सऊदी अरब: सऊदी अरब के देशों में कितने रिफाइनरी का निर्माण कराया गया है।

सऊदी अरब: सऊदी अरब के देशों में कितने रिफाइनरी है।

सऊदी अरब: सऊदी अरब के देशों में कितने रिफाइनरी का निर्माण कराया गया है।

खाड़ी देशों (Gulf Countries) में दुनिया की सबसे बड़ी और आधुनिक तेल रिफाइनरी (Oil Refineries) हैं। ये देश मुख्यतः Persian Gulf क्षेत्र में स्थित हैं और कच्चे तेल (Crude Oil)के उत्पादन व शोधन के लिए प्रसिद्ध हैं। 

नीचे कुछ प्रमुख देशों और उनकी रिफाइनरियों का संक्षिप्त विवरण: 

सऊदी अरब: प्रमुख रिफाइनरी: 

Ras,Tanura,Refinery,Jubail,Refinery,Yanbu Refinery, कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में से एक है।

संयुक्त अरब अमीरात: 

Ruwais Refinery, कंपनी:Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC)

खुजेस्तान रिफाइनरी ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित है, जो प्रमुख रूप से खाड़ी क्षेत्र के पास है। यह रिफाइनरी ईरान के सबसे महत्वपूर्ण पेट्रोलियम प्रसंस्करण केंद्रों में से एक है और इसका एक महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह न केवल घरेलू मांग को पूरा करती है, बल्कि ईरान के तेल उत्पादों के निर्यात में भी अहम भूमिका निभाती है।

खुजेस्तान रिफाइनरी के बारे में प्रमुख जानकारी: स्थान: खुजेस्तान प्रांत, जो इराक सीमा के पास स्थित है और खाड़ी (Persian Gulf) के पास भी है। यह क्षेत्र तेल और गैस के संसाधनों के लिए समृद्ध है।

कच्चे तेल का स्रोत: खुजेस्तान क्षेत्र ईरान के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। यहां के तेल संसाधनों का उपयोग इस रिफाइनरी में कच्चे तेल के रूप में किया जाता है। 

निर्माण और क्षमता: यह रिफाइनरी उच्च क्षमता के साथ पेट्रोलियम उत्पादों जैसे डीजल, पेट्रोल, गैसोलीन, और अन्य उपयोगी उत्पादों का प्रसंस्करण करती है। रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता का विस्तार लगातार किया गया है, जिससे यह क्षेत्रीय मांग को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार में भी योगदान कर सकें।

निर्यात: खुजेस्तान रिफाइनरी से उत्पादित पेट्रोलियम और गैसोलीन का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में निर्यात होता है, विशेष रूप से एशियाई देशों और मध्य-पूर्वी देशों को।महत्वपूर्ण भूमिका: यह रिफाइनरी ईरान के तेल निर्यात का एक अहम हिस्सा है और आर्थिक दृष्टि से भी इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल उद्योग ईरान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है।

पर्यावरणीय और विकासात्मक पहल: इस रिफाइनरी का विस्तार ईरान के ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है। हालांकि, यह क्षेत्र तेल उत्पादों के निर्यात में सफलता हासिल कर रहा है, लेकिन पर्यावरणीय और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में चुनौतीपूर्ण कारक भी बने रहते हैं।

खुजेस्तान रिफाइनरी ईरान तेल-प्रसंस्करण क्षमता को बढ़ाने और उसे वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।



ईरान:इस्फहान रिफाइनरी भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करता है।।

ईरान:इस्फहान रिफाइनरी भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करता है।
ईरान:इस्फहान रिफाइनरी भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करता है।।

