रुपये में गिरावट का असर आम जनता की जेब पर भी दिखाई दे सकता है।
पेट्रोल-डीजल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और विदेश से आने वाले अन्य सामान महंगे हो सकते हैं।
विदेश में पढ़ाई और यात्रा का खर्च भी बढ़ने की संभावना है।
हालांकि निर्यात कारोबार से जुड़े उद्योगों को इससे कुछ राहत मिल सकती है।
कमजोर रुपये के कारण विदेशों से मिलने वाले डॉलर के बदले भारतीय कंपनियों को अधिक रुपये प्राप्त होंगे, जिससे निर्यातकों को फायदा हो सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक स्थिति पर नजर बनाए हुए है और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां रुपये की दिशा तय करेंगी।
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