पटना,एजेंसी। बिहार में शराबबंदी पर सवाल, अवैध कारोबार जारी।
कार्यालय:कर्मचारी/केन्द्र/राज्य कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा शराब सेवन, अवैध कारोबार पर सवाल,सरकार को राजस्व हानि, शराब माफिया हो रहे मालामाल।
पटना,संवाददाता। भारतीय रेलवे कुली समाचार पत्र देश विदेश समाचार
नीति और कानून की घोषणा एक बात है, और उसका प्रभाव वास्तविक जीवन में पूरी तरह लागू करना दूसरी बात। यह सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती है कानून बनाने से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसका प्रभावी क्रियान्वयन।
नीति और कानून की पहल:
नितीश कुमार की सरकार ने शराब बंदी लागू की है। इसका मतलब यह है कि सरकारी स्तर पर शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया है। आम तौर पर इसका उद्देश्य समाज में शराब से होने वाले स्वास्थ्य और सामाजिक नुकसान को कम करना होता है।
वास्तविकता और चुनौतियाँ:
आपने जो कहा कि “शराब प्रशासन की मिली भगत से घर-घर धड़ल्ले से बाजार में उपलब्ध हो रहा है,” यह दर्शाता है कि कानून के बावजूद अवैध बिक्री जारी है। इसका कारण अक्सर यह होता है कि:
शराब की काला बाज़ार आपूर्ति बहुत सक्रिय हो जाती है।
प्रशासनिक भ्रष्टाचार या स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत इसे बढ़ावा देती है। मांग और आपूर्ति का सिद्धांत जब लोग शराब लेना चाहते हैं, तो अवैध तरीके से इसे उपलब्ध कराया जाता है।
बिहार में लागू शराबबंदी कानून के बावजूद राज्य के कई जिलों में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्ती के दावों के बावजूद घर-घर शराब उपलब्ध हो रही है।
राज्य सरकार ने शराबबंदी को सामाजिक सुधार की बड़ी पहल बताया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार यह कहते रहे हैं कि शराबबंदी से घरेलू हिंसा और अपराध में कमी आई है। हालांकि विपक्ष और स्थानीय लोग कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठा रहे हैं।
कई इलाकों में लोगों का आरोप है कि अवैध कारोबार प्रशासन की मिलीभगत से चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई अक्सर छोटे विक्रेताओं तक सीमित रह जाती है, जबकि बड़े तस्कर बच निकलते हैं।
सामाजिक संगठनों का मानना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी। इसके लिए प्रशासनिक पारदर्शिता, रोजगार के अवसर, नशामुक्ति अभियान और जन जागरूकता जरूरी है।
वहीं, सरकार का दावा है कि अवैध शराब के खिलाफ लगातार छापेमारी की जा रही है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो रही है। बावजूद इसके, शराबबंदी की प्रभाव शीलता को लेकर बहस जारी है।
बिहार। सरकार,प्रशासन और समाज तीनों को एकजुट होकर साथ में काम करना पड़ेगा।इस प्रकार कुछ व्यावहारिक उपाय कर सकते हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना:
जिन इलाकों में लगातार अवैध शराब पकड़ी जाती है, वहाँ स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग की जिम्मेदारी तय हो। भ्रष्ट अधिकारियों पर तेज कार्रवाई हो।
गुप्त शिकायत व्यवस्था:-
लोगों को सुरक्षित तरीके से सूचना देने की सुविधा मिले, ताकि वे बिना डर के अवैध बिक्री की जानकारी दे सकें।
तकनीकी निगरानी:-
बॉर्डर चेकपोस्ट, सीसीटीवी, ड्रोन और डिजिटल ट्रैकिंग से तस्करी पर रोक लगाई जा सकती है।
रोजगार और नशामुक्ति कार्यक्रम:-
कई लोग शराब के अवैध कारोबार में आर्थिक मजबूरी से जुड़ते हैं। वैकल्पिक रोजगार और नशामुक्ति केंद्रों की जरूरत होती है।
समाज की भागीदारी:-
पंचायत, महिला समूह, और स्थानीय संगठन जागरूकता अभियान चलाएँ। बिहार में कई जगह महिलाओं ने अवैध शराब के खिलाफ प्रभावी आंदोलन भी किए हैं।
कानून का समान पालन:-
छोटे लोगों पर ही कार्रवाई न हो, बल्कि बड़े सप्लायर और नेटवर्क पर भी सख्त कार्रवाई हो।
शराबबंदी जैसी नीति की सफलता काफी हद तक उसके ईमानदार क्रियान्वयन और जनता के सहयोग पर निर्भर करती है।
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