कोलकाता/शुभेंदु अधिकारी/अवैध प्रवासियों पर सख्ती: बंगाल में बनेंगे ‘होल्डिंग सेंटर’, विपक्ष ने उठाए सवाल।

कोलकाता/शुभेंदु अधिकारी/अवैध प्रवासियों पर सख्ती: बंगाल में बनेंगे ‘होल्डिंग सेंटर’, विपक्ष ने उठाए सवाल।
हम केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश से होल्डिंग् सेंटर बना रहे हैं।

कोलकाता, 25 मई। पश्चिम बंगाल में कथित अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राजनीति तेज हो गई है। 

राज्य सरकार द्वारा जिलों में “होल्डिंग सेंटर” बनाए जाने के निर्देश के बाद विपक्षी दलों ने इसे “डिटेंशन सेंटर” करार देते हुए मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari ने कहा कि जिन विदेशी नागरिकों की पहचान अवैध रूप से रह रहे लोगों के रूप में होगी, उन्हें अस्थायी रूप से इन केंद्रों में रखा जाएगा और बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत बांग्लादेश भेजा जाएगा।

सरकार का दावा है कि यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उठाया जा रहा है।

वहीं विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया कि इन केंद्रों का इस्तेमाल विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। 

उनका कहना है कि दस्तावेज़ों की कमी या पहचान संबंधी त्रुटियों के कारण भारतीय नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के दिनों में सीमा पार घुसपैठ और नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर राज्य में बयानबाज़ी तेज हुई है। 

भाजपा इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बता रही है, जबकि विपक्ष इसे सामाजिक ध्रुवीकरण की राजनीति करार दे रहा है।

विपक्षी दलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने इन “होल्डिंग सेंटरों” को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि व्यवहार में ये “डिटेंशन सेंटर” की तरह काम कर सकते हैं, जहाँ लोगों को लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है।

मुख्य आपत्तियाँ इस प्रकार हैं:

पहचान की प्रक्रिया में गलती की आशंका आलोचकों का कहना है कि केवल भाषा, दस्तावेज़ या धार्मिक पहचान के आधार पर किसी को “अवैध प्रवासी” मान लेना गलत हो सकता है।

कानूनी प्रक्रिया (due process) कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पकड़े गए लोगों को अदालत में पेश करने के बजाय सीधे BSF को सौंपने की बात की गई, जिस पर कानूनी बहस शुरू हुई है।

मानवाधिकार और नागरिक स्वतंत्रता विपक्ष का आरोप है कि इससे डर और असुरक्षा का माहौल बन सकता है, खासकर सीमावर्ती इलाकों और गरीब समुदायों में।

धार्मिक भेदभाव का आरोप क्योंकि राजनीतिक बयानबाज़ी में “C A A के तहत पात्र” और “अवैध बांग्लादेशी” जैसे शब्द आए हैं, इसलिए विपक्ष ने आरोप लगाया कि नीति का असर मुख्यतः मुस्लिम समुदाय पर पड़ सकता है।

वहीं सरकार और BJP का पक्ष यह है कि:

ये केंद्र केवल अस्थायी “ट्रांजिट” या “होल्डिंग” सुविधा हैं।
इनका उद्देश्य उन विदेशी नागरिकों को रखना है जिनकी निर्वासन प्रक्रिया चल रही है,और यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशों के अनुसार की जा रही है।


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