दारूकावन। दारुकावन में भक्त की पुकार पर प्रकट हुए भगवान शिव, नागेश ज्योतिर्लिंग की हुई स्थापना

दारूकावन।दारुकावन में भक्त की पुकार पर प्रकट हुए भगवान शिव,नागेश ज्योतिर्लिंग की हुई स्थापना।

द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक यह भी अद्भुत ज्योतिर्लिंग है

विशेष संवाददाता: दारूकावन.

दारुकावन क्षेत्र में राक्षसों के अत्याचार से त्रस्त जनजीवन के बीच एक अद्भुत घटना ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दारुक और दारुका नामक राक्षस दंपति लंबे समय से क्षेत्र में आतंक फैला रहे थे। उनके अत्याचारों से ऋषि, साधु और सामान्य नागरिक भयभीत थे।

सूत्रों के अनुसार, राक्षसों ने हाल ही में सुप्रिय नामक एक शिवभक्त वैश्य सहित अनेक लोगों को बंदी बना लिया था। कारागार में रहते हुए भी सुप्रिय ने भगवान शिव की आराधना जारी रखी और अन्य बंदियों को भी “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के जप के लिए प्रेरित करता रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब राक्षसों ने सुप्रिय को दंडित करने का प्रयास किया, तब उसने पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण किया। इसी दौरान एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और भगवान शिव ने अपने तेजस्वी स्वरूप में दर्शन दिए। बताया जाता है कि शिव के प्रकट होते ही राक्षसों का आतंक समाप्त हो गया और बंदियों को मुक्ति मिल गई।

घटना के बाद भक्तों में भारी उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव ने भक्त-रक्षा का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया है। सुप्रिय की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान होने का आशीर्वाद दिया। इसके बाद यह स्थान “नागेश ज्योतिर्लिंग” के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

धार्मिक विद्वानों का मानना है कि यह घटना भक्ति, श्रद्धा और धर्म की विजय का प्रतीक है। उनका कहना है कि सच्ची आस्था के सामने संकट और अत्याचार अधिक समय तक टिक नहीं सकते।

भक्तों की बड़ी संख्या इस पवित्र स्थल पर पहुँच रही है और भगवान नागेश्वर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रही है।


“नागेशं दारुकावने” की पौराणिक कथा।सुप्रिय वैश्य की भक्ति, भगवान शिव का प्रकट होना। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना। "नागेश" नाम का अर्थ। स्थान का विभिन्न मत।

“नागेशं दारुकावने” की पौराणिक कथा। सुप्रिय वैश्य की भक्ति, भगवान शिव का प्रकट होना। नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना। "नागेश" नाम का अर्थ। स्थान का विभिन्न मत।

द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन।

यह कथा मुख्य रूप से Shiva Purana में वर्णित है और Nageshwar Jyotirlinga ज्योतिर्लिंग की महिमा से जुड़ी मानी जाती है।

दारुक और दारुका की कथा

प्राचीन काल में दारुकावन नामक एक विशाल वन था। वहाँ दारुक नामक राक्षस और उसकी पत्नी दारुका रहते थे। दारुका ने देवी Parvati की कठोर तपस्या करके एक वरदान प्राप्त किया था। उस वरदान के प्रभाव से वह अपने पूरे वन को इच्छानुसार कहीं भी ले जा सकती थी।

वरदान पाकर दारुक और दारुका अत्याचारी बन गए। वे ऋषियों, साधुओं और सामान्य लोगों को सताने लगे। उनके भय से क्षेत्र में धर्म-कर्म बाधित होने लगा।

सुप्रिय वैश्य की भक्ति

एक बार राक्षसों ने सुप्रिय नामक शिवभक्त वैश्य और अनेक लोगों को पकड़कर कारागार में डाल दिया। कारागार में भी सुप्रिय ने भगवान शिव का स्मरण नहीं छोड़ा। वह सभी बंदियों को “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करने के लिए प्रेरित करता रहा।

जब राक्षसों को यह पता चला तो वे क्रोधित हो गए और सुप्रिय को मारने का निश्चय किया।

भगवान शिव का प्रकट होना

संकट की घड़ी में सुप्रिय ने पूर्ण श्रद्धा से भगवान शिव की प्रार्थना की। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव वहाँ ज्योतिर्मय रूप में प्रकट हुए। कहा जाता है कि उसी समय एक दिव्य लिंग प्रकट हुआ और शिव ने अपने भक्त की रक्षा की।

भगवान शिव ने राक्षसों का विनाश किया और धर्म की पुनः स्थापना की।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना

