नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली के बाज़ारों में खुदरा पैसों (छोटे नोट/सिक्कों) की किल्लत कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन हाल के समय में यह फिर से उभरती दिख रही है। New Delhi और Old Delhi के व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को इससे दिक्कत हो रही है।
समस्या क्यों हो रही है:-छोटे नोटों की कमी: ₹10, ₹20, ₹50 के नोट और सिक्के पर्याप्त मात्रा में सर्कुलेशन में नहीं हैं।
डिजिटल पेमेंट का बढ़ना:- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्रोत्साहन से U P I और ऑनलाइन पेमेंट बढ़े हैं, जिससे लोग नकद (खासकर छोटे नोट) कम रखते हैं।
जमा करके रखना:- कुछ दुकानदार और लोग छोटे नोट/सिक्के जमा करके रखते हैं, जिससे बाज़ारों में उनकी उपलब्धता और घट जाती है।
बैंक से सीमित सप्लाई:- बैंकों में भी कभी-कभी छोटे नोटों की उपलब्धता सीमित रहती है।
इसका असर:- दुकानदारों को ग्राहकों को सही छुट्टा देने में दिक्कत कई बार “छुट्टा नहीं है” कहकर टॉफी/चॉकलेट देने की प्रथा। ग्राहकों और दुकानदारों के बीच बहस या असुविधा छोटे लेन-देन में देरी क्या समाधान हो सकते हैं?
डिजिटल पेमेंट अपनाना:- U P I, Q R कोड आदि से छुट्टे की समस्या कम हो सकती है
बैंकों से छोटे नोट लेना:- R B I समय-समय पर छोटे नोट जारी करता है
सिक्कों का सही उपयोग: सिक्के लेने से मना करना गैरकानूनी है
व्यवस्थित वितरण: बाज़ार में छोटे नोटों की बेहतर सप्लाई। इस मुद्दे पर हाल ही में सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (R B I) दोनों ने कुछ अहम बातें और कदम सामने रखे हैं, कि “कमी” और “जमीनी हकीकत” में थोड़ा फर्क दिख रहा है। सरकार और R B I का आधिकारिक रुख मार्च 2026 में सरकार ने संसद में साफ कहा कि ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की देश में कोई कमी नहीं है। R B I के अनुसार हर साल बड़ी मात्रा में छोटे नोट छापे और सप्लाई किए जा रहे हैं, और मांग के अनुसार सप्लाई एडजस्ट होती रहती है।
मतलब: कागज़ पर (आफीसियल डाटा में) समाप्त नहीं माना जा रहा। लेकिन ज़मीनी स्तर पर समस्या क्यों दिख रही है?
हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि: कुछ क्षेत्रों में वास्तविक नकदी ( फिजी कली कैस) की कमी महसूस हो रही है खासकर छोटे नोट/सिक्कों की उपलब्धता uneven (असमान) है,बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक तक ने cash shortage की शिकायत की है,यानी “सप्लाई है”, लेकिन सही जगह और सही समय पर नहीं पहुँच रही।
सरकार और RBI के नए कदम (2026) सबसे अहम हालिया पहल:-छोटे नोट/सिक्कों के लिए विशेष मशीनें SBI और RBI मिलकर cash&coin dispensers (छोटे नोट/सिक्के देने वाली मशीनें) लगाने की योजना बना रहे हैं,ये मशीनें बाज़ारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगेंगी। जून 2026 तक दर्जनों मशीन लगाने की योजना।
इसका मकसद:- छुट्टे पैसे सीधे मशीन से मिल जाएँ, दुकानदार पर निर्भरता कम हो। डिजिटल पेमेंट को और बढ़ावा छोटे लेन-देन में भी U P I और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा जारी सरकार मानती है कि बहुत ज्यादा मांग का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल हो चुका है।
वितरण प्रणाली सुधारने पर फोकस:- R B I और बैंक मुद्रा वितरण (कैश कहाँ कितना पहुँचे) को बेहतर करने पर काम कर रहे हैं, खासकर बहुत ज्यादा मांग क्षेत्रों (जैसे बाजार) में,देश में छोटे नोटों की कमी” आधिकारिक तौर पर नहीं मानी गई “बाज़ार में छुट्टे की समस्या”हकीकत में मौजूद है,असली समस्या:वितरण+जमाखोरी+व्यवहारिक उपयोग।
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