भारतीय रेलवे कुली समाचार पत्र देश विदेश समाचार रिपोर्ट। गुरुवार/05/06/2026.
मुंगेर/बिहार/मुंगेर का चंडिका स्थान: आस्था, शक्ति और दानवीर कर्ण की अमर गाथा।
मुंगेर, बिहार। गंगा तट पर स्थित प्रसिद्ध चंडिका स्थान आज भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यह देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का बायां नेत्र गिरा था। इसी कारण इसे "नेत्र पीठ" के नाम से भी जाना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद माता सती ने योगाग्नि में देह त्याग दी थी।
शोकाकुल भगवान शिव जब सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के अंग अलग किए। जहां-जहां ये अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। मुंगेर का चंडिका स्थान भी उन्हीं पवित्र स्थलों में माना जाता है।
इस मंदिर की एक और विशेष पहचान दानवीर कर्ण से जुड़ी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कर्ण प्रतिदिन मां चंडिका की आराधना करते थे और उनके आशीर्वाद से दान-पुण्य के कार्य करते थे। इसी कारण यह स्थान भक्ति और दान की परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भक्त माता के नेत्र स्वरूप पर जल अर्पित कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि मुंगेर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का भी अभिन्न हिस्सा है।
मंदिर की विशेषता:-
यहां माता के नेत्र स्वरूप की पूजा की जाती है।
श्रद्धालु माता के नेत्र पर जल अर्पित करते हैं।
नवरात्रि में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
इसे सिद्धपीठ और शक्तिपीठ दोनों का महत्व प्राप्त है।
मुंगेर का चंडिका स्थान केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि देवी सती की शक्ति, भगवान शिव की करुणा और कर्ण की दान वीरता से जुड़ी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
रिपोर्ट संवाददाता: अमन कुमार मिश्र।
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