भक्त सुप्रिय की प्रार्थना पर भगवान शिव उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हो गए। चूँकि यह स्थान दारुकावन कहलाता था, इसलिए यह ज्योतिर्लिंग “नागेशं दारुकावने” नाम से प्रसिद्ध हुआ।

“नागेश” नाम का अर्थ

“नागेश” का अर्थ है नागों के ईश्वर या सर्पों के स्वामी। भगवान शिव का सर्पों से विशेष संबंध माना जाता है; वे अपने गले में नाग धारण करते हैं, इसलिए यह नाम उनके लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

स्थान के बारे में विभिन्न मत

नागेश ज्योतिर्लिंग के वास्तविक स्थान को लेकर अलग-अलग परंपराएँ हैं:

Nageshwar Jyotirlinga (गुजरात)-सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत।
Aundha Nagnath (महाराष्ट्र)-कुछ परंपराएँ इसे नागेश ज्योतिर्लिंग मानती हैं।
Jageshwar (उत्तराखंड)-कुछ विद्वानों द्वारा दारुकावन से जोड़ा जाता है।

इसी कारण “नागेशं दारुकावने” की भौगोलिक पहचान पर मतभेद मिलते हैं, लेकिन कथा का मुख्य संदेश भक्ति, श्रद्धा और भगवान शिव द्वारा भक्त-रक्षा है।

दारूकावन। "नागेशं दारुकावने” की कथा से कुछ प्रमुख शिक्षाएँ मिलती हैं।

दारूकावन। "नागेशं दारुकावने” की कथा से कुछ प्रमुख शिक्षाएँ मिलती हैं।

इस कथा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। 

ऐतिहासिक या भौगोलिक दृष्टि से यह चर्चा हो सकती है कि “दारुकावन” वास्तव में कहाँ था, लेकिन पुराणों का उद्देश्य केवल स्थान बताना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक संदेश देना भी होता है।


12 ज्योतिर्लिंगों के स्मरण-श्लोक में आता है।

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालम् ओंकारम् अमलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

भक्ति संकट से बड़ी है

सुप्रिय वैश्य कारागार में था, उसके पास न शक्ति थी, न साधन। फिर भी उसने भगवान शिव का स्मरण नहीं छोड़ा। 
यह दर्शाता है कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, श्रद्धा बनी रह सकती है।

सत्संग का प्रभाव

सुप्रिय ने केवल स्वयं जप नहीं किया, बल्कि अन्य बंदियों को भी “ॐ नमः शिवाय” का जप कराया। 

इससे यह शिक्षा मिलती है कि सच्चा भक्त दूसरों को भी धर्ममार्ग पर प्रेरित करता है।

अहंकार का पतन निश्चित है

दारुक और दारुका को वरदान मिला था, पर उन्होंने उसका उपयोग अत्याचार के लिए किया। 

पुराणों में बार-बार यह संदेश मिलता है कि शक्ति जब अहंकार से जुड़ती है तो अंततः विनाश का कारण बनती है।

ईश्वर भक्त की रक्षा करते हैं

कथा का केंद्रीय भाव यही है कि भगवान शिव अपने भक्त की पुकार सुनते हैं। 

रक्षा का स्वरूप चमत्कारिक हो या आंतरिक शक्ति के रूप में, भक्त को अकेला नहीं छोड़ा जाता।

ज्योतिर्लिंग का आध्यात्मिक अर्थ

“ज्योतिर्लिंग” केवल एक मंदिर या पत्थर का लिंग नहीं, बल्कि शिव के अनंत, प्रकाशमय और निराकार स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। 

इसलिए नागेश ज्योतिर्लिंग की कथा बाहरी घटना के साथ-साथ आंतरिक आध्यात्मिक जागरण का भी संकेत देती है।

एक रोचक बात यह भी है कि द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में प्रत्येक ज्योतिर्लिंग के साथ उसका क्षेत्र जोड़ा गया है,

जैसे Somnath Jyotirlinga, Mallikarjuna Jyotirlinga, Kashi Vishwanath Temple आदि। “नागेशं दारुकावने” में “दारुकावन” का उल्लेख इसलिए विशेष महत्व रखता है 

कि इसी शब्द ने बाद के युगों में उसके वास्तविक स्थान पर विभिन्न मतों को जन्म दिया।

नई दिल्ली। ज्ञान के प्रमुख माध्यम: भारत में कागज़ से पहले ताड़पत्र और भोजपत्र थे।

 विशेष समाचार रिपोर्ट:

