मास्को/इस्लामाबाद/भारत के दुश्मन पाकिस्तान को रूस दे रहा है ‘मृतसंजीवनी’? बढ़ती दोस्ती से नई दिल्ली में चिंता।

मास्को/इस्लामाबाद/भारत के दुश्मन पाकिस्तान को रूस दे रहा है ‘मृतसंजीवनी’? बढ़ती दोस्ती से नई दिल्ली में चिंता।

रूस से पाकिस्तान मृतसंजीवनी विद्या दे रहे हैं।

मॉस्को/इस्लामाबाद। एक समय पाकिस्तान से दूरी बनाकर रखने वाला रूस अब उसके साथ आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग तेजी से बढ़ा रहा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं, जिससे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, रूस और पाकिस्तान ने 2030 तक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।

रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भी हाल में पाकिस्तान के साथ संबंधों को “पारस्परिक रूप से लाभकारी” बताया और कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है।

भारत की चिंता का एक बड़ा कारण रूस की वह पहल है जिसमें पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से जोड़ने की संभावना पर चर्चा हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो पाकिस्तान को आर्थिक और सामरिक लाभ मिल सकता है।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। रूस ने समानांतर रूप से भारत के साथ भी रक्षा सहयोग जारी रखा है और उन्नत लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में सहयोग की इच्छा जताई है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रूस आज “भारत या पाकिस्तान” में से किसी एक को चुनने की नीति पर नहीं चल रहा, बल्कि दोनों देशों के साथ अपने-अपने हितों के अनुसार संबंध बढ़ा रहा है। फिर भी पाकिस्तान के साथ बढ़ती निकटता को भारत में कई रणनीतिक विश्लेषक पाकिस्तान के लिए “मृतसंजीवनी” के रूप में देख रहे हैं।

निष्कर्ष: रूस-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ोतरी एक वास्तविक कूटनीतिक और आर्थिक प्रवृत्ति है, लेकिन इसे “मृतसंजीवनी विद्या” कहना राजनीतिक या संपादकीय शैली की अभिव्यक्ति होगी, तथ्यात्मक नहीं। रूस अभी भी भारत के साथ अपने पारंपरिक रणनीतिक संबंध बनाए हुए है।

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