ज़ीरो बैलेंस के विज्ञापनों पर उठे सवाल, उपभोक्ताओं ने ब्याज दरों में पारदर्शिता की मांग की।

ज़ीरो बैलेंस के विज्ञापनों पर उठे सवाल, उपभोक्ताओं ने ब्याज दरों में पारदर्शिता की मांग की।

बजाज फाइनेंस कंपनी से उपभोक्ता परेशान। ठगी का शिकार। भारत सरकार से जांच कराने की मांग।

जीरो प्रतिशत ब्याज' के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रमित किए जाने का आरोप, जांच की मांग।

जीरो प्रतिशत ब्याज' के नाम पर उपभोक्ताओं को भ्रमित किए जाने का आरोप, जांच की मांग

संवाददाता: अमन कुमार मिश्र।

बरौनी। सोकहारा।

बाजार में "0% ब्याज" या "जीरो प्रतिशत ब्याज" पर ईएमआई का आकर्षक प्रचार उपभोक्ताओं को लुभा रहा है, लेकिन उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में ऐसे ऑफर भ्रामक साबित हो रहे हैं।

उनका कहना है कि ब्याज नहीं लेने का दावा करने के बावजूद ग्राहकों से प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, बीमा शुल्क या अन्य छिपे हुए शुल्क वसूले जाते हैं, जिससे खरीदारी की वास्तविक लागत बढ़ जाती है। 

शिकायतकर्ताओं ने संबंधित नियामक एजेंसियों से ऐसे विज्ञापनों और वित्तीय योजनाओं की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी योजना में अतिरिक्त शुल्क या विशेष शर्तें लागू हैं, तो उनकी जानकारी विज्ञापन में स्पष्ट और प्रमुखता से दी जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ता सही निर्णय ले सकें। 

विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को किसी भी "0% ब्याज" ऑफर का लाभ लेने से पहले उसकी सभी शर्तों, प्रोसेसिंग फीस, कुल भुगतान राशि और अन्य शुल्कों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए।

कई योजनाओं में ब्याज की लागत उत्पाद की कीमत में पहले से शामिल हो सकती है या अन्य माध्यमों से वसूली जा सकती है।

मुजफ्फरपुर, 29 जून:

कुछ उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि निजी वित्तीय संस्थाओं द्वारा "जीरो प्रतिशत ब्याज" पर ऋण देने का प्रचार किया जाता है, लेकिन बाद में ऋण से जुड़े शुल्क, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शर्तों के कारण ग्राहकों पर अपेक्षा से अधिक वित्तीय बोझ पड़ता है।

शिकायत करने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि ऋण की सभी शर्तों और कुल लागत की स्पष्ट जानकारी पहले से नहीं दी जाती, जिससे कई लोगों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में प्रभावी ऋण लागत सरकारी बैंकों की तुलना में अधिक महसूस होती है।

उपभोक्ताओं ने संबंधित नियामक संस्थाओं और प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि कहीं भ्रामक प्रचार या नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो आवश्यक कार्रवाई की जाए।

साथ ही, उन्होंने ऋण लेने से पहले सभी दस्तावेज़ों, ब्याज दर, शुल्क और शर्तों को ध्यान से पढ़ने की सलाह भी दी है।

उपभोक्ताओं की प्रमुख मांगें हैं:-

ब्याज दरों की स्पष्ट जानकारी:- विज्ञापन में यह साफ बताया जाए कि कितनी ब्याज दर मिलेगी और किन शर्तों पर मिलेगी।

शर्तों का खुलासा:- यदि अलग-अलग बैलेंस स्तरों पर अलग ब्याज दरें लागू होती हैं, तो इसकी जानकारी प्रमुखता से दी जाए।

छिपे हुए शुल्कों की जानकारी:- ज़ीरो बैलेंस होने के बावजूद यदि कुछ सेवाओं पर शुल्क लगता है, तो उसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए।

भ्रामक प्रचार से बचाव: विज्ञापन ऐसे न हों जिनसे उपभोक्ता को वास्तविक लाभों के बारे में गलत धारणा बने।

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