रूस: विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत को लेकर कहा भारत और रूस की दोस्ती “मजबूत और अटूट” है।

रूस: विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत को लेकर कहा भारत और रूस की दोस्ती “मजबूत और अटूट” है।
भारत और रूस की दोस्ती “मजबूत और अटूट” है।
सर्गेई लावरोव ने कहा 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस दौरे पर जाएंगे और रूस उन्हें स्वागत करने के लिए तैयार है।

सर्गेई लावरोव ने ज़ोर दिया कि दोनों देशों के रिश्ते आपसी भरोसे, सम्मान और लंबे समय की साझेदारी पर आधारित हैं।
उनका मुख्य संदेश:-भारत-रूस संबंध अभी भी बहुत मजबूत है।भविष्य में सहयोग (रक्षा, व्यापार, तकनीक) और बढ़ेगा दोनों देश वैश्विक मुद्दों पर मिलकर काम करेंगे।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जब कहा कि भविष्य में भारत-रूस सहयोग बढ़ेगा, तो उसका मतलब सिर्फ सामान्य दोस्ती नहीं, बल्कि कई ठोस क्षेत्रों में काम बढ़ाना है। 
रक्षा (सुरक्षा):- हथियार और तकनीक का संयुक्त निर्माण।
जैसे ब्रह्मोस मिसाइल पहले से मिलकर बनाया गया है।ऐसे और प्रोजेक्ट बढ़ सकते हैं।
फाइटर जेट, सबमरीन, एयर डिफेंस सिस्टम रूस से S-400 जैसी सिस्टम की सप्लाई और अपग्रेड जारी रह सकता है।
Make in India पर फोकस: भारत में ही हथियार बनाने के लिए रूस टेक्नोलॉजी शेयर कर सकता है।
तेल और गैस सप्लाई रूस सस्ते दाम पर भारत को कच्चा तेल देता है। यह आगे भी बढ़ सकता है।
रुपया-रूबल में व्यापार डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए दोनों देश अपनी करेंसी में व्यापार बढ़ा सकते हैं।
नए सेक्टर:-खाद, कोयला, फार्मा और एग्रीकल्चर में भी साझेदारी बढ़ सकती है।
कुणडाकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट जैसे प्रोजेक्ट में रूस पहले से मदद कर रहा है—और नए प्लांट बन सकते हैं।
अंतरिक्ष मिशन, सैटेलाइट और रिसर्च में सहयोग बढ़ सकता है।
नई टेक्नोलॉजी में भी दोनों देश मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर सहयोग
दोनों देश B R I C S और शंघाई सहयोग संगठन जैसे समूहों में मिलकर काम करते हैं।
दुनिया में “पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम” करने और अपनी अलग ताकत बनाने की रणनीति पर भी सहयोग हो सकता है।

सार:-


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