बिहार/बेगुसराय/बरौनी/सोकहारा: हिन्दू शास्त्रों के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रा मनाया जाता है।
हिंदू धर्म में साल भर में चार बार नवरात्रि आती है। माघ,चैत्र, आषाढ़ और आश्विन मास में। इन चारों नवरात्रि का अपना अलग-अलग महत्व और उद्देश्य होता है।
(1) चैत्र नवरात्रि (वसंत नवरात्रि) मास: चैत्र (मार्च–अप्रैल)
महत्व:- यह हिंदू नववर्ष की शुरुआत का समय होता है।माँ दुर्गा की पूजा से नए कार्यों की शुभ शुरुआत आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का समय अंत में राम नवमी मनाई जाती है। नए जीवन और नई शुरुआत का प्रतीक है।
(2) आश्विन नवरात्रि (शारदीय नवरात्रि) मास: आश्विन (सितंबर–अक्टूबर) महत्व: साल की सबसे प्रसिद्ध और धूमधाम वाली नवरात्रि माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर वध की कथा से जुड़ी अंत में विजयादशमी मनाया जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
(3)आषाढ़ नवरात्रि (गुप्त नवरात्रि) मास: आषाढ़ (जून–जुलाई) महत्व:- इसे “गुप्त नवरात्रि” कहा जाता है। तंत्र, साधना और विशेष सिद्धियों के लिए महत्वपूर्ण माँ दुर्गा की गुप्त पूजा की जाती है।आध्यात्मिक शक्ति और साधना का समय है।
(4) माघ नवरात्रि (गुप्त नवरात्रि) मास: माघ (जनवरी–फरवरी)
महत्व: यह भी एक गुप्त नवरात्रि मानी जाती है। योग, ध्यान और तांत्रिक साधना के लिए विशेष आंतरिक शक्ति और ज्ञान प्राप्त करने का समय आत्मिक उन्नति और गहन साधना का प्रतीक यह भी एक गुप्त नवरात्रि मानी जाती है। योग, ध्यान और तांत्रिक साधना के लिए विशेष आंतरिक शक्ति और ज्ञान प्राप्त करने का समय आत्मिक उन्नति और गहन साधना का प्रतीक माना जाता है। चारों नवरात्रि का अंतर एक नजर में
नवरात्रि उद्देश्य:- चैत्र नई शुरुआत,शुद्धि,आश्विन बुराई पर जीत आषाढ़ गुप्त साधना,माघ आत्मिक शक्ति चारों नवरात्रि अलग-अलग उद्देश्य से मनाई जाती हैं।
चैत्र और आश्विन → सामान्य लोगों के लिए (भक्ति और उत्सव)
माघ और आषाढ़ → साधकों के लिए (गुप्त साधना और शक्ति प्राप्ति)।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें