रुस ने 25 वर्षों बाद अचानक सोना बेचना शुरू किया क्यों।
बिजनेसमैन की तरह रूस सोचने वाले देश को भला किस प्रकार की दिक्कतें आ गई।
रूस ने बहुत लंबी अवधि (लगभग 25 साल) के बाद पहली बार अपने सेंट्रल बैंक के सोने के भंडार से भौतिक (physical) सोना बेचना शुरू किया है। यह सोना आमतौर पर सरकार और रिज़र्व बैंकों के पास रणनीतिक “सुरक्षित संपत्ति” के रूप में रखा जाता है।

सबसे बड़ा कारण यह है कि रूस का बजट घाटा बढ़ गया है,खासकर यूक्रेन युद्ध और उससे जुड़े उच्च सैन्य खर्च की वजह से रूस को हर महीने बहुत बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है,और उसकी आमदनी (तेल‑गैस आय समेत)) पर्याप्त नहीं रह गई है। ऐसे में सोना बेचकर रूस तात्कालिक नकदी जुटा रहा है ताकि वह अपनी सरकारी खर्चें (खासकर युद्ध खर्च)) को पूरा कर सके यही वजह है कि भौतिक सोना बाजार में बेचा जा रहा है। सोना क्यों नहीं पहले बेचा जाता था? हाल तक तक रूस ने सोना अपने रणनीतिक भंडार में रखा ।
क्योंकि: सोना एक सुरक्षित संपत्ति (safe asset) माना जाता है। यह विदेशी मुद्रा या ऋण के बजाय संकट के समय में आर्थिक सहारा देता है। रूसी रिज़र्व बैंक पिछले कई वर्षों में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहा था। पिछले कई वर्षों में रूसी रिज़र्व बैंक (Bank of Russia) ने अपने सोने (Gold) के भंडार की हिस्सेदारी बढ़ाई थी, लेकिन हाल ही में स्थिति बदल रही है। सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने का पिछला ट्रेंड रूस ने 2000 के दशक के बाद से काफी तेजी से सोने के भंडार बढ़ाए हैं और यह दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडारों में से एक बन गया। आंकड़ों के अनुसार, रूस के सोने का भंडार 2010 के लगभग 800+ टन से बढ़कर 2024 तक लगभग 2,300+ टन तक पहुंच गया था, जो विश्व में पाँचवें स्थान जैसा स्तर था। यह वृद्धि कई वर्षों में निरंतर होती रही।इसी वजह से सोने का हिस्सा उसके कुल आरक्षित विदेशी संपत्तियों में (फॉरेक्स रिज़र्व) भी बढ़ा कभी 15‑20% के स्तर से बढ़कर लगभग 45‑48% तक पहुंचा, जो उच्च स्तर माना जाता है।
2026 के शुरुआत में रूस ने अपने केंद्रीय बैंक के भंडार से सोना बेचना शुरू कर दिया है, जो करीब 25 साल में पहली बार हुआ है। इसका मुख्य कारण सैन्य खर्च और बजट घाटा बताया जा रहा है। सोने की यह बिक्री संकेत देती है कि जहाँ पहले रूस ने सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई थी और उसे एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में रखा, वहीं अब आर्थिक दबावों के चलते उसने कुछ सोना बाज़ार में बेचना शुरू किया है।
पहले: रूस ने अपने सोने के भंडार और सोने की हिस्सेदारी को लगातार कई वर्षों तक बढ़ाया था, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार का जोखिम कम हो और डॉलर‑यूरो पर निर्भरता घटे।
अब: फरवरी‑मार्च 2026 में उसने सोना बेचना शुरू कर दिया, जो पिछले दो दशकों का बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
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