कोलकाता: पश्चिम बंगाल बीजेपी पहले हिन्दू मुस्लिम करके केन्द्र में सत्ता संभाली अब यूं सी सी पर राजनीति कर रही है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल बीजेपी पहले हिन्दू मुस्लिम करके केन्द्र में सत्ता संभाली अब यू सी सी पर राजनीति कर रही है।ईी

कानून की तराजू पर समझ सकते हैं देश की जनता क्या चाहती है। टी वी न्यूज चैनल पर आधी अधूरी या पुरानी खबरों को नया बताकर फैलाया जाता है। जनता में भ्रम फैलाया जाता है। जब भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान शुरू हुआ की पुरानी खबरें चैनल पर प्रसारित करना शुरू कर देता है जनता दिग्भ्रमित हो जाती है।

UCC लागू करने से अलग-अलग धार्मिक समुदायों की परंपराओं पर असर पड़ सकता है इसे राजनीतिक रूप से ध्रुवीकरण (polarization) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। U C C को अगर सावधानी से लागू नहीं किया गया या उसे राजनीतिक रूप से भुनाया गया, तो यह ध्रुवीकरण बढ़ा सकता है। लेकिन सही प्रक्रिया, संवाद और संतुलन के साथ इसे समानता और सामाजिक सुधार के साधन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। युसीसी एक ऐसा विषय है जिसमें कानून, समाज, धर्म और राजनीति सब जुड़े हुए हैं। इसे लागू करने के लिए सिर्फ कानून बनाना ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहमति भी बहुत जरूरी है।

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युसीसी क्या है:-युनिफोर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) का मतलब है कि देश के सभी नागरिकों के लिए एक ही सिविल कानून लागू हो चाहे उनका धर्म कोई भी हो। अभी India में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग पर्सनल लॉ हैं, जैसे: हिंदू कानून (शादी, तलाक, विरासत) मुस्लिम पर्सनल लॉ ईसाई और पारसी कानून युसीसी लागू होने पर ये सभी अलग-अलग कानून हटकर एक समान नियम लागू होंगे।

संवैधानिक आधार Indian Constitution के अनुच्छेद 44 में राज्य को निर्देश दिया गया है कि वह UCC लागू करने का प्रयास करे।
लेकिन यह Directive Principle है, यानी यह अनिवार्य नहीं है, बल्कि मार्गदर्शक सिद्धांत है।
UCC के संभावित फायदे
1. समानता (Equality)
सभी नागरिकों को एक जैसा कानून मिलेगा
धर्म के आधार पर भेदभाव कम होगा
2. महिलाओं के अधिकार
तलाक, विरासत आदि में महिलाओं को अधिक समान अधिकार मिल सकते हैं
खासकर उन समुदायों में जहां अभी असमानता है
3. राष्ट्रीय एकता
एक देश, एक कानून की भावना मजबूत होती है
4. कानून की सरलता
अलग-अलग कानूनों की जगह एक ही नियम होने से प्रक्रिया आसान होती है
UCC के संभावित नुकसान / चिंताएँ
1. धार्मिक स्वतंत्रता पर असर
लोग मानते हैं कि इससे उनके धार्मिक रीति-रिवाज प्रभावित होंगे
2. विविधता का मुद्दा
भारत बहुत विविध देश है—एक कानून सभी पर लागू करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है
3. राजनीतिक विवाद
UCC को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और समुदायों में मतभेद हैं
4. लागू करना कठिन
इतने बड़े और विविध देश में एक समान कानून बनाना और लागू करना आसान नहीं
किन राज्यों में क्या स्थिति है?
Uttarakhand:-
UCC लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया यह भारत का पहला राज्य बना जिसने इस पर कानून पारित किया (हाल के वर्षों में)
Goa:- यहां पहले से ही एक प्रकार का UCC लागू है (पुर्तगाली सिविल कोड के कारण)
अन्य राज्य:-
जैसे पश्चिम बंगाल,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि में यह राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है, लेकिन अभी लागू नहीं है।
निष्कर्ष: यूसीसी एक ऐसा विषय है जिसमें कानून, समाज, धर्म और राजनीति सब जुड़े हुए हैं। इसे लागू करने के लिए सिर्फ कानून बनाना ही नहीं, बल्कि सामाजिक सहमति भी बहुत जरूरी है।
व्यावहारिक तरीके से समझते हैं:- UCC लागू होने पर आम लोगों की ज़िंदगी में क्या बदलाव आ सकते हैं।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर क्या कहा है
1. आम लोगों की ज़िंदगी में संभावित बदलाव: अगर युनिफोर्म सिविल कोड लागू होता है, तो ये बदलाव दिख सकते हैं,शादी (विवाह) अभी अलग-अलग धर्मों के अलग नियम है।
UCC के बाद:
शादी की एक समान कानूनी उम्र और प्रक्रिया सभी के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो सकता है इससे फर्जी या जबरन शादी के मामलों में कमी आ सकती है।
तलाक (Divorce) अभी: हर धर्म के अलग नियम (जैसे पहले “ट्रिपल तलाक” का मुद्दा था) UCC के बाद तलाक के समान आधार और प्रक्रिया दोनों पक्षों (पति-पत्नी) को बराबर अधिकार इससे खासकर महिलाओं को ज्यादा सुरक्षा मिल सकती है। विरासत (Inheritance) अभी संपत्ति बंटवारे के नियम धर्म के अनुसार बदलते हैं। UCC के बाद सभी बच्चों (बेटा-बेटी) को बराबर हिस्सा पति-पत्नी के अधिकार समान इससे जेंडर इक्वालिटी मजबूत होगी। गोद लेना (Adoption) अभी: सभी धर्मों में समान अधिकार नहीं है।
UCC के बाद: हर नागरिक को गोद लेने का समान अधिकार कुल असर कानून ज्यादा सरल और पारदर्शी होगा कोर्ट केस कम जटिल हो सकते हैं,लेकिन कुछ लोगों को लगेगा कि उनके धार्मिक रिवाजों में हस्तक्षेप हो रहा है
2. सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है: 
भारत के सुप्रीम कोर्ट  ने कई बार युसीसी पर टिप्पणी की है:

