फुकुओका: जापान ऑस्मोसिस संयंत्र की तकनीक से बिजली पैदा कर रहा है। इसे “ब्लू एनर्जी” भी कहा जाता है।
फुकुओका: जापान ऑस्मोसिस संयंत्र की तकनीक से बिजली पैदा कर रहा है। इसे “ब्लू एनर्जी” भी कह सकते हैं।
जापान के फुकुओका शहर में एक ऑस्मोटिक पावर प्लांट शुरू किया गया है यह दुनिया का केवल दूसरा ऐसा संयंत्र है जो इस तकनीक से बिजली पैदा करता है। एक नवीन 24/7 चलने वाली नवीकरणीय तकनीक है। अगस्त 2025 में शुरू हुआ।

फुकुओका: जापान ऑस्मोसिस संयंत्र की तकनीक से बिजली पैदा कर रहा है। इसे “ब्लू एनर्जी” भी कह सकते हैं।
यह कैसे काम करता है:- यह संयंत्र ऑस्मोसिस प्रक्रिया पर आधारित है,कम नमक वाले पानी (जैसे शुद्ध या अपशिष्ट जल) और ज्यादा नमक वाले पानी (समुद्री पानी) के बीच झिल्ली लगाई जाती है। पानी प्राकृतिक रूप से उच्च नमक वाले हिस्से की ओर जाता है, जिससे दबाव बनता है। यही दबाव टरबाइन घुमाकर बिजली पैदा करता है।
नमकीन समुद्री पानी और मीठे नदी के पानी के मिलने से पैदा होती है।
ब्लू एनर्जी क्या है:-
“ब्लू एनर्जी” उस ऊर्जा को कहा जाता है जो नमकीन समुद्री पानी और मीठे नदी के पानी के मिलने से पैदा होती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ओस्मोसिस (परासरण) प्रक्रिया कहा जाता है।
जब समुद्र का खारा पानी और नदी का मीठा पानी एक विशेष झिल्ली के जरिए मिलते हैं, तो पानी प्राकृतिक रूप से कम नमक वाले क्षेत्र से ज्यादा नमक वाले क्षेत्र की ओर जाता है इस दौरान दबाव पैदा होता हैइस दबाव को टरबाइन घुमाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और इससे बिजली उत्पन्न होती है। इस तकनीक को खास तौर पर (P R O) कहा जाता है।
फायदे क्या हैं:-
उच्च लागत (विशेष झिल्ली महंगी होती है) अभी बड़े पैमाने पर उत्पादन सीमित मेंटेनेंस और तकनीकी जटिलताएँ
जापान, खासकर जापान, इस तकनीक को विकसित करने में अग्रणी है और फुकुओका जैसे क्षेत्रों में इसके परीक्षण चल रहे हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में इसे बड़े स्तर पर उपयोग करना है।
जापान के फुकुओका में इस तकनीक पर प्रयोग और विकास किया जा रहा है। वहाँ शोध संस्थान और कंपनियां इस “ब्लू एनर्जी” को व्यावहारिक रूप से उपयोगी बनाने पर काम कर रही हैं।
इसे “ब्लू एनर्जी” क्यों कहते हैं “ब्लू” शब्द समुद्र को दर्शाता है। यह पूरी तरह नवीकरणीय और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा स्रोत है।
प्रदूषण नहीं होता लगातार ऊर्जा उत्पादन संभव (सूर्य या हवा पर निर्भर नहीं) जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद तकनीक अभी महंगी है झिल्ली की कार्यक्षमता और टिकाऊपन सुधारने की जरूरत है बड़े पैमाने पर लागू करना अभी सीमित है।
“ब्लू एनर्जी” भविष्य की एक संभावनाशील हरित ऊर्जा तकनीक है, लेकिन अभी इसे व्यापक रूप से अपनाने के लिए और शोध व निवेश की जरूरत है।यह कैसे काम करती है?
यह तकनीक समुद्र के खारे पानी और नदी के मीठे पानी के बीच लवणता के अंतर का उपयोग करती है। जब ये दोनों पानी एक विशेष झिल्ली के माध्यम से मिलते हैं, तो दबाव उत्पन्न होता है। उसी दबाव से टर्बाइन चलाकर बिजली पैदा की जाती है।
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| नमकीन समुद्री पानी और मीठे नदी के पानी के मिलने से पैदा होती है। |
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