भारत के रेलवे कुली (पोर्टर) 2008 से लगातार अपनी समस्या को उठा रहे हैं,लेकिन समाधान न होना चिंताजनक है।
मुख्य समस्याएँ जो कुली उठाते रहे हैं,नियमित नौकरी का दर्जा नहीं:-
ज्यादातर कुली लाइसेंस पर काम करते हैं, उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता।
सामाजिक सुरक्षा का अभाव:-
पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएँ बहुत सीमित या नहीं के बराबर हैं।
कमाई में गिरावट:-
ई-रिक्शा, ट्रॉली बैग और डिजिटल सिस्टम के कारण उनकी आय प्रभावित हुई है।
नई नीतियों का असर:-
स्टेशन आधुनिकीकरण और निजीकरण से उनकी भूमिका और घट रही है।
संबंधित संस्थाएँ:
भारतीय रेल,रेल मंत्रालय,मंत्री स्तर पर मामला:
रेल मंत्री और राज्य मंत्रियों को ज्ञापन दिए जाते रहे हैं।
फाइलें आगे नहीं बढ़तीं ठोस नीति निर्णय नहीं होते स्थानीय स्तर पर ही मामला अटक जाता है।
1.सामूहिक संगठन बनाना या मजबूत करना कुलियों का यूनियन स्तर पर एकजुट होना बहुत जरूरी है।
2.ऑनलाइन शिकायत और जनसुनवाई:-
रेल मंत्रालय की वेबसाइट:-
प्रधानमंत्री जन सुनवाई पोर्टल (CPGRAMS)
3.मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा अगर मामला मीडिया में उठता है, तो सरकार जल्दी प्रतिक्रिया देती है।
4.जनप्रतिनिधियों से संपर्क:-
अपने क्षेत्र के सांसद (MP) और विधायक (MLA) को लिखित आवेदन देना।
5.कानूनी रास्ता:-
जरूरत पड़े तो उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) भी डाली जा सकती है।

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