बिहार: बेगूसराय में मामला सिर्फ ट्रेनों के ठहराव तक सीमित नहीं है,अब पार्सल लोडिंग-अनलोडिंग बंद होने से व्यापारियों की नाराज़गी भी जुड़ गई है।

बेगूसराय में मामला सिर्फ ट्रेनों के ठहराव तक सीमित नहीं है अब पार्सल लोडिंग-अनलोडिंग बंद होने से व्यापारियों की नाराज़गी भी जुड़ गई है।

बेगुसराय रेलवे स्टेशन पर सभी ट्रेनों का ठहराव पांच मिनट और पार्सल लोडिंग अनलोडिंग की मांग रेलमंत्री से कई वर्षों से की जा रही है। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

बेगूसराय एक महत्वपूर्ण जिला मुख्यालय है और यहां से बड़ी संख्या में लोग बाहर काम, पढ़ाई और इलाज के लिए यात्रा करते हैं।पर्याप्त ठहराव न होने के कारण लोगों को पास के बड़े स्टेशनों (जैसे बरौनी आदि) पर जाकर ट्रेन पकड़नी पड़ती है।

स्थानीय संगठनों का तर्क है कि 5 मिनट का ठहराव देने से यात्रियों को चढ़ने-उतरने में सुविधा होगी और भीड़-भाड़ कम होगी।

बेगूसराय स्टेशन पर पार्सल सेवा बंद होने का कोई स्थायी आधिकारिक कारण सार्वजनिक रूप से नहीं मिला।

बेगूसराय जिले के अन्य स्टेशनों (जैसे सलौना) पर भी एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को लेकर लोग आंदोलन कर चुके हैं, जिससे यह मुद्दा लंबे समय से चला आ रहा है। जिससे मुद्दा और बड़ा हो गया है।

बिहार के बेगूसराय रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार मांग उठ रही है। हालिया जानकारी के अनुसार, लोग यह मांग कर रहे हैं कि यहां गुजरने वाली सभी ट्रेनों का कम से कम 5 मिनट का ठहराव सुनिश्चित किया जाए।
यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण ट्रेनें स्टेशन पर या तो रुकती नहीं हैं या बहुत कम समय के लिए रुकती हैं।
इससे यात्रियों खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और सामान के साथ यात्रा करने वाले लोगों—को काफी परेशानी होती है।
इसी वजह से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन भी किए गए हैं। 
बेगूसराय स्टेशन पर पार्सल सेवा बंद होने का कोई स्थायी आधिकारिक कारण सार्वजनिक रूप से नहीं मिला।

🚆 पार्सल सेवा बंद होने का असर बेगूसराय रेलवे स्टेशन यहां पार्सल (माल) की लोडिंग-अनलोडिंग बंद होने से स्थानीय व्यापार सीधे प्रभावित हुआ है। छोटे-मझोले व्यापारी, जो रेलवे के जरिए सस्ता और तेज माल भेजते/मंगाते थे, अब महंगे विकल्प (जैसे सड़क परिवहन) पर निर्भर हो गए हैं। खासकर अनाज, कपड़ा, किराना और अन्य थोक व्यापार पर असर पड़ा है।
😠व्यापारियों की नाराज़गी क्यों: व्यापारियों का कहना है कि बिना पर्याप्त विकल्प दिए यह सेवा बंद कर दी गई।
इससे लागत बढ़ी, समय ज्यादा लग रहा है, और प्रतिस्पर्धा में नुकसान हो रहा है।
इसी वजह से उन्होंने रेल मंत्री (अश्विनी वैष्णव) के खिलाफ नाराज़गी जताई है और सेवा बहाल करने की मांग की है।
🚉 ठहराव + पार्सल दोहरी मांग:
अब स्थानीय लोग और व्यापारी दो प्रमुख मांगें कर रहे हैं,सभी प्रमुख ट्रेनों का कम से कम 5 मिनट ठहराव पार्सल लोडिंग-अनलोडिंग सेवा फिर से शुरू की जाए।
रेलवे का पक्ष (संभावित): हालांकि रेलवे आमतौर पर ऐसे फैसले इन कारणों से लेता है,कम पार्सल ट्रैफिक या आर्थिक व्यवहार्यता ऑपरेशन और लॉजिस्टिक की दिक्कतें बड़े जंक्शन (जैसे बरौनी) पर सेवाएं केंद्रित करना।
यह मांग मुख्य रूप से यात्री सुविधा और क्षेत्रीय महत्व को ध्यान में रखकर उठाई जा रही है। 



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