रोजगार मेलों के प्रचार पर उठे सवाल
“वोट के लिए व्यापक प्रचार, लेकिन रोजगार मेलों की जानकारी सीमित”भारत के रेलवे कुली 2008 से नौकरी मांग रहे,2026 हो गया लेकिन नौकरी नहीं दी गई ऐसा क्यों मोदी जी रेलवे कुली आपसे पुंछ रहा है।
दुर्गापुर/नई दिल्ली। देश में आयोजित किए जा रहेरोजगार मेलों के प्रचार-प्रसार को लेकर युवाओं और सामाजिक वर्गों के बीच सवाल उठने लगे हैं।

लोगों का कहना है कि जिस प्रकार चुनाव के समय राजनीतिक दलों और सरकारों द्वारा मीडिया में बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाए जाते हैं, उसी प्रकार रोजगार मेलों और भर्ती अभियानों का भी व्यापक प्रचार होना चाहिए।
बताया जा रहा है कि कई बार रोजगार मेलों के अंतर्गत नियुक्ति पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वितरित किए जाते हैं, लेकिन इसकी जानकारी बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं तक समय पर नहीं पहुंच पाती। इससे कई पात्र अभ्यर्थी अवसरों से वंचित रह जाते हैं।
युवाओं का कहना है कि यदि रोजगार मेलों की जानकारीटीवी, अखबार, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार प्रसारित की जाए तो अधिक से अधिक लोग आवेदन कर सकेंगे और रोजगार के अवसरों का लाभ उठा पाएंगे।
सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि रोजगार मेलों के लिए विशेष प्रचार अभियान चलाया जाए, ताकि गांवों और छोटे शहरों के युवाओं तक भी सही जानकारी पहुंच सके।
उनका मानना है कि रोजगार संबंधी योजनाओं का प्रचार केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जन-जागरूकता अभियान का रूप दिया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता और व्यापक सूचना प्रसार से रोजगार योजनाओं की प्रभाव शीलता बढ़ेगी और बेरोजगार युवाओं में विश्वास भी मजबूत होगा।
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