चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि (राम नवमी) पर मां दुर्गा के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि (राम नवमी) पर मां दुर्गा के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। 
मां काली सरस्वती दुर्गा लक्ष्मी जागरण।

।।चैत्र शुक्ल पक्ष अष्टमी उपरांत नवमी माता की ।।जागरण।।

इस दिन विशेष भोग चढ़ाने का महत्व होता है।
चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी सिध्दीदात्री माता की अराधना अर्चना की जाती है।

नवमी तिथि का मुख्य भोग:- पूरी, हलवा और काला चना। इसे “कन्या पूजन भोग” भी कहा जाता है। अन्य भोग जो मां को अर्पित किए जाते हैं। सूजी का हलवा (सबसे प्रमुख)  काला चना (उबला हुआ) पूरी,खीर,नारियल,फल (जैसे केला, सेब) पान और सुपारी इत्यादि।

खास परंपरा:- नवमी के दिन कन्या पूजन (कंजक) किया जाता है, जिसमें 9 छोटी कन्याओं (मां दुर्गा का रूप मानकर) को यही भोग खिलाया जाता है और आशीर्वाद लिया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से यह भोग अर्पित करने पर मां प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि और सिद्धियां प्रदान करती हैं।

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