50 लाख रुपये की कार आम लोगों की पहुंच से दूर, BYD की नई SUV पर उठे सवाल।
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यह कार मध्यम वर्ग के लिए नहीं है और न ही गरीबों के लिए है। भारत में 9 जून को लांच करने से क्या फायदा। गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार जिसे खरीद नहीं कर सकता है। |
नई दिल्ली, 8 जून। चीन की वाहन निर्माता कंपनी BYD द्वारा भारत में करीब 50 लाख रुपये कीमत वाली नई हाइब्रिड SUV लॉन्च किए जाने की खबर के बीच इसकी कीमत को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आम लोगों और उपभोक्ताओं का कहना है कि इतनी महंगी कार देश के अधिकांश परिवारों की पहुंच से बाहर है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में बड़ी आबादी मध्यम और निम्न आय वर्ग से जुड़ी है। ऐसे में 45 से 50 लाख रुपये कीमत वाली कार खरीदना अधिकांश लोगों के लिए संभव नहीं है। वाहन खरीदने के साथ बीमा, रखरखाव, ईंधन और अन्य खर्च भी जुड़ जाते हैं, जिससे कुल लागत और बढ़ जाती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस श्रेणी की गाड़ियां मुख्य रूप से उच्च आय वर्ग, बड़े कारोबारियों और प्रीमियम वाहन ग्राहकों को ध्यान में रखकर लॉन्च की जाती हैं। वहीं आम उपभोक्ता आमतौर पर 5 लाख से 15 लाख रुपये के बजट वाली कारों को प्राथमिकता देते हैं।
हालांकि ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि नई तकनीक, बेहतर सुरक्षा फीचर्स और लंबी रेंज जैसी सुविधाओं के कारण प्रीमियम वाहनों की कीमत अधिक होती है। इसके बावजूद कई उपभोक्ताओं का मानना है कि भारतीय बाजार में सस्ती और किफायती कारों की मांग अभी भी सबसे ज्यादा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 50 लाख रुपये की कार को "गरीबों की कार" नहीं कहा जा सकता। यह वाहन मुख्य रूप से उन ग्राहकों के लिए है जिनकी आय और क्रय क्षमता अपेक्षाकृत अधिक है। ऐसे में BYD की नई SUV तकनीकी रूप से भले ही उन्नत हो, लेकिन इसकी कीमत आम और गरीब परिवारों की पहुंच से काफी दूर नजर आती है।
संवाददाता अमन कुमार मिश्र

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