पटना।नल-जल योजना की गुणवत्ता पर उठे सवाल, अतिरिक्त फंड की मांग पर विवाद।

पटना।नल-जल योजना की गुणवत्ता पर उठे सवाल, अतिरिक्त फंड की मांग पर विवाद।
निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदारों द्वारा निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे पाइपलाइन टूटने, लीकेज और जलापूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आईं।
आवेदन को रद्दी की टोकरी में फेंक दी जाती है। बरौनी सोकहारा 02 पंचायत में सही ढंग से जांच कराई जाए तब सही जानकारी मिल सकती है।

पटना, संवाददाता।
Nitish Kumar के कार्यकाल में शुरू की गई Har Ghar Nal Ka Jal Yojana को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। 
कई क्षेत्रों के ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन और अन्य सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी, जिसके कारण अनेक स्थानों पर जलापूर्ति व्य दिया वस्था प्रभावित हुई है।
आलोचकों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। 
उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदारों द्वारा निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे पाइपलाइन टूटने, लीकेज और जलापूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आईं।
इसी बीच योजना के रखरखाव और विस्तार के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त लगभग 18 करोड़ रुपये की सहायता मांगने की खबरों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि पहले से खर्च की गई राशि का लेखा-जोखा और कार्यों की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए, जबकि सरकार का पक्ष है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की वास्तविक स्थिति का आकलन स्वतंत्र तकनीकी जांच और सामाजिक ऑडिट के माध्यम से किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि समस्याओं के पीछे निर्माण गुणवत्ता, रखरखाव की कमी या अन्य प्रशासनिक कारण जिम्मेदार हैं।


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