कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कांग्रेस बहुत कमजोर स्थिति में है।

इंडियन नेशनल कांग्रेस
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कांग्रेस बहुत कमजोर स्थिति में है।

बीजेपी+तृणमूल कांग्रेस समर्थकों में झड़प शुरू हुई मजबुरन पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा बीजेपी अपनी हार को छुपाने के लिए अपने समर्थकों द्वारा आपस में दंगा फसाद करवा रहा है।

राजनीति में राहुल गांधी हों या नरेन्द्र मोदी, हर नेता अपनी बात को इस तरह रखते हैं कि जनता को लगे उनकी पार्टी ही सबसे बेहतर विकल्प है। इसी तरह भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और इंडियन नेशनल कांग्रेस सभी अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करती हैं।
2026 विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान में

।।तृणमूल कांग्रेस+बीजेपी+इंडियन नेशनल कांग्रेस।।

असली तस्वीर समझने के लिए कुछ चीज़ें ज़्यादा भरोसेमंद मानी जाती हैं:-

चुनाव परिणामकिसे कितना वोट मिला, इससे साफ संकेत मिलता है।

वोट शेयर और सीटेंजनता का झुकाव किस तरफ है।

जमीनी मुद्दे – बेरोज़गारी, महंगाई, स्थानीय समस्या।

लोकल फीडबैकरैलि, जनसभा, मीडिया रिपोर्ट्स।

यानी, भाषण और दावे एक तरह का “नैरेटिव” बनाते हैं, लेकिन वास्तविक जनमत चुनाव और जमीनी हालात से ही सामने आता है।
।।तृणमूल कांग्रेस समर्थकों में से एक अभिषेक बनर्जी।। 

पश्चिम बंगाल में जनता का झुकाव किस तरफ रहा है। पश्चिम बंगाल में में जनता का झुकाव काफी साफ दिखाई देता है।

2016 विधानसभा चुनाव:-

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी): 211 सीट, ~45% वोट

इंडियन नेशनल कांग्रेस: 44 सीट

कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया (लेफ्ट): 26 सीट

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी): सिर्फ 3 सीट

मतलब: उस समय जनता का भारी झुकाव टीएमसी की तरफ था, बीजेपी बहुत कमजोर थी।

2021 विधानसभा चुनाव:- टीएमसी: 215 सीट, ~48% वोट, बीजेपी: 77 सीट, ~38% वोट,कांग्रेस + लेफ्ट: लगभग खत्म (0 सीट) 

इसका मतलब:- टीएमसी अभी भी सबसे मजबूत पार्टी लेकिन बीजेपी ने बहुत तेजी से उभरकर मुख्य विपक्ष की जगह ले ली।कांग्रेस और लेफ्ट का जनाधार काफी गिर गया।

सबसे बड़ा ट्रेंड (2016 → 2021)

टीएमसी: मजबूत बनी रही (थोड़ा और बढ़ी)

बीजेपी: 3 सीट → 77 सीट (बड़ा उछाल)

कांग्रेस + लेफ्ट: लगभग खत्म 

इसका सीधा मतलब क्या है: जनता पूरी तरह एक पार्टी से नाराज़ नहीं थी। बल्कि पावर टीएमसी के पास रही, लेकिन एक बड़ा वर्ग बीजेपी की तरफ शिफ्ट हुआ। कांग्रेस “तीसरा विकल्प” बनने में सफल नहीं रही।

निष्कर्ष (साधारण भाषा में) तृणमूल कांग्रेस = अभी भी मुख्य पसंद।

भारतीय जनता पार्टी = तेजी से बढ़ती वैकल्पिक ताकत धीरे-धीरे कमजोर दिखाई दे रही है। 

इंडियन नेशनल कांग्रेस= जमीन पर कमजोर दिखाई दे रही है। इसलिए जब Rahul Gandhi कहते हैं कि “लोग दोनों से परेशान हैं” 'तो डेटा पूरी तरह उस दावे को सपोर्ट नहीं करता, क्योंकि: टीएमसी को लगातार जीत मिल रही है।


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