नई दिल्ली: पुराने समुद्री जीव दबकर कच्चा तेल बनते हैं, और उसी से डीज़ल निकलता है।
गर्मी और दबाव की वजह से ये जैविक अवशेष धीरे-धीरे तेल (पेट्रोलियम) और गैस में बदल गए।
करोड़ों साल पहले छोटे-छोटे समुद्री जीव (जैसे प्लवक) समुद्र में मरकर तल में जमा हो गए। समय के साथ वे मिट्टी और रेत की परतों के नीचे दबते गए। बहुत अधिक ताप और दबाव के कारण ये धीरे-धीरे कच्चे तेल में बदल गए। और उसी से डीज़ल निकलता है यह भी सही है, लेकिन प्रक्रिया अलग है।

कच्चे तेल को सीधे उपयोग नहीं किया जाता। इसे रिफाइनरी में ले जाकर अलग-अलग हिस्सों में बाँटा जाता है,जिसे प्रभाजी आसवन कहते हैं। इसी प्रक्रिया से पेट्रोल, डीज़ल, केरोसिन आदि निकाले जाते हैं।
सरल भाषा में पूरा वाक्य ऐसे कह सकते हैं:- करोड़ों साल पहले समुद्री जीवों के अवशेष दबकर कच्चा तेल बनते हैं, और रिफाइनरी में इसी कच्चे तेल से डीज़ल व अन्य ईंधन तैयार किए जाते हैं। धरती में तेल (पेट्रोलियम) बनने की प्रक्रिया लाखों–करोड़ों साल पुरानी और बहुत दिलचस्प है।
बहुत पहले समुद्रों में छोटे-छोटे जीव (प्लवक, शैवाल आदि) रहते थे। जब ये मर जाते थे, तो इनके अवशेष समुद्र की तलहटी में जमा हो जाते थे।
इन अवशेषों के ऊपर समय के साथ मिट्टी, रेत और चट्टानों की परतें जमा होती गईं। इससे वे नीचे दबते चले गए।
जैसे-जैसे ये परतें गहराई में गईं, वहां तापमान और दबाव बहुत बढ़ गया।
इसी गर्मी और दबाव की वजह से ये जैविक अवशेष धीरे-धीरे तेल (पेट्रोलियम) और गैस में बदल गए।
यह तेल चट्टानों के छोटे-छोटे छिद्रों में भर जाता है और ऊपर की ओर जाकर ऐसी जगह रुक जाता है जहाँ कठोर चट्टान उसे आगे बढ़ने से रोक देती है। इसी जगह तेल के भंडार बनते हैं।
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