नई दिल्ली में QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक (26 मई 2026)।
भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली में बैठक कर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री निगरानी, आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals), साइबर सुरक्षा और उत्तर कोरिया से उत्पन्न खतरों पर चर्चा की।
बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार के दबाव या बलपूर्वक यथास्थिति बदलने के प्रयासों का विरोध करने पर जोर दिया गया।

भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने नई दिल्ली में बैठक कर इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, समुद्री निगरानी, आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals), साइबर सुरक्षा और उत्तर कोरिया से उत्पन्न खतरों पर चर्चा की।
विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने की नई पहलें घोषित की गईं।
27 मई 2026 को जापानी संसद ने एक कानून पारित किया जिसके तहत प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय खुफिया परिषद (National Intelligence Council) स्थापित की जाएगी।
इसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों से प्राप्त खुफिया सूचनाओं को एकीकृत करना, विदेशी जासूसी, आतंकवाद, साइबर खतरों और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों का समन्वित ढंग से सामना करना है।
प्रधानमंत्री परिषद के अध्यक्ष होंगे।
विदेश, रक्षा, न्याय, वित्त आदि प्रमुख मंत्रालय इसमें शामिल होंगे।
राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और विदेशी प्रभाव/जासूसी गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं का केंद्रीकृत विश्लेषण किया जाएगा।
मौजूदा खुफिया ढांचे को अधिक समन्वित और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इन दोनों घटनाओं को कई विश्लेषक चीन की बढ़ती सैन्य एवं समुद्री गतिविधियों, उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम, साइबर खतरों और संवेदनशील प्रौद्योगिकियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के संदर्भ में देखते हैं।
QUAD देशों के बीच सुरक्षा सहयोग गहरा हो रहा है, जबकि जापान अपनी खुफिया और राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना को अधिक केंद्रीकृत और सक्षम बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
हालाँकि जापान के भीतर कुछ राजनीतिक दलों और नागरिक अधिकार समूहों ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि खुफिया तंत्र के विस्तार से गोपनीयता और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए निगरानी और जवाबदेही के पर्याप्त प्रावधानों की आवश्यकता बनी रहेगी।
संक्षेप में, मई 2026 की ये दोनों घटनाएँ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों के प्रति QUAD देशों और विशेष रूप से जापान की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता को दर्शाती हैं।
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