ज्ञान का प्रमुख माध्यम: ताड़ पत्र और भोजपत्र।

ज्ञान के प्रमुख माध्यम: भारत में कागज़ से पहले ताड़पत्र और भोजपत्र थे।

नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में जहाँ जानकारी कुछ ही सेकंड में उपलब्ध हो जाती है, वहीं प्राचीन भारत में ज्ञान के संरक्षण और प्रसार के लिए ताड़पत्र और भोजपत्र का उपयोग किया जाता था। इतिहासकारों के अनुसार, कागज़ के व्यापक प्रचलन से पहले धार्मिक, दार्शनिक और साहित्यिक ग्रंथ इन्हीं माध्यमों पर लिखे जाते थे।

ताड़ के पेड़ों की पत्तियों को विशेष प्रक्रिया से तैयार कर ताड़पत्र बनाया जाता था। इन पत्तियों पर लेखन के बाद उन्हें सुरक्षित रखने के लिए धागों से बाँधकर ग्रंथ का रूप दिया जाता था। दक्षिण भारत और पूर्वी भारत में ताड़पत्र का व्यापक उपयोग होता था।

वहीं, भोजपत्र हिमालयी क्षेत्रों में पाए जाने वाले भोज वृक्ष की छाल से तैयार किया जाता था। इसकी सतह अपेक्षाकृत चिकनी होने के कारण इस पर लिखना सुविधाजनक माना जाता था। कई प्राचीन संस्कृत ग्रंथ और धार्मिक पांडु लिपियाँ भोजपत्र पर लिखी गई थीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन पारंपरिक लेखन सामग्रियों ने सदियों तक भारतीय ज्ञान, संस्कृति और साहित्य को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज भी संग्रहालयों और पुस्तकालयों में सुरक्षित अनेक ताड़पत्र और भोजपत्र पांडु लिपियाँ भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत की गवाही देती हैं।

पहले के लोग कागज़ के व्यापक उपयोग से पहले अलग-अलग सामग्री पर लिखते थे। समय और स्थान के अनुसार माध्यम बदलते रहे।

पत्थर: शिलालेख और महत्वपूर्ण घोषणाएँ पत्थरों पर उकेरी जाती थीं। उदाहरण के लिए, Edicts of Ashoka से जुड़े अभिलेख पत्थरों और स्तंभों पर लिखे गए थे।

मिट्टी की तख्तियाँ — प्राचीन Mesopotamia में गीली मिट्टी की तख्तियों पर लिखकर उन्हें सुखाया या पकाया जाता था।

ताड़पत्र (Palm Leaves) — India और दक्षिण एशिया के कई भागों में ग्रंथ ताड़ के पत्तों पर लिखे जाते थे।

भोजपत्र (Birch Bark) — हिमालयी क्षेत्रों में भोज वृक्ष की छाल पर लेखन किया जाता था।



भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग।(महाराष्ट्र)। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था, दर्शन को लेकर बढ़ा उत्साह।

 मुख्य समाचार:

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में उमड़ी श्रद्धालुओं की आस्था, दर्शन को लेकर बढ़ा उत्साह।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग दर्शन करने का महत्व।

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

महादेव के दरबार में भक्तों की भीड़, भीमाशंकर बना आस्था का केंद्र।

सह्याद्रि की वादियों में गूंजा हर-हर महादेव, भीमाशंकर में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या।

भीमाशंकर (महाराष्ट्र), संवाददाता।

सह्याद्रि पर्वतमाला की गोद में स्थित Bhimashankar Jyotirlinga में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। 

भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में शामिल यह तीर्थस्थल देशभर से आने वाले भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने दैत्य भीम का संहार कर इसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए थे। यही कारण है कि इस पवित्र धाम को "भीमाशंकर" के नाम से जाना जाता है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन एवं पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, 

शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से श्रावण मास, सोमवार और 

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

मंदिर परिसर प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है। 

घने जंगलों और वन्यजीव अभयारण्य के बीच स्थित यह तीर्थ धार्मिक महत्व के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों को भी आकर्षित करता है। 

यहां से निकलने वाली भीमा नदी क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण नदी मानी जाती है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि भीमाशंकर धाम में पहुंचते ही एक अद्भुत आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। 

मंदिर की प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक वातावरण भक्तों को शिवभक्ति में लीन कर देता है।


नई दिल्ली: वन नेशन वन राशन कार्ड योजना कागज़ों में सफल, ज़मीन पर लाभार्थी अब भी परेशान।

