नई दिल्ली: मोदी सरकार में भ्रष्टाचार कांग्रेस की सरकार से ज्यादा।
एन डी ए की सरकार में सभी नेता खरबपति हैं चुनाव से पहले जीरो बंटा जीरो।
नई दिल्ली: केन्द्रीय चुनाव के समय में एक ही नारा था हर-हर मोदी,घर-घर मोदी लेकिन अभी के नारे हैं। हर-हर मोदी घर- घर ग़रीबी।
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| आम जनता का नारा हर-हर मोदी घर घर ग़रीबी। |
भारत में बेरोजगारी 70% है फिर भी भारत की 30% जनता मोदी-मोदी कर रहे हैं लेकिन 70% बेरोजगारी झेलने वाले ने हर-हर मोदी घर-घर मोदी बोलना छोड़ दिया।
मोदी सरकार में भ्रष्टाचार कांग्रेस की सरकार से ज्यादा है।
सबसे ज्यादा प्रभावित जनता को करने वाले प्रथम नेता नरेंद्र दामोदर दास मोदी। वर्तमान भारत के प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हैं। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी पर टीका-टिप्पणी करते हैं गांधी परिवारवाद करता है। आम जनता का कहना है कि मोदी के पार्टी में परिवारवाद भयंकर रूप से हो रहा है अभी मोदी को दिखना चाहिए की कौन परिवारवाद करता है।
यह एक राजनीतिक आरोप/राय है, न कि कोई स्थापित तथ्य। ऐसे बयानों को समझते समय थोड़ा संदर्भ ज़रूरी होता है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) दोनों पर अलग-अलग समय में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।
नरेंद्र मोदी की सरकार (2014 के बाद) खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त बताती है, जबकि विपक्ष कई मामलों में आरोप लगाता रहा है।
दूसरी ओर, मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार (2004–2014) के दौरान भी 2G, कोयला आदि जैसे बड़े घोटाले चर्चा में रहे थे। असलियत क्या है? “किस सरकार में ज्यादा भ्रष्टाचार है” -यह मापना बहुत कठिन है, क्योंकि: हर मामले की प्रकृति अलग होती है। कई आरोप साबित नहीं होते हैं।राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं। कैसे समझें? विश्वसनीय रिपोर्ट्स (जैसे CAG, कोर्ट के फैसले) देखें, मीडिया रिपोर्ट्स को क्रॉस-चेक करें।सिर्फ बयान के आधार पर निष्कर्ष न निकालें।
संक्षेप में: यह दावा एक राजनीतिक दृष्टिकोण है, न कि सार्वभौमिक रूप से सिद्ध सच्चाई।
मैं दोनों सरकारों के प्रमुख भ्रष्टाचार मामलों की तुलना करके विस्तार से समझा सकता चलिए तथ्यों और प्रमुख मामलों के आधार पर तुलना करके समझते हैं—बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के।
1.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (UPA सरकार: 2004–2014)
इस दौर में कुछ बड़े घोटाले काफी चर्चा में रहे हैं।
प्रमुख मामले:-
2G स्पेक्ट्रम घोटाला (2008) टेलीकॉम लाइसेंस आवंटन में कथित गड़बड़ी कोयला आवंटन घोटाला (Coalgate)
कोयला ब्लॉकों के आवंटन में अनियमितताएँ कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला (2010) कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 से जुड़े खर्चों में भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
इन मामलों में:-CAG ने बड़े पैमाने पर संभावित नुकसान का अनुमान लगाया,कई नेताओं/अधिकारियों पर जांच हुई।कुछ मामलों में बाद में अदालतों ने सबूतों की कमी के कारण बरी भी किया।
2.भारतीय जनता पार्टी (NDA सरकार: 2014–वर्तमान) इस दौर में भी कई विवाद और आरोप सामने आए:
प्रमुख आरोप/विवाद:-राफेल डील विवाद (2018) फ्रांस से लड़ाकू विमान खरीद में पारदर्शिता पर सवाल PMC बैंक घोटाला (2019) बैंकिंग अनियमितता (हालांकि यह सीधे केंद्र सरकार का घोटाला नहीं था) इलेक्टोरल बॉन्ड योजना राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता को लेकर सवाल कुछ राज्य-स्तरीय घोटाले (जैसे खनन, भर्ती आदि)।
इन मामलों में:-सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले में सरकार को क्लीन चिट दी । इलेक्टोरल बॉन्ड पर पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस और कानूनी चुनौती रही है।
3. मुख्य अंतर (सरल भाषा में)
पहलू कांग्रेस (UPA) भाजपा (NDA)
बड़े “घोटालों” की धारणा बहुत बड़े और हाई-प्रोफाइल अपेक्षाकृत कम बड़े, पर विवाद मौजूद जांच/निष्कर्ष कई मामलों में सबूत कमजोर निकले कई मामलों में आरोप, पर सीमित कानूनी दोष सिद्ध राजनीतिक नैरेटिव “घोटालों की सरकार” “भ्रष्टाचार पर सख्ती” vs “पारदर्शिता पर सवाल”
निष्कर्ष:-
दोनों ही सरकारों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।कांग्रेस काल में “बड़े घोटालों” की छवि ज्यादा बनी,मोदी सरकार में “कम बड़े घोटाले” लेकिन नीतिगत पारदर्शिता पर बहस ज्यादा रही है।
किसमें ज्यादा भ्रष्टाचार है, यह कहना अभी भी व्यक्तिगत और राजनीतिक दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

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