(1) सास बानो केस कोर्ट ने कहा कि UCC की जरूरत है,यह मामला मुस्लिम महिला के भरण-पोषण से जुड़ा था इस केस के बाद युसीसी पर राष्ट्रीय बहस तेज हुई।

(2) सरला मुद्गल केस:

औकोर्ट ने कहा कि अलग-अलग पर्सनल लॉ से कानूनी जटिलता और दुरुपयोग होता है,सरकार को UCC लागू करने की दिशा में काम करना चाहिए।

(3) सायरा बानो केस “ट्रिपल तलाक” को असंवैधानिक घोषित किया यह दिखाता है कि कोर्ट समानता और अधिकारों पर जोर देता है

कोर्ट का समग्र रुख:-

युसीसी को समानता और न्याय के लिए अच्छा बताया गया लेकिन कोर्ट ने यह भी माना कि इसे लागू करना सरकार और संसद का काम है,इसे लागू करते समय सामाजिक संवेदनशीलता जरूरी है

निष्कर्ष:- 

युसीसी लागू होने पर आम जिंदगी में शादी, तलाक, संपत्ति जैसे मामलों में बड़ा बदलाव आएगा।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इसे कई बार समर्थन दिया है,लेकिन अंतिम फैसला सरकार पर छोड़ा। वह एक राजनीतिक दृष्टिकोण (opinion) है, और भारत जैसे विविध समाज में इस तरह के मुद्दों पर अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है।
कोलकाता और पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और अन्य दल अक्सर पहचान (identity) और नीतिगत मुद्दों—जैसे Uniform Civil Code (UCC)—को अलग-अलग तरीकों से पेश करते हैं।

आपकी बात का एक विश्लेषण: कुछ आलोचक मानते हैं कि युसीसी जैसे मुद्दों को राजनीतिक समर्थन जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, खासकर जब इसे धार्मिक पहचान से जोड़ा जाता है। वहीं बीजेपी और इसके समर्थक कहते हैं कि युसीसी का उद्देश्य समान नागरिक अधिकार और लैंगिक न्याय सुनिश्चित करना है, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना। विपक्षी दल अक्सर इसे ध्रुवीकरण (polarization) की राजनीति बताते हैं।

असल मुद्दा कहाँ है:

बहस दो चीज़ों के बीच फंसी रहती है: समानता (Equality before law) धार्मिक/सांस्कृतिक स्वतंत्रता (Freedom of religion) है।





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