निर्माण और इतिहास: इस्फहान रिफाइनरी निर्माण 1950 के दशक में हुआ था, और यह समय के साथ ईरान के ऊर्जा उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। यह रिफाइनरी तेल और गैस के प्रसंस्करण के लिए आवश्यक तकनीकी और संसाधन क्षमता के साथ विकसित हुई है।उत्पाद और प्रसंस्करण: इस्फहान रिफाइनरी विभिन्न प्रकार के पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन करती है, जिनमें प्रमुख रूप से: पेट्रोल,डीज़ल, हवाई ईंधन,मिट्टी तेल,साथ ही ल्यूब्रिकेंट अन्य पेट्रोलियम-आधारित उत्पाद शामिल हैं। यह रिफाइनरी घरेलू ऊर्जा की आपूर्ति को संतुलित करने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में ऊर्जा की खपत को भी पूरा करती है।
आधुनिकरण और विस्तार: इस्फहान रिफाइनरी  का आधुनिकरण और विस्तार निरंतर चल रहा है। विभिन्न सुधारों के कारण इसकी क्षमता में वृद्धि हुई है, और यह अब उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोलियम उत्पादों का निर्माण करती है। रिफाइनरी में पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों और ऊर्जा दक्षता को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
आर्थिक योगदान: इस्फहान रिफाइनरी ईरान की अर्थव्यवस्था में अहम स्थान रखती है। यह न केवल ईरान की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करती है, बल्कि रिफाइनरी से उत्पादित पेट्रोलियम उत्पादों का एक हिस्सा निर्यात भी किया जाता है, खासकर मध्य-पूर्वी देशों और एशियाई बाजारों में। 
रणनीतिक महत्व: इस्फहान शहर का रणनीतिक महत्व है क्योंकि यह ईरान के प्रमुख व्यापारिक मार्गों के करीब है, जिससे रिफाइनरी से उत्पादों का वितरण आसान हो जाता है। इसके अलावा, यह रिफाइनरी क्षेत्रीय मांग के अनुसार उत्पादों का उत्पादन करती है, जो अन्य प्रमुख ईरानी रिफाइनरी के साथ संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

चुनौतियां:इस्फ़हानी रिफाइनरी को अपने संचालन में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे पर्यावरणीय प्रदूषण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव। इसके अलावा, तकनीकी सुधारों और आधुनिक उपकरणों का निर्माण और रखरखाव भी समय-समय पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बदलती हैं। इस्फहान रिफाइनरी, अपनी विशाल उत्पादन क्षमता और विविध पेट्रोलियम उत्पादों के प्रसंस्करण के कारण, ईरान के ऊर्जा क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। यह रिफाइनरी घरेलू आपूर्ति के साथ-साथ ईरान के तेल उद्योग की ताकत को बनाए रखने में मदद करती है। 

ईरान:अमेरिका-ईरान युद्ध लंबे समय तक चलता है तो तेल, शेयर बाजार, महंगाई और वैश्विक व्यापार सभी प्रभावित हो सकते हैं।

ईरान:अमेरिका-ईरान युद्ध लंबे समय तक चलता है तो तेल, शेयर बाजार, महंगाई और वैश्विक व्यापार सभी प्रभावित हो सकते हैं।

ईरान:अमेरिका-ईरान युद्ध लंबे समय तक चलता है तो तेल, शेयर बाजार, महंगाई और वैश्विक व्यापार सभी प्रभावित हो सकते हैं।

अगर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच युद्ध लंबा चलता है, तो भारत के शेयर बाजार और आम लोगों की ज़िंदगी पर कई तरह के असर पड़ सकते हैं। भारत के शेयर बाजार पर असर,शेयर बाजार में गिरावट युद्ध और वैश्विक तनाव के समय निवेशक डर जाते हैं। इसका असर भारत के बड़े इंडेक्स पर पड़ सकता है। जैसे निफ्टी 50, बी एस ई सेंसेक्स विदेशी निवेशक पैसे निकाल सकते हैं। जिससे बाजार में गिरावट आ सकती है।

तेल कंपनियों और एयर लाइन पर दबाव अगर तेल महंगा होता है तो इन सेक्टरों पर ज्यादा असर दिखाई पड़ेगा: एयरलाइन कंपनीयां, ट्रांस्पोर्ट, पेंट और केमिकल कंपनियां क्योंकि इनका खर्च बढ़ जाता है। रक्षा सेक्टर के शेयर बढ सकते हैं। तनाव के समय रक्षा कंपनियों की मांग बढ़ती है । इसलिए भारत की कंपनियाऀ जैसे Hindustan Aeronautics Limited, Bharat Electronics Limited इनके शेयर कभी-कभी बढ़ सकते हैं।

