पटना: बिहार में अपराधियों पर सख्ती, एनकाउंटर की बात पर गरमाई बिहार की राजनीति।

पटना: बिहार में अपराधियों पर सख्ती, एनकाउंटर की बात पर गरमाई बिहार की राजनीति।
प्रशासन को दिया तोहफा अपराधी जहां मिले ठोक दिया करो।
पटना। बिहार में बढ़ते अपराध और हालिया पुलिस एनकाउंटर को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि अपराध और गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

हाल के दिनों में बिहार में कई पुलिस एनकाउंटर हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सम्राट चौधरी सरकार बनने के बाद करीब 35 दिनों में 12 एनकाउंटर की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें कई अपराधी घायल हुए और कुछ मारे गए। सरकार इसे कानून-व्यवस्था सुधारने की कार्रवाई बता रही है।

एक कार्यक्रम में सम्राट चौधरी ने कहा कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और पुलिस को खुली छूट दी गई है। वहीं, उनके एक बयान को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

विपक्षी दलों ने सरकार पर “एनकाउंटर राजनीति” करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि कानून अपने तरीके से काम करे और किसी भी कार्रवाई में संविधान का पालन होना चाहिए। दूसरी ओर भाजपा और एनडीए नेताओं का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ कठोर कदम उठाना जरूरी है ताकि आम लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़े।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में कानून-व्यवस्था का मुद्दा आने वाले समय में बड़ा चुनावी विषय बन सकता है।

पटना। बिहार में अपराध, पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच कानून-व्यवस्था का मुद्दा अब चुनावी बहस के केंद्र में आता दिख रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में यही मुद्दा बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा बन सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में बढ़ते अपराध, व्यापारियों से रंगदारी, गोलीबारी और हालिया पुलिस एनकाउंटर की घटनाओं ने जनता के बीच सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बना दिया है। सत्ता पक्ष जहां इसे अपराधियों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति बता रहा है, वहीं विपक्ष सरकार पर कानून व्यवस्था संभालने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में रोजगार, जातीय समीकरण और विकास के साथ-साथ अब सुरक्षा और कानून-व्यवस्था भी वोटरों को प्रभावित करने वाला प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों और व्यापारिक वर्ग में इस विषय को लेकर ज्यादा चर्चा हो रही है।

इधर, भाजपा और एनडीए नेता लगातार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि कानून का राज संविधान के दायरे में रहकर ही चलना चाहिए और एनकाउंटर को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी चुनावों में सभी दल कानून-व्यवस्था के मुद्दे को जनता के सामने प्रमुखता से उठाएंगे। ऐसे में बिहार की राजनीति में अपराध और सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्माने की संभावना है।

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