से बढ़ी चमक।

नई दिल्ली। देश में सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। आम लोगों के लिए शादी-ब्याह और निवेश दोनों महंगे होते जा रहे हैं। 

हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की बढ़ती कीमतों के पीछे सिर्फ घरेलू राजनीति या किसी एक सरकार की भूमिका नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और मुद्रा विनिमय की बड़ी भूमिका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में सोने की कीमत बढ़ते ही उसका सीधा असर भारतीय बाजार पर दिखाई देता है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी सोने को और महंगा बना देती है।

हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव, वैश्विक मंदी की आशंका और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की सुरक्षित निवेश की तलाश ने सोने की मांग बढ़ाई है।

जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सोने में निवेश करते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आती है।

बाजार जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार की आयात शुल्क और टैक्स नीति का भी कुछ असर पड़ता है, लेकिन
यह असर सीमित होता है। 

यदि आयात शुल्क बढ़ता है तो घरेलू कीमतें ऊपर जाती हैं, जबकि शुल्क घटने पर कुछ राहत मिल सकती है। बावजूद इसके, असली दिशा अंतरराष्ट्रीय बाजार ही तय करता है।

ज्वेलरी कारोबारियों के मुताबिक, भारतीय बाजार में शादी और त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने से भी कीमतों को सहारा मिलता है। 

निवेश के रूप में सोने की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण मांग मजबूत बनी हुई है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बनी रहेगी और डॉलर मजबूत रहेगा, तब तक सोने की कीमतों में नरमी की संभावना कम दिखाई देती है।

बीजिंग। रूस-चीन संबंधों को नई मजबूती, राष्ट्रपति पुतिन चीन दौरे पर।

बीजिंग। रूस-चीन संबंधों को नई मजबूती, राष्ट्रपति पुतिन चीन दौरे पर।

बीजिंग,एजेंसी:18 मई2026 ब्लादिमीर पुतिन चीन यात्रा।

बीजिंग, 18 मई:

रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय चीन दौरे पर पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग  से होगी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

क्रेमलिन ने कहा है कि यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और वार्ता के दौरान ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि रूस और चीन कई नए समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच मॉस्को और बीजिंग लगातार एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं।

इस दौरे को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अहम माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह यात्रा अमेरिका और पश्चिमी देशों को स्पष्ट संदेश देती है कि रूस और चीन अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की तैयारी में हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी “वैश्विक स्थिरता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था” को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नई दिल्ली। सोने के दाम ने तोड़े रिकॉर्ड, आम लोगों की बढ़ी चिंता बेटी की शादी कैसे करें।

नई दिल्ली। सोने के दाम ने तोड़े रिकॉर्ड, आम लोगों की बढ़ी चिंता बेटी की शादी कैसे करें।

गरीब की बेटी के शादी करना हो गया दुर्लभ।

नई दिल्ली, सोमवार:

देश में सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। पिछले कुछ वर्षों में सोना रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार महंगाई, अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ती निवेश मांग इसके मुख्य कारण हैं।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1970 में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग ₹184 थी, जो अब बढ़कर कई शहरों में ₹90,000 से ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच चुकी है। खासकर कोविड महामारी के बाद सोने की कीमतों में तेज उछाल देखा गया।

सर्राफा बाजार के व्यापारियों का कहना है कि शादी और त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने से कीमतों पर और असर पड़ रहा है। वहीं डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति भी सोने के भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जारी रहती है, तो आने वाले समय में सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि बीच-बीच में हल्की गिरावट भी संभव है।

आम लोगों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण अब सोना खरीदना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो गया है। कई परिवार अब हल्के वजन के गहनों की ओर रुख कर रहे हैं।

रिपोर्ट: विशेष संवाददाता भारतीय रेलवे कुली समाचार पत्र देश विदेश समाचार। अमन कुमार।

भारत में सोने का दाम कुछ प्रमुख सालों की कीमत (लगभग)

       साल 10 ग्राम सोने की औसत कीमत।

1964 -----------------------------------------------₹63

1970 -----------------------------------------------₹184

1980 -----------------------------------------------₹1,330

1990------------------------------------------------₹3,200

2000-----------------------------------------------  ₹4,400

2005------------------------------------------------ ₹7,000

2010 ------------------------------------------------₹18,500

2015 ---₹26,000

2020 ₹48,000

2023 ₹60,000+

2024 ₹70,000–75,000+

2026 कई शहरों में ₹ 90,000–1,00,000 के आसपास कीमतें शहर, टैक्स और शुद्धता (22K/24K) के अनुसार थोड़ी बदल सकती हैं। 