आम लोगों पर असर पेट्रोल-डीजल महंगा भारत अपना ज्यादातर तेल आयात करता है। अगर तेल की कीमत बढ़ती है तो : पेट्रोल,डीजल,एल पी जी गैस सब महंगे हो सकते हैं। महंगाई बढ़ सकती है तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाता है, जिससे: खाने-पीने की चीजें सब्जियां रोजमर्रा का सामान इनकी कीमत बढ़ सकती है यात्रा महंग हवाई यात्रा और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।रुपये पर दबाव अगर वैश्विक तनाव बढ़ता है तो भारतीय मुद्रा पर भी असर पड़ सकता है, जिससे आयात और महंगा हो जाता है। अगर अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ता है तो भारत में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव, तेल की कीमतें बढ़ना और महंगाई बढ़ने की संभावना रहती है।





ईरान: अमेरिका और ईरान युद्ध के बारहवें दिन युद्ध जारी है।

 ईरान: अमेरिका और ईरान युद्ध के बारहवें दिन युद्ध जारी है।

अमेरिका और ईरान के महासंग्राम के आज बारहवें दिन है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह संघर्ष 28/02/2026 को तब शुरू हुआ जब युनाइटेड स्टेट्स और इजराइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बड़े हमले किए। इसके बाद ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमले शुरू कर दिए।ईरान का कहना है कि अब तक 1,300 से ज्यादा नागरिक मारे गए और करीब 10,000 नागरिक ठिकानों पर हमले हुए है।अमेरिका-इज़राइल ने ईरान में हजारों सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों पर एयर स्ट्राइक की हैं।

ईरान ने जवाब में तेल अवीव हाइफा और यसरूलम के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।अब तक लगभग 140–150 अमेरिकी सैनिक घायल होने की खबर है, हालांकि अधिकांश चोटें हल्की बताई जा रही हैं।युद्ध का विस्तार खाड़ी के कई देशों जैसे सउदी अरब और युनाइटेड अरब अमीरात ने ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।

तेल प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों पर खतरे के कारण वैश्विक तेल कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। मध्य-पूर्व से 43,000 से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों को निकाला गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटे हेगसेथ ने कहा कि कुछ दिनों में सबसे तीव्र हवाई हमले किए गए हैं।

आंध्रप्रदेश: आंध्रप्रदेश में मिलावटी दूध पीने से 11 व्यक्ति की जान गई।

आंध्रप्रदेश: आंध्रप्रदेश में मिलावटी दूध पीने से 11 व्यक्ति की जान गई।

आंध्रप्रदेश में मिलावटी दूध का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।मिलावटी दूध में एथिलीन ग्लाइकोल: मिलावटी दूध में कभी-कभी एथिलीन ग्लाइकोल मिलाया जाता है ताकि दूध का स्वाद मीठा लगे या उसकी रंगत में सुधार हो। यह बेहद खतरनाक है, क्योंकि यह एक जीवित शरीर के लिए अत्यधिक विषाक्त होता है। यदि दूध में इसका मिश्रण किया जाता है, तो इसे पीने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे कि वह घटना जिसमें आंध्र प्रदेश में 11 लोगों की मौत हो गई।

इसलिए, खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे इस तरह के मिलावट को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए आंध्रप्रदेश प्रदेश में मिलावटी दूध पीने से 11 लोगों की मौत हो जाना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। मिलावटी या अपमिश्रित खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकते हैं, और इस घटना से यह साफ होता है कि खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता पर ध्यान देना कितना जरूरी है।

मिलावटी दूध में आमतौर पर सिंथेटिक दूध या अन्य हानिकारक रसायनों का मिश्रण किया जाता है, जो इंसानों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकते हैं। यह घटना खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और सरकार के लिए एक चेतावनी है कि दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की जांच और निगरानी कड़ी से कड़ी की जाए।

