वाशिंगटन: अमेरिका: भारत-अमेरिका व्यापार 2030 तक 500 अरब डॉलर कैसे पहुंच सकता है।
अमेरिका के वाशिंगटन में हुई बातचीत के बाद भारत और अमेरिका ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) को 500 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। इसे अक्सर “Mission-500” कहा जाता है।अभी दोनों देशों के बीच व्यापार इससे काफी कम है, इसलिए इसे बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम प्रस्तावित किए गए हैं।
बड़े पैमाने पर अमेरिकी सामान की खरीद: भारत अगले कुछ वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा, विमान, तकनीक और कच्चे माल की बड़ी खरीद बढ़ाने की योजना बना रहा है। ऊर्जा (कच्चा तेल, LNG, LPG),विमान और विमान के पार्ट्स तकनीकी उपकरण (GPU, डेटा-सेंटर उपकरण),कीमती धातुएँ और कोकिंग कोल इन क्षेत्रों में खरीद बढ़ाकर व्यापार तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
टैरिफ (आयात शुल्क) कम करना : प्रस्तावित व्यापार समझौते में अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ लगभग 50% से घटाकर लगभग 18% तक ला सकता है। भारत भी अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम कर सकता है। इससे दोनों देशों के सामान सस्ते होंगे और व्यापार बढ़ेगा।
टेक्नोलॉजी और डिजिटल व्यापार: दोनों देश इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं: सेमीकंडक्टर और AI,डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर,डिजिटल व्यापार नियम इससे हाई-टेक व्यापार में बड़ा विस्तार हो सकता है।
रक्षा और विमानन क्षेत्र:भारत पहले से अमेरिका से बड़े रक्षा और विमानन सौदे कर रहा है, जैसे: बोइंग विमान खरीद,रक्षा उपकरण,संयुक्त उत्पादन इन सौदों से व्यापार का बड़ा हिस्सा बढ़ सकता है।
ऊर्जा और सप्लाई-चेन सहयोग: भारत अमेरिका से अधिक तेल और गैस,स्वच्छ ऊर्जा तकनीक,महत्वपूर्ण खनिज खरीद सकता है, जिससे व्यापार का आकार बढ़ेगा। 2030 तक 500 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए व्यापार समझौता,टैरिफ में कमी,ऊर्जा और रक्षा खरीद,टेक्नोलॉजी सहयोग,सप्लाई-चेन साझेदारी जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

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