नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा दुर्भाग्यपूर्ण है कि व्यक्ति ने हमारे आदेश का पालन नहीं किया।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा दुर्भाग्यपूर्ण है कि व्यक्ति ने हमारे आदेश का पालन नहीं किया।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा दुर्भाग्यपूर्ण है कि व्यक्ति ने हमारे आदेश का पालन नहीं किया।सुप्रीम कोर्ट ने कहा व्यक्ति ने हमारे आदेश का पालन नहीं किया यह दुर्भाग्यपूर्ण है। चार साल से अपनी नाबालिग बेटी एक भी पैसा नही दिया एवं देखा तक नहीं कि किस हालात से गुजर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले के आदेश एक व्यक्ति के नियोक्ता को आदेश दिया है कि उसकी मासिक वेतन से 25.000 रूपए उसकी पत्नी और चार वर्षीय लड़की के भरण-पोषण के लिए काटें क्योंकि उसने अपनी स्वेच्छा से कोई राशि देने से इंकार कर दिया। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पाडिंवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने उस ट्रांसफर याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसे डिंपल ने अपने पति निशांत प्रविनभाई सोनी के खिलाफ दायर किया था अब यह मामला अवमानना का मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करना संविधान की गरिमा का अपमान है। ऐसे व्यक्ति को सीधे फांसी की सजा होनी चाहिए।

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