नई दिल्ली:संसद भवन: भारत सरकार की केन्द्रीय कैबिनेट बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

नई दिल्ली:संसद भवन: भारत सरकार की केन्द्रीय कैबिनेट बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

नई दिल्ली:संसद भवन: भारत सरकार की केन्द्रीय कैबिनेट बैठक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

भारतीय रेल कुली के लिए प्रधानमंत्री ने कोई महत्वपूर्ण निर्णय नहीं लिए। भारतीय रेल कुली की लगातार आशा निराशा में बदल गई। 2026 का अंतिम अवसर रेलवे कुली के लिए था जो आज समाप्त हो गया। कैबिनेट की बैठक में छः फैसले निम्नलिखित प्रकार है।

FDI नियमों में बदलाव: विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया। अब भारत से सीमा साझा करने वाले देशों (जैसे चीन) की कुछ छोटी हिस्सेदारी (लगभग 10% तक) वाले निवेश को ऑटोमैटिक रूट से अनुमति मिल सकेगी और कुछ क्षेत्रों में मंजूरी की समयसीमा लगभग 60 दिन तय की गई है।

मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय दर्जा:Madurai Airport को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने को मंजूरी दी गई, जिससे दक्षिण भारत में पर्यटन, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

जल जीवन मिशन का विस्तार: Jal Jeevan Mission को 2028 तक बढ़ाने का फैसला किया गया और इसके लिए लगभग ₹8.69 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया, ताकि ग्रामीण घरों तक पाइप से पीने का पानी पहुंचाया जा सके।

रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी:पश्चिम बंगाल और झारखंड में लगभग ₹4474 करोड़ की रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिससे यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी।

सड़क परियोजनाओं को मंजूरी: कुल मिलाकर करीब ₹11,944 करोड़ की सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से फरीदाबाद तक कनेक्टिविटी जैसी योजनाएं शामिल हैं।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और निवेश को बढ़ावा देने वाले अन्य प्रस्ताव सरकार ने आर्थिक विकास, निवेश और परिवहन कनेक्टिविटी बढ़ाने से जुड़ी कई अन्य परियोजनाओं और नीतिगत बदलावों को भी मंजूरी दी। 10 मार्च 2026 की कैबिनेट बैठक के फैसलों का मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना, बुनियादी ढांचा मजबूत करना, जल आपूर्ति सुधारना और परिवहन कनेक्टिविटी बढ़ाना है।




लखनऊ:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम परिवहन योजना 2026 का शुभारंभ किया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम परिवहन योजना 2026 का शुभारंभ किया है। 

उत्तर प्रदेश में ग्राम परिवहन योजना 2026 का आरंभ कर दी गई।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को बढ़ावा देना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को बेहतर यातायात व्यवस्था मिले। इससे गांवों में लोगों को खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य ज़रूरी सेवाओं तक पहुंच में आसानी होगी।

इस योजना के तहत: नए वाहनों की व्यवस्था की जाएगी ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को सरल और सस्ता बनाया जा सके। सुरक्षित और सस्ती यात्रा के अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकारी और निजी वाहन मिलकर काम करेंगे, और यात्रियों को एकीकृत परिवहन सेवा प्रदान की जाएगी। यह योजना राज्य के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।



इस्लामाबाद:पाकिस्तान:पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि उर्जा संकट से बाहर निकलने के लिए सरकार से स्थिर और दीर्घकालीन समाधान ढूंढने की नसीहत दी।

इस्लामाबाद:पाकिस्तान:पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि उर्जा संकट से बाहर निकलने के लिए सरकार से स्थिर और दीर्घकालीन समाधान ढूंढने की नसीहत दी।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ।

9 मार्च 2026 को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस्लामाबाद में तेल और ऊर्जा क्षेत्र के बारे में एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उनका बयान तेल की बढ़ती कीमतों और पाकिस्तान में ऊर्जा संकट के समाधान के लिए सरकार की योजनाओं पर केंद्रित था। उन्होंने देश की ऊर्जा नीति को सुधारने और तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता की बात की।

