बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नवरात्रि मां कुष्मांडा मां की अराधना की जाती है।

बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: चैत्र मास शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नवरात्रि मां कुष्मांडा मां की अराधना की जाती है।

मां कुष्मांडा की अराधना अर्चना चतुर्थी तिथि को कुम्भर
 से की जाती है। ऐसी मान्यता शास्त्रों में दी गई है।

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को नवरात्रि का चौथा दिन (मां कुष्मांडा पूजा) मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की आराधना करते हैं।

मां कुष्मांडा को सृष्टि की आदि सृजनकर्ता माना जाता है। मान्यता है कि उन्होंने अपनी मंद मुस्कान (कु + उष्मा + अंड = ब्रह्मांड) से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। इसलिए इन्हें "आदि शक्ति" भी कहा जाता है।

इस दिन विशेष रूप से:-मां को कुम्हड़ा (कद्दू) का भोग लगाया जाता है-दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।साधक अनाहत चक्र पर ध्यान करते हैं।

बिहार के बेगूसराय (बरौनी,सोकहारा) जैसे क्षेत्रों में भी इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।

मां कुष्मांडा की पूजा विधि और प्रमुख मंत्र सरल और विस्तार से दिए जा रहे हैं।

मां कुष्मांडा की पूजा विधि:प्रातःकाल की तैयारी:सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।पूजा स्थान को साफ कर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

संकल्प लें: हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर मन में पूजा का संकल्प करें।

कलश स्थापना: पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें (यदि पहले दिन नहीं किया है तो)

मां का ध्यान और आवाहनदीप जलाकर मां का ध्यान करें और उन्हें आमंत्रित करें।

पूजन सामग्री अर्पित करें:रोली, अक्षत, फूल, माला, धूप, दीप अर्पित करें। विशेष रूप से कुम्हड़ा (कद्दू) का भोग लगाएं।(मां कुष्मांडा को प्रिय माना जाता है)

मंत्र जप और पाठ: दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करें।मां के बीज मंत्र का जप करें।

आरती करें: अंत में मां की आरती करके प्रसाद वितरित करें, 

मां कुष्मांडा का ध्यान मंत्र:-

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्मांडा शुभदास्तु मे॥

बीज मंत्र:- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः। इस मंत्र का जप कम से कम 108 बार करना शुभ माना जाता है।

मां कुष्मांडा की आरती (संक्षेप):

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी... (आप पूरी दुर्गा आरती भी कर सकते हैं)

विशेष मान्यताएं:-इस दिन पूजा करने से रोग, शोक और भय दूर होते हैं,आयु, यश और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है,साधक के अनाहत चक्र को बल मिलता है


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