नई दिल्ली: वन नेशन वन राशन कार्ड योजना कागज़ों में सफल, ज़मीन पर लाभार्थी अब भी परेशान।

वन नेशन वन कार्ड 

संवाददाता, विशेष रिपोर्ट:

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी "वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC)" योजना का उद्देश्य देश के किसी भी राज्य में रहने वाले पात्र राशन कार्ड धारकों को कहीं से भी राशन प्राप्त करने की सुविधा देना है। सरकार के अनुसार यह योजना पूरे देश में लागू की जा चुकी है और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को इससे जोड़ा गया है।

हालांकि कई क्षेत्रों में लाभार्थियों का कहना है कि योजना का पूरा लाभ उन्हें अभी भी नहीं मिल रहा है। प्रवासी मजदूरों और गरीब परिवारों को कई बार तकनीकी समस्याओं, आधार प्रमाणीकरण में दिक्कत, सर्वर डाउन रहने तथा स्थानीय स्तर पर जानकारी के अभाव के कारण राशन लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

योजना के तहत पात्र परिवार देश के किसी भी उचित मूल्य की दुकान से अपना निर्धारित राशन प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से उन श्रमिकों के लिए शुरू की गई थी जो रोजगार के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में जाते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई राशन दुकानों पर अभी भी लाभार्थियों को प्रक्रिया की सही जानकारी नहीं दी जाती। कुछ स्थानों पर मशीनों की तकनीकी खराबी और नेटवर्क समस्याओं के कारण लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता के लिए तकनीकी ढांचे को और मजबूत करने, राशन दुकानदारों को प्रशिक्षित करने तथा लाभार्थियों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। तभी "वन नेशन वन राशन कार्ड" का वास्तविक लाभ देश के हर पात्र नागरिक तक पहुंच सकेगा।

निष्कर्ष:

योजना राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने के बावजूद कई स्थानों पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन में चुनौतियां बनी हुई हैं। सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर दूर करना समय की मांग है।

मास्को।कीव।अजोव सागर में यूक्रेन का बड़ा हमला, पांच जहाज़ बने निशाना।

    ब्रेकिंग न्यूज़:

अजोव सागर में यूक्रेन का बड़ा हमला, पांच जहाज़ बने निशाना।

अजोव सागर में यूक्रेन का बड़ा हमला, पांच जहाज़ बने निशाना

मॉस्को/कीव, 6 जून: यूक्रेन ने अजोव सागर (Sea of Azov) में रूस के नियंत्रण वाले क्षेत्रों के पास पांच जहाज़ों पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है। यूक्रेनी ड्रोन बलों के अनुसार, हमले में मालवाहक जहाज़ों और एक टैंकर को निशाना बनाया गया, जिन पर यूक्रेन ने सैन्य सामग्री और कथित तौर पर कब्जे वाले क्षेत्रों से अनाज ढोने का आरोप लगाया है।

रूस ने आरोप लगाया है कि हमले में दो मालवाहक जहाज़ों — नात्रा (Natra) और ज़िरकॉन (Zircon) को नुकसान पहुंचा। इन जहाज़ों पर सवार अज़रबैजान के नागरिकों में कम से कम पांच लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।

रूसी विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई को "आतंकी हमला" बताते हुए इसकी निंदा की है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि निशाना बनाए गए जहाज़ रूस के युद्ध प्रयासों में सहयोग कर रहे थे।

इस घटना के बाद अजोव सागर और काला सागर क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच जारी युद्ध में समुद्री मार्गों और बंदरगाहों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।




मॉस्को, 6 जून। अजोव सागर में यूक्रेन का ड्रोन अटैक: पांच जहाज़ निशाने पर, 5 लोगों की मौत।

मॉस्को, 6 जून। अजोव सागर में यूक्रेन का ड्रोन अटैक: पांच जहाज़ निशाने पर, 5 लोगों की मौत।

अजोव सागर। यूक्रेन और रूस युद्ध 

मॉस्को, 6 जून। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अजोव सागर में यूक्रेन ने बड़ा ड्रोन हमला किया है। यूक्रेन ने दावा किया कि उसके ड्रोन ने रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों के बंदरगाहों और तटीय जलक्षेत्र में पांच जहाज़ों को निशाना बनाया। वहीं इस हमले में कम से कम पांच लोगों की मौत और तीन के घायल होने की खबर है।

यूक्रेनी ड्रोन बलों के कमांडर Robert Brovdi ने कहा कि हमले में ऐसे मालवाहक जहाज़ों और एक टैंकर को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल कथित रूप से यूक्रेनी अनाज, सैन्य सामग्री और ईंधन के परिवहन में किया जा रहा था। यूक्रेन का आरोप है कि इन जहाज़ों की पहचान छिपाई गई थी और उनके रडार बंद थे।

