चैत्र मास शुक्ल पक्ष सप्तमी को माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। यह दिन नवरात्रि का सातवाँ दिन होता है, जिसे विशेष रूप से शक्ति और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
माँ कालरात्रि को भय, रोग और शत्रुओं का नाश करने वाली देवी माना जाता है।
इनके पूजन से जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं और साहस व आत्मबल बढ़ता है।
यह रूप अज्ञान और अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश देता है।
पूजा का शुभ समय (सामान्य मार्गदर्शन):-
सप्तमी तिथि में प्रातःकाल या रात्रि में विशेष पूजा का महत्व होता है।
कालरात्रि पूजा अक्सर रात्रि (निशीथ काल) में करना अधिक शुभ माना जाता है।
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा स्थल को साफ कर माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
माँ कालरात्रि को गुड़, जौ या काले चने का भोग लगाएँ।
लाल या पीले फूल अर्पित करें।
दीपक जलाकर दुर्गा सप्तशती या मंत्रों का पाठ करें।
मंत्र:-ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
पूजा में मन की शुद्धता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है।
रात्रि पूजा करते समय दीपक अवश्य जलाएं और शांत वातावरण रखें।
तिथि (2026)
चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हुई है
उसके अनुसार शुक्ल सप्तमी (कालरात्रि पूजा) 25 मार्च 2026 (बुधवार) को पड़ती है।
सप्तमी तिथि समय (बरौनी/ सोकहारा के आसपास)
सप्तमी तिथि शुरू: 24 मार्च 2026 शाम लगभग 4:07 बजे के बाद
सप्तमी तिथि समाप्त: 25 मार्च 2026 शाम तक
इसलिए 25 मार्च को पूरे दिन सप्तमी पूजा मान्य है
प्रातः पूजा: सूर्योदय के बाद (लगभग 6:15 – 10:00 बजे तक)
सर्वश्रेष्ठ समय: रात्रि पूजा (निशीथ काल)
रात लगभग 11:45 बजे से 12:30 बजे (मध्यरात्रि के आसपास)
विशेष योग (इस दिन):-
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छोटी भगवती दुर्गा स्थान बरौनी |
इसलिए पूजा का फल और भी अधिक शुभ माना जाता है
सरल निष्कर्ष:-
देवी: माँ कालरात्रि (सातवाँ दिन)
श्रेष्ठ समय: रात्रि (मध्यरात्रि पूजा)।


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