नई दिल्ली: क्या भारतीय रेलवे का निजीकरण भारत के लिए सही है या गलत?
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| निजी कंपनियों के हाथों सफाई कार्य दिया गया है। |
उदाहरण:-- तेजस एक्सप्रेस में सेवा मानक बेहतर माना गया।
2. सरकार का बोझ कम होगा रेलवे को हर साल भारी निवेश चाहिए। निजी पैसा आने से सरकार दूसरे क्षेत्रों (स्वास्थ्य और शिक्षा) पर खर्च कर सकती है।
3. तेज़ विकास (तेज आधुनिकीकरण) नए स्टेशन, बुलेट ट्रेन आधुनिक तकनीक जल्दी आ सकती है। निर्णय लेने वाला निजी क्षेत्र में तेज़ होता है।
4. नवाचार बढ़ेगा नई टेक्नोलॉजी और बेहतर मैनेजमेंट आचरण आएँगी, विरोध में तर्क निजीकरण गलत क्यों हो सकता है।
1.किराया बढ़ने का खतरा:- निजी कंपनियों का लक्ष्य लाभ होता है। टिकट महंगे हो सकते है। गरीब और मध्यम वर्ग प्रभावित होंगे।
2. सामाजिक जिम्मेदारी कम हो सकती है। भारतीय रेलवे सिर्फ व्यवसाय नहीं है।यह लाखों लोगों की जीवन है, दूर-दराज़ और घाटे वाले मार्ग भी चलाने पड़ते हैं। निजी कंपनियाँ ऐसे मार्ग avoid कर सकती हैं।
3. असमानता बढ़ सकती है,बड़े शहर ,बेहतर सेवा,छोटे शहर/गाँव ,कम सुविधा।
4.नौकरी पर असर:- रेलवे कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा कम हो सकती है। कॉन्ट्रैक्ट आधारित नौकरियां बढ़ सकती हैं।
पूरी तरह निजीकरण ---भारत के लिए जोखिम भरा।
बिल्कुल निजीकरण नहीं - विकास धीमा।
इसलिए: सीमित निजीकरण = सही दिशा,अनियंत्रित निजीकरण= नुकसानदायक है।

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