नई दिल्ली:लोकसभा: एसी कमरे में बैठे बैठे लोकसभा आए और कुछ बोल दिए की किसानों की आय आठ गुना बढ़ गई।

लोकसभा: नई दिल्ली एसी कमरे में बैठे बैठे लोकसभा आए और कुछ बोल दिए की किसानों की आय आठ गुना बढ़ गई।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ब्यान दिया की किसानों की आय आठ गुना बढ़ गई है।
एसी कार,लक्जरी होटल,एसी कमरा,हवाई उड़ान करने से फुर्सत नहीं मिलती है। किसानों के दुःख को देखे नहीं बिना देखे सुने लोकसभा में कह दिए की किसानों आय आठ गुना बढ़ गई है। मंत्री जी एसी में बैठे बैठे आठ गुना बढ़ गई।सिर्फ बिहार के किसानों का ब्यौरा दिया हुं आकलन करें।

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को सोच समझकर ब्यान देना चाहिए। किसानों ने कहा मोदी सरकार में सिर्फ ब्यानबाजी होता है। आठ गुनी आय कहां और किस जिले की बात कर रहे हैं पुख्ता सबूत के साथ बयानबाजी करें। कितने किसानों से मिलकर जानकारी लिए है। चुनाव जितने के बाद कितने बार क्षेत्रों का दौरा किये है। जनता के पैसों से मौज मस्ती कर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मैं वर्तमान स्थिति एक राज्य का दे रहा हूं। चौहान जी किसान या कर्मचारी को गथंथ

उदाहरण: बिहार का छोटा किसान (1 एकड़):मान लेते हैं किसान धान+गेहूं उगाता है (साल में 2 फसल)

साल भर की कुल आमदनी:- धान (Kharif),उत्पादन: 18 क्विंटल,बिक्री: ₹1,800 / क्विंटल,कुल = ₹32,400
गेहूं (Rabi),उत्पादन: ~15 क्विंटल,बिक्री: ₹2,100/ क्विंटल कुल = ₹31,500,सालाना खेती से आय = ₹63,900, 2. सालभर का खर्च,लागत (दोनों फसल मिलाकर),बीज = ₹3,000,खाद/उर्वरक = ₹8,000
कीटनाशक = ₹2,000,डीज़ल/सिंचाई = ₹6,000,मजदूरी = ₹10,000,मशीन (ट्रैक्टर/थ्रेसर) = ₹6,000,कुल खर्च = ₹35,000, 3. खेती से शुद्ध कमाई,₹63,900 – ₹35,000 = ₹28,900 (सालाना) यानी: महीने की खेती से कमाई ≈ ₹2,400
अतिरिक्त आय (बहुत जरूरी) छोटा किसान सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं रहता,मजदूरी (मनरेगा/दैनिक काम) = ₹3,000 / महीना,1–2 पशु (दूध) = ₹1,000 / महीना
कुल अतिरिक्त आय = ₹4,000 / महीना,कुल मासिक आय,खेती = ₹2,400,अन्य = ₹4,000,कुल ≈ ₹6,400 / महीना,महीने का खर्च:-राशन (जो बाजार से खरीदना पड़ता) = ₹2,500,बच्चों की पढ़ाई = ₹1,000,दवा/स्वास्थ्य = ₹500,बिजली/मोबाइल = ₹500,सामाजिक/अन्य खर्च = ₹1,000, कुल खर्च ≈ ₹5,500 / महीना।

बचत कितनी:-₹6,400 – ₹5,500 = ₹900 / महीना (बहुत कम)अगर:-फसल खराब हुई ,बीमारी आ गई ,शादी/इमरजेंसी तो किसान कर्ज में चला जाता है।असली समझ (सबसे महत्वपूर्ण) कागज पर किसान की आय “बढ़ी” दिख सकती है,लेकिन जमीन पर कमाई बहुत कम,खर्च लगातार बढ़ रहा,बचत लगभग नहीं,इसलिए किसान को लगता है: “आय बढ़ी नहीं, बल्कि हालत खराब हुई”


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