इंग्लैंड: युनाइटेड किंगडम में रेलवे को निजीकरण से मिश्रित परिणाम (फायदे + नुक्सान)
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| युनाइटेड किंगडम ऑफ ब्रिटिश सरकार |
यूनाइटेड किंगडम (UK) में रेलवे का निजीकरण 1990 के दशक में, खासकर British Rail के टूटने के बाद किया गया था। इसका उद्देश्य प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, सेवाएँ सुधारना और सरकारी खर्च कम करना था। लेकिन समय के साथ इसके कई नुकसान सामने आए:
1. टुकड़ों में बँटने से समन्वय की कमी निजीकरण के बाद रेलवे को कई कंपनियों में बाँट दिया गया—ट्रैक, ट्रेन ऑपरेटर, मेंटेनेंस अलग-अलग इससे समन्वय मुश्किल हो गया। देरी और संचालन में गड़बड़ी बढ़ी।
2. किरायों में भारी वृद्धि निजी कंपनियाँ मुनाफा कमाने पर ध्यान देती हैं। UK में ट्रेन किराए यूरोप के सबसे महंगे में गिने जाते हैं।यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दी गई।
3. सुरक्षा चिंताएँ निजीकरण के बाद कुछ बड़े हादसे हुए, जैसे Hatfield rail crash। जांच में पाया गया कि मेंटेनेंस में लापरवाही और कंपनियों के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट न होने से जोखिम बढ़ा।
4. सरकारी सब्सिडी कम नहीं हुई,निजीकरण का एक बड़ा तर्क था कि सरकार का खर्च घटेगा। लेकिन वास्तविकता में सरकार को अब भी भारी सब्सिडी देनी पड़ती है। कुछ मामलों में पहले से ज्यादा खर्च हुआ।
5. जवाबदेही की कमी: जब कई कंपनियाँ शामिल हों, तो गलती होने पर जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है।यात्रियों को शिकायत का स्पष्ट समाधान नहीं मिलता
6. सेवा गुणवत्ता में असमानता कुछ रूट्स पर अच्छी सेवा है, लेकिन कई जगह: देरी, कैंसलेशन, भीड़ ग्रामीण या कम-लाभ वाले रूट्स की अनदेखी।
7. अल्पकालिक सोच निजी कंपनियाँ अक्सर छोटे समय के अनुबंध पर काम करती हैं। लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में रुचि कम होती है।
निष्कर्ष: निजीकरण से कुछ सुधार भी हुए (जैसे यात्री संख्या बढ़ी),लेकिन कुल मिलाकर उच्च किराया जटिल संरचना सुरक्षा और सेवा से जुड़े मुद्दे,इन कारणों से UK में अब फिर से रेलवे के आंशिक या पूर्ण सरकारी नियंत्रण पुनः राष्ट्रीयकरण की मांग बढ़ रही है।

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