       सोने का दाम क्यों बढ़ता है? (आसान भाषा में) 

सोना तब महंगा होता है जब लोग उसे “सुरक्षित निवेश” मानते हैं। मुख्य कारण महंगाई (Inflation) रुपये की कीमत घटती है, इसलिए सोना महंगा दिखने लगता है।

डॉलर और अंतरराष्ट्रीय बाजार:

दुनिया में सोना डॉलर में ट्रेड होता है। डॉलर मजबूत या कमजोर होने से असर पड़ता है।

युद्ध या आर्थिक संकट:

जैसे कोविड, रूस-यूक्रेन युद्ध आदि के समय लोग शेयर छोड़कर सोना खरीदते हैं।

शादी और त्योहारों की मांग।

भारत में त्योहार और शादी के मौसम में खरीद बढ़ती है।

सरकार का टैक्स और आयात शुल्क।

भारत ज्यादातर सोना बाहर से खरीदता है, इसलिए Import Duty बढ़ने पर दाम भी बढ़ते हैं।

कम ब्याज दरें: जब बैंक FD पर कम ब्याज देते हैं, लोग सोने में पैसा लगाते हैं।

2010 के बाद भारत में सोने (24K, लगभग प्रति 10 ग्राम) के दामों में वृद्धि का क्रम इस प्रकार रहा:

वर्ष सोने का औसत दाम (₹/10 ग्राम) पिछले वर्ष से बदलाव।

2010 ₹18,500 —

2011 ₹26,400 ▲ 42.7%

2012 ₹31,050 ▲ 17.6%

2013 ₹29,600 ▼ 4.7%

2014 ₹28,006 ▼ 5.4%

2015 ₹26,343 ▼ 5.9%

2016 ₹28,623 ▲ 8.7%

2017 ₹29,667 ▲ 3.6%

2018 ₹31,438 ▲ 6.0%

2019 ₹35,220 ▲ 12.0%

2020 ₹42,700 ▲ 21.2%

2021 ₹48,720 ▲ 14.1%

2022 ₹52,950 ▲ 8.7%

2023 ₹60,100 ▲ 13.5%

2024 ₹72,500 ▲ 20.6%

2025 ₹78,200 ▲ 7.9%

मुख्य बातें: 2010 से 2012 तक सोने में तेज़ बढ़ोतरी हुई।2013–2015 के बीच कीमतों में गिरावट देखी गई। 2019 के बाद फिर लगातार तेज़ वृद्धि हुई, खासकर 2020 (कोविड काल) और 2024 में।


कोलकाता: पश्चिम बंगाल।ओबीसी (OBC) सुची रद्द कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य की OBC सूची खत्म करने और नई जांच समिति बनाने का फैसला।

शुभेंदु अधिकारी की दूसरी कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रमुख निर्णय ये रहे।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल। ओबीसी (OBC) सुची रद्द,कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य की OBC सूची खत्म करने और नई जांच समिति बनाने का फैसला। 

कोलकाता पश्चिम बंगाल हाईकोर्ट का निर्णय सर्वोपरि माना जाता है।

शुभेंदु अधिकारी की दूसरी कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रमुख निर्णय ये रहे।

महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी

राज्य की महिलाओं को हर महीने ₹3000 आर्थिक सहायता देने का फैसला। योजना 1 जून 2026 से लागू करने की घोषणा।

    महिलाओं के लिए सरकारी बसों में फ्री यात्रा


1 जून से सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त सफर की अनुमति।

            7 सातवें वें वेतन आयोग को मंजूरी।

राज्य कर्मचारियों, शिक्षा बोर्ड और सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों के लिए 7वें वेतन आयोग के गठन को स्वीकृति।

धार्मिक आधार पर मिलने वाली सरकारी सहायता बंद।

मौलवियों/धार्मिक समूहों को दी जा रही सरकारी आर्थिक मदद समाप्त करने का निर्णय।

         पश्चिम बंगाल की मौजूदा OBC सूची रद्द।

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के बाद राज्य की OBC सूची खत्म करने और नई जांच समिति बनाने का फैसला।

