नई दिल्ली: भारतीय रेलवे कुली संघ (रेलवे पोर्टर्स/कुलियों का संगठन) समय-समय पर सरकार से मांग करता रहा है कि कुलियों को स्थायी रूप से भारतीय रेलवे में समायोजित किया जाए।

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे कुली संघ (रेलवे पोर्टर्स/कुलियों का संगठन) समय-समय पर सरकार से मांग करता रहा है कि कुलियों को स्थायी रूप से भारतीय रेलवे में समायोजित किया जाए।
2008 की तरह रेलवे में समायोजित करने के लिए रेलमंत्री, प्रधानमंत्री से मांग की गई एवं क्षेत्रीय सांसद, विधायक द्वारा संसद भवन में आवाज लगाई गई लेकिन किसी इस आवाज को नहीं सुना।
भारतीय रेलवे कुली आज भी अपने अधिकार और स्थायी रोजगार की मांग कर रहे हैं।

भारतीय रेलवे कुली संघ की मांग है कि 2008 की तरह कुलियों को भारतीय रेलवे में समायोजित किया जाए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे कुली संघ (रेलवे पोर्टर्स/कुलियों का संगठन) समय-समय पर सरकार से मांग करता रहा है कि कुलियों को स्थायी रूप से भारतीय रेलवे में समायोजित किया जाए।

2008 के आसपास भी ऐसी मांगें उठी थीं, जब कुछ कुलियों को सीमित स्तर पर नौकरी में लेने या उन्हें वैकल्पिक रोजगार देने की चर्चा हुई थी। लेकिन यह पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया। 

इसके पीछे कुछ मुख्य कारण हैं: रेलवे में पहले से ही पदों की सीमित संख्या:

भर्ती की प्रक्रियाएं (जैसे रेलवे भर्ती बोर्ड) के जरिए ही नियुक्ति का नियम

कुलियों का पारंपरिक रूप से लाइसेंसधारी लेकिन गैर-स्थायी कर्मचारी होना।

इसलिए हर बार मांग उठती है, लेकिन उसे लागू करना प्रशासन के लिए आसान नहीं होता।फिर भी,कुलियों की समस्याएं वास्तविक हैं:

आय का अस्थिर होना,सामाजिक सुरक्षा (पेंशन, बीमा) की कमी,डिजिटल टिकटिंग और ट्रॉली/लिफ्ट जैसी सुविधाओं से काम कम होना।

मीडिया और जनप्रतिनिधियों द्वारा क्षेत्रीय (जैसे सांसद/विधायक) तक मुद्दा संसद भवन, रेलमंत्री, भारत के प्रधानमंत्री तक पहुंचाया गया। कोर्ट और जनहित याचिका (PIL) का भी सहारा लिया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रेलवे कुलियों ने कहा सिर्फ निराशा ही निराशा दिखाई दे रहा है।

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