वाशिंगटन, एजेंसी। लोकप्रियता की दौड़ में रिश्ते पीछे, कुर्सी की नीलामी में उमड़ी भीड़।
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| जो अपने कर्तव्यों के निर्वहन से प्राप्त हो, न कि केवल सार्वजनिक प्रदर्शन से।"लोकप्रियता क्षणिक हो सकती है, लेकिन माता-पिता की सेवा से मिलने वाला सम्मान जीवनभर साथ रहता है।" |
विशेष संवाददाता।
दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है जो सामाजिक प्रतिष्ठा और लोकप्रियता हासिल करने के लिए हर मंच पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन अपने माता-पिता की सेवा और जिम्मेदारियों के प्रति उतनी गंभीरता नहीं दिखाते। समाज के विभिन्न वर्गों में इस प्रवृत्ति को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।
हाल ही में कई स्थानों पर देखा गया कि कुछ लोग चर्चित व्यक्तियों द्वारा उपयोग की गई कुर्सियों, वस्तुओं या स्मृति-चिह्नों की नीलामी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने पहुंचे। वहीं दूसरी ओर, परिवार और बुजुर्गों की देखभाल जैसे मूल सामाजिक दायित्वों को नजरअंदाज करने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं।
सामाजिक चिंतकों का मानना है कि आधुनिक दौर में दिखावे और प्रसिद्धि की चाह ने कई लोगों की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। उनका कहना है कि माता-पिता की सेवा केवल नैतिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि समाज की मजबूत नींव भी है। यदि लोग सम्मान और लोकप्रियता के लिए प्रतीकात्मक चीजों के पीछे भागेंगे, लेकिन अपने परिवार की जिम्मेदारियों से दूर रहेंगे, तो सामाजिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज को बाहरी प्रतिष्ठा से अधिक पारिवारिक संस्कारों और मानवीय मूल्यों को महत्व देने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि किसी कुर्सी या वस्तु की नीलामी में शामिल होना गलत नहीं है, लेकिन माता-पिता के प्रति कर्तव्य निभाना उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
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