उर्जा संकट दूर करने के लिए दुसरे रास्ते स्टीमर को लाना पड़ रहा है।

नवाज शरीफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों, जैसे कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और जलवायु अनुकूल तकनीकों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनका मानना था कि अगर पाकिस्तान अपने ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करता है, तो उसे तेल और गैस की बढ़ती कीमतों से प्रभावित होने की संभावना कम होगी।

उन्होंने तेल और गैस आयात के लिए पाकिस्तान पर बाहरी दबाव और वैश्विक बाजारों में मूल्य वृद्धि की चिंता भी व्यक्त की। इसके साथ ही, उन्होंने सरकार से अधिक स्थिर और दीर्घकालिक समाधान ढूंढने की अपील की, ताकि पाकिस्तान को ऊर्जा संकट से बाहर निकाला जा सके।

नवाज शरीफ के इस बयान के बाद, पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को लेकर राजनीतिक चर्चा और बहस तेज हो गई है।

नई दिल्ली:फिनलैंड और भारत के प्रधानमंत्री के बीच हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। ये समझौते विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए।

नई दिल्ली: फिनलैंड और भारत के प्रधानमंत्री के बीच हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। ये समझौते विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए।

साना मरीन फिनलैंड के सबसे कम उम्र के नेता के रूप में उभर आई इनकी उम्र मात्र 34 वर्ष थी। फिनलैंड के प्रधानमंत्री के पद पर 2019 से 2023 तक विराजमान रही। कार्यकाल दस दिसंबर 2019 से 20 जून 2023 तक प्रधानमंत्री के पद पर कार्यरत थी।

नई दिल्ली:फिनलैंड और भारत के प्रधानमंत्री के बीच हाल ही में कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। ये समझौते विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड की प्रधानमंत्री साना मरीन के बीच नई दिल्ली में महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन, और शैक्षिक आदान-प्रदान जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इन समझौतों के जरिए दोनों देशों ने आपसी संबंधों को और अधिक मजबूत करने का संकल्प लिया, विशेष रूप से डिजिटल, शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्रों में। इसके अलावा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे में भी सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

नई दिल्ली: संसद भवन: राहुल गांधी ने कहा भारतीय मजदूरों और प्रवासियों के अधिकारों की अनदेखी होती है।

नई दिल्ली: संसद भवन: राहुल गांधी ने कहा भारतीय मजदूरों और प्रवासियों के अधिकारों की अनदेखी होती है।

नई दिल्ली:संसद भवन:विदेश मंत्री जय शंकर सिंह।

भारत के विदेश मंत्री, डॉ. एस. जयशंकर ने 8 मार्च 2026 को संसद में खाड़ी देशों के बारे में एक महत्वपूर्ण बयान दिया था, जिसमें उन्होंने भारत के खाड़ी देशों के साथ रिश्तों की स्थिरता और सुरक्षा पर चर्चा की। जयशंकर ने यह कहा था कि खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और कल्याण भारतीय सरकार की प्राथमिकता है, और इन देशों में भारतीय श्रमिकों की बढ़ती संख्या भारत के कूटनीतिक संबंधों का अहम हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी देशों में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता भारत के हितों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और सुरक्षा साझेदारी के संदर्भ में।

राहुल गांधी संसद भवन परिसर में हंगामा करते हुए।

विपक्षी हंगामा: इस बयान के बाद विपक्षी दलों के सदस्य, खासकर कांग्रेस और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार खाड़ी देशों के साथ अपने रिश्तों को ज्यादा महत्व दे रही है, जबकि भारतीय नागरिकों के मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, खासकर जब इन देशों में भारतीय मजदूरों और प्रवासियों के अधिकारों की अनदेखी होती है।

कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और स्थिति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए, और सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी की है। इस पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ, जिससे संसद की कार्यवाही में रुकावट आई।

जयशंकर का बयान खाड़ी देशों के साथ भारत के कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने के संदर्भ में था, जबकि विपक्ष ने इस पर तीव्र आपत्ति जताई और सरकार से भारतीय नागरिकों के मुद्दों पर अधिक ध्यान देने की मांग की।