इन फैसलों की जानकारी राज्य सरकार की मंत्री अग्नि मित्रा पॉल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।



आंध्रप्रदेश,एजेंसी। श्रीकाकुलम जिले के नरसन्नापेटा। में जनसंख्या बढ़ाने के लिए आंध्र सरकार का बड़ा ऐलान।

आंध्रप्रदेश,एजेंसी। श्रीकाकुलम जिले के नर सन्ना पेटा। में जनसंख्या बढ़ाने के लिए आंध्र सरकार का बड़ा ऐलान।
तीसरे बच्चे पर ₹30 हजार, चौथे पर ₹40 हजार की सहायता।
N. चंद्र बाबू नायडू ने राज्य में घटती जनसंख्या दर को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अब आंध्र प्रदेश में तीसरे बच्चे के जन्म पर परिवार को ₹30,000 और चौथे बच्चे पर ₹40,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा श्रीकाकुलम जिले के नर सन्ना पेटा में आयोजित एक जनसभा के दौरान की। 

उन्होंने कहा कि राज्य में जन्म दर लगातार घट रही है, जिससे भविष्य में युवा आबादी कम होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहायता राशि सीधे महिला के खाते में भेजी जाएगी, ताकि परिवार को बच्चों के पालन-पोषण में आर्थिक मदद मिल सके। सरकार जल्द ही इस योजना की विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण भारत के कई राज्यों में प्रजनन दर तेजी से घट रही है। आंध्र प्रदेश सरकार का यह कदम देश में जनसंख्या संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक नई पहल माना जा रहा है।

हेग/नई दिल्ली, सोमवार। नरेंद्र मोदी ने हेग में भारतीय समुदाय को किया संबोधित।

हेग/नई दिल्ली, सोमवार। नरेंद्र मोदी ने हेग में भारतीय समुदाय को किया संबोधित।
हेग/नई दिल्ली, सोमवार।
नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड्स के शहर हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया में तेजी से उभरती हुई आर्थिक और तकनीकी शक्ति बनकर सामने आया है। 

उन्होंने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि विदेशों में बसे भारतीय देश की संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को विश्वभर में सम्मान दिला रहे हैं।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। 
और देश स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर तथा ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 
उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड मिलकर नई तकनीकों और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारी कर सकते हैं।
नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। 
अपने संबोधन में उन्होंने भारत-नीदरलैंड संबंधों, तकनीक, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा और वैश्विक चुनौतियों पर बात की। 
पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया कोविड, युद्ध और ऊर्जा संकट जैसे “आपदाओं के दशक” से गुजर रही है, लेकिन भारत बड़े सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि विदेशों में बसे भारतीय भारत की संस्कृति और मूल्यों के “ब्रांड एंबेसडर” हैं। 
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग मौजूद रहे और पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान “भारत माता की जय” और “मोदी-मोदी” के नारों से पूरा सभागार गूंज उठा। 
भारतीय समुदाय के लोगों ने पारंपरिक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत-नीदरलैंड संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


स्टोकहोल्म,सिटी। स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी।

स्टोक होल्म,सिटी। स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान पाने वाले भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी।

।भारत-स्वीडन संबंधों को मिली नई मजबूती।

Narendra Modi को स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल “Order of the Polar Star” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विदेशी नागरिकों को उनके उत्कृष्ट योगदान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत बनाने के लिए दिया जाता है।

स्वीडन सरकार ने कहा कि भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते सहयोग, व्यापार, तकनीक और वैश्विक साझेदारी को नई दिशा देने में प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस सम्मान को दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है।

क्या है “Order of the Polar Star”

Order of the Polar Star की स्थापना वर्ष 1748 में स्वीडन के राजा फ्रेडरिक प्रथम ने की थी। यह सम्मान मुख्य रूप से उन विदेशी नागरिकों को दिया जाता है जिन्होंने स्वीडन और दुनिया के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने में विशेष योगदान दिया हो।

इस सम्मान का प्रतीक सफेद क्रॉस और चमकता हुआ सितारा है, जो शांति, सहयोग और वैश्विक मित्रता का संदेश देता है।

भारत के लिए क्यों खास:

विशेषज्ञों के अनुसार यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और कूटनीतिक प्रभाव का संकेत है। हाल के वर्षों में भारत और Sweden के बीच हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, रक्षा और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सम्मान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मजबूत स्थिति को भी दर्शाता है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी।