नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट:-आठवीं कक्षा में Corruption in the Judiciary पेज को एन सी ई आर टी किताबों से हटा दिया जाय।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट:-आठवीं कक्षा में
Corruption in the Judiciary इस पेज को एन सी ई आर टी की किताबों से हटा दिया जाए।

एनसीईआरटी (NCERT) किताबों में "न्यायपालिका में भ्रष्टाचार" पर जानकारी।
नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विकास सिंह एनसीईआरटी बुक से इस को हटाया जाए।

एनसीईआरटी की किताबों में, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अक्सर चर्चा होती है, विशेषकर भारत के संविधान, राजनीति और समाजशास्त्र से जुड़े विषयों में। ये किताबें न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक समीक्षा, और कानून के शासन पर बल देती हैं, साथ ही यह भी बताती हैं कि कभी-कभी न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मुख्य कारण:-

(1) विलंबित न्याय:-

भारतीय न्यायपालिका में केसों की लंबी सुनवाई और फैसलों में विलंब न्यायिक व्यवस्था के समक्ष एक बड़ा मुद्दा है। इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि न्यायालय में मामलों की धीमी गति से फैसला होने से न्यायपालिका पर दबाव बढ़ता है और न्यायधीशों को अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए भ्रष्ट तरीके अपनाने पड़ सकते हैं।
वित्तीय और पारिवारिक दबाव:-
कुछ न्यायधीशों के पास भ्रष्टाचार से निपटने के लिए पर्याप्त निगरानी नहीं होती है, जिससे वे विभिन्न प्रकार के बाहरी दबावों का सामना करते हैं।
न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन:-
जब न्यायपालिका पर बाहरी दबाव बढ़ता है, तो न्यायाधीशों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है, जिसके कारण वे भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।
न्यायपालिका में सुधार की आवश्यकता:-
न्यायिक स्वतंत्रता को मजबूत करना:-
न्यायपालिका को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखना आवश्यक है ताकि वह बिना किसी दबाव के अपने कार्य कर सके।
स्मार्ट कोर्ट सिस्टम:-
डिजिटलाइजेशन और टेक्नोलॉजी का उपयोग करके न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
न्यायिक जवाबदेही:-
 न्यायधीशों के कार्यों की निगरानी के लिए एक तंत्र होना चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सके।
निष्कर्ष:-
एनसीईआरटी की किताबों में यह देखा जाता है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या है, लेकिन इसे दूर करने के लिए कई उपायों की आवश्यकता है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार, न्यायधीशों और समाज को मिलकर काम करना जरूरी है।

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