नई दिल्ली/गवर्नर/रुपये पर R B I गवर्नर का बड़ा बयान।

रुपये पर R B I गवर्नर का बड़ा बयान

नई दिल्ली/गवर्नर/रुपये पर R B I गवर्नर का बड़ा बयान।
“रुपया फिलहाल कम मूल्यवान, बैंकिंग में बचत जरूरी”

Sanjay Malhotra द्वारा “रुपया कम मूल्यवान है” जैसी बात का अर्थ आमतौर पर यह होता है कि भारतीय मुद्रा की क्रय शक्ति या अंतरराष्ट्रीय मूल्य दबाव में है। 

ऐसे समय में Reserve Bank of India और बैंकिंग व्यवस्था लोगों को नकद घर में रखने के बजाय बैंक में जमा करने के लिए प्रोत्साहित करती है, क्योंकि:

बैंक जमा पर ब्याज मिलता है।

पैसा औपचारिक अर्थव्यवस्था में आता है।

बैंक उसी धन से उद्योग, घर, खेती और व्यवसायों को ऋण देते हैं।

इससे निवेश और आर्थिक गतिविधि बढ़ती है।

लेकिन “सिर्फ बैंक में पैसा जमा करना ही लोगों की भलाई है” यह पूरी तस्वीर नहीं है। 

आम नागरिक के लिए संतुलन ज़रूरी होता है।

कुछ पैसा बचत खाते/FD में,

कुछ आपातकालीन फंड,

और लंबी अवधि के लिए निवेश (जैसे म्यूचुअल फंड, PF, आदि)।

अगर महंगाई ब्याज दर से ज्यादा बढ़ती है, तो केवल बचत खाते में पैसा रखने से वास्तविक संपत्ति की वृद्धि सीमित हो सकती है। 

इसलिए वित्तीय योजना व्यक्ति की आय, जोखिम और जरूरतों पर निर्भर करती है।

नई दिल्ली: Sanjay Malhotra ने भारतीय रुपये को लेकर बड़ा बयान दिया है। 

उन्होंने कहा कि हाल की गिरावट के बाद रुपया फिलहाल “अंडर वैल्यूड” यानी कम मूल्यवान दिखाई दे रहा है। 

साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि देश की आर्थिक मजबूती के लिए लोगों का पैसा बैंकिंग व्यवस्था में आना जरूरी है।

Reserve Bank of India के गवर्नर ने कहा कि R B I विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए “जो भी जरूरी होगा” वह कदम उठाएगा। 

उन्होंने बताया कि R B I के पास लगभग 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे अत्यधिक उतार-चढ़ाव और सट्टेबाजी पर नियंत्रण किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आम नागरिक बैंक में पैसा जमा करते हैं तो उससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। 

बैंक उसी धन को उद्योग, व्यापार, कृषि और घरों के लिए ऋण के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिससे निवेश और रोजगार बढ़ता है।

हालांकि आर्थिक जानकार यह भी कहते हैं कि केवल बचत खाते में पैसा रखना पर्याप्त नहीं है। 

लोगों को अपनी जरूरत और जोखिम के अनुसार F D, P F, म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश विकल्पों पर भी ध्यान देना चाहिए।

हाल के दिनों में रुपये में आई कमजोरी के पीछे पश्चिम एशिया तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बाजार की अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है। 

R B I का कहना है कि हालात सामान्य होने पर रुपये में फिर मजबूती आ सकती है।

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