नई दिल्ली:संसद भवन (Sansad bhawn) संसद भवन में संसद पप्पू यादव एवं मंत्री गिरिराज सिंह से संसद भवन तीखी नोंकझोंक हुई।

नई दिल्ली:संसद भवन (Sansad bhawn) संसद भवन में संसद पप्पू यादव एवं मंत्री गिरिराज सिंह से संसद भवन तीखी नोंकझोंक हुई।
नई दिल्ली:संसद भवन (Sansad bhawn) संसद भवन में संसद पप्पू यादव एवं मंत्री गिरिराज सिंह से संसद भवन तीखी नोंकझोंक हुई।

संसद सदस्य पप्पू यादव ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अपनी बातों रख रहे थे। उसी समय मंत्री गिरिराज सिंह ने पप्पू यादव को बोलने पर रोक लगाने का प्रयास कर रहे थे। इस पर पप्पू यादव ने कहा एक समय था कि आप हमारे यहां भुंजा खाते थे।आप बीजेपी पार्टी ज्वाइन कर संसद सदस्य बने हैं लेकिन मैं निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बार बार जीत कर आ रहा हूं।
पप्पू यादव ने कहा कि मैं किसी के रहम करम से जीत कर नहीं आता हुं। यह विडियो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया। पप्पू यादव ने कहा जब मैं पांच बार सांसद बना तब आपका जन्म हुआ। आप हमें मत सिखाइये कि राजनीति कैसे की जाती है।
संसद भवन में पप्पू यादव और गिरिराज सिंह के बीच हुआ विवाद एक राजनीतिक मुद्दे पर आधारित था, जो बहस को तीखा और व्यक्तिगत बनाया गया। 
विवाद का कारणयह विवाद मुख्य रूप से बिहार में राजनीतिक स्थिति और देश में दलितों और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जुड़ा था। पप्पू यादव (जो बिहार के एक प्रमुख नेता हैं और आरजेडी से जुड़े रहे हैं) अक्सर गिरिराज सिंह और उनकी पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) पर निशाना साधते हैं।
पप्पू यादव ने गिरिराज सिंह की कार्यशैली और उनके द्वारा उठाए गए कुछ विवादास्पद बयानों पर आलोचना की थी, जिनमें धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों से संबंधित टिप्पणियां थीं। यह आलोचना गिरिराज सिंह को व्यक्तिगत रूप से चुभी और उन्होंने तुरंत जवाब दिया।
किसने क्या कहापप्पू यादव: पप्पू यादव ने गिरिराज सिंह पर सामाजिक न्याय और संविधान के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि गिरिराज सिंह ने अक्सर समाज के कमजोर वर्गों के खिलाफ बयान दिए हैं और उनका उद्देश्य हमेशा हिंदू धर्म का राजनीतिकरण करना है। इसके अलावा, पप्पू यादव ने गिरिराज सिंह को “संविधान विरोधी” और “जातिवाद को बढ़ावा देने वाला नेता” करार दिया।
गिरिराज सिंह: गिरिराज सिंह ने पप्पू यादव की आलोचनाओं का कड़ा जवाब देते हुए कहा कि पप्पू यादव अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक लाभ के लिए दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पप्पू यादव हमेशा दलितों और पिछड़े वर्गों का नाम लेकर राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि पप्पू यादव अपने बयानों में झूठ का सहारा लेकर सिर्फ भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
विवाद का बढ़ना: यह विवाद संसद में गर्मा गया जब दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखी टिप्पणी की और व्यक्तिगत हमले किए। गिरिराज सिंह ने पप्पू यादव को “बेहूदे बयानों” के लिए कठघरे में खड़ा किया, जबकि पप्पू यादव ने उन्हें “समाज के लिए हानिकारक व्यक्ति” कहा। यह नोंकझोंक भीतर ही बढ़ गई, और दोनों नेताओं के बीच तीखी शब्द बाजी हुई।

संसद में हस्तक्षेप: संसद में उपस्थित अन्य नेताओं ने इस स्थिति को शांत करने की कोशिश की और दोनों नेताओं से अपील की कि वे संसद के मंच पर अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। हालांकि, स्थिति कुछ समय तक तनावपूर्ण रही, लेकिन अंततः वरिष्ठ नेताओं ने हस्तक्षेप किया और विवाद को काबू में किया।
समाप्ति और राजनीतिक असर: इस विवाद का असर अधिकतर बिहार की राजनीति और दोनों नेताओं की छवि पर पड़ा। पप्पू यादव ने गिरिराज सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाए, जबकि गिरिराज सिंह ने पप्पू यादव के राजनीतिक उद्देश्य पर उंगली उठाई। ऐसे विवादों से अक्सर लोकसभा या राज्यसभा की कार्यवाही में बाधा उत्पन्न होती है, और यह विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच गतिरोध को और बढ़ा देता है।
यह घटनाएं भारतीय राजनीति की एक निरंतर चल रही प्रवृत्ति को दिखाती हैं, जहां बयानबाजी और व्यक्तिगत हमले कभी-कभी विधायकी कार्य को प्रभावित करते हैं।


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