नई दिल्ली:भारत रूस से तेल कैसे खरीदता है जबकि उस पर पश्चिमी प्रतिबंध हैं।

नई दिल्ली:भारत रूस से तेल कैसे खरीदता है जबकि उस पर पश्चिमी प्रतिबंध हैं।

भारत रूस से तेल इसलिए खरीद पाता है क्योंकि वह प्राइस कैप नियम के भीतर सौदे करता है वैकल्पिक जहाज़ और भुगतान प्रणाली का उपयोग होता है भारत ने रूस पर खुद प्रतिबंध नहीं लगाए हैं। भारत के लिए रूस से तेल खरीदना आर्थिक और रणनीतिक—दोनों तरह से फायदेमंद रहा है, लेकिन इससे कभी-कभी अमेरिका के साथ कूटनीतिक तनाव भी पैदा होता है।

भारत को रूस से तेल खरीदने से क्या फायदा होता है।

1. सस्ता तेल मिलता है। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद उसने अपना कच्चा तेल सस्ता बेचना शुरू किया। भारत को कई बार $10–20 प्रति बैरल तक सस्ता तेल मिला इससे भारत की रिफाइनरियों की लागत कम होती है।

2. पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर दबाव कम: भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। सस्ता रूसी तेल मिलने से देश में ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इससे महंगाई भी कुछ हद तक कम रहती है।

रिफाइनरियों को बड़ा मुनाफा:-भारत की रिफाइनरी जैसे: रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन वाइल कोरपोरेशन सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे प्रोसेस करके यूरोप और अन्य देशों को डीज़ल, पेट्रोल और जेट फ्यूल बेचती हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त मुनाफा मिलता है।

4. ऊर्जा सुरक्षा:भारत पहले मध्य-पूर्व पर बहुत निर्भर था अब रूस से तेल लेने से सप्लाई के स्रोत बढ़ गए किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई।

अमेरिका-भारत रिश्तों पर इसका क्या असर पड़ता है

1. अमेरिका को असहजता युनाइटेड स्टेट्स चाहता था कि दुनिया रूस से तेल कम खरीदे ताकि रूस की युद्ध अर्थ व्यवस्था कमजोर हो (खासकर रूस युक्रेन युद्ध के बाद) इसलिए शुरुआत में उसने भारत पर दबाव डाला।

2. लेकिन भारत के लिए अपवाद भी अमेरिका यह भी समझता है कि भारत एक बड़ा रणनीतिक साझेदार है चीन के मुकाबले क्षेत्रीय संतुलन में भारत अहम है।इसलिए उसने भारत पर कड़े प्रतिबंध नहीं लगाए। व्यावहारिक समझौता:अब स्थिति यह है कि अमेरिका भारत से पूरी तरह तेल बंद करने की मांग नहीं करता बल्कि चाहता है कि खरीद कीमत सीमा प्राइज कैंप के अंदर हो।

वर्तमान स्थिति (संक्षेप में) India रूस से तेल खरीदकर अरबों डॉलर बचाता है। युनाइटेड स्टेट्स को यह पूरी तरह पसंद नहीं, लेकिन रणनीतिक रिश्तों के कारण वह इसे सहन करता है। दोनों देशों के रिश्ते कुल मिलाकर अभी भी मजबूत हैं।

दिलचस्प तथ्य:-2021 से पहले भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 1% से भी कम थी, लेकिन 2023–2025 में कई महीनों में यह 30–40% तक पहुंच गई।







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