राजनीति में राहुल गांधी हों या नरेन्द्र मोदी, हर नेता अपनी बात को इस तरह रखते हैं कि जनता को लगे उनकी पार्टी ही सबसे बेहतर विकल्प है। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और इंडियन नेशनल कांग्रेस सभी अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करती हैं।
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।।तृणमूल कांग्रेस+बीजेपी+इंडियन नेशनल कांग्रेस।। |
असली तस्वीर समझने के लिए कुछ चीज़ें ज़्यादा भरोसेमंद मानी जाती हैं:-
चुनाव परिणाम – किसे कितना वोट मिला, इससे साफ संकेत मिलता है।
वोट शेयर और सीटें – जनता का झुकाव किस तरफ है।
जमीनी मुद्दे – बेरोज़गारी, महंगाई, स्थानीय समस्या।
लोकल फीडबैक – रैलि, जनसभा, मीडिया रिपोर्ट्स।
यानी, भाषण और दावे एक तरह का “नैरेटिव” बनाते हैं, लेकिन वास्तविक जनमत चुनाव और जमीनी हालात से ही सामने आता है।
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| ।।तृणमूल कांग्रेस समर्थकों में से एक अभिषेक बनर्जी।। |
पश्चिम बंगाल में जनता का झुकाव किस तरफ रहा है। पश्चिम बंगाल में में जनता का झुकाव काफी साफ दिखाई देता है।
2016 विधानसभा चुनाव:-
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी): 211 सीट, ~45% वोट
इंडियन नेशनल कांग्रेस: 44 सीट
कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (लेफ्ट): 26 सीट
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी): सिर्फ 3 सीट
मतलब: उस समय जनता का भारी झुकाव टीएमसी की तरफ था, बीजेपी बहुत कमजोर थी।
2021 विधानसभा चुनाव:- टीएमसी: 215 सीट, ~48% वोट, बीजेपी: 77 सीट, ~38% वोट,कांग्रेस + लेफ्ट: लगभग खत्म (0 सीट)
इसका मतलब:- टीएमसी अभी भी सबसे मजबूत पार्टी लेकिन बीजेपी ने बहुत तेजी से उभरकर मुख्य विपक्ष की जगह ले ली।कांग्रेस और लेफ्ट का जनाधार काफी गिर गया।
टीएमसी: मजबूत बनी रही (थोड़ा और बढ़ी)
बीजेपी: 3 सीट → 77 सीट (बड़ा उछाल)
कांग्रेस + लेफ्ट: लगभग खत्म
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