रूस के अनुसार, हमले में Natra और Zircon नामक दो कार्गो जहाज़ प्रभावित हुए। Azerbaijan के विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों जहाज़ों पर कुल 25 अज़रबैजानी नागरिक सवार थे। हमले में पांच नागरिकों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए, जिन्हें येस्क के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रूस ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे नागरिक जहाज़ों पर हमला बताया है, जबकि यूक्रेन का कहना है कि कार्रवाई सैन्य और रसद आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने के लिए की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि अजोव सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस युद्ध के समुद्री मोर्चे को और अधिक संवेदनशील बना रही हैं।


नई दिल्ली। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का बढ़ रहा दायरा, जानिए कौन-कौन सी गाड़ियां हैं शामिल।

नई दिल्ली। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का बढ़ रहा दायरा, जानिए कौन-कौन सी गाड़ियां हैं शामिल।

पुराने वाहनों के लिए यह लाभ नहीं मिल सकता है।

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल पर निर्भरता कम करने और इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर तेजी से काम हो रहा है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहन पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों (E20, E85 से लेकर E100 तक) पर चल सकते हैं। केंद्र सरकार भी इस तकनीक को प्रोत्साहित कर रही है।

हाल ही में Maruti Suzuki ने भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार के रूप में Maruti Suzuki Wagon R Flex Fuel पेश की है, जो 100 प्रतिशत इथेनॉल पर भी चलने में सक्षम बताई जा रही है।

इसके अलावा, ऑटोमोबाइल कंपनियां कई अन्य फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल बाजार में लाने की तैयारी कर रही हैं। 

इनमें प्रमुख रूप से:-

Toyota Taisor Flex Fuel:-

टोयोटा और अन्य कंपनियों की कुछ E85/E100 समर्थित एसयूवी एवं कारें (प्रस्तावित मॉडल)

दोपहिया वाहन श्रेणी में भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक ने दस्तक दे दी है। Hero Moto Corp ने हाल ही में:

Hero Splendor Plus Flex Fuel

Hero HF Deluxe Flex Fuel

को लॉन्च किया है। ये मोटरसाइकिलें इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल सकती हैं और इनकी बिक्री जुलाई 2026 से शुरू होने की घोषणा की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते उपयोग से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों को इथेनॉल उत्पादन से लाभ मिलेगा और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

मुख्य फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (भारत में उपलब्ध/घोषित):

Maruti Suzuki Wagon R Flex Fuel

Hero Splendor Plus Flex Fuel

Hero HF Deluxe Flex Fuel

Toyota Taisor Flex Fuel (प्रस्तावित)

निष्कर्ष: फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक भारत के ऑटो सेक्टर में एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है, जहां वाहन चालक पेट्रोल के साथ-साथ इथेनॉल आधारित ईंधन का भी उपयोग कर सकेंगे।

नई दिल्ली: मोदी सरकार लाई ₹20 सस्ता ईंधन, E85 पेट्रोल हुआ लॉन्च।

 मुख्य समाचार:

मोदी सरकार लाई ₹20 सस्ता ईंधन, E85 पेट्रोल हुआ लॉन्च।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने E85 (85% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल लॉन्च करने की घोषणा की है। 

नई दिल्ली, 5 जून 2026: केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं और किसानों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए E85 (85% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल लॉन्च करने की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि यह ईंधन सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग ₹20 प्रति लीटर सस्ता होगा और इससे देश का आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता भी कम होगी।

सरकार के अनुसार, E85 ईंधन का उपयोग विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में किया जा सकेगा। इससे न केवल उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन मिलेगा, बल्कि गन्ना और अन्य एथेनॉल उत्पादन से जुड़े किसानों को भी लाभ होने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार लंबे समय से एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि E85 का लाभ केवल उन्हीं वाहन मालिकों को मिलेगा जिनके वाहन इस ईंधन के अनुकूल हैं। सामान्य पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में फिलहाल कोई ₹20 प्रति लीटर की सीधी कटौती नहीं की गई है।

क्या है E85?

85% एथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण

सामान्य पेट्रोल से लगभग ₹20 सस्ता

केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए उपयुक्त

आयातित तेल पर निर्भरता कम करने में मददगार

किसानों की आय बढ़ाने की संभावना