बरौनी/बेगुसराय जंक्शन/रेलवे स्टेशनों पर कुलियों की कठिन जिंदगी: तपती धूप में भी जारी है मेहनत।
चिलचिलाती गर्मी में स्टेशनों पर से बाहर निकल कर जाना, कठिनाईयों का सामना करना में मंत्री के वश की बात नहीं है।
बरौनी जंक्शन/विशेष रिपोर्ट:
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चिलचिलाती गर्मी में स्टेशनों पर से बाहर निकल कर जाना, कठिनाईयों का सामना करना में मंत्री के वश की बात नहीं है। |
भारत के मंत्री को एसी गाड़ी,एसी बांग्ला,पेंशन, खाने-पीने की व्यवस्था जरूरत की सारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है
लेकिन रेलवे कुलियों के लिए कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
रेलवे में समायोजित करने के लिए सरकार से 2008 से गुहार लगाई जा रही है लेकिन बहरी सरकार कोई ध्यान नहीं दे रहा है
चिलचिलाती गर्मी और तपती धूप के बीच रेलवे स्टेशनों पर काम करने वाले कुलियों की जिंदगी आज भी बेहद कठिन बनी हुई है।
प्लेटफॉर्म पर भारी सामान उठाकर यात्रियों को सेवा देने वाले ये मजदूर दिनभर लगातार मेहनत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई बार उन्हें पर्याप्त आय और आराम नहीं मिल पाता।
स्टेशनों पर सुबह से लेकर देर रात तक कुलियों को यात्रियों के सूटकेस, बैग और अन्य सामान ढोते देखा जा सकता है।
तेज धूप, भीड़ और लंबे समय तक खड़े रहने की मजबूरी के बीच उनकी यह मेहनत रेलवे व्यवस्था का अहम हिस्सा है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियाँ अक्सर अनदेखी रह जाती है।
स्थानीय कुलियों का कहना है कि गर्मी के मौसम में काम और भी कठिन हो जाता है।
कई बार पानी और छाया की कमी के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण बन जाती है।
वहीं यात्रियों की बढ़ती भीड़ और डिजिटल बुकिंग सिस्टम के कारण काम का स्वरूप भी बदल रहा है, जिससे उनकी कमाई पर असर पड़ता है।
हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से समय-समय पर सुविधाएँ और पहचान पत्र जैसी व्यवस्थाएँ की गई हैं,
लेकिन जमीनी स्तर पर कई कुलियों का कहना है कि उन्हें अभी भी बेहतर कार्य स्थितियों और नियमित सहायता की जरूरत है।
यह मुद्दा सिर्फ एक वर्ग की परेशानी नहीं, बल्कि शहरी परिवहन व्यवस्था में मेहनतकश श्रमिकों की भूमिका और उनके अधिकारों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन मजदूरों के लिए गर्मी से राहत, स्वास्थ्य सुविधाएँ और आय सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी जिंदगी भी सम्मानजनक और सुरक्षित बन सके।
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