इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत पर अमेरिका का बढ़ता भरोसा।
ट्रम्प प्रशासन ने रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने के दिए संकेत।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, बुधवार:
Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिका अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए India के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर जोर दे रहा है।
अमेरिकी नीति विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।
अमेरिकी प्रशासन रक्षा, तकनीक, समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा समझौतों और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के साथ संबंध मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है।
इसी रणनीति के तहत Quadrilateral Security Dialogue को अधिक सक्रिय बनाने पर भी बल दिया जा रहा है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
अमेरिका भारत को केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और सामरिक साझेदार के रूप में देख रहा है।
रक्षा तकनीक, सेमीकंडक्टर निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएँ भी तेजी से उभर रही हैं।
भारत अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” बनाए रखना चाहता है।
भारत रूस, अमेरिका और अन्य देशों के साथ संतुलित संबंध रखने की कोशिश करता है।
इसलिए यह साझेदारी पूर्ण सैन्य गठबंधन जैसी नहीं, बल्कि “हित आधारित सहयोग” अधिक है।
हालाँकि भारत अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति पर कायम है और रूस सहित अन्य देशों के साथ भी संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय बहु-ध्रुवीय कूटनीति को प्राथमिकता देता रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका संबंध इंडो-पैसिफिक की भू-राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
ट्रम्प की शैली:
ट्रम्प प्रशासन अक्सर “America First” नीति की बात करता है, लेकिन साथ ही ऐसे साझेदार देशों को मजबूत करने की कोशिश करता है जो चीन के प्रभाव को सीमित करने में मदद करें। भारत इस रणनीति में स्वाभाविक रूप से फिट बैठता है।
चीन को संतुलित करना:
अमेरिका मानता है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की सैन्य और आर्थिक शक्ति तेजी से बढ़ रही है। भारत, अपनी भौगोलिक स्थिति और सैन्य क्षमता के कारण, इस संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
QUAD और रक्षा सहयोग:
Quadrilateral Security Dialogue (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) को अधिक सक्रिय बनाया जा रहा है। रक्षा अभ्यास, तकनीकी सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर जोर बढ़ा है।
सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी:
अमेरिका कई क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है। इसलिए सेमीकंडक्टर, रक्षा निर्माण, AI, और महत्वपूर्ण खनिजों में भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात हो रही है।
रक्षा खरीद और सैन्य साझेदारी:
हाल के वर्षों में भारत-अमेरिका रक्षा संबंध काफी मजबूत हुए हैं ड्रोन, जेट इंजन तकनीक, लॉजिस्टिक्स समझौते और संयुक्त सैन्य अभ्यास इसके उदाहरण हैं।

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