दारूकावन।दारुकावन में भक्त की पुकार पर प्रकट हुए भगवान शिव,नागेश ज्योतिर्लिंग की हुई स्थापना।
द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक यह भी अद्भुत ज्योतिर्लिंग है।
विशेष संवाददाता: दारूकावन.

द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक यह भी अद्भुत ज्योतिर्लिंग है।
दारुकावन क्षेत्र में राक्षसों के अत्याचार से त्रस्त जनजीवन के बीच एक अद्भुत घटना ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दारुक और दारुका नामक राक्षस दंपति लंबे समय से क्षेत्र में आतंक फैला रहे थे। उनके अत्याचारों से ऋषि, साधु और सामान्य नागरिक भयभीत थे।
सूत्रों के अनुसार, राक्षसों ने हाल ही में सुप्रिय नामक एक शिवभक्त वैश्य सहित अनेक लोगों को बंदी बना लिया था। कारागार में रहते हुए भी सुप्रिय ने भगवान शिव की आराधना जारी रखी और अन्य बंदियों को भी “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के जप के लिए प्रेरित करता रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब राक्षसों ने सुप्रिय को दंडित करने का प्रयास किया, तब उसने पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण किया। इसी दौरान एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और भगवान शिव ने अपने तेजस्वी स्वरूप में दर्शन दिए। बताया जाता है कि शिव के प्रकट होते ही राक्षसों का आतंक समाप्त हो गया और बंदियों को मुक्ति मिल गई।
घटना के बाद भक्तों में भारी उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव ने भक्त-रक्षा का एक और उदाहरण प्रस्तुत किया है। सुप्रिय की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उसी स्थान पर ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान होने का आशीर्वाद दिया। इसके बाद यह स्थान “नागेश ज्योतिर्लिंग” के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
धार्मिक विद्वानों का मानना है कि यह घटना भक्ति, श्रद्धा और धर्म की विजय का प्रतीक है। उनका कहना है कि सच्ची आस्था के सामने संकट और अत्याचार अधिक समय तक टिक नहीं सकते।
भक्तों की बड़ी संख्या इस पवित्र स्थल पर पहुँच रही है और भगवान नागेश्वर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रही है।
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